गठिया रोग का लक्षण, घरेलु उपचार | Gathiya ka Gharelu Ilaj

गठिया एक सामान्य रोग है जिसमें रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और चुभन जैसी तेज पीड़ा होती है। यह रोग रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से होता है, जिसका प्रमुख कारण यूरिक एसिड अपचयन से है। गठिया का रोग 45 -50 वर्ष के बाद बहुत से लोगो में पाया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण हैं आज कल हमारी दिनचर्या हमारे खान -पान में बदलाव। इस रोग में रात को जोडों का दर्द बढता है और सुबह अकडन मेहसूस होती है। इसकी पहचान होने पर इसका जल्दी ही इलाज करना चाहिए अन्यथा जोडों को बड़ा नुकसान हो सकता है। आइये जाने गठिया होने का कारण और घरेलु उपचार ( Gathiya Rog Treatment in Hindi)…

गठिया रोग का लक्षण, घरेलु उपचार | Gathiya ka Gharelu Ilajगठिया के लक्षण- Arthritis symptoms in hindi

  • उंगलियों के जोड़ में दर्द रहना।
  • कंधे पर हल्का-हल्का दर्द रहना।
  • जोड़ो के आस पास लाल होना।
  • उठने या बैठने में घुटनों में दर्द होना।
  • पैर के पंजो में दर्द रहना, हल्का सा भी चलने से पंजो में दर्द होना।
  • घुटनों के आस पास सुजन हो जाना।
  • पैर के उँगलियों में कभी कभी सुजन हो जाना।
  • साथ में बुखार और थकावट भी हो सकती है।

गठिया होने का कारण – Arthritis causes in hindi

गठिया शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ जाने से भी होता है। यह वह विषेला पदार्थ है जिसे शरीर, मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। इस प्रक्रिया को करने में किडनी मुख्य भूमिका निभाती है। जब किडनी अपना काम सुचारू रूप से नहीं करती है, तब ये पदार्थ शरीर में ही इक्कठा होने लगता है। और यूरिक एसीड के कण घुटनों व अन्य जोडों में जमा हो जाते हैं। जोडों में दर्द से रोगी का बुरा हाल रहता है। यह रोग अनुवांशिक भी होता है, मतलब परिवार के एक सदस्य से दुसरे में जाता है।

गठिया के हानिकारक – Gathiya in Hindi

गठिया के रोगियों को रक्तचाप, डायबिटीज, मेटाबोलिक सिन्ड्रोम, वृक्क रोग और हृदय रोग का खतरा अधिक रहता है। यदि उपचार नहीं किया जाये तो यह धीरे-धीरे दीर्घकालीन और स्थाई रोग बन जाता है। जोड़ों की सतह क्षतिग्रस्त होने लगती है। अक्षमता और अपंगता बढ़ जाती है। साथ ही शरीर में कई जगह (जैसे कान, कोहनी आदि) यूरिक एसिड जमा होने से दर्दहीन गांठें (Tophi) बन जाती हैं। यदि गुर्दे में पथरी बन जाये तो स्थिति और जटिल हो जाती है। ऐसे में किडनी खराब (Kidney Failure) होने का खतरा बढ़ जाता है।

गठिया रोग का घरेलु इलाज – Gathiya rog ka gharelu upchar

गठिया रोग में मेथी का प्रयोग शाक-सब्जी में डालकर करना चाहिए। इससे जकड़न और सूजन में भी लाभ होता है। शरीर की पीड़ा में मेथी के लड्डू बनाकर खाना भी लाभदायक है।

⇒ लहसुन के तेल की मालिश से गठिया बाय का दर्द मिट जाता है।

⇒ तारपीन, स्प्रिट और बाबूना का तेल बराबर-बराबर ले कर मिला लें। रोज रात को इस तेल की मालिश करके गर्म कपड़ा बांधकर सो जाएं। कुछ ही दिन में दर्द जाता रहेगा शुरू में 2 दिन ना नहाए।

⇒ गठिया के रोगी 4-6 लीटर पानी पीने की आदत डालें। इससे ज्यादा पेशाब होगा और अधिक से अधिक विजातीय पदार्थ और यूरिक एसीड बाहर निकलते रहेंगे।

⇒ मूली के सेवन से घुटने तथा शरीर के विभिन्न जोड़ों की जकड़न दूर होती है।

⇒ जोड़ों के दर्द अथवा गठिया के रोग में सोया को सरसों के तेल में उबाल-छानकर मालिश करने से लाभ होता है।

⇒ पोस्त के डोडो का काढ़ा पीने से गठिया में आराम मिलता है। दो या तीन तोले डोडे कुचलकर आधा किलो पानी में भिगो दें और मंदी आंच पर पकाएं। चौथाई जल रह जाने पर छानकर पी जाएं। गठिया-बाय का नामो निशान मिट जाएगा।

⇒ 1 किलो गाय के दूध में, एक पीपल और चार भीलवा कतरकर डाल दें। फिर उस दूध को औटाएं। जब चौथाई दूध रह जाए तो उसमें मिश्री डालकर पी ले शीघ्र ही गठिया में लाभ होगा।

⇒ केसर तीन ग्राम, सुरंजान 12 ग्राम और खांड 12 ग्राम, – इन सबको मिलाकर बारीक पीसकर 32 पुड़िया बना ले। एक-एक पुड़िया सुबह शाम गाय के दूध के साथ ले। यह गठिया बाय की एक अच्छी दवा है।

⇒ गठिया के दर्द में दो चम्मच मेथी के दानों को आधा गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।

⇒ शाम के समय थोडा गरम (सहने लायक) पानी में 10 चमच्च नमक ले कर उसे अपने पैरों को सेका करे, ऐसा करने से जोड़ो के दर्द से राहत मिलेगी।

⇒ एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें। सुबह पानी निकाल दें और मैथी के बीज अच्छी तरह चबाकर खाएं। मैथी बीज की गर्म तासीर मानी गयी है। यह गुण जोड़ों के दर्द दूर करने में मदद करता है।

⇒ मटर, मूंगफली, चना, मुंग, मसूर, झुंगा, गेहू एक एक चम्मच, मेथी आधा चम्मच और अजवाइन पाव चम्मच ले। सभी चीजों को एक गिलास पानी में 24 घंटे भिगो कर रखे। फिर इन्हें एक मोटे साफ कपड़े में बांधकर 24 घंटे लटकाकर रखे।  ये दाने अंकुरित हो जाएंगे। सुबह खाली पेट इन्हे चबा-चबाकर खाए। इसके 2 घंटे बाद भोजन करें। इससे पुराने से पुराना जोड़ों और घुटनों का दर्द चला जाता है। इससे मधुमेह के रोगी को भी लाभ होता है।

⇒ गठिया और जोड़ों के दर्द में सोंठ, असगंध, विधारा और सुरंजान -सभी 20-20 ग्राम लेकर को पीसकर कपड़े में छान कर ले। फिर बुरा मिलाकर मोटी छन्नी में छान लें। अब इसे एक जार में भरकर रख दें। आधा-आधा चम्मच चूर्ण गाय के दूध के साथ सुबह खाली पेट और रात को सोते समय ले। यह दवा सिर्फ चार दिन लेना चाहिए। इन 4 दिनों में खटाई, गुड़, तेल, चावल, उड़द की दाल और तली चीजें ना खाएं। दो माह बाद इन्हें पुन: चार दिन खाएं और परहेज करें। इसी प्रकार 2-2 माह बाद दवा लेते रहें और परहेज करें। यह रोग जड़ से खत्म हो जाएगा।

⇒ सरसो का तेल लाल रंग की शीशी में भरकर 5 घंटे धूप में रखें। बाद में इस तेल से मालिश करने पर गठिया रोग और जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है।

⇒ सेंधा नमक में मैग्नीशियम की अधिकता होती है, जिससे ये शरीर में ph लेवल को संतुलित बनाये रखता है। शरीर में ph लेवल का संतुलित होना बहुत जरुरी होता है, क्यूंकि हाई एसिडिटी से गठिया जैसे रोग उभरते है।

⇒ तुलसी के 3 ग्राम रस में 2 ग्राम अजवाइन का चूर्ण मिलाकर खाने से जोड़ों की सूजन और पीड़ा दूर हो जाती है।

⇒ राइ के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से जोड़ों का दर्द चला जाता है।

⇒ नारियल की गिरी और पुराना गुड कूट कर मिला लें। इसे 15 ग्राम रोज खाएं। पानी ना पिए। गठिया का दर्द जाता रहेगा।

⇒ अखरोट की गिरी खाते रहने से जोड़ों के दर्द में लाभ पहुंचता है।

⇒ लहसुन की 10 कलियों को 100 ग्राम पानी एवं 100 ग्राम दूध में मिलाकर पकाकर उसे पीने से दर्द में शीघ्र ही लाभ होता है।

⇒ एप्पल विनेगर पोषक तत्व की खदान है, इसमें मैग्नीशियम, कैल्सियम, पोटेशियम व् फोस्फोरस होता है। इसके उपयोग से जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है। यह जोड़ो से यूरिक एसिड की अधिकता को कम करता है।

⇒ सुबह के समय सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से भी जोड़ों के दर्द से स्थाई रूप से छुटकारा मिलता है।

⇒ नियमित टहलें, व्यायाम (क्षमतानुसार) एवं मालिश करें। कब्ज न होने दें। हफ्ते में एक दिन उपवास रखना चाहिए। इससे दर्द में राहत मिलती है।

⇒ गठिया के रोगियों को प्रोटीनयुक्त आहार से परहेज करना चाहिए। शरीर में प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए चोकरयुक्त आटे की रोटी तथा छिलके वाली मूंग की दाल खाएं।

⇒ एलोविरा के पत्‍ते को काटकर उसका जेल दर्द होने वाली जगह पर लगाएं। बाजार में मिलने वाला एलोविरा जेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं मगर घर पर अगर पेड़ है तो ये काफी फायदेमंद होगा।


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