मंगल ग्रह की जानकारी, उत्पत्ति, तथ्य | Mars Planet Information in Hindi

Mars Planet / मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। पृथ्वी से इसकी आभा रक्तिम दिखती है, जिस वजह से इसे “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है। सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं – “स्थलीय ग्रह” जिनमें ज़मीन होती है और “गैसीय ग्रह” जिनमें अधिकतर गैस ही गैस है। पृथ्वी की तरह, मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है। इसका वातावरण विरल है। इसकी सतह देखने पर चंद्रमा के गर्त और पृथ्वी के ज्वालामुखियों, घाटियों, रेगिस्तान और ध्रुवीय बर्फीली चोटियों की याद दिलाती है। हमारे सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स मंगल पर ही स्थित है। साथ ही विशालतम कैन्यन वैलेस मैरीनेरिस भी यहीं पर स्थित है। अपनी भौगोलिक विशेषताओं के अलावा, मंगल का घूर्णन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान हैं। मंगल को रात में नंगी आंखों से देखा जा सकता है। मंगल ग्रह को युद्ध का भगवान भी कहते हैं।

मंगल ग्रह की जानकारी, उत्पत्ति, तथ्य | Mars Planet Information in HindiMars Planet Profile

Equatorial Diameter:6,792 km
Polar Diameter:6,752 km
Mass:6.42 x 10^23 kg (10.7% Earth)
Moons:2 (Phobos & Deimos)
Orbit Distance:227,943,824 km (1.52 AU)
Orbit Period:687 days (1.9 years)
Surface Temperature:-153 to 20 °C
First Record:2nd millennium BC
Recorded By:Egyptian astronomers

 

मंगल ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी – Mars Planet Information & History in Hindi

मंगल के दो चन्द्रमा, फो़बोस और डिमोज़ हैं, जो छोटे और अनियमित आकार के हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह 5261 यूरेका के समान, क्षुद्रग्रह है जो मंगल के गुरुत्व के कारण यहाँ फंस गये हैं। मंगल को पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकता है। इसका आभासी परिमाण -2.9, तक पहुँच सकता है और यह् चमक सिर्फ शुक्र, चन्द्रमा और सूर्य के द्वारा ही पार की जा सकती है, यद्यपि अधिकांश समय बृहस्पति, मंगल की तुलना में नंगी आँखों को अधिक उज्जवल दिखाई देता है।

मंगल ग्रह सूर्य से लगभग 22.80 करोड़ किलोमीटर दूर है ( कक्षा :1.52: 227,940,000 किमी = ए.यू. सूर्य से )। यह सूर्य की परिक्रमा बिल्कुल गोल नहीं बल्कि अंडाकार पथ पर करता है। इसलिए कभी तो सूर्य से लगभग 24.90 करोड़ किलोमीटर दूर हो जाता है और कभी सूर्य से उसकी दूरी केवल क़रीब 20.70 करोड किलोमीटर रह जाती है। मंगल के गोले का व्यास 6794 किलोमीटर है और द्रव्यमान 6.4219e23 किलो है। वह अपनी धुरी पर 24 घंटे, 37 मिनट और 22.1 सेकेंड में घूम जाता है। उसका एक दिन हमारी पृथ्वी के 1.026 दिन के बराबर होता है। वह सूर्य की परिक्रमा हमारी पृथ्वी के दिनों के हिसाब से 686.98 दिन में करता है। यानी, उसका एक वर्ष हमारे 2 वर्षों से भी बड़ा होता है। मंगल की कक्षा दिर्घवृत्त में है जिसके कारण इसके तापमान में सूर्य से दूरस्थ बिन्दू और निकटस्थ बिन्दू के मध्य 30 डिग्री सेल्सीयस का अंतर आता है। इससे मंगल के मौसम पर असर होता है। मंगल पर औसत तापमान 218 डिग्री केल्वीन ( – 55 डिग्री सेल्सीयस ) है। इसलिए मंगल ग्रह का दिन में अधिकतम औसत तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम औसत तापमान शून्य से 133 डिग्री सेल्सियस तक नीचे होता है। मंगल पृथ्वी से बहुत छोटा है लेकिन उसकी सतह का क्षेत्रफल पृथ्वी की सतह के क्षेत्रफल के बराबर ही है, क्योंकि मंगल पर सागर नहीं है ।

मंगल, पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है। यह पृथ्वी से कम घना है, इसके पास पृथ्वी का 15 % आयतन और 11 % द्रव्यमान है। हालांकि मंगल, बुध से बड़ा और अधिक भारी है पर बुध की सघनता ज्यादा है। फलस्वरूप दोनों ग्रहों का सतही गुरुत्वीय खिंचाव लगभग एक समान है। मंगल ग्रह की सतह का लाल- नारंगी रंग लौह आक्साइड (फेरिक आक्साइड) के कारण है, जिसे सामान्यतः हैमेटाईट या जंग के रूप में जाना जाता है। यह बटरस्कॉच भी दिख सकता है, तथा अन्य आम सतह रंग, भूरा, सुनहरा और हरे शामिल करते है जो कि खनिजों पर आधारित होता है।

हाल ही में वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित कर दिया कि मंगल भी हमारी पृथ्वी की तरह एक ठोस ग्रह है और यहाँ की सतह रूखी और पथरीली हैं। मंगल की सतह पर मैदान, पहाड़ और घाटियां हैं। वहां धूल के भयंकर तूफ़ान उठते रहते हैं। चाँद की तरह मंगल ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में उच्चभूमि है और उत्तरी गोलार्ध में मैदान हैं। इस ग्रह के भीतरी भाग में 1700 किलोमीटर रेडियस का कोर ( त्रिज्या का केन्द्रक ) है, उसके चारो पिघली चट्टानो का पिघला मैन्टल है जो पृथ्वी से मैंटल से ज़्यादा घना है, इनके बाहर एक पतला भूपृष्ठ है। मार्स ग्लोबल सर्वेयर के आंकड़ो से भूपृष्ठ की मोटाई दक्षिणी गोलार्ध में 80 किलोमीटर मोटा है लेकिन उत्तरी गोलार्ध में केवल 35 किलोमीटर मोटा है। चट्टानी ग्रहों में मंगल का कम घनत्व यह दर्शाता है कि इसके केन्द्रक में सल्फर की मात्रा लोहे की मात्रा से ज़्यादा है। मंगल का दक्षिणी गोलार्ध चन्द्रमा के जैसे क्रेटरों से भरा हुआ उठा हुआ और प्राचीन है। इसके विपरित उत्तरी गोलार्ध नये पठारो का बना और निचला है। इन दोनो की सीमा पर उंचाई में एक आकस्मिक उंचाई में बदलाव दिखायी देता है। इस आकस्मिक उंचाई में बदलाव के कारण अज्ञात है। मार्श ग्लोबल सर्वेयर यान ने जो 3 आयामी मंगल का नक्शा बनाय है इन सभी रचनाओ को दिखाता है। मंगल के दोनों ध्रुवो पर बर्फ़ की परत है। यह बर्फ़ की परत पानी और कार्बन डाय आक्साईड की बर्फ़ है। उत्तरी गोलार्ध की गर्मीयो में कारबन डायाअक्साईड की बर्फ़ पिघल जाती है और पानी की बर्फ़ की तह रह जाती है। मार्स एक्सप्रेस ने यह अब दक्षिणी गोलार्ध में भी देखा है। अन्य स्थानो पर भी पानी की बर्फ़ के होने की आशा है।

मंगल पर ज़मीन खिसकने की घटनाएँ भी आम तौर पर होती हैं, मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण भी पृथ्वी के मुक़ाबले काफ़ी कम है। बुध और चन्द्रमा की तरह मंगल में भी क्रियाशील प्लेट टेक्टोनिक्स नहीं है क्योंकि मंगल में मोड़दार पर्वत (पृथ्वी पर हिमालय) नहीं है। प्लेट की गतिविधी ना होने से सतह के नीचे के गर्म स्थान अपनी जगह रहते हैं, तथा कम गुरुत्व के कारण थारसीस उभार जैसे उभारो तथा ज्वालामुखी की संभावना ज़्यादा रहती है। हालिया ज्वालामुखीय गतिविधी के कोई प्रमाण नहीं मीले है। मार्स ग्लोबल सर्वेयर के अनुमानो से मंगल में किसी समय टेक्टानिक गतिविधी रही होंगी। इतिहास में मंगल पृथ्वी जैसा रहा होगा।

चन्द्रमा के अलावा मंगल अकेला ग्रह है जिस पर मानव निर्मित यान पहुंचा है। 1960 के दशक में पहली बार अंतरिक्ष यान यहाँ उतरा था, 1990 के आख़िर तक मंगल के सतह की पूरी तस्वीर खींची जा चुकी थी। सबसे पहले मंगल पर 1965 में मैरीनर – 4 यान भेजा गया था। उसके बाद इस ग्रह पर मार्स 2 ( Mars 2 ) जो मंगल पर उतरा भी था, के अलावा बहुत सारे यान भेजे गये है। 1976 में दो वाइकिंग यान भी मंगल पर उतरे थे। इसके 20 वर्ष पश्चात 4 जुलाई 1997 को मार्श पाथफाईंडर मंगल पर उतरा था। 2004 में मार्स एक्स्पेडीसन रोवर प्रोजेक्ट के दो वाहन स्प्रिट तथा ओपरच्युनिटी मंगल पर भौगोलिक आंकड़े और तस्वीरे भेजने उतरे थे। 2008 में फिनिक्स यान मंगल के उत्तरी पठारो में पानी की खोज के लिये उतरा था। मंगल की कक्षा में मार्स रीकानैसेन्स ओर्बीटर मार्स ओडीसी तथा मार्स एक्सप्रेस यान है। भारतीय वैज्ञानिक भविष्य में मंगल अभियान की योजना बना रहे हैं।

धर्म ग्रंथो और पुराणों में — मंगल ग्रह प्राचीनकाल से ही मानव का ध्यान आकर्षित करता रहा है। हमारी पौराणिक कथाओं में इसे पृथ्वी का पुत्र माना गया है। शिव पुराण में कहा गया है कि यह शिव के पसीने की बूंद से पैदा हुआ और देवता बन कर आकाश में स्थापित हो गया। रोम और यूनान के प्राचीन निवासी लाल रंग के कारण इसे युद्द का देवता (यूनानी: Ares) मानते थे। रोमन देवता मार्स कृषि देवता का देवता था। इसलिए मार्च महीने का नाम भी मंगल ग्रह से लिया गया है।


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