जिगर बढ़ने का कारण, लक्षण, घरेलू उपचार Liver ka Badhna in Hindi

Liver in Hindi/ जिगर (लिवर) में जलन होने के बाद और यकृत (जिगर) में बार-बार रक्त संचार अधिक होने से लिवर अधिक बड़ा हो जाता है, तो इसे लिवर का बड़ा होना या यकृत की प्रदाह (जलन) कहते हैं। अपच, मंदाग्नि, कब्ज एवं अजीर्ण आदि के कारण प्राय: जिगर (यकृत) खराब हो जाता है। मादक द्रव्यों का अधिक सेवन करने से भी जिगर में विकार आ सकता है। जिगर का कार्य पाचन शक्ति को सुव्यवस्थित रखना है। इस विकार को जिगर बढ़ना ही कहते हैं। इस रोग में धीरे-धीरे पेट भरने लगता है। दिन में कई बार पतले-पतले दस्त आते हैं। भूख लगने बंद हो जाती है। पेट दर्द, वमन एवं बुखार की शिकायतें पैदा हो जाती है।

जिगर बढ़ने का कारण, लक्षण, घरेलू उपचार Liver ka Badhna in Hindiजिगर बढ़ने का कारण – Enlarged Liver Causes in Hindi

जिगर बढ़ने का रोग प्राय: छोटे बच्चों को होता है। इसके मुख्य कारणों में माता के दूध की खराबी, गाय-भैंस का बासी तथा भारी दूध, अधिक मात्रा में दूध पिलाना, छोटी उम्र में बच्चों को चावल एवं भरपेट भोजन देना, मीठे पदार्थों का अधिक प्रयोग, बर्फ, आइसक्रीम, चॅाकलेट आदि के सेवन हैं। इन्हें खाने से बच्चे का जिगर घातक रोगों का शिकार हो जाता है।

लक्षण – Fatty Liver Symptoms in Hindi

खाने के अपच के कारण धीरे-धीरे जिगर का बढ़ जाना, पेट बढ़ा मालूम पड़ना, बालक का स्वास्थ्य रोजाना गिरते जाना। खून की कमी, स्वभाव चिड़चिड़ा होना आदि इस रोग के लक्षण हैं। इसके आलावा पेट में दर्द, थकान, उलटी आना, त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से का पीला पड़ना एक लक्षण हैं।

जिगर बढ़ने का घरेलु आयुर्वेदिक इलाज – Enlarged Liver Treatment in Hindi

जिगर के बढ़ने पर छोटी पीपली को घिसकर शहद के साथ दिन में तीन बार लेने से अवश्य लाभ होता है। इससे तिल्ली रोग भी दूर हो जाता है।

पीपल और चिरायता – दोनों का चूर्ण एक-एक चुटकी की मात्रा में बच्चे को पानी के साथ दें। इससे जल्दी आराम मिलेगा।

खीरे के गोल टुकड़े काट कर उस पर पुदीने की पत्ती व नींबू का रस टपकाएं है और काला नमक बुर कर खाए जिगर बढ़ने पर आराम मिलता है।

अजवायन, चीता, यवक्षार, पीपरामूल, दंती की जड़ और छोटी पीपल – सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें, इसमें से आधा चम्मच चूर्ण दही के तोड़ (पानी) के साथ खिलाएं।

मेहंदी के पत्तों को कुचलकर रात में भिगो दें सुबह पानी निकाल कर उसे पिलाने से जिगर वृद्धि में लाभ मिलता है।

एक चम्मच खाने का मीठा सोडा, एक कप ताजा गौमूत्र में डालकर पीने से जिगर की वृद्धि एवं गर्मी शांत हो जाती है। यह प्रयोग दिन में एक बार करें।

जिगर बढ़ने पर राय को गौमूत्र में पीसकर पेट पर लेप करने से आराम मिलता है।

जिगर वृद्धि में बथुवा की जड़ और कालीमिर्च संभाग में पीसकर जंगली बेर जैसी गोली बनाकर एक गोली रोज शहद से खाए।

25 ग्राम मूली के रस में जरा सा जवाखार डालकर पीने से जिगर का बढ़ना बंद हो जाता है और जल्दी आराम मिलता है।

अलसी और एरंड के बीज पीसकर पेट पर लेप करें इससे जिगर वृद्धि में शीघ्र ही आराम मिलेगा।

नीम की छाल का काढ़ा शहद मिलाकर पीने से जिगर विकार में लाभ पहुंचता है।

आधा चम्मच जामुन का सिरका पानी में घोलकर बच्चे को दें। आराम जल्दी हो जायेगा।

गौ-मूत्र गुनगुना करके उसमें कपडा भिगोकर जिगर के स्थान पर पेट सेकने से भी आराम होता है।

जिगर बढ़ने के रोग को ठीक करने के लिए चियोनैनथस औषधि की मूल-अर्क का प्रयोग करना चाहिए। जिगर बढ़ने के साथ ही नाभि के आस-पास के भाग में दर्द होता है, खींचन होती है, ऐंठन होती है और ऐसा लगता है कि आंतों को किसी रस्सी से बांधा और बांधकर फिर यह बांध धीरे-धीरे छोड़ा जा रहा है। इस प्रकार के लक्षण के होने पर रोग को ठीक करने के लिए चियोनैनथस औषधि का उपयोग करना अधिक फायदेमंद है।

लीवर बढ़ने से बचाव – Prevention of Enlarged Liver in Hindi

अपने खाने में फल, सब्ज़ियां और पूर्ण आहार खाएं। धूम्रपान न करें और शराब कम पियें। इसके आलावा ऐसी फालतू दवाइयों का सेवन न करे जो शरीर को नुक्सान पहुंचाएं।

बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर को अवश्य दिखाएँ।


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