मोतियाबिंद का कारण, लक्षण, घरेलु उपचार | Home Remedies for Cataract in Hindi

Cataract / मोतियाबिंद में आंखों की पुतली पर सफेद रंग का धब्बा आ जाती है और रोगी की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है। वह किसी चीज को स्पष्ट नहीं देख पाता। आंखों के आगे धब्बे और फिर काले बिंदु से दिखाई पड़ने लगते हैं। जैसे जैसे रोग बढ़ता जाता है रोगी ठीक से देखने में असमर्थ हो जाता है।

मोतियाबिंद का कारण, लक्षण, घरेलु उपचार | Home Remedies for Cataract in Hindiमोतियाबिंद ज्यादातर बुजुर्गों को होता है। लेकिन आजकल ये युवाओं ओर बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। इसके अतिरिक्त यह अत्यधिक पढ़ने-लिखने, रात में पढ़ने से, अधिक शराब, तंबाकू, धूम्रपान, चीनी, चाय-कॉफी, गलत खान-पान तथा पोष्टिक भोजन के अभाव के फलस्वरुप भी हो सकता है।

मोतियाबिंद क्या हैं और कैसे होता हैं  –

हमारी आंख की पुतली के पीछे एक लेंस होता है। पुतली पर पड़ने वाली लाइट को यह लेंस फोकस करता है और रेटिना पर ऑब्जेक्ट की साफ इमेज बनाता है। आंख के अंदर का लेंस कैमरे की तरह काम करता है। लेंस पानी और प्रोटीन से मिलकर बनता है। रेटिना से यह इमेज नर्व्स तक और वहां से दिमाग तक पहुंचती है। आंख की पुतली के पीछे मौजूद यह लेंस पूरी तरह से साफ होता है, ताकि इससे लाइट आसानी से पास हो सके।

उम्र बढ़ने के साथ कई बार कुछ प्रोटीन एक जगह इकट्ठी हो जाती है और लेंस के एक हिस्से पर जमा हो जाती है। जिसकी वजह से इससे गुजरने वाला प्रकाश का रास्ता बंद हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि पूरी लाइट पास होने पर जो ऑब्जेक्ट इंसान को बिल्कुल साफ दिखाई देता है, अब कम लाइट पास होने की वजह से वही ऑब्जेक्ट धुंधला नजर आने लगता है। लेंस पर होनेवाले इसी धुंधलेपन की स्थिति को मोतियाबिंद कहा जाता है। यह क्लाउडिंग धीरे – धीरे बढ़ती जाती है और मरीज की नजर पहले से ज्यादा धुंधली होती जाती है।

मोतियाबिंद होने के अन्य कारण –
  • आंखों में किसी तरह का अन्य रोग होना, जैसा ग्लूकोमा आदि
  • जन्मजात आंख में मोतियाबिंद होना
  • डायबिटीज होना
  • शरीर में किसी परेशानी, जैसे अस्थमा के लिए स्टेरॉइड लेना
  • अचानक से तेज रोशनी के संपर्क में आने से या लगातार तेज रोशनी में रहने से
  • धूम्रपान या शराब आदि का ज्यादा सेवन करने से
  • अत्यधिक पढ़ने-लिखने, रात में पढ़ने से इसके आलावा गलत खान-पान से

मोतियाबिंद के प्रकार –

सभी प्रकार के मोतियाबिंद में आंखों के आस-पास की स्थिति भी अलग-अलग होती है। रक्त मोतियाबिंद में सभी चीजें लाल, हरी, काली, पीली और सफेद नजर आती हैं। परिम्लामिन मोतियाबिंद में सभी ओर पीला-पीला नजर आता है। ऐसा लगता है जैसे कि पेड़-पौधों में आग लग गई हो। सभी चीजें ज्वाला से घिरी दिखाई पड़ती हैं। इसे ‘मूर्छित हुए पित्त का मोतियाबिंद’ भी कहते हैं। वातज मोतियाबिंद में आंखों की पुतली लालिमायुक्त, चंचल और कठोर होती है। पित्तज मोतियाबिंद में आंख की पुतली कांसे के समान पीलापन लिए होती है। कफज मोतियाबिंद में आंख की पुतली सफेद और चिकनी होती है या शंख की तरह सफेद खूँटों से युक्त व चंचल होती है। सन्निपात के मोतियाबिंद में आंख की पुतली मूंगे या पद्म पत्र के समान तथा उक्त सभी के मिश्रित लक्षणों वाली होती है। परिम्लामिन में आंख की पुतली भद्दे रंग के कांच के समान, पीली व लाल सी, मैली, रूखी और नीलापन लिए होती है।

मोतियाबिंद के लक्षण –

मोतियाबिंद के घरेलु उपचार – Cataract Treatment in Hindi

ऐसे तो मोतियाबिंद को सर्जरी के द्वारा हटाया जा सकता है लेकिन कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से भी मोतियाबिंद का इलाज संभव है। यदि शुरूआत में सचेत होकर यह अपनाए जाएं तो संभव है आपको सर्जरी या ऑपरेशन न करवाना पड़े। आइये जाने मोतियाबिंद के घरेलु उपचार..

आधा मुट्ठी गेहू और आधा मुट्ठी चना, इससे दोगुने पानी में रात को भिगो दें। सुबह इनको निकालकर एक गिले-सूती कपड़े में बांध दे। दूसरे दिन इनमे अंकुर फुट आएंगे। जलपान में इन अंकुरित गेहूं-चनो को अपनी भूख और पाचन शक्ति के अनुसार खाएं। मोतियाबिंद ठीक होकर नेत्रज्योति में वृद्धि होगी।

छोटी पीपल, लाहौरी नमक, समुद्री फेन और काली मिर्च सभी 10-10 ग्राम लें। इसे 200 ग्राम काले सुरमा के साथ 500 मिलीलीटर गुलाब अर्क या सौंफ अर्क में इस प्रकार घोटें कि सारा अर्क उसमें सोख लें। अब इसे रोजाना आंखों में लगाएं।

प्याज को पीस और निचोड़ उसका रस निकाल ले। उससे दोगुनी मात्रा में शहद मिलाकर नित्य आंखों में लगाए। यदि यह आंखों में अधिक लगे तो उतनी ही मात्रा में गुलाब जल मिला ले। इससे मोतियाबिंद की संभावना नहीं होती।

शुद्ध शहद सुबह शाम आंखों में दो-दो बून्द डालने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।

10 ग्राम गिलोय का रस, 1 ग्राम शहद, 1 ग्राम सेंधा नमक सभी को बारीक पीसकर रख लें। इसे रोजाना आंखों में अंजन की तरह प्रयोग करने से मोतियाबिंद दूर होता है।

बादाम की छह गिरी रात को पानी में भिगो दें। सुबह इन्हे पीसकर आधा चम्मच काली मिर्च तथा एक चम्मच शहद के साथ खाने से मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।

एक बड़ा चम्मच सूखा धनिया, इतनी ही मात्रा में सौंप और एक छोटा चम्मच खांड (देसी शक्कर) मिलाकर पीस ले। दोनों समय यह खुराक शुद्ध जल के साथ सेवन करने से मोतियाबिंद नहीं होता है।

गाजर का रस एक गिलास सुबह तथा एक गिलास शाम को पीने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।

मोतियाबिंद की शुरुआती अवस्था में भीमसेनी कपूर स्त्री के दूध में घिसकर नित्य लगाने पर यह ठीक हो जाता है।

लहसुन की 4 कलियां छीलकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह जलपान से पूर्व इन कलियों को खाकर ऊपर से वह पानी पी लेने से मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।

हल्के बड़े मोती का चूरा 3 ग्राम और काला सुरमा 12 ग्राम लेकर खूब घोंटें। जब अच्छी तरह घुट जाए तो एक साफ शीशी में रख लें और रोज सोते वक्त अंजन की तरह आंखों में लगाएं। इससे मोतियाबिंद अवश्य ही दूर हो जाता हैं।

कच्चे पपीते में पपेन नाम का एंजाइम होता है जो कि प्रोटीन के पाचन में सहायक होता है। मोतियाबिंद से परेशान लोगों को प्रोटीन को पचाने में दिक्कत आती है, ऐसे में कच्चा पपीता मोतियाबिंद से ग्रसित लोगों को लाभ देता है। कच्चा पपीता रोजाना इस्तेमाल करने से आंखों के लेंस नए जैसे चमकने लगते हैं।

कच्ची सब्जियां आंखों के लिए चमत्कार का काम कर सकती है। कच्ची सब्जियों में पोषक तत्व और विटामिन ए की उच्च मात्रा होती है जो कि आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अपने दैनिक आहार में कच्ची सब्जियों को इस्तेमाल करने से मोतियाबिंद के साथ ही आंखों की अन्य सामान्य समस्याओं से भी निपटा जा सकता है। कच्ची सब्जियों को सलाद के रूप में जितना संभव हो खाएं।

जामुन से मोतियाबिंद पूरी तरह नहीं हटता लेकिन दृष्टि की अस्पष्टता को जामुन खाने से ठीक किया जा सकता है। जामुन में एंथोसायनोसाइड्स तथा फ्लेवनाइड्स काफी अधिक होते हैं जो कि रेटिना और आंखों के लैंस की रक्षा करते हैं।

औषधियाँ प्रयोग करने के साथ-साथ रोज सुबह नियमित रूप से सूर्योदय से दो घंटे पहले नित्य क्रियाओं से निपटकर शीर्षासन और आंख का व्यायाम अवश्य करें।

मोतियाबिंद के रोगी को गेहूँ की ताजी रोटी खानी चाहिए। गाय का दूध बगैर चीनी का ही पीएँ। गाय के दूध से निकाला हुआ घी भी सेवन करें। आंवले के मौसम में आंवले के ताजा फलों का भी सेवन अवश्य करें। फलों में अंजीर व गूलर अवश्यक खाएं।

इन बातों का ख्याल रखे –

सुबह-शाम आंखों में ताजे पानी के छींटे अवश्य मारें। मोतियाबिंद के रोगी को कम या बहुत तेज रोशनी में नहीं पढ़ना चाहिए और रोशनी में इस प्रकार न बैठें कि रोशनी सीधी आंखों पर पड़े। पढ़ते-लिखते समय रोशनी बार्ईं ओर से आने दें।

वनस्पति घी, बाजार में मिलने वाले घटिया-मिलावटी तेल, मांस, मछली, अंडा आदि सेवन न करें। मिर्च-मसाला व खटाई का प्रयोग न करें। कब्ज न रहने दें। अधिक ठंडे व अधिक गर्म मौसम में बाहर न निकलें।


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