बांदीपुर राष्ट्रीय पार्क की जानकारी, इतिहास | Bandipur National Park in Hindi

Bandipur National Park / बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक राज्य के चामराजानगर ज़िले में स्थित एक राष्ट्रीय पार्क है। यह पार्क बांदीपुर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ रोमांच प्रेमियों के लिए भी एक आदर्श स्थान है। 843 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए इस पार्क (उद्यान) में प्रचुर मात्रा में सुंदर, गहरा और घना जंगल है। यहां चंदन, टीक और रोजवुड जैसी प्रजातियों के पेड हैं और बांस के कुंजों की भरमार है। इस पार्क में कई जानवरों जैसे बाघ, चार सींगों वाला हिरण, विशाल गिलहरी, हाथी, हार्नबिल, जंगली कुत्ते, चीता, निष्क्रिय भालू, और गौर को प्राकृतिक आवास प्रदान करता है।

बांदीपुर राष्ट्रीय पार्क की जानकारी, इतिहास | Bandipur National Park in Hindiबांदीपुर राष्ट्रीय पार्क का इतिहास और जानकारी – Bandipur National Park Information in Hindi

बांदीपुर राष्ट्रीय पार्क को प्रोजेक्ट टाइगर के तहत सन् 1973 में एक टाइगर रिज़र्व के रूप में स्थापित किया गया था। 1931 में मैसूर के महाराजा ने इस पार्क (उद्यान) की स्थापना की थी, जो उस समय 90 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में था। 1941 में इस पार्क(उद्यान) का नाम वेनुगोपाला वन्यजीवन उद्यान रखा गया जो उस क्षेत्र के प्रमुख देवता के नाम पर आधारित था।

यह भारत के लुप्तप्राय वन्य जीवन की कई प्रजातियों का संरक्षण स्थल है। आसपास के नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (643 वर्ग किलोमीटर (248 वर्ग मील)), मुदुमलाइ राष्ट्रीय उद्यान (320 वर्ग किलोमीटर (120 वर्ग मील)) और वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (344 वर्ग किलोमीटर (133 वर्ग मील)) के साथ कुल मिलाकर 2183 वर्ग किलोमीटर (843 वर्ग मील) का यह नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है जिससे यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र बन जाता है।

पार्क के सभी कोनों से पर्यटक सुंदर दृश्यों का आनंद लिया जा सकता हैं क्योंकि यह नागुर, कबिनी और मोयर नदियों से घिरा हुआ है। यह पार्क(उद्यान) कई जानवरों जैसे बाघ, चार सींगों वाला हिरण, विशाल गिलहरी, हाथी, हार्नबिल, जंगली कुत्ते, चीता, निष्क्रिय भालू, और गौर को प्राकृतिक आवास प्रदान करता है। जानवरों के साथ साथ यहाँ कुछ दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी पाए जाते हैं जिसके अंतर्गत प्रवासी और निवासी पक्षी आते हैं। पार्क में भूरे बाज़ उल्लू, ट्रोगोंस, ग्रे जंगल पक्षी, ड्रोंगो बे उल्लू, बुनकर पक्षी(बया), कठफोड़वा, किंगफिशर, सामान्य गाने वाले पक्षी और मक्खी आदि को देखा जा सकता है। इस उद्यान में कुछ दुर्लभ प्रजाति की वनस्पतियां जैसे सागौन, आँवला, बाँस और सित्सल भी पाई जाती हैं।

यहां हाथियों के कई जत्थे हैं, जो यत्र-तत्र भटकते हुए अक्सर पर्यटकों के सामने आ जाते हैं किंतु मनुष्य की दखलअंदाजी उन्हें जरा भी पसन्द नहीं है। पर्यटकों को हाथियों से दूर ही रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि कई बार ये उग्र और हिंसक हो जाते हैं। चीतल, सांभर, काकड और चौसिंगा के झुण्ड प्रायः सब कहीं नजर आ जाते हैं। जंगली कुत्ते ‘धौर’ झुण्डों में रहते हैं। ये बडे आक्रामक और खतरनाक होते हैं।

बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान में भ्रमण के लिये सफारी वाहन, प्रशिक्षित हाथी और मार्ग निर्देशकों की अच्छी व्यवस्था है, जो आपके सफर को अविस्मरणीय बना देते हैं।

कैसे जायें –

निकटतम हवाई अड्डा बंगलुरू है, जो हैदराबाद, दिल्ली, चेन्नई, मदुरई, तिरुअनन्तपुरम, कोयम्बटूर, कोच्चि, मंगलौर, गोवा, पुणे और मुम्बई की वायुसेवा से जुडा है। निकटतम रेलवे स्टेशन चामराजनगर यहां से 53 किलोमीटर दूर है। वहां से बांदीपुर का सफर सडक मार्ग से तय किया जा सकता है। बांदीपुर स्टेट हाइवे से जुडा है। यहां दक्षिण भारत के सभी प्रमुख नगरों से सडक परिवहन के द्वारा पहुंचा जा सकता है।

कहां ठहरें –

बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों के आवास के लिये वन विश्राम गृह और कॉटेज की उचित व्यवस्था है। इसके लिये चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अथवा फील्ड डाइरेक्टर प्रोजेक्ट टाइगर कार्यालय से अग्रिम आरक्षण करा लेना सुविधाजनक रहता है।

कब जायें –

र्यटन प्रेमियों के लिये बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान सितम्बर से अप्रैल तक खुला रहता है और इस पूरे सीजन में यह देखने योग्य है। फिर भी वर्षा के बाद यानी सितम्बर से नवम्बर तक यह विशेष रूप से दर्शनीय हो जाता है। वर्षा के बाद हरीतिमा कई गुना बढ जाती है और मेघ रहित आकाश काफी नीला लगने लगता है।

दिसम्बर से फरवरी के मध्य यहां सर्दी होती है। इस मौसम में हल्के गर्म कपडों की जरुरत पडती है। वसन्त के मौसम का भी अपना आनन्द है, जब जंगली फूलों की खुशबू से जंगल और जानवर मस्ती में झूमने लगते हैं। वृक्षों पर नई नई कोंपलें और फूल सजने लगते हैं जिससे सारा जंगल कभी हल्का गुलाबी, थोडा बैंगनी और कुछ कुछ नीला नजर आने लगता है। ऐसे खुशगवार मौसम में बांदीपुर की धरती स्वर्गीय आनन्द की अनुभूति प्रदान करती है। पर्यटक सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उद्यान की यात्रा कर सकते हैं। भारतीयों के लिए शुल्क 25 रूपये और विदेशियों के लिए शुल्क 150 रूपये है।

स्थिति –

कर्नाटक के बांदीपुर चामराजनगर जिले में स्थित 843 वर्ग किलोमीटर विस्तार का बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान उत्तर पश्चिम में राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान (नागरहोल) द्वारा, दक्षिण में तमिलनाडु के मुदुमलाई वन्यजीव अभयारण्य द्वारा और दक्षिण पश्चिम में केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य द्वारा घिरा हुआ है। यह सब साथ मिलकर नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व बनाते हैं।


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