ह्रदय ‘दिल’ की धड़कन बढ़ने का घरेलु इलाज Dil ki Dhadkan ka Ilaj in Hindi

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मनुष्य का ह्रदय (दिल) एक मिनट में करीब 72 बार धड़कता हैं। इस तरह 24 घंटो में 1,00,800 बार। हृदय की धड़कने की क्रिया से ही हमारे पूरे शरीर में रक्त का संचालन होता है। यदि किसी दोष या बीमारी के कारण यह धड़कन सामान्य से तेज हो जाती है तो उसे बीमारी का रूप माना जाता है।

वास्तव में दिल की धड़कन कोई बीमारी नहीं है। किन्तु जब दिल तेजी से धड़कने लगता है तो मनुष्य के शरीर में कमजोरी आ जाती है, माथे पर हल्का पसीना उभर आता है तथा पैर लड़खड़ाने लगते हैं। रोगी को लगता है, जैसे वह गिर जाएगा। दिल धड़कने की क्रिया भय, हानि की आशंका, परीक्षा में असफलता, ट्रेन का अचानक छूटना, किसी प्रिय की मृत्यु आदि घटनाओं को देखने-सुनने के बाद शुरू हो जाती है। इसके आलावा मानसिक उत्तेजना, स्नायु में किसी प्रकार की बीमारी, उत्तेजित पदार्थों को खाना, बहुत ज्यादा परिश्रम, शोक, हस्तमैथुन और अधिक संभोग यानी सहवास आदि कारणों से दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

ह्रदय (दिल) की धड़कन बढ़ने का घरेलु इलाज Dil ki Dhadkan ka Ilaj in Hindi

लक्षण –

इस रोग में दिल बड़ी तेजी से धड़कने लगता है जिसके कारण शरीर में रूखापन, प्यास अधिक लगना, भूख की कमी, हाथ-पांव ठंडे से हो जाते हैं, दिल जैसे बैठा जा रहा हो और सांस लेने में परेशानी होती है।

ह्रदय की धड़कन का इलाज – Dil ki Dhadkan Tej Hone Par Kya Kare

दस ग्राम रेहा के बीज मिट्टी के बर्तन में लेकर उसमें आधा किलो पानी डाल दे। सुबह बीजों को मसल छानकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करें। 1 सप्ताह में हृदय की दुर्बलता और धड़कन ठीक हो जाएगी।

रात्रि में गाजर को भूनकर छील ले तथा खुले में रख दें। सुबह इसमें शक्कर और गुलाबजल मिलाकर खाने से हृदय की धड़कन में लाभ होगा।

बिल-जड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है।

नागफनी और थूहर के पंचांग की राख का सेवन करने अथवा दोनों के रस की समान मात्रा मिलाकर पीने से हृदय की धड़कन सामान्य हो जाती है।

हृदय की धड़कन यदि अधिक मालूम हो तो सूखा धनिया और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर नित्य एक चम्मच ठंडे पानी से लें।

सफेद गुलाब की पंखुड़ियों का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम सेवन करने से हृदय की धड़कन में लाभकारी होता है।

अर्जुन की छाल 500 ग्राम को कूट-पीसकर उसमें 125 ग्राम छोटी इलायची को पीसकर 20 ग्राम की मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम को खुराक के रूप पानी के साथ सेवन करने से तेज दिल की धड़कन और घबराहट नष्ट होती है।

अनार के ताजा पत्ते दे सौ ग्राम पानी में घोटकर छान ले। इस रस का सुबह एवं शाम नियमित सेवन करने से दिल की धड़कन शांत हो जाती है।

सूखा आंवला तथा मिश्री पचास-पचास ग्राम लेकर कूट-पीस ले। 16 ग्राम औषधि प्रतिदिन एक बार पानी के साथ लेने से कुछ दिनों में ही हृदय की धड़कन तथा अन्य विकार समान हो जाते हैं।

200 ग्राम सेब को छिलके सहित छोटे-छोटे टुकड़े करके आधा लीटर पानी में डाल दें। फिर इस पानी को आंच पर रखें। जब पानी जलकर एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर सेवन करें। यह दिल को मजबूत करता है।

टमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करेंटमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करें। टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए। टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए।

पानी में आधा नीबू निचोड़ें तथा उसमें दो चुटकी खाने वाला सोडा डालें| इस नीबू-पानी को पीने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है।

जिनके हृदय की धड़कन बढ़ गई हो, हृदय-रोगों से बचना चाहते हैं, वे एक कच्चा प्याज नित्य खाना खाते समय खायें। इससे धड़कन सामन्य हो जायेगी। प्याज का रस उचित मात्रा में लेना खून के बहाव में सहायक है और दिल को कई बीमारियों से सुरक्षित रखता है।

गर्म दूध एक गिलास में स्वादानुसार मिश्री या शहद, दस भीगी हुई किशमिश उसी भिगोये हुए पानी में पीसकर मिला दें। इसे नित्य 40 दिनों तक पीयें। हृदय की धड़कन कम होगी, शरीर में शक्ति आयेगी।

अदरक का रस एक चम्मच, तुलसी के पत्तों का रस चौथाई चम्मच, लहसुन का रस दो बूंद तथा सेंधा नमक एक चुटकी – सबको अच्छी तरह मिलाकर उंगली से चाटें। चाटते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेट में लार अधिक मात्रा में जाए।

बेल का गूदा लेकर उसे भून लें। फिर उसमें थोड़ा-सा मक्खन या मलाई मिलाकर सहता-सहता लार सहित गले के नीचे उतारें।

दिल की धड़कन बढ़ती हो तो भोजन के साथ कच्ची अदरक, कच्ची प्याज तथा कच्चे चनो का इस्तेमाल अवश्य करें। अंकुरित मूंग दिल की धड़कन में बहुत लाभकारी है। मसालों में लाल मिर्च न खाकर कालीमिर्च, लौंग, जावित्री, तेजपात आदि साग-सब्जी में डालकर सेवन करें।

बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, खजूर, चिलगोजे आदि मेवे दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखते हैं। साथ ही चिंता, शोक, निराशा एवं विषाद आदि नकारात्मक भावों से स्वयं को बचाएं।


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