मेघालय के दर्शनीय व पर्यटन स्थल | Meghalaya Tourism in Hindi

Meghalaya Tourism / मेघालय भारत के उत्तर पूर्व में स्थित एक राज्य है। यहाँ की राजधानी खूबसूरत शहर शिलांग (Shillong) है। मेघालय में बहुत से ऐसे पर्यटन स्‍थल हैं, जहां पर प्रकृति अपने भव्‍य रूप में उपस्थित है। यहां देश के कुछ सबसे बड़े वन हैं। इसलिए, आज देश में सबसे महत्वपूर्ण इकोटोरिज़्म सर्किटों में से एक है। मेघालय उप-उष्णकटिबंधीय वन में कई प्रकार के वनस्पतिया और जीव पाए जाते है। यह ऊंचे-ऊंचे चीड़ के पेड़ों और बादलों का एक अंतहीन सिलसिला है। इसी वजह से इस राज्य का नाम “मेघालय” पड़ा है यानी मेघों (बादलों) का डेरा।

मेघालय के दर्शनीय व पर्यटन स्थल की जानकारी | Meghalaya Tourism in Hindi

मेघालय के दर्शनीय व पर्यटन स्थल की जानकारी – Meghalaya Tourism Place in Hindi

मेघालय के प्राकृतिक दृश्यों में तीन पहाड़ियों- खासी, जैंतिया और गारो का प्रभुत्व है। 1972 में मेघालय असम से अलग हुआ था। यहां मूल रूप से खासी, जयंतिया और गारो जनजाति के लोग रहते हैं। यह राज्य फल और सुपारी के उत्पादन के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के लोगों को सुपारी चबाते देखना एक आम नजारा है। मेघालय उत्तर में असम और दक्षिण में बांग्लादेश से घिरा हुआ है। राज्य के करीब एक तिहाई हिस्से पर जंगल है। मेघालय के जंगल स्तनपाई, पक्षी और पौधों की जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं।

मेघालय, पर्वतारोहण, रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रेकिंग और हाइकिंग, वाटर स्पोर्ट्स आदि के रूप में कई साहसिक पर्यटन अवसर प्रदान करता है। हिरण और भालू उमियाम झील के पास एक जल क्रीड़ा परिसर है, जिसमे रोबोबोट्स, पैडलबोट्स, सेलिंग नौकाओं, क्रूज-बोट्स, वॉटर स्कूटर और स्पीडबोट्स भी है।

मेघालय का मौसम ऊंचाई के साथ भिन्न होता है। खासी और जैन्तिया हिल्स का मौसम विशिष्ट सुखद है। यह न तो गर्मियों में बहुत गर्म है और न ही सर्दियों में बहुत ठंडा है, लेकिन गारो हिल्स के मैदानों पर, सर्दियों में छोड़कर मौसम गर्म और नम है। इसका नाम इसीलिए है क्योकि मेघालय का आकाश कभी-कभार ही बादलों से मुक्त रहता है। औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1,150 सेमी है। यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं।

देखा जाए तो मेघालय घूमना वास्तव में संस्कृति, प्रकृति, लोग और भाषा के बीच से होकर गुजरना है। मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्राकृतिक नजारों के कारण लोग मिजोरम को भी बेहद खूबसूरत जगह मानते हैं। मिजोरम के आकर्षणों में मुरलेन नेशनल पार्क और डम्पा टाइगर रिजर्व प्रमुख है। इसके अलावा यहां के झील और पालक दिल, ताम दिल और वनतावंग जलप्रपात भी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता है।

भारत के उत्तर-पूर्व में सात राज्य हैं। इसे ‘सात बहनों’ या ‘सेवन सिस्टर्स’ के नाम से भी जाना जाता है। मेघालय इन्हीं सात बहनों में से एक है। यहां ढेरों नदियां हैं, जिनमें से ज्यादातर बरसाती है। गारो पहाड़ी क्षेत्र में दारिंग, सांदा, बांद्रा, भोगाई, दारेंग, सिमसांग, निताई और भुपाई नदी प्रमुख है। पठार के मध्य और पूर्वी हिस्से में उमखरी, दिगारू, उमियाम, किनचियांग, मावपा, बारापानी, मिनगोत और मिंतदु नदी बहती है। दक्षिणी खासी पहाड़ी क्षेत्र में ये नदिया बेहद गहरी तंग घाटियों से होकर गुजरती है और कई जलप्रपात का निर्माण करती है।

इस राज्य की सबसे ऊंची चोटी शिलांग 589.50 मीटर ऊंची है। दूसरे नंबर की सबसे ऊंची चोटी नोकोक है, जो गारो हिल्स में है गारो हिल्स राज्य के सबसे पश्चिमी में, मध्य में खासी तथा पूर्व में जयंतियां की पहाड़ियां है। वनों की दृष्टि से यह राज्य काफी समृद्द है, यहां पर 15,760 हेक्टेयर क्षेत्र में वन है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 703 प्रतिशत वन है। यहां अत्यन्तं दुलर्भ वन्य जीवन बिनतुरोग भी मिलता है।

मेघालय में देखने लायक जगह – Meghalaya Tourist Place in Hindi

1). शिलांग – (Shillong Tourist Place in Hindi)

शिलांग एक छोटा-सा शहर है जिसे पैदल घूमकर देखा जा सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार सिटी बस या दिनभर के लिए ऑटो या टैक्सी किराए पर लेकर भी घूमा जा सकता है। शिलांग को प्राय: पूर्व का स्कॉटलैंड कहा जाता है। यहां की वास्तुकला और खान-पान में भी ब्रिटिश झलक नजर आती है। यह शहर में प्राकृतिक सौंदर्य उत्यन्त शोभायमान होता है। शिलांग पीक, लेडी हैदरी पार्क, कैलांग रॉक, वार्डस झील, मीठा झरना, हाथी झरना यहां के प्रमुख पर्यटक स्थल हैं।

2). चेरापूंजी

चेरापुंजी भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय का एक शहर है। यह शिलांग से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान दुनिया भर में मशहूर है। हाल ही में इसका नाम चेरापूंजी से बदलकर सोहरा रख दिया गया है। वास्तव में स्थानीय लोग इसे सोहरा नाम से ही जानते हैं। यह स्थान दुनियाभर में सर्वाधिक बारिश के लिए जाना जाता है। इसके नजदीक ही नोहकालीकाई झरना है, जिसे पर्यटक जरूर देखने जाते हैं। यहां कई गुफा भी हैं, जिनमें से कुछ कई किलोमीटर लम्बी हैं। चेरापूंजी बांगलादेश सीमा से काफी करीब है, इसलिए यहां से बांगलादेश को भी देखा जा सकता है।

3). सीजू गुफा

मेघालय की सीजू गुफा, भारत की पहली चूना पत्थर वाली प्राकृतिक गुफ़ा है. यह गुफा 2 पहाड़ियों के शिखर को एक रस्सी और तार के ब्रिज के माध्यम से जोड़ती है। इस पुल की अस्थिरता आपको इतना डराएगी की आपको लगेगा की आप पुल से नीचे गिर जाएंगे।

4). मोसमाई झरना

इस झरने से 2 हजार फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ जल देखकर मन सिहर उठता है। इतना ही नहीं, करीब 1.5 किमी दूरी पर मोसमाई गुफा भी बहुत ज्यादा सुंदर है। यह गुफाएं मानव निर्मित नहीं है। या भी इनकी एक विशेषता है। गुफा में जाल रिसता रहता है। इन गुफाओं के अंदर घने अंधकार का साम्राज्य स्थापित है।

यह गुफा नाहसिंहथियांग झरनों के पास हैं। मोसमाई गुफा जाने का रास्ता चेरापूंजी के पास स्थित मोसमाई गांव से है। गुफा मॉस्मई गांव के बेहद करीब है। गुफा का प्रवेश द्वार खड़ी चढ़ाई वाला और बेहद संकरा है।

5). मफलंग

यह शिलांग से 24 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह एशिया के सबसे साफ गांव हैं, यहां का प्राकृतिक दृश्य अत्यधिक मनमोहक है। प्रकृति के अनुपम दृश्यों से परिपूर्ण इस स्थान पर पर्यटकों को स्वर्ग की अनुभूति होती है। यह स्थान पर्यटकों को आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

6). मावसिनराम

मावसिनराम गुफा अपनी आप में खास है। यही विशिष्टता इसकी पहचान है। मावसिनराम की गुफा के चलते मेघालय का यह गांव भारत के साथ साथ दुनियाभर में लोकप्रिय है। मेघालय के खूबसूरत नजारों में से एक है मावसिनराम, जो शिलांग से 56 किमी की दूरी पर स्थित है। इसकी गुफा मावसिनराम गांव से करीब एक किमी उत्तर में है। यह गुफा स्टलैग्माइट यानी चूने के पत्थरों से बनी बड़ी बड़ी चोटियों के लिए मशहूर है। इनकी उंचाई 25.30 फीट तक है। ये चोटियां शिवलिंग की तरह दिखती है। इस गुफा का दूसरा नाम मावियमबुइन भी है।

7). क्रेम डैम गुफा

क्रेम डैम गुफा मेघालय का ऐसा सुरम्य स्थान है, जहां प्रकृति अपने भव्य स्वरूप में दर्शन देती है। क्रेम डैम संभवतः पूरे भारतीय महाद्वीप की सबसे बड़ी गुफा होगी, जो बलुआ पत्थरों से बनी है। यह अपने विशाल आकार और बेमिसाल खूबसूरती की वजह से बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। क्रेम डैम की लंबाई लगभग 1297 मीटर है।
ऐसा पत्थर जो रेत के बारीक कणों से मिलकर बना हो, बलुआ पत्थर कहलाता है। यह तलछटी चट्टान भी कहलाता है। इसमें अधिकतर हिस्सा स्फटिक या धरती की सतह पर पाए जाने वाले तत्वों की ही होती है।

8). क्रेम लैशिंग

क्रेम लैशिंग, मेघालय की उन हजार खूबसूरत गुफाओं में से एक है, जो उसके दिल में पालने की तरह झूलती हैं। क्रेम लैशिंग राज्य के एक और पर्यटन स्थल जोवाई से 37 किमी. की दूरी पर है। बेहद शांत जगह है। यदि आपके दिल में गुफाओं के लिए भी जगह है तो मेघालय आपकी पहली पसंद साबित हो सकता है, जो आपको हर पल रोमांचित कर सकता है। मेघालय यूं तो गुफाओं के लिए ही मशहूर है। लेकिन क्रेम लैशिंग की विशेषता इसका विशालकाय होना है, जो इसे दूसरों से अलग करता है। 50 मीटर की चौड़ाई में फैली इस गुफा की ऊंचाई 40 मीटर है। यही आंकड़े मेघालय आने वाले हर पर्यटक को अपनी ओर खिंचते हैं।

9). नारतियांग

जयंतिया हिल्स जिला मेघालय टूरिज्म का बड़ा केंद्र है, जहां एक से एक अद्भुत गुफाएं कंदराएं और एडवेंचरस स्पोर्ट्स के स्थान हैं। यह छुट्टी मनाने के लिए आसपास के लोगों की पहली पसंद है। हालांकि, एडवेंचर करने वालों को यहां सावधानी रखने की जरूरत भी होती है। नारतियांग, ऐसी जगह है जो पूरे मेघालय के दिल में बसता है। यह सिर्फ पर्यटन स्थल के तौर पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

10). नोकरेक चोटी

नोकरेक गारो हिल्स पर तूरा क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटी है। यह पश्चिम गारो हिल्स जिले में आती है। तूरा रेंज इस पहाड़ की प्रमुख आकर्षणों में से एक है। इसकी लंबाई 50 किलोमीटर के करीब है। यह पूर्व से पश्चिम दिशा में सीजू से तूरा तक फैला हुआ है। तूरा की पहाड़िया अभी नोकरेक नेशनल पार्क के प्रबंधन के तहत आती हैं। नोकरेक की चोटी और इसका बेस तूरा के दक्षिण पूर्व में 13 किलोमीटर क्षेत्र में पसरा हुआ है।

11). एलिफेण्ट फॉल्स

एलिफण्ट फॉल्स बहुत ही बडा झरना है जिसकी आवाज बहुत दूर से सुनी जा सकती है। पहाडी से बहुत नीचे उतरकर यह मनोरम दृष्य देखा जा सकता है। फोटोग्राफी के लिये यह सर्वश्रेष्ठ झरना कहा जा सकता है क्योंकि इसमे झरने के पास जाया जा सकता है।

कैसे जाये –

मेघालय की जलवायु उपोष्ण और आद्र है। इस क्षेत्र में शायद ही कभी तापमान 28 डिसे से ऊपर जाता होगा। खासी हिल्स में स्थित चेरापूंजी विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है। मेघालय घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जुलाई के बीच का रहता है।

मेघालय में कोई विमानतल नहीं है। सबसे निकट का विमानतल है गुवाहाटी, जो मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से 128 किमी दूर है। हेलिकॉप्टर सेवा के जरिए गुवाहाटी से शिलॉन्ग (30 मिनट) और तुरा (60 मिनट) पहुंचा जा सकता है। राज्य में सड़क नेटवर्क काफी अच्छा है। पूरे राज्य में सड़कों का जाल बिछा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग -40 हर मौसम में इस्तेमाल होता है, जो राज्य से होकर गुजरता है। शिलांग से गुवाहाटी को जोड़ने वाली सड़क देश के अन्य बड़े शहरों को भी जोड़ती है। मेघालय में कोई भी रेल सेवा नहीं है। सबसे पास का रेलवे स्टेशन है गुवाहाटी।


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