राजस्थान के दर्शनीय व पर्यटन स्थल | Rajasthan Tourism in Hindi

Rajasthan Tourism / राजस्थान भारत का एक राज्य है जो पर्यटन के लिए सबसे अच्छा राज्य माना जाता है। चमकती चांदी, सुनहरी रेत, बहुरंगी कपड़ों, जोशीले गीतों, जिंदादिल नृत्यों, ऊंट की राजसी सवारी, प्राचीन लोक परंपराओं और समृद्ध हस्तशिल्पों से राजस्थान की पहचान हैं। राजस्थान राज्य में हर ज़िले में कई दर्शनीय स्थल देखने को मिलते है, यहां विशेषरूप से दुर्ग है जो लगभग हर ज़िले में है। इनके अलावा राजस्थान में कई पौराणिक मन्दिर भी है। राजस्थान अपने अंदर एक विशाल इतिहास को समेटा हुवा हैं।

राजस्थान के दर्शनीय व पर्यटन स्थल की जानकारी | Rajasthan Tourism in Hindi

राजस्थान के दर्शनीय व पर्यटन स्थल – Rajasthan Tourism Place in Hindi

राजस्थान, एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर राज्य भारत के उत्तर पश्चिम में मौजूद है जो अपने आप में कालातीत आश्चर्य का जीवंत उदहारण है। इस राज्य ने कई अद्भुत घटनाओं को देखा है। इस राज्य का दौरा आपको शुष्क, फिर भी खूबसूरत रेगिस्तानी शहरों जैसलमेर और बाड़मेर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ जैसे राजपूत वैभव और बुद्धिमत्ता के दिल तक लेकर जाएगा। प्राकृतिक सुंदरता और महान इतिहास से संपन्न राजस्थान में पर्यटन उद्योग समृद्धिशाली है।

देश के पश्चिमोत्तर की ओर स्थित, राजस्थान भारत गणराज्य में क्षेत्र से सबसे बड़ा राज्य है। ये राज्य भारत के 10.4% भाग को अपने में समेटे हुए है जिसमें 342,269 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है। गुलाबी नगरी जयपुर यहाँ की राजधानी है जबकि अरावली रेंज में स्थित माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। राजस्थान का पश्चिमोत्तर भाग काफी शुष्क और रेतीले है जिसमें से अधिकांश भाग को थार रेगिस्तान ने कवर कर रखा है।

राजस्थान पर उस राजपूत वंश ने राज किया, जिनकी पहचान युद्धों में साहस और वीरता के लिए रही है। भारत की उत्तर-पश्चिम सीमा पर स्थित, इस धरती पर आपको इतिहास, मिथक, वीरता और प्रेम का अद्भुत मिश्रण उसकी नैसर्गिक सुंदरता के साथ देखने को मिलेगा। एक समय यह इलाका कई शासकों में बंटा हुआ था। यही इसका चमकदार इतिहास भी है। वीरता की लुभावनी कहानियां और यहां के निवासियों की नायकता भारतीय इतिहास का महत्वपूण हिस्सा रही है।

राजस्थान को “राजाओं की धरती” के तौर पर भी जाना जाता है। यहां कई महाराजाओं के अनोखे राज्य और उनके महल व किले हैं। राजस्थान अपने जंगलों, बाघों और चमचमाते जेवरों के साथ ही बहुरंगी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। जब आप राजस्थान जाएं तो खुद को इस राज्य की खूबसूरती और राजसी ठाठ से सम्मोहित होने दें।

राजस्थान देशीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यकटों, दोनों के लिए एक उचित पर्यटन स्थल है। भारत की सैर करने वाला हर तीसरा विदेशी सैलानी राजस्थान देखने ज़रूर आता है क्योंकि यह भारत आने वाले पर्यकटों के लिए “गोल्डन ट्रायंगल” का हिस्सा है। राजस्थान का शुमार दुनिया की उन जगहों में है जो अपने यहाँ आने वालों को बहुत कुछ देता है।

यहां सबसे अद्भुत हवेलियां और महल तो हैं ही, उसके साथ-साथ चकित कर देने वाले वन्य जीव अभयारण्य, धर्मनिष्ट और उत्सुकता भर देने वाले स्मारक भी हैं। इस जमीन से जुड़ी कई किंवदंतियां हैं। वीरता और समर्पण की कई कहानियां हैं।

राजस्थान में मौसम को 3 भागों में बांटा गया है जिसमें गर्मी, मानसून और सर्दियों शामिल हैं। पूरा राज्य केवल मॉनसून को छोड़कर बाकी सारे समय शुष्क और सूखा रहता है। राज्य गर्मियों में सर्वाधिक गर्म रहता है इस दौरान यहां का पारा 48 डिग्री तक चला जाता है। पूरे राज्य में केवल माउंट आबू ही वो स्थान है जहां गर्मियों के दौरान मौसम सुखद रहता है।

राज्य में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में  होली, तीज, दीपावली, देवनारायण जयंती, संक्रांति और जन्माष्टमी का विशेष महत्त्व है । इसके अलावा, वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला राजस्थानी रेगिस्तान त्योहार, ऊंट मेला , और पशु मेला भी राज्य के प्रमुख उत्सवों में अपनी जगह रखते हैं।

राजस्थान में देखने लायक जगहे – Rajasthan Tourist Place in Hindi

1). अल्बर्ट हाॅल संग्रहालय

अल्बर्ट हॉल संग्रहालय भारत के राजस्थान राज्य के जयपुर ज़िले में स्थित एक संग्रहालय है। यह राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय है। यह संग्रहालय “राम निवास उद्यान” के बाहरी ओर सीटी वॉल के नये द्वार के सामने है। यह “भारत-अरबी शैली” में बनाई गयी एक बिल्डिंग है। इसकी डिजाइन सर सैम्युल स्विंटन जैकब ने की थी तथा यह पब्लिक संग्रहालय के रूप में 1887 में खुला था।

2). आमेर का क़िला

आमेर का क़िला राजस्थान के जयपुर में स्थित एक ऐतिहासिक नगर आमेर में राजपूत वास्तुकला का अद़भुत उदाहरण है। आमेर का क़िला दिल्ली – जयपुर राजमार्ग की जंगली पहाड़ियों के बीच अपनी विशाल प्राचीरों सहित नीचे माओटा झील के पानी में छवि दिखाता हुआ खड़ा है। प्राचीन काल में अम्‍बावती और अम्बिबकापुर के नाम से आमेर कछवाह राजाओं की राजधानी रहा है। और पढ़े 

3). कुम्भलगढ़ किला

झीलों की नगरी उदयपुर से 84 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर में स्थित कुम्भलगढ़ किला शायद इस इतिहास से भरे शहर का सबसे मुख्य आकर्षण है। मशहूर महाराणा कुम्भ की सरलता की गवाही देता यह किला चित्तौड़गढ़ के दुर्जेय किले के तौर पर ज्यादा मशहूर है। इसका निर्माण सन् 1445 और 1458 के बीच किया गया था और कहा जाता है कि इसे संप्रति के महल के अवशेषों से बनाया गया था। संप्रति 2 शताब्दी ईसा पूर्व के एक जैन शासक थे। इस किले के अंदर मौजूद एक जैन मंदिर के अवशेष इसकी ओर इशारा करते हंै।

4). मेहरानगढ़ किला

मेहरानगढ़ किला भारत का विशाल और शानदार किला है जो 150 मीटर उंची पहाड़ी पर स्थित है। यह किला राजस्थान में जोधपुर से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। और पढ़े 

भटनेर क़िला हनुमानगढ़, राजस्थान में स्थित एक प्राचीन स्थल है। ‘भूपत’ के पुत्र ‘अभय राव भाटी’ ने 295 ई. में इस क़िले का निर्माण करवाया था। यह क़िला भारतीय इतिहास की कई महत्त्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी भी रहा है।
मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच प्रसिद्ध तराइन का युद्ध यहीं पर हुआ था। कुतुबुद्दीन ऐबक, तैमूर और अकबर ने भी भटनेर में शासन किया है।

6). जूनागढ़ क़िला

जूनागढ़ क़िला राजस्थान राज्य के बीकानेर शहर में स्थित है। जूनागढ़ क़िले का निर्माण सन् 1588 से 1593 के बीच किया गया था। सम्राट अकबर की सेना के एक सेनापति राजा राय सिंह ने इस क़िले को सन् 1593 में स्थापित करवाया था। यह क़िला समुद्र तल से 700 फीट ऊपर होने के कारण इस क़िले की टावर शहर के किसी भी हिस्‍से से दिखी जा सकती है। इसमें कई आकर्षक महल हैं, लाल बलुए एवं संगमरमर पत्थर से बने महल प्रांगण, छज्जों, छतरियों व खिड़कियाँ जो सभी इमारतों में फैली हुई है।

7). गलताजी मंदिर

आलीशान जंतर मंतर और रोशन हवा महल वाले गुलाबी शहर जयपुर में में कई मंदिर भी हैं, जहां साल भर बड़ी संख्या में लोग आते हैं। गलता मंदिर भी इनमें से ही एक है। गलता मंदिर चारों ओर से दुर्गम इलाके से घिरा है और इसे ‘बंदरों के मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका नज़ारा अद्भुत है। एक पहाड़ की चोटी पर स्थित यह मंदिर खूबसूरत ‘सिसोदिया रानी का बाग’ के बिलकुल नजदीक है। इसी मंदिर में संत गालव ने तपस्या की थी। रामानंद के धार्मिक आदेश पर भगवान कृष्ण के ढेरों भक्त यहां बड़ी संख्या में आते हैं।

8). हवा महल

शाही हवा महल खूबसूरत गुलाबी शहर का शायद सबसे ज्यादा घूमा जाने वाला पर्यटन स्थल है। महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा सन् 1799 में स्थापित यह ‘हवा का महल’ राजस्थान के रंगीन इतिहास और संस्कृति का परिचायक है।मधुमक्‍खी के छत्ते जैसी संरचना के लिए प्रसिद्ध, हवा महल लाल और गुलाबी सेंड स्‍टोन से मिल जुल कर बनाया गया है, जिसमें सफ़ेद किनारी और मोटिफ के साथ बारीकी से पच्‍चीकारी की गई है। और पढ़े 

9). सिटी पैलेस

जयपुर के शाही शहर में स्थित सिटी पैलेस वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इस महल की नींव महाराजा जय सिंह द्वितीय ने रखी थी। वह 18वीं सदी में आमेर के कछवाह राजपूत राजा थे। इस महल की खूबसूरत संगमरमर की नक्काशी वाली आंतरिक सज्जा, शानदार खंभे, जाली का काम और जड़ाउ सजावट इसे सैलानियों के लिए खास आकर्षण बनाती है। जलेब चैक और त्रिपोलिया गेट जयपुर के सिटी पैलेस के दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं। इस भव्य महल के वास्तुकार कर्नल जैकब ने इसमें मुगल, राजपूत और यूरोपीय शैली की वास्तुकला का मेल किया है। और पढ़े 

10). जंतर मंतर

ये कायनात और ये विशाल सृष्टि इंसानों के लिए हमेशा से ही एक पहेली रही है। प्राचीन काल से ही इस कायनात ने इंसान को मोहित किया है। इस कायनात को जानने के लिए ही कई वेधशालाएं बनाई गई हैं और जयपुर में बना जंतर मंतर उनमें से एक है। महाराजा सवाई जय सिंह की पूरे उत्तर भारत में बनवाई गई पांच वेधशालाओं में से जयपुर का जंतर मंतर सबसे बड़ा और संरक्षित है। गुलाबी शहर के जंतर मंतर में पत्थरों से कई बड़ी संरचनाएं बनाई गई हैं जो बड़े और विविध ज्यामितीय रुपों में हैं। दुनिया भर के कलाकारों, वास्तुकारों और इतिहासकारों को जंतर मंतर अपनी ओर आकर्षित करता है। और पढ़े 

11). रणथम्भौर नेशनल पार्क

रणथम्भौर नेशनल पार्क अरावली की पहाडि़यों और विंध्य पठार के बीच में स्थित भारत का एक मशहूर अभयारण्य है। इस अभयारण्य का कुल इलाका 1334 वर्ग किलोमीटर है और यह राॅयल बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध है। इस टाइगर को दिन के समय दलदल और झीलों के पास देखा जा सकता है। पहले के समय में यह इलाका महाराजाओं के लिए शिकारगाह था। सन् 1955 में इसे खेल अभयारण्य घोषित किया गया और सन् 1980 में यह नेशनल पार्क बना। अंत में सन् 1980 में यह भारत में टाइगर रिजर्व बन गया। रणथम्भौर पार्क के भीतर एक सुंदर खंडहर होने के कारण इसे विरासत स्थल भी घोषित किया गया है। और पढ़े 

12). सरिस्का नेशनल पार्क

सरिस्का नेशनल पार्क अलवर जिले में अरावली की पहाडि़यों में है और इसे सन् 1958 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसे सन् 1979 में टाइगर रिजर्व के रुप में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ में शामिल किया गया था। इस पार्क में 800 वर्ग किलोमीटर का विशाल इलाका है और यहां विविध प्रकार के जीव, वनस्पति और पक्षी पाए जाते हैं।

13). भांडेसर मंदिर

राजस्थान के शाही राज्य में स्थित बीकानेर अपनी समृद्ध संस्कृति और वास्तुकला के बेहतरीन नमूनों वाले मंदिरों और महलों के लिए मशहूर है। भांडेसर मंदिर को बीकानेर का सबसे लोकप्रिय आकर्षण माना जाता है और यह अपनी खूबसूरत आंतरिक सज्जा, भित्तिचित्र और कला के लिए प्रसिद्ध है।

14). दिलवाड़ा जैन मंदिर

दिलवाड़ा जैन मंदिर राजस्थान राज्य के सिरोही ज़िले के माउंट आबू नगर में स्थित है। दिलवाड़ा मंदिर वस्तुतः पांच मंदिरों का समूह है। इन मंदिरों का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच में हुआ था। यह विशाल एवं दिव्य मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित है।

15). रानी सती मंदिर

जयपुर से 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित झुंझनु राजस्थान का एक ऐतिहासिक शहर है। चैहान वंश का हिस्सा होने के लिए पहचाना जाने वाला झुंझनु हमेशा से ही एक व्यापारिक और व्यवसायिक केंद्र रहा है। झुंझनु अपने धार्मिक स्थलों के लिए भी मशहूर है, जिसमें रानी सती मंदिर सबसे लोकप्रिय है। इस शहर में कई प्रतिष्ठित राजस्थानी हवेलियां भी हैं जिन्हें बारीक नक्काशी और भित्तिचित्रों से सजाया गया है।

16). ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती दरगाह

ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती दरगाह राजस्थान के शहर अजमेर में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इसे ‘दरगाह अजमेर शरीफ़’ भी कहा जाता है। ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, ख़्वाजा साहब या ख़्वाजा शरीफ़ अजमेर आने वाले सभी धर्मावलम्बियों के लिये एक पवित्र स्थान है। मक्का के बाद सभी मुस्लिम तीर्थ स्थलों में इसका दूसरा स्थान हैं। इसलिये इसे भारत का मक्का भी कहा जाता हैं।

कैसे जाएँ –

राजस्थान में सभी प्रमुख सरकारी और निजी एयरलाइंस इन जगहों से दिल्ली, मुंबई जैसे देश के सभी महत्वपूर्ण शहरों के लिए नियमित उड़ानें संचालित करते हैं। राजस्थान में अच्छा रेलवे नेटवर्क भी है। प्रमुख रेलवे स्टेशनों में जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर शामिल है, जहां से देश के सभी प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली रेल सेवा उपलब्ध है। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों की एक विस्तृत शृंखला है, जो राज्य को पूरी तरह कवर करते हैं। दिल्ली से पांच घंटे की यात्रा से जयपुर पहुंचा जा सकता है।


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