कान का बहना, मवाद का घरेलु उपचार | Otorrhoea Treatment Hindi

Otorrhoea / कान हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। कभी-कभी कई कारणों से कानों में अक्सर फुंसियां हो जाती है और यही फुंसियां जब पककर फूट जाती हैं तो उनमें से मवाद निकलने लगता है। कान से मवाद आने को मरीज गंभीरता से नहीं लेता, इसे अत्यंत गंभीरता से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श एवं चिकित्सा अवश्य लेना चाहिए अन्यथा यह कभी-कभी गंभीर व्याधियों जैसे मेनिनजाइटिस एवं मस्तिष्क के एक विशेष प्रकार के कैंसर को उत्पन्न कर सकता है। यदि यह रोग बहुत दिनों तक ठीक न हो तो बहरापन या और भी कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। हालाँकि कान का बहना हम घरेलु उपचार से ठीक कर सकते हैं।

कान का बहना, मवाद का घरेलु उपचार | Otorrhoea Treatment Hindiकान में मवाद किसी भी उम्र में आ सकता है, किंतु प्रायः यह एक वर्ष से छोटे बच्चों या ऐसे बच्चों में ज्यादा होता है। कान से मवाद आने का स्थान मध्य कर्ण का संक्रमण है। मध्य कर्ण में सूजन होकर, पककर पर्दा फटकर मवाद आने लगता है। मध्य कान में संक्रमण पहुँचने के तीन रास्ते हैं, जिसमें 80-90 प्रश कारण गले से कान जोड़ने वाली नली है। इसके द्वारा नाक एवं गले की सामान्य सर्दी-जुकाम, टांसिलाइटिस, खाँसी आदि कारणों से मध्य कर्ण में संक्रमण पहुँचता है। कान का बहना बहुत ही कष्ट कर होता है यदि एक बार कान का बहना स्टार्ट हो गया है तो बहुत ही तकलीफ पंहुचा सकते है।

कान बहने का कारण –

  • कान में खुजली होना।
  • कान को साफ़ करने के लिए नुकीले वस्तु का प्रयोग।
  • कभी-कभी कान में चोट लग जाने की वजह से भी कान में से मवाद बहने लगता है।
  • कान में जख्म होने की वजह से फुंसी होना।
  • फुंसी के पक जाना और मवाद बहना।
  • गैस रोग के कारण भी कान में से मवाद बहने लगता है।

कान बहने का घरेलु इलाज – Kan ka Bahna Upchar

1). सरसों का तेल :-

  • 12 ग्राम सरसों का तेल गर्म करके, उसमें 4 ग्राम “बोरिक एसिड” पाउडर मिला दे। कान में मवाद पड़ जाने पर दो बूंदे कान में डालें। पुराना-से-पुराना बहता कान 10 दिनों में ठीक हो जाएगा।
  • 50 मिलीलीटर सरसो के तेल और 4 ग्राम मोम को किसी बर्तन में डालकर गर्म करने के लिये रख दें। जब पकने पर मोम पिघल जाये तो इसे आग पर से उतारकर इसके अन्दर 7 ग्राम पिसी हुई फिटकरी डालकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना बन्द हो जाता है।
  • पिब का बहाव रोकने के लिए महुआ, जामुन, चमेली, आर आवला के पत्ते और बढ़ के जड़ की खाल सबका रस सरसों के तेल में पकाकर तेल को कान में डाले अवश्य फायदा होगा।
  • 100 मिलीलीटर सरसों या तिल का तेल गर्म करें और जब इसमें उबाल आने लगे तो आंच बन्द कर दें। जब यह कुछ ठंडा हो जाए तो इसमें 10 ग्राम राई, 10 ग्राम लहसुन और 2 ग्राम कपूर डालकर ढककर रख दें। इसके बाद इसे छानकर बोतल में भरकर रख लें। इस तेल को सुबह-शाम 4 से 5 बूंद कान में डालने से कान का घाव ठीक हो जाता है जिसके फलस्वरूप मवाद आना भी बन्द हो जाता है।
  • 10 तोला सरसों के तेल में 1 तोला रतनजोत मिलाकर पकाएं। जब रतनजोत जलने लगे तो इसे आग से उतारें और इस तेल को साफ शीशी में भरकर रख लें। कान के बहने व कान दर्द में इसे दो बूंद कानों में डालने से लाभ होता है।

2). नीम :-

  • नीम के तेल में शहद मिलाकर रूई के फोहे पर इसे लगाएं, फिर कान को साफ करके इसके अन्दर फोहे को लगाएं इससे मवाद बहना ठीक हो जाता है।
  • 3 ग्राम हल्दी, 10 ग्राम नीम के पत्तों का चूर्ण और 10 ग्राम लहसुन की कलियों को 200 मिलीलीटर सरसों के तेल में डालकर पका लें। इस तेल को बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान में से मवाद का बहना ठीक हो जाता है।

3). रसौत :- रसौत, शहद और स्त्री का दूध मिलाकर कान साफ करके दो-तीन बून्द दिन में 3 बार डालने से कान का बहना रुक जाएगा।

4). तिल के तेल :- 10 मिलीलीटर तिल के तेल और 40 मिलीलीटर हुलहुल के रस को एक साथ मिलाकर आग पर पकाने के लिये रख दें। पकने के बाद जब बस तेल ही बाकी रह जाये तो इसे आग पर से उतारकर छान लें। इस तेल को कान में डालने से कान में से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

5). सिलोचन :- बारीक़ पिसा सिलोचन नली द्वारा दिन में दो-तीन बार डालने से कान का बहना बंद हो जाता है।

6). कीकर के फूल :- कान के बहने में कीकर के फूलों को तेल में पकाकर छान ले। यह कान के बहने के सबसे उत्तम दवा है।

7). माजूफल :- 5 ग्राम माजूफल को पीसकर और कपड़े में छानकर 50 मिलीलीटर शराब में मिला लें। इसकी 2-2 बूंदें कान को साफ करके सुबह-शाम डालने से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

8). बबूल के फल :- बबूल के फल को सरसों के तेल में डालकर आग पर जलाएं। इस तेल को छानकर कान में दो बूंदें डालने से कान का बहना बंद हो जाता है।

9). प्याज :- सफेद प्याज को गर्म राख के अन्दर दबाकर रख दें। कुछ समय बाद उस प्याज को निकालकर उसका रस निकाल लें। इस रस को बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान में से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

10). इंद्रायण :- इंद्रायण का कच्चा-ताजा फल लेकर तिल के तेल में आग पर पकाएं। फिर उसे छानकर शीशी में भर लें। इस तेल की एक-दो बूंद रोज सुबह शाम डालने से 20-25 दिनों में लाभ हो जाता है। इस से कान के कीड़े भी मर जाते हैं।

11). फिटकरी :- भुनी हुई 10 ग्राम फिटकरी और 1 ग्राम हल्दी को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को थोड़ा सा कान में डालने से कान में से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

12). केले के पत्तों :- केले के पत्तों के रस में समुद्री फेन मिलाकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

13). मूली :- मूली का रस 60 ग्राम और काले तिलों का तेल 60 ग्राम – कर दोनों को मिलाकर मंदी आंच पर रखे। जब तेल मात्र रह जाए, तो उसे उतार ले। इस तेल की चार-पांच बुँदे कान में टपकाने से कान का बहना तथा दर्द ठीक हो जाता है।

14). चमेली :- 500 मिलीलीटर चमेली के पत्तों के रस को 100 मिलीलीटर तिल के तेल में मिलाकर पकाने के लिए आग पर रख दें। जब पकने पर रस बिल्कुल जल जाये तो बचे हुये तेल को छानकर शीशी में भरकर रख लें। इस तेल को बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान में से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

15). अदरक :- मधु, अदरक का रस व थोड़ा सा नमक मिलाकर गुनगुना कर लें और उसे कानों में डालें। कान का दर्द चला जाएगा। बहने में भी आराम होगा।

16). लहसुन :- लहसुन को सरसों के तेल में उबालकर कान में डालने से कान का दर्द, कान में घाव और कान से मवाद बहना ठीक हो जाता है।

17). बबूल :- बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर कान में डालने से लाभ मिलता है इसके बाद एक सलाई लेकर उसमें बारीक कपड़ा या रूई लपेटकर धीरे-धीरे कान में इधर-उधर घुमाना चाहिए और फूली हुई फिटकरी को थोड़ा सा पानी मिलाकर कान में डालना चाहिए। इससे कान से मवाद बहना बन्द हो जाता है।

18). स्व-मूत्र को गरम करके उसकी 2-2 बुँदे बोले कान में डालने से 3 दिन में ही कान का बहना, कान का पकना आदि रोग शर्तिया ठीक हो जाते हैं।

अगर कान ज्यादा दिन से बह रही हो या ठीक नहीं हो रहा हैं तो बेहतर इलाज के लिए कोई अच्छे डॉक्टर से मिले।


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