उदयपुर के पर्यटन स्थल की जानकारी और इतिहास Udaipur Tourist Place

Udaipur Tourist Place / झीलों का शहर उदयपुर भारत का सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल माना जाता है। यह उत्तरी भारत के राजस्थान राज्य में स्थित हैं। खूबसूरत झीलों, आलीशान महलों व सुंदर उद्यानों वाला उदयपुर राजस्थान का एक बड़ा ऎतिहासिक शहर है। इसकी फिजाओं में आज भी राणाओं की शौर्यगाथाएं गूंजती हैं। महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने वर्ष 1559 में इस शहर की स्थापना की।

उदयपुर के पर्यटन स्थल की जानकारी और इतिहास Udaipur Tourist Place Information in Hindi

उदयपुर का संक्षिप्त परिचय – Udaipur Information in Hindi

Contents

नामउदयपुर (Udaipur)
राज्यराजस्थान
स्थापनासन् 1559 ई. में महाराजा उदयसिंह द्वारा स्थापित
जनसंख्या559,317 (2001 तक)
भौगोलिक स्थितिउत्तर- 24°35 – पूर्व- 73°41
प्रसिद्धिउदयपुर के अलावा झीलों के साथ रेगिस्तान का अनोखा संगम अन्‍य कहीं नहीं देखने को मिलता है।
कब जाएँअक्टूबर से फ़रवरी

उदयपुर की जानकारी  – Udaipur Tourism in Hindi

उदयपुर ऐसा शहर हैं जहां पर झीलों के साथ रेगिस्तान का अनोखा संगम देखने को मिलता हैं। यह शहर अरावली पहाड़ी के पास राजस्थान में स्थित है। यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल यहाँ के शासकों द्वारा बनवाये गए महल, झीलें, बगीचे तथा स्‍मारक हैं। ये सभी चीज़ें हमें सिसोदिया राजपूत शासकों के सदगुण, विजय तथा स्‍वतंत्रता की याद दिलाते हैं। इनका निर्माण उस समय हुआ जब मेवाड़ ने पहली बार मुग़लों की अधीनता स्‍वीकार की थी तथा बाद में अंग्रेज़ों की।

उदयपुर को हाल ही में विश्व का सबसे खूबसूरत शहर घोषित किया गया है। यहाँ की मेहमान नवाजी पुरे जगत में प्रसिद्ध है। देश विदेश से लोग उदयपुर की सुन्दरता, संस्कृति को देखने जाते है। यहाँ रोयल मेवाड़ परिवार की अनेकों महल, स्थल है, जहाँ लोग घुमने-देखने जाते है। इन रॉयल पैलेस को आज कई होटलों में तब्दील कर दिया गया है, जिसमें रुका भी जा सकता है। आपको उदयपुर घूमने के लिए कम-से-कम तीन दिन का समय देना चाहिए। इसके आसपास के स्‍थानों को घूमने के लिए दो और दिन देने चाहिए।

उदयपुर का इतिहास – Udaipur Rajasthan History in Hindi

उदयपुर को पहले मेवाड़ के नाम से जाना जाता था। इस शहर ने बहुत कम समय में देश को कई देशभक्त दिए हैं। यहाँ का मेवाड़ राजवंश अपने को सूर्य से जोड़ता है। यहाँ का इतिहास निरंतर संघर्ष का इतिहास रहा है। यह संघर्ष स्वतंत्रता, स्वाभिमान तथा धर्म के लिए हुआ। संघर्ष कभी राजपूतों के बीच तो कभी मुगल तथा अन्य् शासकों के साथ हुआ। यहां जैसी देशभक्‍ित, उदार व्यवहार तथा स्वतंत्रता के लिए उत्कृष्ट इच्छा किसी दूसरे जगह देखने को नहीं मिलती है।

मेवाड़ पर बारह सौ सालों तक महान सूर्यवंशी राजाओं का शासन रहा। माना जाता है कि किसी भी क्षेत्र पर इतने लंबे समय तक शासन करने वाला भारत का यह एकमात्र वंश है। महाराणा उदय सिंह ने उदयपुर शहर बसाकर उसे मेवाड़ की राजधानी बनाया। महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं के गौरवशाली इतिहास की यह धरती अरावली की छोटी-छोटी पहाडियों के बीच स्थित है। 1559 में इस शहर की स्थापना महाराणा उदय सिंह ने की थी। तब उन्हीं के नाम से शहर का नामकरण उदयपुर हुआ।

उस समय नगर की सुरक्षा के लिए इसके चारों ओर मजबूत चारदीवारी बनवाई गई थी जिसके 11 भव्य द्वार थे। सूरजपोल शहर का मुख्य द्वार था। उदयपुर में खूबसूरत और ऎतिहासिक स्थल हैं जिन्हें देखने के लिए देश, प्रदेश ही नहीं बल्कि विश्वभर से लोग देखने आते हैं।

मेवाड़ की प्राचीन राजधानी चित्तौड़गढ़ थी। मेवाड़ के नरेशों ने मुग़लों का आधिपत्य कभी स्वीकार नहीं किया था। महाराणा राजसिंह जो औरंगज़ेब से निरन्तर युद्ध करते रहे थे, महाराणा प्रताप के पश्चात् मेवाड़ के राणाओं में सर्वप्रमुख माने जाते हैं। उदयपुर के पहले ही चित्तौड़ का नाम भारतीय शौर्य के इतिहास में अमर हो चुका था।

सन 1572 ई. में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र प्रताप का राज्याभिषेक हुआ था। उन दिनों एक मात्र यही ऐसे शासक थे जिन्होंने मुग़लों की अधीनता नहीं स्वीकारी थी। महाराणा प्रताप एवं मुग़ल सम्राट अकबर के बीच हुआ हल्‍दीघाटी का घमासान युद्ध मातृभूमि की रक्षा के लिए इतिहास प्रसिद्ध है। यह युद्ध किसी धर्म, जाति अथवा साम्राज्य विस्तार की भावना से नहीं, बल्कि स्वाभिमान एवं मातृभूमि के गौरव की रक्षा के लिए ही हुआ।

18वीं शताब्दी में इस राज्य को आतंरिक फूट व मराठों के आक्रमणों का सामना करना पड़ा और 1818 ई. में यह ब्रिटिश प्रभुता के अधीन हो गया था। 1948 ई. में राजस्थान राज्य में इसका विलीन हो गया।

उदयपुर के पश्चिम में पिछोला झील है, जिस पर दो छोटे द्वीप और संगमरमर से बने महल हैं, इनमें से एक में मुग़ल शहंशाह शाहजहाँ (शासनकाल 1628-58 ई.) ने तख़्त पर बैठने से पहले अपने पिता जहाँगीर से विद्रोह करके शरण ली थी।

उदयपुर जाने का सही समय – Udaipur Tour & Travels Guide in Hindi

उदयपुर में वर्ष के अधिकांश भाग में गर्म और शुष्क जलवायु रहती है। सितंबर और मार्च के बीच की अवधि को गंतव्य का दौरा करने के लिए आदर्श माना जाता है। अधिकांश यात्री गर्मियों के दौरान इस जगह का दौरा करने से बचते हैं क्योंकि इस जगह का तापमान इस समय के दौरान अधिकतम 45 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। मानसून के मौसम के दौरान इस क्षेत्र में अल्प वर्षा होती है, जिससे हवा काफी नम रहती है। इस जगह सर्दियों के मौसम के दौरान मौसम सुखद रहता है, जो शहर के चारों ओर दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए अनुकूल समय है।

कैसे जाएँ –

उदयपुर दिल्ली, मुंबई के बीच में आता है, यहाँ से दोनों जगह 700 किलोमीटर की दुरी पर है। उदयपुर से 22 किमी की दूरी पर महाराणा प्रताप हवाई अड्डा स्थित है। प्रमुख भारतीय शहर इस हवाई अड्डे से नियमित उड़ानों द्वारा जुड़े हुए हैं। शहर में ब्रॉड गेज रेलवे स्टेशन है, जो भारत के विभिन्न शहरों को जोड़ता है। ऐसे यात्री जो सड़क मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं, राजस्थान के कई शहरों से उदयपुर के लिए बस सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।

उदयपुर दर्शनीय स्थल – Udaipur Tourist Place List in Hindi

1). सिटी पैलेस काम्‍पलेक्‍स

उदयपुर के इतिहास व मेवाड़ के सूर्यवंशी महाराणाओं की गौरवगाथा को समझना हो तो यहां का सिटी पैलेस सबसे उपयुक्त जगह है। सिटी पैलेस काम्पलेक्स पिछोला झील पर स्थित है। महाराणा उदय सिंह द्वारा इस महल का निर्माण आरंभ किया गया था किन्‍तु आगे आने वाले महाराणाओं ने इस संकुल में कई महल और संरचनाओं को जोड़ा, इस पैलेस में संकल्‍पना की एक रूपता को बनाए रखा है। महल में प्रवेश करने का स्थान हाथी पोल की ओर से है। बड़ी पोल या बड़ा गेट त्रिपोलिया अर्थात् तीन प्रवेश द्वारों में से एक है। एक समय में यह रिवाज था कि महाराणा इस प्रवेश द्वार के नीचे सोने और चाँदी से तौले जाते थे और फिर यह ग़रीबों में बाँट दिया जाता था।

2). सिटी पैलेस संग्रहालय

सिटी पैलेस महल का मुख्‍य हिस्‍सा अब एक संग्रहालय के रूप में सं‍रक्षित कर दिया गया है। यह संग्रहालय कलात्‍मक वस्‍तुओं का एक बड़ा और विविध संग्रह प्रदर्शित करता है। इस संग्रहालय में प्रवेश करते ही आप की नजर कुछ बेहतरीन चित्रों पर पड़ेगी। ये चित्र श्रीनाथजी, एकलिंगजी तथा चतुर्भुजजी के हैं। यह सभी चित्र मेवाड़ शैली में बने हुए हैं।

3). पिछोला झील

उदयपुर शहर के सौंदर्य को और ज्यादा बढ़ाने वाली यहां की झीलों में सबसे प्रमुख पिछौला झील है। सिटी पैलेस के ठीक पीछे पसरी इस झील का सौंदर्य सिटी पैलेस से ही नजर आता है। बहुत से सैलानी दूसरी ओर जाकर राजमहल की दीवारों से टकराती झील की लहरों को देखने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। करीब चार किलोमीटर लंबी इस झील का नाम पिछौला गांव के आधार पर पड़ा था। झील पर आगे एक मनोहारी बांध भी है।

4). सरकारी संग्रहालय

इस संग्रहालय में मेवाड़ से संबंधित शिलालेख रखे हुए हैं। ये शिलालेख दूसरी शताब्दी. ईसा पूर्व से 19वीं शताब्दी तक हैं। यहां बहुत से प्रतिमाएं भी रखी हुई हैं। कृष्ण और रुक्मणी के मेवाड़ शैली में बने हुए बहुत से चित्र भी यहां रखे हुए हैं। इसमें खुर्रम (बाद में शाहजहां) का साफा भी रखा हुआ है। खुर्रम ने जब जहांगीर के खिलाफ विद्रोह किया था तो वह उदयपुर में ही रहा था।

5). नेहरू गार्डन

नेहरू गार्डन एक सुरम्य अंडाकार आकार का द्वीप, फतेह सागर झील के बीच में स्थित है। उद्यान, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम पर है। इसे जनता के लिए 14 नवंबर 1967 को उनकी जयंती के उपलक्ष्य में खोला गया था। यह खूबसूरत बगीचा उदयपुर का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है।

6). राजीव गांधी पार्क

राजीव गांधी पार्क एक पहाड़ी पर स्थित है, जो अपनी स्थिति और मनोरम दृश्य के कारण तेजी से एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण बनता जा रहा है। यहां बच्चों का एक विशाल पार्क और लजीज़ व्यंजनों की सेवा वाला एक पूरी तरह कार्यात्मक रेस्तराँ है।

7). काँच गैलरी

काँच गैलरी उदयपुर पर्यटन का सबसे आकर्षक स्थल माना जाता है। काँच गैलरी के सामानों में काँच की कुर्सी, बेड, सोफ़ा, डिनर सेट आदि शामिल था। उदयपुर के राणा सज्‍जन सिंह ने 1877 ई. में इंग्‍लैण्‍ड की एफ. एंड. सी. ओसलर एण्‍ड कंपनी से काँच के सामानों की ख़रीददारी की थी। इनके बाद के शासकों ने इन सामानों को सुरक्षित रखा। अब इन सामानों को फ़तह प्रकाश भवन के दरबार हॉल में पर्यटकों को देखने के लिए रखा गया है।

8). विंटेज कार सिटी पैलेस

विंटेज कार सिटी पैलेस में अन्‍य पुरानी कारों का अच्‍छा संग्रह है। यहाँ क़्ररीब दो दर्जन कारें पर्यटकों को देखने के‍ लिए रखी हुई हैं। इन कारों में 1934 ई. की रॉल्‍स रायल फैंटम 1939 ई. में काडिलेक कन्‍वर्टिवल भी है। 1939 ई. में जब जैकी कैनेडी (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की पत्नी) उदयपुर के दौरे पर आए थे तो इसी कार से घूमे थे।

9). बगोर की हवेली

यह पहले उदयपुर के प्रधानमंत्री अमरचंद वादवा का निवास स्थातन था। यह हवेली पिछोला झील के सामने है। इस हवेली का निर्माण 18वीं शताब्दीद में हुआ था। इस हवेली में 138 कमरे हैं। इस हवेली में हर शाम को 7 बजे मेवाड़ी तथा राजस्थारनी नृत्यन का आयोजन किया जाता है।

10). राज आँगन

राज आँगन, ज्यादातर गोल महल के रूप में जाना जाता है, एक सुंदर गुंबद के आकार की संरचना है जिसे महाराणा उदय सिंह द्वारा वर्ष 1572 में निर्मित किया गया था। यह राजा के आंगन के रूप में माना जाता है, जिसे वह लोगों की शिकायतों का समाधान करने के लिए प्रयोग करता था। इमारत की वास्तुकला काफी हद तक ताजमहल के समान है।

आहर उदयपुर शाहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। यहाँ मेवाड़ के 19 शासकों के स्‍मारक है। यहाँ सबसे प्रमुख स्‍मारक महाराणा अमर सिंह का है। अमर सिंह ने सिंहासन त्‍यागने के बाद अपना अंतिम समय यहीं व्‍यतीत किया था। इस स्‍थान का संबंध हड़प्पा सभ्‍यता से भी जोड़ा जाता है। यहाँ एक पुरातात्विक संग्रहालय भी है।

12). मानसून भवन

इसे मूल रूप से सज्जहन घर के नाम से जाना जाता था। इसे सज्जथन सिंह ने 19 वीं शताब्दी में बनवाया था। पहले यह वेधशाला के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह एक लॉज के रूप में तब्दील हो चुका है।

13). उदयपुर की सात बहनें

उदयपुर के शासक ने जल के महत्व को समझते हुए कई बांधों और जलकुण्डों का निर्माण करवाया था। ये कुण्ड तत्कालीन समय के विकसित इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना हैं। पिछोला झील, दूध थाली, गोवर्धन सागर, कुमारी तालाब, रंगसागर झील, स्वरुप सागर तथा फतेह सागर झील यहां की सात प्रमुख झीलें हैं। इन्हें सामूहिक रूप से उदयपुर की सात बहनों के नाम से जाना जाता है। ये झीलें कई शताब्दियों से उदयपुर की जीवनरेखा हैं। ये झीलें एक-दूसरें से जुड़ी हुई हैं। एक झील में पानी अधिक होने पर उसका पानी अपने आप दूसरे झील में चला जाता है।

14). हल्दीघाटी

हल्दीघाटी इतिहास में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुए युद्ध के लिए प्रसिद्ध है। यह राजस्थान में एकलिंगजी से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। यह अरावली पर्वत शृंखला में एक दर्रा (pass) है। यह उदयपुर से 40 किमी की दूरी पर है। इसका नाम ‘हल्दीघाटी’ इसलिये पड़ा क्योंकि यहाँ की मिट्टी हल्दी जैसी पीली है।

15). जग निवास

जगनिवास महल पिछौला झील के मध्य स्थित है। यह महल 1730 में महाराणा जगत सिंह ने बनवाया था। इसे वह अपने ग्रीष्म निवास के रूप में प्रयोग करते थे। पानी पर तैरता हुआ प्रतीत होता यह सफेद जलमहल विदेशी सैलानियों को बहुत आकर्षित करता है। जगनिवास में पर्यटक नाव में बैठकर जाते हैं। इस महल की मेहराबदार खिड़कियां एवं छतरियां इसके सौंदर्य को दूर से भी दर्शाती हैं।

16). एकलिंगगढ़

उदयपुर पर्यटन का सबसे आकर्षक स्थल माना जाता है। बांध के पास की ऊँची पहाड़ी माछला मगरा (मत्स्य-शैल) कहलाती है। एकलिंगगढ़ दुर्ग इसी पहाड़ी पर बना हुआ है। इस जगह पर अभी भी कुछ तोपें रखी हुई है। मरहटों के आक्रमण के समय इस दुर्ग ने नगर की रक्षा करने में बहुत सहायता की थी। इसके दक्षिण में अरावली पर्वतमाला की श्यामवर्ण पहाड़ियाँ शोभायमान हैं।

17). सज्जनगढ़

सज्जनगढ़ जिसे ‘मानसून पैलेस’ के रूप में भी जाना जाता है, उदयपुर की एक अद्भुत महलनुमा इमारत है। महल अरावली रेंज के बंसदारा चोटी पर समुद्र स्तर से 944 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मेवाड़ राजवंश के महाराणा सज्जन सिंह 1884 में महल का निर्माण बरसात के बादल देखने के लिये करवाया था।

यह सुंदर महल सफेद संगमरमर से निर्मित है। यात्री इस जगह से पिछोला झील और आसपास के ग्रामीण इलाकों के अद्भुत दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। महल को सहारा देते स्तंभों को फूलों के रूपांकनों और पत्तियों के साथ डिजाइन किया गया है।

18). सहेलियों की बाड़ी

सहेलियों की बाड़ी, जिसका अर्थ है ‘सम्मान की नौकरानियों के गार्डन’, महाराणा संग्राम सिंह द्वारा शाही महिलाओं के लिए 18 वीं सदी में बनाया गया था। यह कहा जाता है कि राजा ने इस सुरम्य उद्यान को स्वयं तैयार किया था और अपनी रानी को भेंट किया था जो शादी के बाद 48 नौकरानियों के साथ आई थी। फतेह सागर झील के किनारे पर स्थित, यह जगह अपनी खूबसूरत झरने, हरे भरे लॉन, और संगमरमर के काम के लिए विख्यात है।

19). कुंभलगढ़

उदयपुर में 25 मील उत्तर की ओर नाथद्वार से क़रीब अरावली की एक ऊँची श्रेणी पर कुंभलगढ़ का प्रसिद्ध क़िला बना हुआ है। इसकी ऊँचाई समुद्रतल से 3568 फुट है। महाराणा कुंभा (कुंभकर्ण) ने सन् 1458 (विक्रम संवत् 1515) में इस क़िले का निर्माण कराया था अतः इसे कुंभलमेर (कुभलमरु) या कुभलगढ़ का क़िला कहते हैं। मुसलमानों की कई बार चढ़ाईयों तथा बड़ी-बड़ी लड़ाईयों के कारण यह क़िला एक ख़ास ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। महाराणा कुंभा ने इस सुन्दर दुर्ग के स्मरणार्थ कुछ सिक्के भी जारी किये थे जिस पर इसका नाम अंकित हुआ करता था।

धार्मिक स्थल – Udaipur Famous Temple in Hindi

20). एकलिंग जी

एकलिंगजी मंदिर उदयपुर के सबसे लोकप्रिय और प्राचीन धार्मिक केन्द्रों में से एक है जो मुख्य शहर से लगभग 24 किमी की दूरी पर स्थित है। मंदिर हिंदू भगवान शिव को समर्पित है, और यह माना जाता है कि आचार्य विश्वस्वरूपा ने इसे 734 ई. में निर्मित किया। लगभग 2500 वर्ग फुट के एक क्षेत्र में फैले इस मंदिर परिसर में 108 मंदिर हैं।

21). जगदीश मंदिर

लगभग 350 वर्ष पुराना जगदीश मंदिर उदयपुर का सबसे बड़ा मंदिर है। यह सिटी पैलेस के नजदीक है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा सुशोभित है। मंदिर प्रांगण में विष्णुवाहन गरूड़ की प्रतिमा भी स्थापित है। मंदिर की दीवारों पर बनी संगमरमर की कलात्मक प्रतिमाएं मंदिर को और शोभायमान बनाती हैं।

22). ॠषभदेव

उदयपुर से 39 मील दक्षिण में खैरवाड़े की सड़क के निकट कोट से घिरे घूलेव गाँव में ॠषभदेव का मंदिर है जो मेवाड़ में जैनियों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थान के रूप में माना जाता है। यह स्थान विष्णु के 24 अवतारों में से आठवें अवतार के रूप में माने जाने के कारण हिन्दुओं का भी तीर्थ स्थल है। ॠषभदेव की भव्य और तेजस्वी प्रतिमा को केसरियानाथ के रूप में भी जाना जाता है।

23). रणकपुर जैन मंदिर

रणकपुर जैन मंदिर राजस्थान में स्थित जैन धर्म के पाँच प्रमुख तीर्थस्‍थलों में से एक है। यह स्‍थान ख़ूबसूरती से तराशे गए प्राचीन जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। रणकपुर मंदिर उदयपुर से 96 किलोमीटर की दूरी पर है। भारत के जैन मंदिरों में संभवतः इसकी इमारत सबसे भव्य तथा विशाल है।

24). जग मंदिर

17 वीं शताब्दी में जगमंदिर आइसलैंड में बने जग मंदिर एक बहुत सुंदर जगह है। जग मंदिर वास्तुकला बहुत ही अच्छा नमूना है, जहाँ बाहर मार्वल के हाथी इसे और आकर्षित बनाते है। यह बहुत बड़े क्षेत्र में बना हुआ है, जहाँ गुल महल, बगीचा, दरीखाना, बड़ा पत्थरों का महल, ज़नाना महल और कुंवर पड़ा का महल है। लेक पिकोला में घूमते समय पर्यटक यहाँ जरुर जाते है। रात के समय यहाँ बहुत सुदर लाइटिंग होती है, जिसका प्रतिबिम्ब लेक भी दिखाई देता है।


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