रणथंभौर राष्ट्रीय पार्क के बारे में जानकारी Ranthambore National Park in Hindi

Ranthambore National Park / रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाईमाधोपुर ज़िले में स्थित है। यह भारत के बड़े उद्यानों में से एक है। 392 वर्ग किलोमीटर में फैले इस उद्यान में अधिक संख्या में बरगद के पेड़ दिखाई देते हैं। रणथंभौर वन्यजीव अभयारण्य को 1980 में राष्ट्रीय पार्क का दर्जा प्रदान किया गया था। बाघों के अलावा, राष्ट्रीय पार्क में विभिन्न जंगली जानवरों, सियार, चीते, हाइना, दलदल मगरमच्छ, जंगली सुअरों और हिरण के विभिन्न किस्मों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान के रूप में कार्य करता है, इसके अलावा, वहाँ जैसे जलीय वनस्पति, लिली, डकवीड और पार्क में कमल बहुतायत है।

रणथंभौर राष्ट्रीय पार्क के बारे में जानकारी Ranthambore National Park in Hindiरणथंभौर राष्ट्रीय पार्क की जानकारी – Ranthambore National Park Information in Hindi

रणथम्भौर राष्ट्रीय अभयारण्य हाड़ौती के पठार के किनारे पर स्थित है। यह चंबल नदी के उत्तर और बनास नदी के दक्षिण में विशाल मैदानी भूभाग पर फैला है। इस विशाल अभयारण्य में कई झीलें हैं, जो वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण और जलस्रोत उपलब्ध कराती हैं। रणथंभौर अभयारण्य का नाम यहाँ के प्रसिद्ध रणथम्भौर दुर्ग पर रखा गया है।

यह उद्यान बाघ संरक्षित क्षेत्र है। यह राष्ट्रीय अभयारण्य अपनी खूबसूरती, विशाल परिक्षेत्र और बाघों की मौजूदगी के कारण विश्व प्रसिद्ध है। अभयारण्य के साथ-साथ यहाँ का ऐतिहासिक दुर्ग भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। लंबे समय से यह राष्ट्रीय उद्यान और इसके नजदीक स्थित रणथंभौर दुर्ग पर्यटकों को विशेष रूप से प्रभावित करता है।

रणथम्भौर को ‘बाघ संरक्षण परियोजना’ के तहत जाना जाता है और यहाँ बाघों की अच्छी खासी संख्या भी है। समय-समय पर जब यहाँ बाघिनें शावकों को जन्म देती हैं। तो ऐसे अवसर यहाँ के वन विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होते। इस अभयारण्य को “बाघों को अभयारण्य” कहा जाता है लेकिन यहाँ बड़ी संख्या में अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी भी है। यह अभयारण्य विविध प्रकार की वनस्पति, पेड़-पौधों, लताओं, छोटे जीवों और पक्षियों के लिए विविधताओं से भरा घर है।

जानवरों के अलावा पक्षियों की लगभग 264 प्रजातियाँ यहाँ देखी जा सकती हैं। सर्दियों में अनेक प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं। पक्षियों में चील, क्रेस्टड सरपेंट ईगल, ग्रेट इंडियन हॉर्न्ड आउल, तीतर, पेंटेड तीतर, क्वैल, स्परफाइल मोर, ट्री पाई और कई तरह के स्टॉर्क देखे जा सकते हैं। यहाँ राजबाग़ तालाब, पदम तालाब, मिलक तालाब जैसे सुंदर स्थल अनेक प्रकार के जानवरों को आकर्षित करते हैं और इनका शिकार करने की कोशिश में रहते हैं मांसाहारी जानवर। इस उद्यान की झीलों में मगरमच्छ भी हैं। यहाँ जीप सफारी का भी आनंद उठाया जा सकता है।

यहां पर्यटकों के लिए वन्य प्राधिकारी ने सड़कों का निर्माण किया है जिससे वह पार्क में घूम सके। वन्य प्राधिकारी ने फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए विशेष व्यवस्था की है।

इतिहास

रणथंभौर उद्यान को भारत सरकार ने 1955 में ‘सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य’ के तौर पर स्थापित किया था। बाद में देशभर में बाघों की घटती संख्या से चिंतित होकर सरकार ने इसे 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर अभयारण्य’ घोषित किया और बाघों के संरक्षण की कवायद शुरू की। इस प्रोजेक्ट से अभयारण्य और राज्य को लाभ मिला और रणथंभौर एक सफारी पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया। इसके चलते 1984 में रणथंभौर को राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित कर दिया गया। 1984 के बाद से लगातार राज्य के अभयारण्यों और वन क्षेत्रों को संरक्षित किया गया। वर्ष 1984 में ‘सवाई मानसिंह अभयारण्य’ और ‘केवलादेव अभयारण्य’ की घोषणा भी की गई। बाद में इन दोनो नई सेंचुरी को भी बाघ संरक्षण परियोजना से जोड़ दिया गया।

कैसे पहुँचें

यह राष्ट्रीय अभयारण्य उत्तर भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय अभयारण्यों में से एक है। इस अभयारण्य का निकटतम हवाई अड्डा कोटा है, जो यहाँ से केवल 110 कि.मी. की दूरी पर स्थित है, जबकि जयपुर का सांगानेर हवई अड्डा 130 कि.मी. की दूरी पर है। राजस्थान के दक्षिण पूर्व में स्थित यह अभयारण्य सवाईमाधोपुर ज़िले में स्थित है, जो मध्य प्रदेश की सीमा से लगता हुआ है। अभयारण्य सवाईमाधोपुर शहर के रेलवे स्टेशन से 11 कि.मी. की दूरी पर है। सवाईमाधोपुर रेलवे स्टेशन से नजदीकी जंक्शन कोटा है, जहाँ से मेगा हाइवे के जरिए भी रणथंभौर तक पहुंचा जा सकता है।


और अधिक लेख –

Please Note : – Ranthambore National Park History & Information in Hindi मे दी गयी Information अच्छी लगी हो तो कृपया हमारा फ़ेसबुक (Facebook) पेज लाइक करे या कोई टिप्पणी (Comments) हो तो नीचे  Comment Box मे करे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *