क्वर्टी कीबोर्ड का इतिहास और जानकारी | Qwerty Keyboard History in Hindi

Qwerty Keyboard in Hindi- कंप्यूटर, लैपटॉप या फ़ोन का कीबोर्ड देख कर आपके भी दिमाग में ये सवाल आता होगा की इसके लेटर एक लाइन में क्यों नहीं हैं जैसे – ABCD? लेटर इधर-उधर क्यों हैं? तो चलिए जाने आखिर ऐसे क्यों हैं..

क्वर्टी कीबोर्ड का इतिहास और जानकारी | Qwerty Keyboard History

क्वर्टी कीबोर्ड की जानकारी – Qwerty Keyboard Information in Hindi

दरअसल हम जिस जमाने में जी रहे हैं, वो जमाना कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन का हैं। आज के समय में किसी तरह का टाइप करना हो तो इसी से टाइप करते हैं। लेकिन जब कंप्यूटर नहीं था तब न्यूज़पेपर या डॉक्यूमेंट में कुछ लिखने के लिए लोग टाइपराइटर मशीन का इस्तेमाल करते थे। और आज जो कीबोर्ड हम इस्तेमाल करते हैं वो कीबोर्ड टाइपराइटर का ही कीबोर्ड हैं। लेकिन समय के साथ आज भी यही कीबोर्ड लेआउट कंप्यूटर और फ़ोन में भी इस्तेमाल हो रहा हैं। इस कीबोर्ड का नाम हैं क्वर्टी कीबोर्ड। इसका यह नाम कीबोर्ड की सबसे ऊपर वाली पंक्ति के पहले छह अक्षर के नाम पर पड़ा है।

QWERTY कीबोर्ड लेआउट को 1868 मे क्रिस्टोफर लाथम शोल्स ने डिज़ाइन किया था जो की एक अख़बार के संपादक थे। 1866 में अख़बार के कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। इसके बाद उस संसथान के प्रमुख ने क्रिस्टोफर लाथम से पूछा कि क्या वे किसी ऐसी मशीन का निर्माण कर सकते हैं, जिससे कागज़ पर आसानी से लिखा जा सके। इस आग्रह पर क्रिस्टोफर ने जल्द ही एक टाइपराइटर का आविष्कार किया। आगे 23 जून, 1868 को उन्हें इस टाइपराइटर पर पेटेंट प्राप्त हुआ। शुरुआत में इस टाइपराइटर के कीबोर्ड पर एक काली और सफेद कुंजी थी, और 0 तथा 1 प्रिंट करने के लिए कोई कुंजी नहीं थी। कारण यह था कि 0 और 1 को प्रिंट करने के लिए ‘O’ और ‘I’ का प्रयोग किया जाना था।

हलांकि, इस टाइपराइटर के साथ एक और दिक्कत थी। इसकी सारी कुंजियाँ धातु की बनी थीं और अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में व्यवस्थित थीं। इसलिए जब कोई तेजी से टाइपिंग करता था, तो एक ही पंक्ति में आस-पास के अक्षर बार-बार दबते थे। इस समस्या का हल निकालने के बाद क्रिस्टोफर ने कीबोर्ड का एक नया डिजाइन तैयार किया। इस प्रकार ‘QWERTY’ कीबोर्ड सामने आया। असल में अंग्रेजी के ज्यादातर अक्षरों में एक स्वर जरूर होता है।

उन्होंने कीबोर्ड का डिज़ाइन करते समय वो अक्षर एक तरफ लगाए जो ज्यादा प्रयोग होने थे और वो एक तरफ जो कम प्रयोग होने थे। दरअसल, टाइपराइटर मैकेनिकल ईनपुट पर काम करता है इसमें जिस अक्षर की कुँजी दबाई जाती है उसी अक्षर की धातु की पट्टी कागज पर जाकर लगती है तब अक्षर छपता है।

हालाँकि शुरुवात में टाइपराइटर के कीबोर्ड के अक्षर लगातार लिखे होते थे जैसे ABCDE.. लेकिन ऐसा कीबोर्ड टाइपिंग करते समय टाइपराइटर में जाम हो जाती थी। मतलब, आपस में फंस जाती थी। जिससे गलती होने के चांस बढ़ गए और टाइपराटर में बैकस्पेस का भी बटन नही होता। अगर एक बार गलती हो जाती तो पूरा कागज दोबारा टाइप करना पड़ता। इसलिए शाॅल्स ने एक नया कीबोर्ड तैयार किया।

उन्होंने इसको डिज़ाइन करने से पहले सभी तरह के कुंजी कॉम्बिनेशन कोशिश किये और पाया की QWERTY कॉम्बिनेशन ही सबसे अच्छा है। इसमें कुँजियों के आपस में फंसने की संख्या ना के बराबर हो गई। उन्होंने जो अक्षर बहुत ज्यादा प्रयोग होते थे जैसे: E और I. उन्हें एक निश्चित राॅड पर बीच में लगाया। जबकि जो अक्षर कम प्रयोग होने थे जैसे: Z और X. उन्हें एक निश्चित राॅड पर कोने में लगाया। बाद में यही कीबोर्ड QWERTY keyboard के नाम से पॉपुलर हुवा।

हालाँकि आज के समय में कंप्यूटर या फ़ोन में कीबोर्ड फंसने का कोई चांस नहीं हैं फिर भी ये कीबोर्ड इस्तेमाल होता हैं। क्यूंकि सभी को इसी कीबोर्ड में हैबिट हो गया हैं और लोग इसी को कीबोर्ड का स्टैण्डर्ड मानते हैं। इसके आलावा भी मार्किट में और भी कीबोर्ड आएं, लेकिन वो ज्यादा फेमस नहीं हुवे। इसका एक कारण यह भी हैं की दुनिया में ज्यादातर क्वर्टी कीबोर्ड का ही इस्तेमाल होता हैं और अगर कोई दूसरा कीबोर्ड में टाइपिंग सीखे तो उस हर जगह क्वर्टी कीबोर्ड ही मिलेगा। ऐसे में उसे टाइपिंग में परेशानी होगा।

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