मुग़ल साम्राज्य का इतिहास और जानकारी | Mughal Empire History In Hindi

Mughal Empire / मुग़ल साम्राज्य एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। इसका साम्राज्य 40 लाख वर्गकिलोमीटर तक फैला हुआ था। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। भारत में इस साम्राज्य का आरम्भ बाबर द्वारा किया गया था।

मुग़ल साम्राज्य का इतिहास और जानकारी | Mughal Empire History In Hindi

मुग़ल साम्राज्य की जानकारी – Mughal Empire Information in Hindi

मुगल राजवंश भारत के महानतम शासकों में से एक था। इससे पहले भारत में अनेक मुस्लिम और हिन्‍दु राजवंश टूटे, और उसके बाद मुगल राजवंश के संस्‍थापक यहां आए। मुगल शासकों ने यहां हज़ारों लाखों लोगों पर शासन किया। भारत में इस साम्राज्य का संस्थापक बाबर था। ज़हीरुद्दीन मोहम्मद बाबर 14 फ़रवरी 1483 को अन्दिजान में पैदा हुए थे, जो फ़िलहाल उज़्बेकिस्तान का हिस्सा है।

मुग़ल सम्राटों में अकबर और ताज महल बनवाने वाले shahjahaan के नाम सब से ऊपर याद किया जाता हैं। एक समय इस साम्राज्य के पास दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत दौलत थी। उनके साम्राज्य में यूरोप के सभी साम्राज्यों की तुलना में कहीं अधिक रत्न, मोती जैसे खजाने थे। इसके संस्थापक babur दुनिया के पहले शासक थे, जिन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी। बाबरनामा उनके जीवन की नाकामियों और कामयाबियों से भरी पड़ी है।

मुग़ल साम्राज्य का इतिहास – Mughal Empire History in Hindi

Mugal kal – मुग़ल राजवंश, जिसे भारत में बाबर ने आरम्भ किया था, जिसने 1526 ई. में लोदी वंश के अन्तिम सुल्तान इब्राहीम लोदी को पानीपत के प्रथम युद्ध में पराजित किया। इस विजय से बाबर का दिल्ली और आगरा पर अधिकार हो गया। 1527 ई. में बाबर ने मेवाड़ के शासक राणा साँगा को खनुआ के युद्ध में पराजित कर राजपूतों के प्रतिरोध का भी अन्त कर दिया। अन्तत: 1528 ई. में उसने घाघरा के युद्ध में अफ़ग़ानों को भी पराजित कर अपना शासन बंगाल और बिहार तक विस्तृत कर लिया। इन विजयों ने बाबर को उत्तरी भारत का सम्राट बना दिया। बाबर ने 1530 तक शासन किया और उसके बाद उसका बेटा हुमायूं गद्दी पर बैठा। इस राजवंश में कई शासक हुवे। जो भारत में 1526 ई. से 1858 ई. तक राज्य किया।

हुमायूं की मृत्यु के बाद उनके पुत्र Akbar, मुगल सिंहासन की राजगद्दी पर मात्र 14 वर्ष की उम्र में बैठे थे। यह मुग़ल राजवंश का सबसे प्रसिद्ध शासक थे। अकबर को इतिहास में एक विशिष्‍ट स्‍थान प्राप्‍त है। वह एक मात्र ऐसा शासक था जिसमें मुगल साम्राज्‍य की नींव का संपुष्‍ट बनाया। लगातार विजय पाने के बाद उसने भारत के अधिकांश भाग को अपने अधीन कर लिया। अकबर न केवल एक महान विजेता था बल्कि वह एक सक्षम संगठनकर्ता एवं एक महान प्रशासक भी था।

अकबर 1556-1605 तक रहे, उसके बाद अकबर के बेटे जहांगीर ने तख्‍त को संभाला। जहांगीर एक ईमानदार और सहनशील शासक था। उनके हिन्‍दुओं, ईसाइयों तथा ज्‍यूस के प्रति उदार था। लेकिन सिक्‍खों के प्रति संबंध तनावपूर्ण थे और दस सिक्‍ख गुरूओं में से पांचवें गुरू अर्जुन देव को जहांगीर के आदेश पर मौत के घाट उतार दिया गया था, जिन पर जहांगीर के बगावती बेटे खुसरू की सहायता करने का अरोप था।

1627 में जहांगीर की मृत्यु के बाद उसके द्वितीय पुत्र खुर्रम ने 1628 में तख्‍त संभाला। खुर्रम ने शाहजहां का नाम ग्रह किया जिसका अर्थ होता है दुनिया का राजा। इन्होने ने ही ताजमहल बनवाया। मुगल शासन शाहजहां के कार्यकाल में अपने सर्वोच्‍च बिन्‍दु पर था। शाहजहां को वास्‍तुकार राजा कहा जाता है। लाल किला और जामा मस्जिद, दिल्‍ली में स्थित ये दोनों इमारतें सिविल अभियांत्रिकी तथा कला की उपलब्धि के रूप में खड़ी हैं। इसके बाद औंरगज़ेब ने 1658 में तख्‍त संभाला और 1707 तक राज्‍य किया।

1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया – इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था।

1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया।

1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं।

मुग़ल प्रभाव – Mughal Samrajya in India Hindi

भारतीय उपमहाद्वीप के लिए मुग़लों का प्रमुख योगदान उनकी अनूठी वास्तुकला थी। मुग़ल काल के दौरान मुस्लिम सम्राटों द्वारा ताज महल सहित कई महान स्मारक बनाए गए थे। मुस्लिम मुग़ल राजवंश ने भव्य महलों, कब्रों, मीनारों और किलों को निर्मित किया था जो आज दिल्ली, ढाका, आगरा, जयपुर, लाहौर, शेखपुरा, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कई अन्य शहरों में खड़े हैं।

मुग़लों के तहत कला और वास्तुकला का उल्लेखनीय कुसुमित कई कारकों के कारण है। इस साम्राज्य ने कलात्मक प्रतिभा के विकास के लिए एक सुरक्षित ढांचा प्रदान किया और इस उपमहाद्वीप के इतिहास में अद्वितीय धन और संसाधनों को बढावा दिया। स्वयं मुग़ल शासक कला के असाधारण संरक्षक थे, जिनकी बौद्धिक क्षमता और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को सबसे परिष्कृत स्वाद में व्यक्त किया गया था।

हालाँकि जिस पर उन्होंने कभी शासन किया था वह हिन्दूस्तान अब पाकिस्तान, भारत और बंगलादेश में बँट गया है, पर उनका प्रभाव आज भी व्यापक रूप से देखा जा सकता है। सम्राटों के मकबरे भारत और पाकिस्तान भर में फैले हुए हैं। इनके 160 लाख वंश, महाद्वीप और संभवतः दुनिया भर में फैले हुए हैं।

मुग़ल साम्राज्य के पतन के कारण – Causes of the decline of mughal empire hindi

मुग़ल साम्राज्य, जिसने अपनी विशेषताओं से सम्पूर्ण मध्ययुगीन भारत को प्रभावित किया, उसका पतन न तो अचानक हुआ और न ही किसी एक कारक ने इसके पतन में अपनी भूमिका निभायी। मुग़ल साम्राज्य के पतन के लिए ज़िम्मेदार महत्त्वपूर्ण कारण इस प्रकार हैं-

  1. मुग़ल साम्राज्य का पतन औरंगज़ेब के व्यक्तित्व एवं कार्य नीतियों के कारण हुआ। इसके अन्तर्गत उसकी धार्मिक नीति, दक्कन नीति एवं राजपूत नीति का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
  2. अयोग्य उत्तराधिकारियों ने भी मुग़लों के पतन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाया। इसकी महत्त्वपूर्ण कड़ी में बहादुरशाह प्रथम, जहाँदारशाह से लेकर बहादुरशाह ज़फ़र तक शामिल हैं।
  3. मुग़लकालीन कुलीन वर्ग अपनी योग्यताओं के अभाव के कारण एक बड़े साम्राज्य पर से अपना प्रभाव खोता जा रहा था। इनकी युद्ध के प्रति घृणा व राजा को ग़लत सलाह, निरन्तर चापलूसी से ग्रस्त रहना आदि कारणों ने उसके पतन में भूमिका निभायी।
  4. दरबार में व्याप्त गुटबन्दी ने भी मुग़ल शासन के पतन में भूमिका निभायी। सैयद बन्धु, ज़ुल्फ़िक़ार ख़ाँ व निज़ामुलमुल्क, ग़ाज़ीउद्दीन फ़िरोज़ जंग जैसे लोग पतन के महत्त्वपूर्ण अभिनेता के रूप में सामने आये।
  5. मुग़ल काल के दौरान उत्तराधिकार का कोई निश्चित नियम नहीं था। औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद तो यह लगभग विस्मृति के गर्त में चला गया। 1748 – 1749 ई. के बीच निर्ममतापूर्वक एक ही वर्ष में क़रीब 4 बादशाहों का कत्ल कर दिया गया।
  6. दक्कन के शिवाजी का जननायक के रूप में उभरना भी मुग़ल साम्राज्य के पतन का एक कारण बना।
  7. मुग़ल साम्राज्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका के निर्वाह के बाद भी मनसबदारी व्यवस्था दोषमुक्त न रही। मुग़ल साम्राज्य के पतन में इसका भी योगदान रहा।
  8. औरंगज़ेब की दक्कन नीति की असफलता के कारण हुए निरन्तर युद्धों ने मुग़ल साम्राज्य को आन्तरिक रूप से खोखला कर दिया। आर्थिक कमज़ोरी भी पतन का एक कारण थी।
  9. नादिरशाह एवं अहमदशाह अब्दाली के आक्रमणों ने तो जैसे मुग़ल साम्राज्य के ताबूत में अंतिम कील ठोकने का कार्य किया।
  10. मुग़ल साम्राज्य की विशालता के साथ ही औरंगज़ेब के बाद कुशल शासकों का अभाव भी पतन का एक कारण बना।
  11. मुग़ल काल के दौरान यूरोपीय कम्पनियों जैसे अंग्रेज़, डेन, डच, फ्राँसीसी आदि का प्रवेश भारत में हो चुका था। अन्ततः अंग्रेजों ने भारत में सर्वोच्चता स्थापित करते हुए मुग़ल सम्राट को अन्तिम रूप से भारत से बाहर खदेड़ दिया।

मुग़ल साम्राज्य के बारे में तथ्य – Mughal empire facts in hindi

  1. मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का असली नाम जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर था जो एक पारसी शब्द “बब्बर” से निकला था जिसक अर्थ होता है “शेर”।
  2. मुग़ल शासको के नाम में एक अर्थ छिपा होता था जैसे – जहांगीर जिसका अर्थ होता है दुनिया का विजेता। इसी तरह खुर्रम ने शाहजहां का नाम ग्रह किया जिसका अर्थ होता है दुनिया का राजा।
  3. बाबर भारत पर शासन करने से पहले पांच बार आक्रमण किया था और हर बार वापस जाना पड़ा था।
  4. पानीपत के युद्ध में लूटे गए धन को बाबर ने अपने सैनिक अधिकारियों, नौकरों एवं सगे सम्बन्धियों में बांट दिया था। इस बंटवारे में हुमायूं को वह कोहिनूर हीरा प्राप्त हुआ, जिसे ग्वालियर नरेश ‘राजा विक्रमजीत’ से छीना गया था। इस हीरे की क़ीमत के बारे में कहा जाता है कि इसके मूल्य द्वारा पूरे संसार का आधे दिन का ख़र्च पूरा किया जा सकता था।
  5. बाबर जब भारत में विजय प्राप्त किया तो उसने ख़ुशी में क़ाबुल के हर एक निवासी को एक-एक चांदी का सिक्का उपहार स्वरूप प्रदान किया था।
  6. भारत में भले बाबर को वो सम्मान नहीं मिला, जो उनके पोते अकबर को मिला था, लेकिन उज़्बेकिस्तान में बाबर को वही दर्जा हासिल है जो भारत में अकबर को।

मुग़ल बादशाहों की सूची – List of mughal emperor in hindi

क्र.सं    नाम  शासनकाल 
1 बाबर
2  नसीरुद्दीन मोहम्मद हुमायूँ  1530-1540
3  शेर शाह सूरी  1540-1545
4  इस्लाम शाह सूरी  1545-1554
5  नसीरुद्दीन मोहम्मद हुमायूँ  1555-1556
6  जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर  1556-1605
7  नुरुद्दीन मोहम्मद जहाँगीर  1605-1627
8  शहाबुद्दीन मोहम्मद शाहजहाँ, (राजकुमार खुर्रम)  1627-1658
9  मोइनुद्दीन मोहम्मद औरंगजेब आलमगीर  1658-1707
10  बहादुरशाह जफर I उर्फ शाह आलम I  1707-1712
11  जहान्दर शाह  1712-1713
12  फुर्रूखसियर  1713-1719
13  रफी उल-दर्जात  1719 – NA
14  रफी उद-दौलत उर्फ शाहजहाँ II  1719 – NA
15  निकुसियर  1719 – NA
16  मोहम्मद इब्राहिम 1720 -NA
17  मोहम्मद शाह  1719-1720, 1720-1748
18  अहमद शाह बहादुर  1748-54
19  आलमगीर II  1754-1759
20  शाहजहाँ III  1759 संक्षेप में
21  शाह आलम II  1759-1806
22  बहादुर ज़फ़र शाह II 1837-1857

 

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