ताजमहल का सच इतिहास | Taj Mahal History In Hindi Essay

सच्चे प्यार की पहचान करनी है तो आप ताजमहल (TajMahal) का दीदार कर सकते हैं। ये एक ऐसी अजिमोशान ईमारत हैं जिसे देखकर लोग आज भी प्यार पर भरोसा करते है। आगरा का ताजमहल भारत की शान और प्रेम का प्रतीक चिह्न माना जाता है। उत्तरप्रदेश का तीसरा बड़ा जिला आगरा ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। इस अद्भुत सफ़ेद संगमरमर स्मारक को आज भी दुनिया का हर एक इंसान देखने की चाह रखता है क्योकि इसे मोहब्बत का मंदिर कहा जाता है।

Taj Mahal History In Hindi Essay,Taj Mahal History In Hindi Language – ताजमहल का इतिहास और रोचक तथ्य 

मुगलों का सबसे पसंदीदा शहर होने के कारण ही उन्होंने ‍दिल्ली से पहले आगरा को अपनी राजधानी बनाया। इतिहास के अनुसार इब्राहिम लोदी ने इस शहर को सन् 1504 में बसाया था। जिस समय इस शहर की स्थापना की गई, उस समय किसी ने यह कल्पना नहीं की होगी कि यह शहर पूरे विश्व में अपनी खूबसूरती के लिए परचम लहराएगा। जिसे आज भी दुनिया के सात अजूबों में शुमार किया जाता है।

यमुना नदी के किनारे पर स्थित यह ईमारत एकविस्मरणीय स्थल है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् 1983 में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है।

शाहजहाँ की सभी बेगम में उनकी सबसे करीब बेगम मुमताज़ महल थी। लेकिन पर्शियन बेगम मुमताज़ महल की मृत्यु अपने चौदहवे बच्चे को जन्म देते समय हो गयी, उनके चौदहवे बच्चे का नाम गौहर बेगम था। जिस कारण मुगल बादशाह शाहजहाँ को बहुत आहत पहुँचा, क्यूंकी वे बेगम मुमताज़ महल से बेइंतहाँ मोहब्बत करते थे। इसीलिए उनकी याद में वे कुछ इतिहासिक धरोहर बनाना चाहते थे, जिसमे ताजमहल का निर्माण हुआ। शाहजहाँ चाहते थे की दुनिया मुमताज़ और उनकी प्रेम कहानी को हमेशा याद रखे, ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ, जो की पूरे 22 साल लगे थे इसे बनाने मे।

ताज महल बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था। इसी तरह बुखारा शहर, जो मध्य एशिया में स्थित हैं, वहां से जिस कारीगर को बुलवाया गया वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था। विराट कद के गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल में रहने वाले दक्ष कारीगर बुलाया गया तथा मिनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलवाया गया।

इस प्रकार ताजमहल के निर्माण से पूर्व 6 महीनों में कुशल कारीगरों को तराश कर उनमें से 37 दक्ष कारीगर इकट्ठे किए गए, जिनके देखरेख में 25000 मजदूरों के साथ कार्य किया गया। इसी प्रकार ताज निर्माण में लगाई गई सामग्री संगमरमर पत्थर राजस्थान के मकराणा से, अन्य कई प्रकार के कीमती पत्थर एवं रत्न बगदाद, अफगानिस्तान, तिब्बत, इजिप्त, रूस, ईरान आदि कई देशों से इकट्‍ठा कर उन्हें भारी पर खरीद कर ताजमहल का निर्माण करवाया गया।

ताजमहल का निर्माण लगभग 1643 में ही ख़त्म हो गया था लेकिन फिर भी उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिये और 10 सालो तक काम किया गया। ताजमहल का निर्माण तक़रीबन 1653 में पूरा हो गया था और उस समय उसे बनाने में लगभग 32 मिलियन रुपयों का खर्चा लगा था, उस्ताद अहमद लाहौरी को प्रायः इसका प्रधान रूपांकनकर्ता माना जाता है।

प्रवेश द्वार

ताजमहल का मुख्‍य प्रवेश दक्षिण द्वार से है। यह प्रवेश द्वार 151 फीट लम्‍बा और 117 फीट चौड़ा है तथा इस प्रवेश द्वार की ऊँचाई 100 फीट है। पर्यटक यहाँ मुख्‍य प्रवेश द्वार के बगल में बने छोटे द्वारों से मुख्‍य परिसर में प्रवेश करते हैं। ताजमहल का मुख्‍य द्वार लाल सेंड स्‍टोन से बनाया हुआ है। यह मुख्य द्वार 30 मीटर ऊँचा है। इस मुख्य द्वार पर अरबी लिपि में क़ुरान की आयतें तराशी गई हैं। इस मुख्य द्वार के ऊपर हिन्‍दू शैली का छोटे गुम्‍बद के आकार का मंडप है और अत्‍यंत भव्‍य प्रतीत होता है।

मस्जिद

लाल सेंड स्‍टोन से बनी हुई एक मस्जिद ताज की बायीं ओर है। इस्‍लाम धर्म की एक आम बात यह है कि मक़बरे के पास एक मस्जिद का निर्माण किया जाता है, क्‍योंकि इससे उस हिस्‍से को एक पवित्रता नीति और पूजा का स्‍थान मिलता है। इस मस्जिद को अब भी शुकराने की नमाज़ के लिए उपयोग किया जाता है।

रबिन्द्रनाथ टैगोर ने अपने लेख, “दी टियर-ड्राप ऑन दी चीक ऑफ़ टाइम” में लिखे हैं की उस समय मुग़ल कालीन बहुत सी वस्तुकलाओ का वर्णन किया था, और भारतीय इतिहास की महान कृतियों को दुनिया के सामने रखा था। हर साल ताजमहल को लगभग 40-50 लाख लोग देखने आते है। 2007 में, ताजमहल को दुनिया के 7 अजूबो शामिल किया गया था। मुगल बादशाह की मुहब्बत और शिद्दत का परिणाम ही है, ‘ताजमहल’ जिसे खूबसूरती का नायाब हीरा कहा जाता है। गुंबदनुमा इस इमारत को जब आप सिर उठाकर ऊपर देखते हैं तो इसकी नक्काशीदार छतें और दीवारें किसी आश्चर्य से कम नहीं लगतीं।

शाहजहाँ और मुमताज़ महल का कब्र 

मुगल बादशाह शाहजहाँ और उनकी प्रेमिका मुमताज़ महल दोनो की कब्र ताजमहल के अंदर ही हैं। ताजमहल के मध्य में मुमताज़ महल कब्र को रखा गया है। बेगम मुमताज़ महल कब्र बड़ी और सफ़ेद मार्बल से बनी हुई, उनकी कब्र को काफी डिज़ाइन किया गया है। मुस्लिम परंपरा के अनुसार कब्र की विस्तृत सज्जा मन है, इसलिए शाहजहाँ एवं मुमताज़ के पार्थिव शरीर इसके निचे तुलनात्मक रूप से साधारण, असली कब्रों में दफ्न है, जिनके चेहरे दाये एवं मक्का की तरफ है। मुमताज़ महल की कब्र आतंरिक कक्ष में स्थित है। उनकी कब्र का आधार लगभग 55 मीटर का बना है. उनकी कब्र का आधार एवं ऊपर का श्रुंगारदान रूप, दोनों ही बहुमूल्य पत्थरो एवं रत्नों से जड़े है। इस पर किया गया सुलेखन मुमताज़ की पहचान एवं प्रशंसा है। शाहजहाँ की कब्र मुमताज़ की कब्र के दक्षिण की तरफ है। ऐसा कहा जाता हैं की मानसून की पहली वर्षा में पानी की बुँदे इनकी कब्र पर गिरती है। ऐसे तो ताजमहल मे कई कीमती रत्न थे परंतु अंग्रेज़ो ने उसे निकाल ले गये।

ताजमहल के पीछे एक बहुचर्चित कथा भी है, जिसके अनुसार जिन कारीगरों ने ताजमहल का निर्माण किया था, शाहजहाँ ने निर्माण होने के बाद उन कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे, ताकि ऐसा दूसरा ताजमहल कही और ना बने, लेकिन सौभाग्य से ये बात बिल्कुल असत्य हैं। ये सिर्फ़ बनावटी कहानी हैं, यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘ताजमहल’ न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है।

क्या आप ताजमहल के बारे मे ये रोचक बातें जानते हैं? – Taj Mahal Facts In Hindi 

  • ताज महल का निर्माण 1632 मे शुरू हुआ था, जो की 1653 मे समाप्त हुआ था इस तरह से ताजमहल को बनाने मे पूरे 22 साल लगे थे।
  • ताजमहल बनाते समय इस्तेमाल होने वाले सामान को स्थानांतरित करने के लिये लगभग 1500 हाथियों का उपयोग किया गया था।
  • ताजमहल का वस्तकला भारतिया फ़ारसियो, और इस्लामी शैलियों का मिश्रण हैं।
  • ताजमहल की कुल ऊंचाई तक़रीबन 73 m है।
  • ताजमहल का हर नीव वाले कोने मे एक-एक मीनार हैं। यह चारो मीनारे मक़बरे को संतुलन देती हैं।
  • ताज महल की चारो मीनारे 41.6 उँची हैं। इन्हे बाहर की ओर हल्का सा झुका दिया गया हैं. ताकि यह मीनारे भूकंप और कोई आपदा पर मक़बरे के उपर ना गिरे।
  • ताजमहल दिन में अलग-अलग समय में अलग-अलग रंगों में दिखाई देता है, सुबह के समय वह हल्का सा गुलाबी और शाम में दुधेरी सफ़ेद जैसा और रात में हल्का सुनहरा दिखाई देता है। लोगो का रंगों के बदलने से तात्पर्य महिलाओ के मूड (स्वभाव) के बदलने से है।
  • ताज महल का निर्माण के लिए राजस्थान, रूस, चिन, तिब्बत, अफ़ग़ानिस्तान, से सबसे अच्छी गुणवता वाले संगमरमर का उपयोग किया गया था।
  • ताजमहल महमोहन गार्डन और इतिहासिक इमारतो से घिरा हुआ है जिसमे मस्जिद और गेस्ट हाउस शामिल है, तक़रीबन 17 हेक्टर्स जमीन पर ताजमहल का परीसर फैला हुआ है।
  • ताजमहल के चारो तरफ की मीनारों की छाया एक अलग ही आईने जैसा प्रतिबिम्ब निर्मित करती है। इसे भी लोग एक चमत्कार ही मानते है बल्कि कई आर्किटेक्चर भी इस पहेली को सुलझा नही पाए है।
  • ताज महल को शुक्रवार के दिन बंद कर दिया जाता हैं, और केवल जुमे की नमाज़ के लिए खोला जाता हैं, ताज महल के अंदर एक मस्जिद भी हैं।

 

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