मिर्गी होने का कारण, लक्षण व घरेलु उपचार | Mirgi Ka Ilaj Hindi Me

अपस्मार या मिर्गी (Epilepsy) तंत्रिकातंत्रीय विकार (neurological disorder) के कारण होता है। मिर्गी में रोगी को ऐसा महसूस होता है, मानो वह अचानक अंधेरे में गिर रहा हो या उससे घिर गया हो। उसकी आंखें खींची-खींची जैसी हो जाती है और उस पर बेहोशी छा जाती है। वह अपने हाथ पैर पटकने लगता है या उसके ये अंग अकड़ जाते हैं उसके नेत्रों पर प्रकाश डालने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता। रोगी की जीभ अकड़ जाती है।

मिर्गी होने का कारण, लक्षण और घरेलु उपचार | Mirgi Ka Ilaj Hindi Meमिर्गी का लक्षण – Symptoms of Epilepsy In Hindi

इस रोग में कई प्रकार के लक्षण प्रकट होते हैं। जैसे मुंह से पीला झाग निकलना, पूरी शरीर और आंखें पीली पड़ जाना, प्यास ज्यादा लगना, शरीर में जलन और चारों ओर से आग-सी लगी अनुभव होना, हर चीज पीली या लाल दिखाई देना। मुंह से झाग आना, दांत किटकिटाना, शरीर कपकपाना, सांस की गति तेज हो जाना, रोगी को चारों ओर काला-सा दिखाई देना। पूरा शरीर और आंखे सफेद पड़ जाना, मुंह से सफेद झाग निकलना, शरीर के रोए में खड़े हो जाना, हर चीज सफेद-सफेद सी दिखाई देना।

इन्हें तीन अवस्थाओं में बांटा जा सकता है। प्रथम अवस्था-सारा शरीर तन जाता है। यह अवस्था 30 सेकंड से अधिक नहीं होती, मरीज अपनी जीभ को दांतों से चबा सकता है। कई मरीजों को कपड़ों में पेशाब या पाखाना भी हो जाता है। द्वितीय अवस्था- यह अधिक उग्र होती है, दो से पांच मिनटों तक बनी रहने वाली इस अवस्था के दौरान मरीज को तेल झटके आते हैं। उसके मुंह से झाग निकलकर बाहर बहने लगता है, होंठ और चेहरा नीले पड़े जाते हैं। तृतीय अवस्था-झटके आना बंद हो जाता है। मरीज या तो होश में आ जाता है या वह फिर ऐसी अवस्था में रहता है।

Note :- मिर्गी का मरीज़ पागल नहीं होता है वह आम लोगों के तरह ही होता है। उसकी शारीरिक प्रक्रिया भी सामान्य होती है। मिर्गी का मरीज़ शादी करने के योग्य होता/होती है और वे बच्चे को जन्म देने की भी पूर्ण क्षमता रखते हैं।

मिर्गी होने का कारण – Due To Epilepsy In Hindi

मस्तिष्क का काम न्यूरॉन्स के सही तरह से सिग्नल देने पर निर्भर करता है। लेकिन जब इस काम में बाधा उत्पन्न होने लगता है तब मस्तिष्क के काम में प्रॉबल्म आना शुरू हो जाता है। इसके कारण मिर्गी के मरीज़ को जब दौरा पड़ता है तब उसका शरीर अकड़ जाता है, बेहोश हो जाते हैं, कुछ वक्त के लिए शरीर के विशेष अंग निष्क्रिय हो जाता है आदि। वैसे तो इसके रोग के होने के सही कारण के बारे में बताना कुछ मुश्किल है। कुछ कारणों के मस्तिष्क पर पड़ सकता है असर, जैसे-

  • सिर पर किसी प्रकार का चोट लगने के कारण।
  • जन्म के समय मस्तिष्क में पूर्ण रूप से ऑक्सिजन का आवागमन न होने पर।
  • ब्रेन ट्यूमर।
  • दिमागी बुखार (meningitis) और इन्सेफेलाइटिस (encephalitis) के इंफेक्शन से मस्तिष्क पर पड़ता है प्रभाव।
  • अत्यधिक नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण।

मिर्गी के दौरे आने पर क्या करें?

  • मरीज को जमीन पर या समतल स्थान पर लिटा दें।
  • उसके आसपास से तेज, नुकीली या चुभने वाली वस्तुओं को हटा दें।
  • झटकों को आने दिया जाये। जैसे ही झटके बंद हो जायें, मरीज को विश्राम की स्थिति में लिटा दें और उसकी गर्दन एक ओर मोड़ दें ताकि मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाए।
  • याद रखिये, झटकों के दौरान मरीज में मुंह में कुछ न रखिये, अक्सर मरीज को दांतों पर दांत कसते देख लोग उसके मुंह में चम्मच या अन्य वस्तु रख देते हैं। मगर ऐसा करना खतरनाक सिद्ध हो सकता है क्योंकि ऐसा वस्तु टूटकर सांस के रास्ते में जा सकती है या मरीज के दांत टूट सकते हैं।
  • कसे हुए या बाधा उत्पन्न करने वाले वस्त्रों को निकाल दें।
  • इस बीच चिकित्सक से संपर्क कर या तो उसे वहीं बुला लें या फिर मरीज को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल ले जाएं।

मिर्गी रोगी का आयुर्वेदिक इलाज उपचार – Ayurvedic Treatment Of Epileptic In Hindi

  • मिरगी के मरीजों के लिए कद्दू या पेठा सबसे कारगर घरेलू इलाज है। पेठे की सब्जी भी बनाई जाती है और आप इसकी सब्जी का भी सेवन कर सकते हैं, लेकिन इसका जूस रोज़ाना पीने से काफी फायदा होता है।
  • रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम ढाई सौ ग्राम अंगूर अथवा उनका रस देने से मिर्गी रोग में लाभ होता है।
  • ब्राही बूटी को पीसकर एक चम्मच इसका रस रोगी को पिलाए। इसे दिन में तीन बार इसी प्रकार पिलाने से मिर्गी के दौरे में कमी हो जाती है।
  • तुलसी कई बीमारियों में रामबाण की तरह कम करता है। तुलसी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक करते हैं। मस्तिष्क की किसी भी प्रकार की बीमारी में अगर रोजाना तुलसी के 20 पत्तियां चबाकर खाया जाए तो यह काफी असरदार होता है।
  • चार दाने बदाम, बड़ी इलायची, अमरुद व अनार के 17-17 पत्ते और सूखी बेलगिरी 10 ग्राम ले। इन सबको दो गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो उसमें हल्का-सा नमक मिला दे। इस काढ़े को रोज दिन में दो बार देने से मिर्गी रोग में शीघ्र लाभ होता है।
  • मिट्टी को पानी में गीला करके मरीज के पूरे शरीर लेप लगा दें। एक घंटे बाद नहा लें। इससे मिरगी के दौरे कम आएगे और मरीज थोड़ा बेहतर महसूस करेगा। यह इलाज काफी कारगर है।
  • बकरी का दूध मिरगी के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। पाव भर बकरी के दूध में 50 ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर रोज सवेरे दो हफ्ता तक पीने से मिरगी के दौरे बंद हो जाते हैं।

सलाह –

  • खानपान – रिसर्च के अनुसार मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला डायट लेना चाहिए। इससे सीज़र पड़ने के अंतराल में कमी आती है।
  • पर्याप्त नींद और एक ही समय में सोने की आदत का पालन करना।
  • तनाव से दूर रहें।
  • संतुलित आहार।
  • मेडिटेशन करे।

डॉक्टरी इलाज – 

बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर से दिखाना जरुरी हैं, इसलिए कोई अच्छे डॉक्टर से संपर्क करे। डॉक्टर मरीज़ के पल्स रेट और ब्लड प्रेशर को चेक करने के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल साइन को भी एक्जामीन करते हैं। इसके अलावा डॉक्टर इस रोग का पता ई.ई.जी (electroencephalogram (EEG), सी.टी.स्कैन या एम.आर.आई (CT scan or MRI) और पेट (positron emission tomography (PET) scan) के द्वारा लगाते हैं। मिर्गी रोगी इसके लिए एन्टी एपिलेप्टिक ड्रग (anti-epileptic drug (AED) थेरपी और सर्जरी होती है। जिन लोगों पर ये ड्रग काम नहीं करता है उन्हें सर्जरी करने की सलाह दी जाती है।


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