नैनीताल का इतिहास व दर्शनीय स्थल की जानकारी | Nainital Tourist Places List

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Nainital Tourism / नैनीताल भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। नैनीताल को भारत का झीलों वाला कस्बा के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि एक समय में नैनीताल जिले में 60 से ज्यादा झीलें हुआ करती थीं। यहां चारों ओर खूबसूरती बिखरी है। सैर-सपाटे के लिए दर्जनों जगहें हैं, जहां जाकर पर्यटक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं। बर्फ़ से ढके पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों से घिरा हुआ है। नैनीताल हिमालय की कुमाऊँ पहाडि़यों की तलहटी में स्थित है।

नैनीताल का इतिहास व दर्शनीय स्थल की जानकारी | Nainital Tourist Places List

Contents

नैनीताल का संक्षिप्त परिचय – Nainital, Uttarakhand in Hindi

नाम नैनीताल (Nainital)
राज्य उत्तराखंड
ज़िला नैनीताल
स्थापना 1841 ई.
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 29.38°, पूर्व- 79.45°
प्रसिद्धि के कारण भारत का प्रमुख पर्यटन स्थल
जनसंख्या 48,900 (2001)
भाषा हिन्दी, कुमायुँनी, गढवाली
कब जाएँ अप्रैल-जून, सितंबर-अक्टूबर
कहाँ ठहरें होटल, धर्मशाला, अतिथिग्रह, रिजॉर्ट

नैनीताल की जनकारी – Nainital Information in Hindi

नैनीताल, उत्तराखंड के उत्तर मध्य भारत में शिवालिक पर्वतश्रेणी में स्थित एक नगर है। यह हिमालयन बेल्ट में स्थित है। इसे खूबसूरत झीलों का आशीर्वाद प्राप्त है। नैनीताल को श्री स्कन्द पुराण के मानस खंड में ‘तीन संतों की झील’ या ‘त्रि-ऋषि-सरोवर’ के रूप में उल्लेखित किया गया है। तीन संत जिनके नाम अत्री, पुलस्त्य और पुलाह थे, अपनी प्यास मिटाने के लिए, नैनीताल में रुके थे पर उन्हें कहीं भी पानी नहीं मिला तब उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से लाए गए जल से इस गड्ढे को भर दिया। तब से यह ‘नैनीताल’ नमक प्रसिद्ध झील अस्तित्व में आई।

एक अन्य कथा में कहा गया है कि हिंदू देवी सती (भगवान शिव की पत्नी) की बाईं आंख इस जगह पर गिर गई थी जिससे इस आँख के आकार की नैनी झील का निर्माण हुआ। यहां का सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल के झील का पानी बेहद साफ है और इसमें तीनों ओर के पहाड़ों और पेड़ों की परछाई साफ दिखती है। नैनीताल को चाहे जिधर से देखा जाए, यह बेहद ख़ूबसूरत है।

गर्मियों में नैनीताल की खूबसूरती और ठंडा मौसम सैलानियों को अपनी ओर जैसे खींच लाते हैं। वहीं सर्दियों में बर्फबारी और विंटर स्पोर्ट्स के दीवानों के लिए नैनीताल स्वर्ग बन जाता है। नैनीताल अपने खूबसूरत परिदृश्यों और शांत परिवेश के कारण पर्यटकों के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रिटिश व्यापारी, पी. बैरून ने 1839 में, यहाँ की सम्मोहित कर देने वाली खूबसूरती से प्रभावित होकर ब्रिटिश कॉलोनी स्थापित करके नैनीताल को लोकप्रिय बना दिया।

यह नगर एक सुंदर झील के आस-पास बसा हुआ है और इसके चारों ओर वनाच्छादित पहाड़ हैं। नैनीताल के उत्तर में अल्मोड़ा, पूर्व में चम्पावत, दक्षिण में ऊधमसिंह नगर और पश्चिम में पौड़ी एवं उत्तर प्रदेश की सीमाएँ मिलती हैं। जनपद के उत्तरी भाग में हिमालय क्षेत्र तथा दक्षिण में मैदानी भाग हैं जहाँ साल भर आनंददायक मौसम रहता है।

नैनीताल का इतिहास – Nainital History in Hindi

वैसे तो नैनीताल का अस्तित्व पौराणिक काल से है पर आधुनिक नैनीताल नगर बसने का श्रेय जाता है एक अंग्रेज व्यापारी पी बैरन को। पी बैरन चीनी व्यापारी थे और पहाड़ों की वादियों में घूमने फिरने का बहुत शौख रखते थे। एक बार वह हिमालय भ्रमण के लिए निकले हुए थे तथा खैरना नामक स्थान पे उन्होने विश्राम किया, जहाँ उसकी मुलाकात एक स्थानीय युवक से हुयी। युवक ने बताया की सामने वाली पहाड़ी को “शेर का टांडा” कहा जाता है और जिसके दूसरी तरफ एक बेहद सुन्दर झील मौजूद है।

प्राकृतिक दृश्यों को देखने के शौक़ीन बैरन स्थानीय लोगो की मदद से नैनीताल पहुचें और स्थान की सुंदरता देख कर मंत्रमुग्ध हो गए और उन्होंने उसी दिन तय कर लिया कि अब वो नैनीताल की इन सुन्दर वादियों में नया शहर बसाएंगे। नैनीताल अंग्रेज़ों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। 1847 में नैनीताल मशहूर हिल स्टेशन बना, अंग्रेज़ इसे ‘समर कैपिटल’ भी कहते थे। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है।

नैनीताल का मौसम –  

इसकी भौगोलिक विशेषता निराली है। नैनीताल का सबसे कम तापमान 27.06°C से 8.06°C के बीच रहता है। ग्रीष्मकालीन मौसम इस सुंदर गंतव्य की यात्रा के लिए आदर्श माना जाता है। हालाँकि नैनीताल किसी भी मौसम में जा सकते हैं। गर्मियों में नैनीताल की खूबसूरती और ठंडा मौसम सैलानियों को अपनी ओर जैसे खींच लाते हैं। वहीं सर्दियों में बर्फबारी और विंटर स्पोर्ट्स के दीवानों के लिए नैनीताल स्वर्ग बन जाता है।

यहां प्राइवेट बारिश भी होता हैं। सुनने में ये बात थोड़ी अजीब जरूर लगी होगी, लेकिन ये बात काफी हद तक सच है। झील की वजह से नैनीताल का मौसम हमेशा बदलता रहता है। आप इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकते की 15 मिनट बाद मौसम कैसा होगा, अभी धूप है तो बस कुछ समय बाद ही झील से बदल उठ कर बरसना शुरू कर देते हैं।

नैनीताल के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल – Nainital Tourist Place Information in Hindi 

1). नैनीताल झील – Naini Lake

नैनी झील, नैनीताल का सबसे प्रमुख आकर्षण है, जो कि हरी-भरी घाटियों से घिरा हुआ है। यात्री, यहाँ यैचिंग (पाल नौकायन), रोइंग, पैडलिंग (नौकायन) जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। किंवदंतियों के अनुसार, आँख के आकार की झील का निर्माण उस स्थान पर किया गया था, जहां हिंदू देवी सती की बाईं आंख गिर गई थी (जब भगवान शिव उन्हें कैलाश पर्वत के लिए ले जा रहे थे)। यह झील काफी लंबी है और इसका उत्तरी भाग ‘मल्ली ताल’ कहलाता है, जबकि दक्षिणी भाग ‘तल्ली ताल’ कहलाता है। यह अकेली ऐसी झील है जिस पर एक पुल और एक डाक घर है।

2). नैनी पीक – Naini Peak

नैनीताल की सात चोटियों में 2611 मीटर ऊंची नैनी पीक (चाइना पीक) सबसे ऊंची चोटी है। चाइना पीक की दूरी नैनीताल से लगभग 6 किलोमीटर है। इस चोटी से हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के दर्शन होते हैं। यहां से नैनीताल झील और शहर के भी भव्य दर्शन होते हैं। यहां एक रेस्तरां भी है।

3). टिफ़िन टॉप – Tiffin Top

टिफ़िन टॉप, एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है जो कि ‘डोरोथी की सीट’ के नाम से भी जाना जाता है। अयारपट्टा पीक पर स्थित यह स्थान समुद्र की सतह से 7520 फीट की उंचाई पर स्थित है। यात्री यहाँ से ग्रामीण परिदृश्यों के साथ शक्तिशाली हिमालय पर्वतमाला के प्रभावशाली दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। इस जगह को डोरोथी केलेट (एक अंग्रेजी कलाकार) के पति के द्वारा विमान दुर्घटना में उसकी मौत के बाद विकसित किया गया था। नैनीताल टाउन से 4 किमी की दूरी पर स्थित यह टिफिन टॉप प्राकृतिक फोटोग्राफी के लिए आदर्श जगह है।

4). The Mall Road – मॉल

मॉल, नैनीताल की एक प्रसिद्ध रोड का नाम है, और हाल ही में उसका नाम बदल कर ‘गोविन्द बल्लभ पन्त मार्ग’ का दिया गया है। दुकानों और बाज़ारों के अलावा बहुत से बैंक और ट्रेवल एजेंसियाँ मॉल रोड पर उपलब्ध हैं। यह रोड मल्लीताल को तल्लीताल से जोड़ती है। एक अन्य पर्यटक आकर्षण है, ‘ठंडी सड़क’, जो नैनी झील के दूसरी तरफ स्थित है।

5). स्नो-व्यू – Snow View Point- Oldest Viewpoint

स्नो-व्यू, समुद्र की सतह से 2270 किमी की ऊँचाई पर स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह नैनीताल शहर से 2.5 किमी की दूरी पर स्थित है। दर्शक रोपवे या किराए के वाहन के द्वारा गंतव्य तक पहुँच सकते हैं। यह ‘शेर-का-डंडा’ रिज के शीर्ष पर स्थित है और शक्तिशाली हिमालय पर्वतमाला के सम्मोहित कर देने वाले दृश्यों का नज़ारा प्रस्तुत करता है। इस स्थल पर मार्बल पत्थर से बना हुआ एक छोटा मंदिर भी है जो हिंदू देवी ‘मुंडी’ को समर्पित है। इस मंदिर में दुर्गा, शिव, सीता, राम, लक्ष्मण और हनुमान की तरह अन्य हिंदू देवी देवताओं के चित्र भी स्थापित किए गए हैं।

6). नैनीताल चिड़ियाघर – Nainital Zoo

नैनीताल में समुद्र सतह से 2100 मीटर की ऊंचाई पर 4.693 हेक्टेयर क्षेत्रफल में शेर का डांडा पहाड़ी में स्थित चिड़ियाघर की स्थापना का कार्य 1984 में हुआ था जबकि इसे दर्शकों के लिए अवलोकनार्थ 1 जून 1995 को खोला गया था। चिड़ियाघर, नैनीताल पर्यटन का हॉट स्पॉट है, जो समुद्र की सतह से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह नैनीताल बस स्टॉप से केवल एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह चिड़ियाघर हिमालयन काले भालू सहित विभिन्न जानवरों जैसे बंदरों, साइबेरियन बाघ, तेंदुए, भेड़िए, पाम सीविट बिल्लियों, रोज़ रिंग पैराकीटों, सिल्वर तीतर, पहाड़ी लोमड़ी, सांबर, घोरल और भौंकने वाले हिरणों का एक घर है। चिड़ियाघर सोमवार और सभी राष्ट्रीय अवकाशों पर बंद रहता है।

7). नैनीताल का राजभवन – Raj Bhawan Nainital

राजभवन एक औपनिवेशिक इमारत है, जिसे ‘गवर्नर हाउस’ के नाम से भी जाना जाता है। कला की मिसाल यह इमारत उत्तराखंड के राज्यपाल का सरकारी निवास है। इसमें 113 सुसज्जित कमरे, एक भव्य बगीचा, एक स्विमिंग पूल और गोल्फ लिंक है। इसकी तुलना बकिन्घम पैलेस से की जाती है और इस इमारत में भ्रमण के लिए पूर्व दाखिले की आवश्यकता होती है।

8). नैयना देवी – Naina Devi Temple

नैनीताल को 64 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर पूरे ब्रह्मांड में भटक रहे थे तो यहां माता की आखें (नैन) गिर गए थे। माता की आखें यहां गिरी थी इसलिए इस जगह का नाम नैनी ताल पड़ा। माता को यहां नैयना देवी के रूप में पूजा जाता है।

9). नीम करोली बाबा – Neem Karoli Baba Ashram

नीम करोली बाबा का यह आश्रम आधुनिक जमाने का धाम है। यहां पर मुख्य तौर पर बजरंगबली की पूजा होती है। इस जगह का नाम कैची यहां सड़क पर दो बड़े जबरदस्त हेयरपिन बैंड (मोड़) के नाम पर पड़ा है। कैची नैनीताल से सिर्फ 17 किमी दूर भुवाली से आगे अल्मोड़ा रोड पर है।

10). भीमताल झील – Bhimtal Lake

नैनीताल जिले में जगह-जगह पर झीलों की श्रृंखला देखी जा सकती है, जिनमें भीमताल, सतताल, नौकुचिया ताल एवम् मालनिय ताल काफी प्रसिद्ध है। समुद्र तल से 1200 मीटर ऊंचाई पर, 1860 मीटर लम्बी तथा 500 मीटर चौड़ी तथा 30 मीटर गहरी त्रिकोणीय भीमताल झील, नैनीताल से मात्र 23 कि.मी. पर है। इस झील के मध्य विद्यमान एक छोटे से द्वीप ने तो इस झील के सौंदर्य को अद्भुत शोभा प्रदान की है।

11). केव्स गार्डन – Eco Cave Gardens

केव गार्डन को ‘ईको केव गार्डन’ के नाम से भी जाना जाता है। यह नैनीताल का एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है। यह उद्यान अपने आगंतुकों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली की एक झलक प्रदान करता है। इसमें छह भूमिगत केव हैं जिन्हें पेट्रोमैक्स लैम्पों के द्वारा प्रकाशित किया जाता है और एक संगीत की लय पर चलने वाला फ़व्वारा भी है जो सर्वप्रथम नैनीताल में लगाया गया था। इन गुफाओं को टाइगर गुफा, पैंथर गुफा, बैट गुफा, स्क्वेरिल गुफा, फ्लाइंग फॉक्स गुफा और एप गुफा के नाम से जाना जाता है। इन गुफाओं को जोड़ने वाला रास्ता काफी संकरा है, कहीं-कहीं यात्रियों को रेंगने की ज़रुरत पड़ती है। ये सभी गुफाएँ प्राकृतिक हैं और इनकी देख-रेख स्थानीय प्रशासन के द्वारा की जाती है।

12). लड़ियाकाँटा – Lariakanta

लड़ियाकाँटा, जो समुद्र की सतह से 2481 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, नैनीताल की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है। इसे किलवरी कहते हैं। यह पिकनिक मनाने के लिए शानदार जगह है। यह शहर से 6 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ आने वाले दर्शक इस जगह से पूरे क्षेत्र का विहंगमावलोकन कर सकते हैं।

13). खुर्पाताल – Khurpatal

नैनीताल के पास ही खुर्पाताल भी है। खुर्पाताल, मछली पकड़ने के शौकीन (काटेबाज़) लोगों के लिए स्वर्ग है। यह नैनीताल से 10 किमी की दूरी पर स्थित है। यह खूबसूरत सा उपग्राम (खेड़ा) समुद्र की सतह से 1635 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती किसी को भी मोहित कर देती है। सुंदर झील और आसपास मकान और होटल इस खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। 19 वीं शताब्दी तक खुर्पाताल अपने लौह औजारों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था, पर अब यह अपने हरी सब्जियों के खेतों के लिए प्रसिद्ध है।

14). सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस – St. John in the Wilderness Church

सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस, एक शांत जगह है जो मल्लीताल (नैनीताल के उत्तरी छोर) में स्थित है। यह चर्च वर्ष 1844 में स्थापित की गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, कोलकाता के बिशप (धार्माध्यक्ष) डैनियल विल्सन, इस चर्च की नींव के पत्थर की स्थापना करने यहाँ आए थे, अपनी यात्रा के दौरान वह बीमार हो गए और उन्हें जंगल के करीब एक अधूरे बने घर में रहना पड़ा।इसलिए, इस चर्च को जंगल में सेंट जॉन के रूप में जाना जाने लगा। यह चर्च 1880 के भूस्खलन में शिकार हुए लोगों के एक स्मारक के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ एक पीतल की पट्टिका में शिकार हुए लोगों का नाम लिखा हुआ है।

15). अरबिंदो आश्रम – Sri Aurobindo Ashram

श्री अरविन्द आश्रम की स्थापना महर्षि अरविन्द द्वारा 24 नवंबर 1926 (सिद्धि दिवस) को की गयी। अरबिंदो आश्रम, कुमाऊँ घाटी की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित है। यह बाज़ार क्षेत्र से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, यह (पूर्व अनुमति के बाद) यात्रियों को आवास की सुविधा प्रदान करता है। यहाँ रहने के दौरान पर्यटक योग और ध्यान साधना का अभ्यास भी कर सकते है।

16). माता गर्जिया – Mata Garjiya

रामनगर से करीब 12 किमी दूर कॉर्बेट जंगल में कोसी नदी के बीच उभरे एक पहाड़ की चोटी पर माता गर्जिया (गिरिजा) का मंदिर है। गर्जिया मंदिर में वैसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यहां मेला लगता है तो खूब धूम मचती है।

17). घोड़ाखाल – Ghorakhal

भुवाली से घोड़ाखाल करीब 3 किमी दूर है। घोड़ाखाल में ग्वेल (गोलू) देवता का विशाल मंदिर है. यहां भक्त आकर उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने की अर्जी लगाते हैं। इसके अलावा घोड़ाखाल को सैनिक स्कूल के लिए भी जाना जाता है। घोड़ाखाल का सैनिक स्कूल देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है।

18). मुक्तेश्वर – Mukteshwar

नैनीताल से करीब 51 किमी दूर बसा मुक्तेश्वर समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर है। मुक्तेश्वर में खूबसूरत फलों के बगीचे हैं। 1893 में अंग्रेजों ने मुक्तेश्वर में अनुसंधान और शिक्षा संस्थान (IVRI) की स्थापना की थी।

कैसे जाएँ – – Nainital Tour & Travels Guide in Hindi

वायु मार्ग – हवाई जहाज से जाने वाले पर्यटक चंडीगढ़ विमानक्षेत्र तक वायु मार्ग से जा सकते है। इसके बाद बस या कार की सुविधा ले सकते है। दूसरा नजदीकी हवाई अड्डा अमृतसर विमानक्षेत्र में है।

रेल मार्ग – रेल मार्ग द्वारा नैना देवी जाने के लिए पर्यटक चंडीगढ और पालमपुर तक रेल सुविधा ले सकते है। इसके पश्चात् बस, कार व अन्य वाहनों से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। चंडीगढ़ देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग – नैना देवी दिल्ली से 350 कि.मी. कि दूरी पर स्थित है। दिल्ली से करनाल, चंडीगढ़, रोपड़ होते हुए पर्यटक नैना देवी पहुंच सकते है। सड़क मार्ग सभी सुविधाओं से युक्त है। रास्ते में काफ़ी सारे होटल हैं, जहां पर विश्राम किया जा सकता है। सड़कें पक्की बनी हुई हैं।


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