दिल्ली लाल किले का इतिहास | Red Fort Delhi History in Hindi

Red Fort / Lal Qila – लाल किला एक विश्व प्रसिद्ध किला हैं जो मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया था। इस किले का निर्माण 1639 में शुरू हुआ जो 1648 तक जारी रहा। हालांकि, किले का अतिरिक्त काम 19 वीं सदी के मध्य में शुरू किया गया। लाल किले को आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद लाहौरी ने डिजाईन किया था, और उन्होंने ने ही ताज महल का भी निर्माण किया था। लाल किला पूरी तरह से लाल पत्थरो का बना होने के कारण उसका नाम लाल किला पड़ा। लाल किला वर्तमान में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है।

दिल्ली लाल किले का इतिहास | Red Fort Delhi History In Hindi

लाल किले की जानकारी – Red Fort Information in Hindi

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के चश्मदीद गवाह और आजादी के मतवालों के प्रेरणास्रोत रहे ऐतिहासिक लाल किले ने न सिर्फ दिल्ली के उतार-चढ़ावों को करीब से देखा है, बल्कि वह कभी उसके दर्द से कराहता, तो सुखद पलों में खुशियों से झूमता भी रहा है।

शाहजहाँ ने 1638 में जब अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया तभी लाल किले (Red Fort) का निर्माण करवाया। वास्तविक रूप से देखा जाये तो सफ़ेद और लाल शाहजहाँ के पसंदीदा रंग है। हालाँकि इसे कहते तो लाल किला है लेकिन असल में यह लाल रंग का नही बना है। आर्कियोलॉजिकल के भारतीय सर्वे के अनुसार किले के कुछ भाग निम्बू (लाइम) पत्थरो से बने हुए है। लेकिन जब सफ़ेद पत्थर ख़राब होने लगे थे तब उन्हें ब्रिटिशो ने लाल रंग दिया था।

यह किला 900 मीटर लंबा और 550 मीटर चौड़ा है और 2.41 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, और इस किले का दो मुख्य द्वार लाहौर गेट और दिल्ली गेट है। लाहौर गेट चट्टा चौक के पास है जो शाही परिवारों के लिए बनवाया गया था। दिल्ली गेट जामा मस्जिद की तरफ है। बादशाह इसी दरवाजे से हर जुम्मे की नमाज पढ़ने जामा मस्जिद जाया करते थे। औरंगजेब ने इन्हीं दोनों की यह अतिरिक्त किलाबंदी कराई थी।

किले में एक पानी का निकास द्वार भी है। वैसे देखा जाये तो वह एक नदी का तट ही है और नदी का नाम यमुना नदी है। इतने सालो में नदी में काफी बदलाव हुआ है लेकिन नदी का नाम नहीं बदला।

यह लाल किला (Red Fort) वर्तमान में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है। इस खूबसूरत स्मारक में कई अद्भुत संरचनाएं भी मौजूद हैं जिनमें दीवान-ए -आम और दीवान-ए – ख़ास शामिल हैं कहा जाता है की दीवान-ए -आम में बादशाह आम आदमी की समस्याओं और शिकायतों को सुनते थे।

ये एक महलनुमा संरचना है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। वहीँ दीवान-ए -खास राजा की अपनी निजी बैठकों और सम्मेलनों के लिए बनवाया गया था। मोती मस्जिद किले का एक अन्य आकर्षण है जो पास ही में स्थित है। मस्जिद उस समय की निजी मस्जिद थी जिसका निर्माण मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा करवाया गया था।

दीवान-ए-आम में सोने का कटहरा लगा हुआ था। तख्त की छत में मोती लगे हुए थे और वह सोने के खंम्भों पर खड़ी थी, जिसमें हीरे जड़े हुए थे। चट्टा चौक, एक ‘कवर बाजार’ है जो लाल किले के पास दिल्ली का एक शॉपिंग करने का स्थान। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां उस समय  रेशम, आभूषण और अन्य सामान शाही परिवार को बेचा जाता था।

लाल किले का इतिहास – Red Fort History in Hindi

मुगल साम्राज्यों द्वारा किये गये किलो के निर्माण का औरंगजेब ने काफी पतन किया। मुग़ल शासक, शाहजहां ने 11 वर्ष तक आगरा पर शासन करने के बाद यह निर्णय लिया कि देश की राजधानी को दिल्‍ली लाया जाए और 1618 में लाल क़िले की नींव रखी गई। वर्ष 1647 में इसके उद्घाटन के बाद महल के मुख्‍य कक्षों को भारी पर्दों से सजाया गया। चीन से रेशम और टर्की से मखमल लाकर इसकी सजावट की गई। लगभग डेढ़ मील के दायरे में यह क़िला अनियमित अष्‍टभुजाकार आकार में बना है।

1712 में जब जहंदर शाह ने लाल किले (Red Fort) को हथिया लिया था तब तक़रीबन 30 सालो तक लाल किला बिना शासक के था। लेकिन शासनकाल के लागु होने के एक साल पहले ही शाहजहाँ की हत्या हो गयी और उनकी जगह फर्रुख्सियर ने ले ली। अपने राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरने के लिये चाँदी की छत को कॉपर की छत में बदला गया।

1719 में लाल किले को रंगीला के नाम से प्रसिद्ध मुहम्मद शाह ने अपनी कलाकृतियों से सजाया। 1739 में पर्शियन शासक नादिर शाह ने आसानी से मुगल सेना को परास्त किया। बाद में नादिर शाह तीन महीने बाद पर्शिया वापिस आये, लेकिन जाने से पहले उन्होंने मुगल शहरो को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। लाल किले को कभी किला-ए-मुबारक नाम से भी जाना जाता था।

सन् 1756 में मराठों और अहमदशाह दुर्रानी की लड़ाई ने भी यहां की इमारतों को काफी नुकसान पहुंचाया। गोलाबारी के कारण दीवाने खास रंगमहल मोती महल और शाह बुर्ज को काफी नुकसान पहुंचा।

दिल्ली के इतिहास में ही नहीं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भी लालकिला खास अहमियत रखता है। इसने दिल्ली को, जिसे उन दिनों ‘शाहजहांनाबाद’ के नाम से जाना जाता था, शाहजहां के आगमन पर खुशी से सजते देखा तो विदेशी आक्रांताओं के जुल्मों से बेनूर होते भी देखा।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सन् 1857 के दौरान अंग्रेजी हुक्मरानों ने आजादी के मतवालों पर ही कहर नहीं ढाया था, बल्कि किले के कई हिस्सों को भी जमींदोज कर वहां सेना की बैरकें और दफ्तर बना दिए थे और इस किले को रोशन करने वाले मुगल सल्तनत के आखिरी बादशाह बहादुरशाह जफर को भी कैद कर रंगून भेज दिया था। यह किला मुगलकाल के ऐशो-आराम, रौनकों, महफिलों, रंगीनियों और पूजा की खुशहाली का चश्मदीद गवाह रहा तो उसने विदेशी हमलावरों के जुल्म और लूटपाट से बदहवास और बेनूर दिल्ली वालों के दिलों में छुपे दर्द को भी देखा।

1747 में नादिर शाह के हमला करने के बाद और 1857 में भारत का ब्रिटिशो के खिलाफ पराजित होने के बाद किले की ज्यादातर कीमती धातुओ को या तो लूट लिया गया था या तो वे चोरी कर ली गयी थी। अंग्रेज़ो द्वारा अंदर की इमारतों का बहुत-सा हिस्सा हटा दिया गया। रंगमहल मुमताज महल और खुर्दजहां के पश्चिम में स्थित जनता महलात और बागात तथा चांदीमहल खत्म कर दिए गए।

इसी तरह दीवान-ए-आम के उत्तर में स्थित तोशेखाने बावर्चीखाने तथा हयात बाग और महबात बाग का बहुत-सा हिस्सा काटकर वहां फौजों के लिए बैरकें और परेड का मैदान बना दिया गया। हयात बाग के उत्तर तथा किले की दीवार के बीच में शहजादों के महल थे, गिरा दिए गए।

कहा जाता है की ब्रिटिश शासको ने उन्हें प्राइवेट समूहों को बेंच दिया था और कुछ कीमती सामानों को ब्रिटिश म्यूजियम ले गये थे। कहा जाता है की आज भी उनके कीमती सामान ब्रिटिश लाइब्रेरी और अल्बर्ट म्यूजियम में रखा गया है। उदाहरण कोहिनूर हीरा, शाह जहाँ का हरे रंग का शराब का कप और बहादुर शाह द्वितीय का ताज लन्दन में रखा गया है। भारतीयों द्वारा की गयी बहोत सिफ़ारिशो को ब्रिटिश सरकार ने कई बार अमान्य किया है।

कोहिनूर हीरा शाहजहाँ के ताज का ही एक भाग था। जो ठोस सोने से बना हुआ था और जिसपर बहुमूल्य धातुए लगी हुई थी, उस ताज को पहनकर शाह जहाँ अपने दीवान-ए-खास में बैठते थे, कहा जाता है की कोहिनूर हीरा विश्व का सबसे कीमती हीरा है।

आजादी की लड़ाई के दौरान लाल किले पर तिरंगा फहराने की ख्वाहिश भारत मां की गुलामी की बेड़ियां काटने को बेकरार मतवालों के दिलों में उफनती रहीं। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया और इसकी प्राचीर पर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराया। तब से लेकर हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लालकिला पर ध्वज लहराकर भाषण देते है। 1947 से पहले 90 सालो तक लालकिला मे अंग्रेज अपना झंडा यूनियन जैक फहराते थे।

आज़ादी के बाद लाल किले में कई बदलाव किये गये और लाल किले का लगातार सैनिक प्रशिक्षण के लिये उपयोग किया जाने लगा। 22 दिसम्बर 2003 तक लाल किला सैनिको की निगरानी में था। INA की सुनवाई में, जिसे लाल किले की सुनवाई भी कहा जाता है, उसमे भारतीय राष्ट्रिय आर्मी के बहुत से ऑफिसरो को दरबार और युद्ध संबंधी प्रशिक्षण दिया गया था। पहली बार यह प्रशिक्षण 1945 में लाल किले पर नवम्बर और दिसम्बर में लिया गया था।

2007 में यूनेस्को ने लाल किले (Delhi Red Fort) के महत्त्व और इतिहास को देखते हुए उसे वर्ल्ड हेरिटेज साईट घोषित किया। यह भारत के लिये काफी गर्व की बात है।

लाल क़िले के कुछ तथ्य – Red Fort Facts in Hindi

  • लाल क़िले (Lal Qila) के निर्माण में प्रयोग में लाए गए लाल बालू पत्थरों के कारण ही इसका नाम लाल क़िला पड़ा।
  • इसकी दीवारें ढाई किलोमीटर लंबी और 60 फुट ऊँची हैं।
  • यमुना नदी की ओर इसकी दीवारों की कुल लंबाई 18 मीटर और शहर की ओर 33 मीटर है।
  • लाल क़िला सलीमगढ़ के पूर्वी छोर पर स्थित है।
  • इसको अपना नाम लाल बलुआ पत्थर की प्राचीर एवं दीवार के कारण मिला है।
  • यही इसकी चारदीवारी बनाती है।
  • नापने पर ज्ञात हुआ है, कि इसकी योजना एक 82 मी. की वर्गाकार ग्रिड (चौखाने) का प्रयोग कर बनाई गई है।

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