दर्जिलिंग की जानकारी, इतिहास व प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल | Darjeeling Tourist Places Visit

Darjeeling Tourism in Hindi / दर्जिलिंग, पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी कोलकाता से 491 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। दार्जीलिंग एक सुन्दर और प्राकृतिक वातावरण से भरपूर एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। दरअसल दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल में स्थित एक हिल स्टेशन है और यहां बर्फ से ढंकी चोटियां देख सकते हैं। लघु हिमालय यानी महाभारत पर्वत श्रृंखला में बसा दार्जिलिंग वास्तव में स्वर्ग सरीखा है।

दर्जिलिंग की जानकारी, इतिहास व प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल | Darjeeling Tourist Places Visit

दर्जिलिंग का संक्षिप्त परिचय – Darjeeling, West Bengal in Hindi 

नाम दार्जिलिंग (Darjeeling)
राज्य पश्चिम बंगाल
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 27° 3′ 0.00″, पूर्व- 88° 16′ 0.00″
जनसंख्या 107,530 (2001 से)
क्षेत्रफल 1057 कि.मी²
प्रसिद्धि के कारण भारत का प्रमुख हिल स्टेशन, पर्यटन स्थल
कब जाएँ अप्रैल से जून
कहाँ ठहरें होटल, अतिथि ग्रह, धर्मशाला
क्या देखें चाय उद्यान, जैविक अद्यान, टाइगर हिल, टॉय ट्रेन, तिब्बती शरणार्थी शिविर, मिरिक, कोरोनेशन ब्रिज

दार्जिलिंग की जानकारी – Darjeeling Information in Hindi

दर्जिलिंग शहर क़रीब 2,100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। दार्जिलिंग से कंचनजंगा (8,586 मीटर) का भव्य दृश्य दिखाई देता है और पास के अवलोकन स्थल, टाइगर हिल से माउंट एवरेस्ट को देखा जा सकता है। दार्जिलिंग शब्द की उत्त्पत्ति दो तिब्बती शब्दों, दोर्जे (बज्र) और लिंग (स्थान) से हुई है। इस का अर्थ “बज्रका स्थान है।

दार्जिलिंग शहर ब्रिटिश शासनकाल से ही पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता रहा है। साथ ही यहां के विशाल चाय बागान और गुणवत्तापूर्ण चाय की लोकप्रियता पूरे विश्व में है। हॉलीवुड की भी एक फिल्म में विश्व प्रसिद्ध दार्जिलिंग हिमालियन रेलवे को दिखाया गया है। यह एक छोटी रेलवे सेवा जो पर्वतों से होकर गुजरती है। इस सफर में आप विहंगम प्राकृतिक दृश्यों का लुत्फ उठा सकते हैं।

दार्जीलिंग नेपाल, ‍तिब्बत, भूटान एवं बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ है। दार्जीलिंग पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहाडों की चोटी पर विराजमान दार्जीलिंग का एहसास सैलानियों को एक ठंडा और सुखद अनुभूति देने के लिए काफी है। दार्जीलिंग ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के मानचित्र पर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

दार्जिलिंग की दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे एक युनेस्को विश्व धरोहर स्थल तथा प्रसिद्ध स्थल है। दार्जिलिंग में ब्रिटिश शैली के निजी विद्यालय भी है, जो भारत और नेपाल से बहुत से विद्यार्थियों को आकर्षित करते हैं। भारत में ब्रिटिश राज के दौरान दार्जिलिंग की समशीतोष्ण जलवायु के कारण से इस जगह को पर्वतीय स्थल बनाया गया था। ब्रिटिश निवासी यहां गर्मी के मौसम में गर्मी से छुटकारा पाने के लिए आते थे। दार्जिलिंग में तिस्ता तथा महानंदा नदियाँ बहती हैं।

मौसम में परिवर्तन के बावजूद दार्जिलिंग के जंगल हरे—भरे हैं, जिससे पर्यटन को नया आयाम मिलता है। शहर में कुछ प्राकृतिक पार्क भी हैं। इनमें से पड़माजा नायडू हिमालियन जूलॉजिकल पार्क और लॉयड बॉटनिकल गार्डन प्रमुख है। इस क्षेत्र में वन्यजीव के संरक्षण का जिम्मा पश्चिम बंगाल वन विभाग के पास है। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले कुछ सामान्य जानवारों में एक सिंघ वाले गेंडे, हाथी, भारतीय बाघ, तेंदुआ और पाढ़ा प्रमुख है। दार्जिलिंग पक्षियों के लिए भी जाना जाता है। आप यहां ढेरों सुंदर प्रवासी पक्षियों को उड़ते हुए देख सकते हैं। अगर आप अकेले या परिवार के साथ कहीं घूमने जाना चाहते हैं तो दार्जिलिंग एक आदर्श स्थान हो सकता है।

दार्जिलिंग का इतिहास – Darjeeling History in Hindi

‘क्वीन ओफ हिल्स’ (Queen of Hills) के नाम से मशहूर दार्जिलिंग कभी सिक्किम का हिस्सा हुआ करता था। बाद में भूटान ने इस पर कब्‍जा कर लिया। लेकिन कुछ समय बाद सिक्किम ने इस पर पुन: कब्‍जा कर लिया। 1835 में अंग्रेज़ो ने लीज पर लेकर इसे हिल स्टेशन की तरह विकसित करना प्रारम्भ किया। फिर चाय की खेती और दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की स्थापना और शैक्षणिक संस्थानों की शुरुआत भी हुई। बाद में यह जापानियों, कुमितांग तथा सुभाषचंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी की भी कर्मस्‍थली बना। स्‍वतंत्रता के बाद ल्‍हासा से भागे हुए बौद्ध भिक्षु यहां आकर बस गए। 1898 मै दार्जीलिंग मै एक बडा भूकम्प आया, जिसने सहर और लोगों की बहुत क्षति की। वर्तमान में दार्जिलिंग पश्‍िचम बंगाल का एक भाग है।

आज भले ही दार्जिलिंग एक शांत और खूबसूरत शहर है, पर इनका इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इस शहर पर नियंत्रण करने के लिए कई युद्ध हुए हैं। अगर आप दार्जिलिंग जा रहे हैं तो बर्फ से ढंकी विशाल चोटी की पृष्ठभूमि में बने दार्जिलिंग युद्ध स्मारक को देखना न भूले। यह जगह खासकर फोटोग्राफरों को काफी पसंद आता है।

दार्जिलिंग की संस्कृति – Darjeeling Culture in Hindi 

यहां स्थानीय लोग काफी मिलनसार होते हैं और यहां दुर्गा पूजा, दिवाली और काली पूजा पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा यहां बड़ी संख्या में स्थानीय भी त्योहार मनाए जाते हैं। यहां के बौद्ध मठों में जाकर आप स्थानीय संस्कृति से रू-ब-रू हो सकते हैं। यहां के स्थानीय व्यंजन का लुत्फ उठाना एक यादगार अनुभव साबित हो सकता है। मोमोज (एक तरह की पकौड़ी) की इस क्षेत्र में खासी लोकप्रियता है। दर्जिलिंग पश्चिमी बंगाल का सबसे अधिक चाय उत्पादक ज़िला है। इस ज़िले में धान, मक्का, ज्वार, इलायची, संतरे, जूट और गेहूँ उत्पन्न होते हैं।

दार्जिलिंग का मौसम – Darjeeling Travels Time

यहां शरद ऋतु जो अक्‍टूबर से मार्च तक होता है। इस मौसम यहां में अत्‍यधिक ठण्‍ड रहती है। यहां ग्रीष्‍म ऋतु अप्रैल से जून तक रहती है। इस समय का मौसम हल्‍का ठण्‍डापन लिए होता है। यहां बारिश जून से सितम्‍बर तक होती है। ग्रीष्‍म काल में ही यहां अधिकांश पर्यटक आते हैं।

दार्जिलिंग के दर्शनीय स्थल – Darjeeling Top Tourist Place Information in Hindi

1). टॉय ट्रेन – Toy Train – Darjeeling Himalayan Railway

दार्जिलिंग का एक मुख्य पर्यटक आकर्षण यहां की टॉय ट्रेन है । आपको बता दें कि इसका शुमार यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में किया गया है। दार्जिलिंग में टॉय ट्रेन की शुरुआत 1800 ई में की गई थी। छोटी लाइन की पटरियों पर यह दार्जिलिंग से न्यूजलपाईगुड़ी तक का सफ़र करती है। टाइगर हिल का मुख्‍य आनंद टॉय ट्रेन पर चढ़ाई करने में है। आज यह भारत की एकमात्र मिनी रेलवे सुविधा है। वैसे तो टॉय ट्रेन अपने नीयत समय पर चलती है, पर घूमने के उद्देश्य से भी इसे चलाया जाता है।

आपने इस ट्रेन को कई सारी बॉलीवुड फिल्मों में भी देखा होगा अगर बात बॉलीवुड की हालिया रिलीज फिल्मों की करें तो रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फ़िल्म बर्फी के कई सारे प्रमुख सीन दार्जिलिंग और इसी टॉय ट्रेन में शूट किये गए है।

2). टाइगर हिल – Tiger Hill

दार्जिलिंग के दर्शनीय स्थानों में 8,482 फीट पर स्थित टाइगर हिल है जहाँ से सूर्योदय का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। इसके साथ ही बर्फ़ की चादर से ढकी पर्वतमाला कंचनजंगा, पूर्वी हिमालयन पर्वत शृंखला और विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत सागरमाथा यानी माउंट एवरेस्ट की चोटी भी यहाँ से दिखाई देती है।

3). चाय की बगाने – Tea Garden

आज दार्जिलिंग की चाय को दुनिया भर के चाय प्रेमियों द्वारा पसंद किया जाता है। दार्जिलिंग में आपको चाय की कई अलग अलग किस्में देखने को मिलेंगी। दार्जिलिंग में मुख्यतः काली, हरी, सफ़ेद और ओलांग चाय का उत्पादन और निर्यात किया जाता है। यहां के चाय बागानों में आप आसानी से घूम सकते हैं।

4). बतासिया लूप और युद्ध स्मारक – Batasia Loop

इसका निर्माण आजादी से पहले स्वतंत्रता संघर्ष और विभिन्न लड़ाइयों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजली देने के लिए किया गया है। इसके अलावा यहां पर टॉय ट्रेन हेयरपिन टर्न लेती है। यहां से कंचनजंघा पर्वत श्रृंखला का विहंगम नजारा देखने को मिलता है। साथ ही यहां पर एक छोटा सा बाजार है, जहां से आप चाहें तो कुछ उत्कृष्ट स्थानीय उत्पाद खरीद सकते हैं। अगर आप इस स्थान पर जा रहे हैं तो कैमरा साथ ले जाना न भूलें।

5). जैविक उद्यान – Organic Garden

जैविक उद्यान तेंदुआ तथा लाल पांडे के प्रजनन कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध है। आप यहाँ साइबेरियन बाघ तथा तिब्‍‍बतियन भेडिया को भी देख सकते हैं। इस उद्यान को यह नाम मिस्‍टर डब्‍ल्‍यू. लियोर्ड के नाम पर दिया गया है। लियोर्ड यहाँ के एक प्रसिद्ध बैंकर थे जिन्‍होंने 1878 ई. में इस उद्यान के लिए ज़मीन दान में दी थी। जैविक उद्यान में ऑर्किड के फूल की 50 जातियों का बहुमूल्‍य संग्रह है। जैविक वानस्‍पतिक उद्यान के निकट ही नेचुरल हिस्‍ट्री म्‍यूजियम है। इस म्‍यूजियम की स्‍थापना 1903 ई. में की गई थी।

6). तिब्‍बतियन रिफ्यूजी कैंप –

तिब्‍बतियन रिफ्यूजी कैंप की स्‍थापना 1959 ई. में की गई थी। इससे एक वर्ष पहले 1958 ईं में दलाई लामा ने भारत से शरण मांगा था। इसी कैंप में 13वें दलाई लामा(वर्तमान में 14 वें दलाई लामा हैं) ने 1910 से 1912 तक अपना निर्वासन का समय व्‍यतीत किया था।

7). निप्‍पोजन मायोजी बौद्ध मंदिर –

भारत में कुल 6 शांति स्‍तूप हैं, जिनमें दार्जीलिंग स्थित निप्‍पोजन मायोजी बौद्ध मंदिर एक है. इस मंदिर का निर्माण कार्य 1972 ई. में शुरू हुआ था। यह मंदिर 1 नवंबर, 1992 ई. को आम लोगों के लिए खोला गया। निप्‍पोजन मायोजी बौद्ध मंदिर से पूरे दार्जीलिंग और कंचनजंघा श्रेणी का मनोरम दृश्‍य नजर आता है।

8). पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान – Padmaja Naidu Himalayan Zoological Park

पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग शहर में 67.56 एकड़ (27.3 हेक्टेयर) में अवस्थित है। इसे (नेपाली : दार्जीलिंग चिडियाघर) भी कहते हैं। यह प्राणी उद्यान 7000 फीट (2,134 मीटर), की औसत ऊंचाई से भारत में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित है। अपने देश का यह एक विशेष प्राणी उद्यान है, जहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर का लाल पांडा, हिम तेंदुए, तिब्बती भेड़िया और पूर्वी हिमालय के अन्य अत्यधिक लुप्तप्राय जानवरों की प्रजातियों के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के लिए अधिकृत है। यह प्राणी उद्यान प्रति वर्ष लगभग तीन लाख दर्शकों को आकर्षित करता है।

9). औपनिवेशिक निर्माण

दार्जिलिंग में आप कई औपनिवेशिक निर्माण देख सकते हैं। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान यह शहर काफी व्यवस्थित हुआ करता था। ज्यादातर भवनों को आज भी सुरक्षित रखा गया है और आप शहर में ब्रिटिश शासनकाल के अवशेष भी देख सकते हैं। यहां के गौथिक शैली में बने चर्च की खूबसूरती देखने लायक है।

कैसे जाएँ – Darjeeling Tour & Travels Guide in Hindi

दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के प्रमुख हिस्सों से अच्छे से जुड़ा हुआ है। एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल होने के कारण यहां पहुंचना कोई मुश्किल काम नहीं है।

हवाई मार्ग – दर्जिलिंग देश के हर एक जगह से हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है। बागदोगरा (सिलीगुड़ी) यहाँ का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है जो 90 किलोमीटर कि दुरी पर स्थीत है। यह दार्जिलिंग से 2 घण्‍टे की दूरी पर है। यहाँ से कलकत्ता और दिल्ली के प्रतिदिन उड़ाने संचालित की जाती है। इसके अलावा गुवाहाटी तथा पटना से भी यहाँ के लिए उड़ाने संचालित की जाती है।

रेलमार्ग – दर्जिलिंग का सबसे नज़दीकी रेल जोन जलपाइगुड़ी है। यह रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों और राज्यों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा ट्वाय ट्रेन से जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग (8-9 घंटा) तक जाया जा सकता है।

सड़क मार्ग – दर्जिलिंग शहर सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से भी अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है। दार्जिलिंग सड़क मार्ग से सिलीगुड़ी से 2 घण्‍टे की दूरी पर स्थित है। कलकत्ता से सिलीगुड़ी के लिए बहुत सी सरकारी और निजी बसें चलती है।


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