दमा ‘अस्थमा’ का लक्षण, कारण, घरेलु इलाज Asthma Treatment in Hindi

Asthma in Hindi / दमा (अस्थमा) एक सांस संबंधी बीमारी है। सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाने के कारण जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तब यह स्थिति दमा रोग कहलाती है। दमा से पीडि़त व्यक्ति को मौसम परिवर्तन के साथ ही कई समस्याओं का सामना पड़ता है। इतना ही नहीं अस्थ्मा रोगी को धूल-मिट्टी, प्रदूषण इत्यादि से भी बचकर रहना होता है। साथ ही खाने-पिने पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता हैं। आइये जाने दमा होने का कारण, लक्षण और घरेलु उपचार..(Dama ka Ilaj in Hindi)

दमा(अस्थमा) का लक्षण, कारण, घरेलु इलाज Asthma Treatment in Hindi

अस्थमा के प्रकार हिंदी में – Types of Asthma in Hindi

मुख्यतः अस्थमा दो प्रकार (Two Types of Asthma in Hindi) का होता हैं: एलर्जिक और नॉन-एलर्जिक। हालाँकि इसके आलावा भी कई प्रकार के होते हैं।

  • एलर्जिक (Allergic Asthma): इस प्रकार का अस्थमा या दमा किसी प्रकार की एलर्जी के संपर्क में होने के कारण होता है।
  • नॉन-एलर्जिक (Non Allergic Asthma): इस प्रकार का अस्थमा या दमा (Asthma in Hindi) तनाव, व्यायाम, ठंड या फ्लू जैसी बीमारियों, या अत्यधिक मौसम के संपर्क में आने, हवा में परेशानियों या कुछ दवाओं के कारण होता है।
  • सिजनल अस्थमा (Seasonal Asthma): पूरे वर्ष न होकर किसी विशेष मौसम में पराग कण या नमी के कारण होता है।
  • अकुपेशनल अस्थमा (Occupational Asthma): यह कारखानों में काम करने वाले लोगों को होता है।

दमा के लक्षण – Dama ke Lakshan Hindi Me

दमा होने का कारण – Asthma Hone ke Karan

  • औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ सूख जाने से दमा रोग हो जाता है।
  • खान-पान के गलत तरीके से दमा रोग हो सकता है।
  • मानसिक तनाव, क्रोध तथा अधिक भय के कारण भी दमा रोग हो सकता है।
  • खून में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा रोग हो सकता है।
  • नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।
  • खांसी, जुकाम तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा रोग हो सकता है।
  • नजला रोग होने के समय में संभोग क्रिया करने से दमा रोग हो सकता है।
  • भूख से अधिक भोजन खाने से दमा रोग हो सकता है।
  • मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से दमा रोग हो सकता है।
  • फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी तथा स्नायुमण्डल में कमजोरी हो जाने के कारण दमा रोग हो जाता है।
  • मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण दमा रोग हो सकता है।
  • धूल के कण, खोपड़ी के खुरण्ड, कुछ पौधों के पुष्परज, अण्डे तथा ऐसे ही बहुत सारे प्रत्यूजनक पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण दमा रोग हो सकता है।
  • मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों में जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा रोग हो सकता है।
  • मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से दमा रोग हो सकता है।
  • धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ रहने या धूम्रपान करने से दमा रोग हो सकता है।

 दमा का घरेलु आयुर्वेदिक इलाज – Asthma ke Gharelu Upchar

अडूसे के रस के साथ तुलसी का रस देने से दमा तथा पुरानी खांसी मिट जाती है। अडूसा का रस अथवा पत्ते पंसारी के यहां मिल जाते हैं। पत्तों को भीगोकर उनका रस निकाला जाता है।

मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।

तीन टोले फुले हुए सुहागे को चार तोले शहद में मिलाकर हर रोज लेने से दमा रोग मिट जाता है।

एक चौड़े गहरे बर्तन में गर्म पानी भरकर उसमें रोगी का आधा घंटा बैठने से दमे का दौरा रुक जाता है।

दमे में स्वास् फूलने पर रोगी को गर्म पानी पिलाना चाहिए।

स्वास रोग में सेंधा नमक और गाय का घी मिलाकर छाती पर मलने से तुरंत आराम मिलता है।

तेजपात के पत्तों के चूर्ण को अदरक के रस के साथ अथवा अदरक के मुरब्बे के साथ लेने पर दमे का प्रकोप नष्ट होता है।

दमा होने पर बड़ी पीपल 4 ग्राम और काकड़ा सिंगी 6 ग्राम दोनों को बारीक करके रख ले। पूर्णमासी के दिन गाय के दूध में चावल की खीर बनाकर, कांसे की थाली में रात को चांदनी में रख दें। अब उक्त दवा खीर पर फैला दे। दूसरे दिन निहार मुंह उस खीर को खा ले। इससे हर पूर्णमासी को एक साल तक खाए। दमा एवं श्वास ठीक हो जाएगा।

सुबह-सुबह सौ ग्राम अदरक का रस शहद के साथ पीने से दमा ठीक हो जाता है।

रात में एक-एक तोला सोंठ, भारंगी और बड़ी हरड़ का चूर्ण पानी के साथ लेने से दमा नष्ट होता है।

दो प्यारे पानी में एक चम्मच मुलहटी डालकर उबालें और काढ़ा बना ले। जब पानी पौन प्याला रह जाए तो उसे पी जाए। रोज सुबह-शाम खाना खाने के बाद इसे काढ़े को 7 दिन तक पीने से कैसा भी दमा दूर हो जाएगा।

यदि दमा शुरूआती अवस्था में है तो तुलसी के पत्तों के साथ दो-तीन काली मिर्च चबाए। दामे का रोग शांत हो जाएगा।

अदरक के साथ नींबू का रस चूसने से दमा रोग हल्का पड़ जाता है।

नींबू के 4 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से दमा व खांसी में लाभ होता है।

जब दमे का दौरा पड़ रहा हो तो चने के बराबर फिटकरी जीभ पर रखकर चूसे। दौरे में तुरंत आराम मिल जाएगा।

गरम पानी में कपड़ा भिगोकर उससे छाती को सेकने से दमे का दौरा रुक जाता है।

भुनी असली 50 ग्राम और भुनी काली मिर्च 12 ग्राम -दोनों को पीसकर रख लें। इसमें से 3 ग्राम चूर्ण सुबह पानी के साथ सेवन करने पर दमा एवं स्वास रोग में आराम पहुंचता है।

कांसे के दो बर्तन ले एक बर्तन में 200 ग्राम अदरक का रस निकाल ले। दूसरे बर्तन में गौ का शुद्ध घी 200 ग्राम डाल कर, दोनों बर्तनों को आग पर रख दें। जब दोनों गरम हो जाए तो अदरक का रस गाय के घी में डाल दे। फिर नीचे उतारकर थाली में ढंक दें। ठंडा होने पर बोतल में भर ले। रोज शाम को एक गिलास मीठे दूध में, दो बड़े चम्मच या दवा डालकर रोगी को पिलाए। थोड़ी देर में ही कफ निकल जाएगा। दमे का दौरा बंद हो जाएगा। यह प्रयोग 10-12 दिन करने से दमे का समूल नाश होता है।

सुहागे की खील बनाकर चूर्ण तैयार कर लें। इसमें मुलहठी का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर आधा से एक ग्राम की मात्रा शहद के साथ चाटें। इससे श्वास नली के कष्ट दूर होकर दमा, खांसी और जुकाम में लाभ होता है | इस चूर्ण को गरम जल से भी ले सकते हैं। आयु के अनुसार मात्रा अधिक या कम कर सकते हैं। तीन-चार सप्ताह तक सेवन करते रहने से साधारण दमा ठीक हो जाता है।

180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।

⇒ एक पका केला छिलका लेकर चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक छोटा चम्मच दो ग्राम कपड़ा छान की हुई काली मिर्च भर दें। फिर उसे बगैर छीले ही, केले के वृक्ष के पत्ते में अच्छी तरह लपेट कर डोरे से बांध कर 2-3 घंटे रख दें। बाद में केले के पत्ते सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की उपर का पत्ता जले। ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें।

⇒ कॉफी में मौजूद कैफीन अस्थमा के इलाज में मदद करता है। यह नाक के खंड को साफ कर देता है जिससे आप प्रभावी ढंग से सांस ले सकते हैं। इस घटना में कि आप एस्प्रेसो की ओर झुकाव नहीं करते हैं, अंधेरे चाय के लिए जाते हैं। किसी भी मामले में, प्रति दिन 3 कप का सेवन सीमित करें।

अस्थमा रोगियों के आहार – Asthma Patient Diet in Hindi

  • गेहूँ, पुराना चावल, मूँग, कुल्थी, जौ, पटोल का सेवन करें।
  • गुनगुने पानी का सेवन करने से अस्थमा के इलाज में मदद मिलती है।
  • अस्थमा के मरीजों को आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए। पालक और गाजर का रस अस्थमा में काफी फायदेमंद होता है। हरी सब्जियों को खाने से फेफड़ों में कफ जमा नही हो पाता है, जिससे अस्थमा के रोगियों को अटैक आने जैसी आशंकाएं कम हो जाती है।
  • आहार में लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को जरूर शामिल करें, यह अस्थमा से लड़ने में मदद करते हैं।
  • शहद का सेवन करें।
  • सूखे मेवों में मैग्नीशियम और विटामिन ई पाया जाता है अत: अस्थमा के मरीजों के लिए ये अच्छा स्नैक है।

अस्थमा रोग में क्या ना खाएं – Food to Avoid in Asthma

  • अनाजनया चावल, मैदा
  • दाल उड़द, मटर, चनाकाबुली चना
  • फल एवं सब्जियां: आलू तथा अन्य कन्द, सरसों का साग
  • अन्य धूल, धुआँ, जलन पैदा करने वाले भोज्य पदार्थ, मछली, अत्यधिक मात्रा में तेल, सुपारी, ठंडा भोजन, बासी भोजन, दूषित जल, रूखा भोजन, तला हुआ पचने में भरी भोज्य पदार्थ
  • सख्त मना: तैलीय, मासलेदार, घी, ज्यादा नमक, बेकरी उत्पाद, जंक फ़ूड, फ़ास्ट फ़ूड  डिब्बाबंद भोजन

दमा पीड़ित रोगी के लिए विशेष सलाह – Asthma Tips in Hindi

  • रोगी को गर्म बिस्तर पर सोना चाहिए।
  • पानी हल्का गरम पीना चाहिए।
  • धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
  • भोजन में मिर्च-मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • धूल तथा धुंए भरे वातावरण से बचना चाहिए।
  • मानसिक परेशानी, तनाव, क्रोध तथा लड़ाई-झगडों से बचना चाहिए।
  • जितना हो सके अपने आप को सक्रिय रखें, नियमित व्यायाम करें।
  • सुनिश्चित करें कि आपके रहने का वातावरण स्वच्छ और धूल रहित हो।
  • शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अधिक ठण्ड से अपना बचाव करना चाहिए, विशेष रूप से मौसम परिवर्तन के समय।
  • दमे के रोगियों को दूध, पालक, चौलाई, सोयाबीन, सूखे मेवे, आंवले, गाजर, पनीर और तिल नियमित रूप से खाते रहने चाहिए। इनसे आवश्यक कैलशियम की आपूर्ति होती रहती है।

Please Note :- अस्थमा की आपकी स्थिति के आधार पर, चिकित्सक द्वारा सलाह के अनुसार दवाएं इनहेलर्स या नेबुलाइजेशन के रूप में हो सकती हैं। इसलिए बेहतर इलाज के लिए किसी अच्छे डॉक्टर से जरूर मिले।


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