रोहे ‘पोथकी’ रोग का कारण, लक्षण, घरेलु उपचार Rohe ka Ilaj

Rohe / रोहे (पोथकी) आँखों का सबसे हानिकारक रोग है। प्रारंभ में इसका कुछ पता नहीं चलता और छोटे-बड़े लोगों को नेत्रहीन बना देता है। इस रोग का प्रारंभ आंखें दुखने के साथ होता है। आंख लाल हो जाती है और इनसे पिब निकलने लगती है। आंखें साफ न करने से पिब आँखों के पास लगी रहती है और जीवाणु के संक्रमण से रोग अधिक बढ़ जाता है। इसके फलस्वरुप आंखों में अधिक शोथ हो जाता है। साथ ही पलकों में भीतर की ओर दाने निकल आते हैं। इस वजह से आँखों में दर्द, आँखों के बाहरी सतह या कॉर्निया का टूटना और संभवत: अंधता हो सकती है।

रोहे (पोथकी) रोग का कारण, लक्षण, घरेलु उपचार Rohe ka Ilajकारण : रोहे (पोथकी) संक्रामक रोग है। घर में किसी एक को हो जाने पर दूसरे स्वस्थ लोग भी शीघ्र इसकी चपेट में आ जाते हैं। यह रोग किसी रोगी से सिर्फ हाथ मिलाने से दूसरे व्यक्ति को हो जाता है। परिवार में सब इसे आंख दुखना ही समझते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद पलकों में शोथ हो जाता है। फिर नन्हें-नन्हें दाने उभर जाते हैं। आंखें खोलने में बहुत कष्ट होता है।

रोहे रोगी तेज जलन और दर्द के कारण बार-बार आंखों को छूता है या किसी रूमाल से पोंछता है तो रूमाल से पोथकी के जीवाणु उसके हाथों में लग जाते हैं। पोथकी रोग राजस्थान में बहुत अधिक होता है। इसके ज्यादा होने का कारण है राजस्थान की रेत। जब रेत के कण आंखों में पहुंच जाते हैं तो बैचैन होकर पलकों को हाथों से रगड़ देते हैं। पलकों के रगड़ने से रेत के कणों के कारण जख्म बन जाते हैं। इन जख्मों में सूजन आती है और फिर रोहे के छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं।

रोहे रोग का घरेलु उपचार – Trachoma treatment in Hindi

फिटकरी (भुनी हुई) पीसकर गुलाब जल में घोलकर रख दें। जब दोनों अच्छी तरह मिल जाए तो प्रतिदिन सुबह-शाम नेत्रों को शीतल जल से धोकर एक-एक बूंद उक्त मिश्रण डाले। इससे नेत्रों की लालिमा व शोथ नष्ट होकर रोहे ठीक हो जाते हैं।

रात्रि को त्रिफला (हरड़, बहेड़ा और आंवला) पानी में भिंगोकर रख दें। सुबह उठने पर कपड़े से छानकर उस जल से नेत्रों को साफ करें। इससे नेत्रों की गंदगी नष्ट हो जाती है। रोहे समाप्त हो कर नेत्र ज्योति तीव्र होती है।

चकबड़ के बीजों को पत्थर पर घिसकर काजल की तरह से लगाने से नेत्रपोथिकी रोग में लाभ मिलता है।

आंवले के स्वरस को जल में मिलाकर नेत्र साफ करने से गंदगी दूर होती है और रोहे ठीक हो जाते हैं।

सहिजन के पत्तो के स्वरस में शहद और सेंधा नमक मिलाकर नेत्रों में लगाने से शोथ-लालिमा नष्ट होती हैं तथा रोहे ठीक होते हैं।

100 मिलीलीटर अनार के हरे पत्तों के रस को खरल यानी पीसकर सुखाकर रख लें। इस सूखे चूर्ण को आंखों में सूरमे की तरह दिन में 2-3 बार लगाने से पोथकी की बीमारी समाप्त हो जाती है।

मिश्री के कपड़छन चूर्ण को स्त्री के दूध में घोलकर आंखों में डाले रोहे शीघ्र ही ठीक हो जाएंगे।

यदि आंखों में रोहे हो जाए तो एक फूल की कटोरी लेकर सरसों के तेल के दीए के ऊपर उल्टी कर के रख दें। फिर गाय के लोनी घी की दो बूंद एक कटोरी पर डालें और उसे ईंट के बारीक पीसें (कपड़छन) चूरे की एक छोटी पोटली से गोल गोल घुमाएं। थोड़ी-थोड़ी देर बाद गाय का लौनी घी बून्द-बून्द टपकाते रहे और पोटली को उस पर घुमाते रहे। कुछ ही देर में कटोरी की सतह पर मेल की परत गोल दायरे में जम जाएगी। इस मैल की परत को रोज रात को आंखों में डाले और सो जाएं। जरूरत समझे तो उसी पोटली से आंखों को सेंक ले। कुछ ही दिनों में रोहे हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे।

सत्यानाशी के रस को किसी कांच के बर्तन में डालकर कुछ दिनों के लिए धूप में सूखने के लिये रख दें। जब यह सूखने पर बहुत ज्यादा गाढ़ा हो जाये तो इसकी वर्तिका (गोली) बनाकर रख लें। इस गोली को अच्छी तरह से पीसकर मक्खन में मिलाकर आंखों में लगाने से अंधेपन का रोग दूर हो जाता है।


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