तिल्ली ‘प्लीहा’ बढ़ने कारण और घरेलु उपचार Spleen Enlargement Treatment Hindi

प्लीहा को हिंदी में “तिल्ली” भी कहा जाता है, और अंग्रेजी में इसे “स्प्लीन” (spleen) कहा जाता है। यह हमारे बॉडी का महत्वपूर्ण अंग हैं, इसके तीन मुख्य काम हैं। लाल रक्त कोशिकाओं की गुणवत्ता बनाए रखना, खराब रक्त कोशिकाएं नष्ट करना व बैक्टीरिया आदि से लडऩे के लिए एंटीबॉडी बनाना। रोग से ग्रस्त होने पर तिल्ली इम्यूनिटी भी बढ़ाती है। लेकिन सामान्य से बड़ा होने पर खतरा भी हो सकती हैं। यह इन्फेक्शन, लिवर की बीमारी और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं से स्प्लीन बढ़ने की समस्या हो सकती है जिसे “स्प्लेनोमेगली” (splenomegaly) भी कहा जाता है।

तिल्ली पेट की सभी ग्रंथियों में बड़ी और नलिकारहित है इसका स्वरूप अंडाकार तथा लम्बाई लगभग तीन से पांच इंच होती है। यह पेट के निचले भाग में पीछे बाईं ओर स्थित होती है। तिल्ली शरीर के कोमल और भुर-भुरे ऊतकों का समूह है। यह मनुष्य के शरीर का एक बहुत ही खास अंग है जिसका हर समय स्वस्थ रहना बहुत जरूरी होता है।

तिल्ली बढ़ने का कारण – Tilli Badhane ka Karan (Spleen enlargement causes)

(तिल्ली बढ़ने) इस रोग की उत्पत्ति अधिकतर मलेरिया के कारण होती है। मलेरिया रोग में शरीर के रक्तकणों की अत्यधिक हानि होने से तिल्ली पर अधिक जोर पड़ता है। ऐसी स्थिति में जब रक्तकण तिल्ली में एकत्र होते हैं तो तिल्ली बढ़ जाती है। इसके आलावा भी सरसों का साग, उड़द, कुल्थी, भैंस के दूध से बनी दही आदि खट्टी चीजों के ज्यादा सेवन करने से कफ और रक्त दूषित होकर तिल्ली को अपने स्वाभाविक आकार से बढ़ा देते हैं। इसके अलावा चिकने पदार्थों के ज्यादा सेवन करने से भी होता हैं।

शरीर में ब्लड सप्लाई का काम स्प्लीन करता है। ऐसे में इस अंग से जब ब्लड जाने और आने वाली नलिकाओं में बाधा आती है जैसे किसी कारण से खून के थक्के जमने लग जाते हैं तो यह दिक्कत होती है। इस स्थिति में आकार बढऩे से कई बार तिल्ली फटने की समस्या हो जाती है। कई बार संक्रमण व बीमारियाँ बढ़े हुए प्लीहा की कारक हो सकती हैं।

तिल्ली बढ़ने के लक्षण – Enlarged Spleen Symptoms in Hindi

तिल्ली वृद्धि में स्पर्श से उक्त भाग ठोस और उभरा हुआ दिखाई देता है। इसमें पीड़ा नहीं होती, परंतु समय रहते उपचार न करने पर आमाशय प्रभावित हो जाता है। ऐसे में पेट फूलने लगता है। इसके साथ ही हल्का ज्वर, खांसी, अरुचि, पेट में कब्ज, वायु प्रकोप, अग्निमांद्य, रक्ताल्पता और धातुक्षय आदि विकार उत्पन्न होने लगते हैं। अधिक लापरवाही से इस रोग के साथ-साथ जलोदर भी हो जाता है। शुरू में इस रोग का उपचार करना आसान होता है, परंतु बाद में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह रोग मनुष्य को बेचैनी एवं कष्ट प्रदान करता है। तिल्ली में वृद्धि होने से पेट के विकार, खून में कमी तथा धातुक्षय की शिकायत शुरू हो जाती है।

हालाँकि कुछ मामलों में कोई लक्षण नहीं होते। परन्तु पेट के बाएं हिस्से में ऊपरी तरफ हल्का दर्द होना। अंग का अपनी जगह से खिसकने जैसा अहसास होना। खून की कमी (एनीमिया), थकान, बार बार संक्रमण होना भी इसके लक्षण हैं।

तिल्ली(प्लीहा) बढ़ने कारण और घरेलु उपचार Spleen Enlargement Treatmentतिल्ली बढ़ने का घरेलु आयुर्वेदिक इलाज – Enlarged Spleen Treatment in Ayurveda Hindi

तिल्ली के बढ़ने पर बड़ी हरड़, सेंधा नमक और पीपल का चूर्ण पुराने गुड के साथ खाने से आराम होता है।

त्रिफला, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सहजन की छाल, दारूहल्दी, कुटकी, गिलोय एवं पुनर्वास के संभाग का काढ़ा बनाकर पि जाएं। आराम मिलता है।

पहाड़ी नीबू दो भागों में काटकर उसमें थोड़ा काला नमक मिश्रित कर हीटर या अंगीठी की आंच पर हल्का गर्म करके चूसने से लाभ होता है।

कच्चे बथुए का रस निकालकर अथवा बथुए को उबालकर उसका पानी पीने से तिल्ली ठीक हो जाती है। इसमें स्वादानुसार नमक भी मिला सकते हैं।

25 ग्राम करेले के रस में थोड़ा सा पानी मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक हो जाती है।

सेंधा नमक (आधा ग्राम) और अजवायन का चूर्ण 2 ग्राम मिलाकर गर्म पानी के साथ लेने से तिल्ली की वृद्धि में लाभ होता है।

गाजर में राई आदि मिलाकर बनाया गया अचार खिलाने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक हो जाती है।

तिल्ली बढ़ने पर, दो अंजीर जामुन के सिरके में डुबोकर नित्य प्राप्त:काल खाएं।

तिल्ली के विकार में नियमित रूप से पपीते का सेवन लाभदायक है।

गिलोय के 2 चम्मच रस में 3 ग्राम छोटी पीपल का चूर्ण और एक दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तिल्ली का विकार दूर होता है। भूख खुलकर लगती है।

तिल्ली में वृद्धि हो जाने पर आधा ग्राम नौसादर गर्म पानी के साथ सुबह के वक्त लेने से जल्दी लाभ होता है

गुड़ और बड़ी हरड़ के छिलके को कूट-पीसकर गोलियां बना लें। प्रातः-सायं हल्के गरम पानी से एक महीने तक सेवन करने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक हो जाती है।

छोटे कागजी नीबू को चार भागों में काट लें। एक भाग में काली मिर्च, दूसरे भाग में काला नमक, तीसरे में सोंठ और चौथे हिस्से में मिश्री अथवा चीनी भर दें। रातभर के लिए ढककर रखें। प्रातःकाल जलपान से एक घंटा पहले, हल्की आंच पर गरम करके चूसने से लाभ होता है।

आम का रस भी तिल्ली की सूजन और उसके घाव को ठीक करता है। 70 ग्राम आम के रस में 15 ग्राम शहद मिलाकर, प्रात:काल सेवन करते रहने से दो-तीन सप्ताह में तिल्ली ठीक हो जाती है। निरंतर इसका प्रयोग करते समय खटाई से बचे।

मलेरिया रोग के कारण से तिल्ली बढ़ जाए तो उसे ठीक करने के लिए आर्टिका युरेंस औषधि के मूल-अर्क के दस बूंद सुबह तथा शाम के समय में पानी में डालकर सेवन करें इससे लाभ मिलेगा।

तिल्ली बढ़ने का डॉक्टर के इलाज  – Tilli Badhane ka ilaj

इसमें रोग की सही से पहचान कर इलाज होता है। ल्यूकीमिया, रक्त का थक्का न जम पाना या अन्य कारण से यदि तिल्ली बढ़ी है तो स्प्लीनेक्टॉमी कर इसे बाहर निकाल देते हैं। एडवांस स्टेज में बाइपास सर्जरी या दूरबीन से ऑपरेशन करते हैं। लीवर सिरोसिस के कारण यदि तिल्ली बढ़ी है तो क्योरेकस दवा देते हैं। अलग-अलग लक्षणों के अनुसार दवाएं व उनकी पोटेंसी तय की जाती हैं। अगर किसी का प्लीहा बढ़ा हुआ है मगर कोई लक्षण नहीं है तो डॉक्टर उसे प्रतीक्षा करने को कह सकते हैं। लेकिन गर उससे पहले कोई लक्षण नज़र आते हैं, तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।

परहेज – Enlarged spleen home remedies

फालसे, खजूर, बथुआ, छोटी मूली, सहजना, दाख, बकरी का दूध, लाल चावल, एक साल पुराने चावल, गाय का दूध, हींग, हरड़, परवल, गोमूत्र, बैंगन, केले का फूल, सेंधानमक, छोटे पक्षियों का मांस तथा जंगली पशुओं का मांस का सूप (शोरबा) इन सभी चीजों को तिल्ली वृद्धि के रोग में लाभकारी माना जाता है। मछली, सूखा साग, सूखा मांस, मलमूत्र इत्यादि के वेग को रोकना, मैथुन, अत्यधिक कार्य करना, रात में जागना, तथा धूप का सेवन नहीं करना चाहिए।

इसके आलावा मसालेदार, तलाभुना, जंकफूड से परहेज करें। जरूरत से ज्यादा पानी न पीएं। शराब, तंबाकू व धूम्रपान से दूरी बनाएं। यदि आपका स्प्लीन बढ़ा हुआ है, तो फुटबॉल और हॉकी जैसे खेल से बचें। और अपने डॉक्टर द्वारा अनुशंसित अन्य गतिविधियों को सीमित करें।


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