बुध ग्रह की जानकारी, उत्पति, तथ्य | Mercury Planet Information in Hindi

बुध ग्रह (Mercury) सूर्य से सबसे पहला / पास का ग्रह है और द्रव्यमान में आंठवा सबसे बड़ा ग्रह है और गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी की अपेक्षा एक चौथाई है। यह सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह है, जिसके पास कोई उपग्रह नहीं है। इसका परिक्रमण काल लगभग 88 दिन है। पृथ्वी से देखने पर, यह अपनी कक्षा के ईर्द गिर्द 116 दिवसो में घूमता नजर आता है जो कि ग्रहों में सबसे तेज है। बुध ग्रह का व्यास 4880 किमी जो सौर मंडल में दो चन्द्रमा गुरु का गेनीमेड और शनि का टाईटन व्यास में बुध से बडे है लेकिन द्रव्यमान में आधे हैं। बुध सामान्यतः नंगी आंखो से सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले (दो घंटा पहले) देखा जा सकता है। बुध सूर्य के काफ़ी समीप होने से इसे देखना मुश्किल होता है।

बुध ग्रह की जानकारी, उत्पति, तथ्य | Mercury Planet Information in Hindiबुध के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी – Mercury Planet Information & History in Hindi

बुध को पृथ्वी जैसे अन्य ग्रहों के समान मौसमों का कोई भी अनुभव नहीं है। यह जकडा हुआ है इसलिए इसके घूर्णन की राह सौरमंडल में अद्वितीय है। किसी स्थिर खडे सितारे के सापेक्ष देखने पर, यह हर दो कक्षीय प्रदक्षिणा के दरम्यान अपनी धूरी के ईर्दगिर्द ठीक तीन बार घूम लेता है। सूर्य की ओर से, किसी ऐसे फ्रेम ऑफ रिफरेंस में जो कक्षीय गति से घूमता है, देखने पर यह हरेक दो बुध वर्षों में मात्र एक बार घूमता नजर आता है। इस कारण बुध ग्रह पर कोई पर्यवेक्षक एक दिवस हरेक दो वर्षों का देखेगा।

बुध ग्रह सौरमंडल के चार स्थलीय ग्रहों में से एक है, तथा यह पृथ्वी के समान एक चट्टानी पिंड है। यह 2,439.7 किमी की विषुववृत्तिय त्रिज्या वाला सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है। बुध ग्रह सौरमंडल के बडे उपग्रहों गेनिमेड और टाइटन से भी छोटा है, हालांकि यह उनसे भारी है। बुध तकरीबन 70% धातु व 30% सिलिकेट पदार्थ का बना है। बुध का 5.427 ग्राम/सेमी3 का घनत्व सौरमंडल में उच्चतम के दूसरे क्रम पर है, यह पृथ्वी के 5.515 ग्राम/सेमी3 के घनत्व से मात्र थोडा सा कम है। यदि गुरुत्वाकर्षण संपीड़न के प्रभाव को गुणनखंडो मे बांट दिया जाए, तब 5.3 ग्राम/सेमी3 बनाम पृथ्वी के 4.4 ग्राम/सेमी3 के असंकुचित घनत्व के साथ, बुध जिस पदार्थ से बना है वह सघनतम होगा।

बुध की सतह पर तापमान 90 डीग्री केल्वीन से 700 डीग्री केल्वीन तक जाता है। शुक्र पर तापमान इससे गर्म है लेकिन स्थायी है। बुध पर एक हल्का (पतला) वातावरण है जो मुख्यतः सौर हवा से लगातार प्राप्त होते परमाणुओ से बना है। बुध बहुत गर्म है जिससे इस ग्रह पर ये परमाणु टिक नहीं पाते है और परमाणु उड़कर अंतरिक्ष में चले जाते हैं। जहां पृथ्वी और शुक्र के वातावरण स्थिर है वंही पर बुध के वातावरण का पुननिर्माण होते रहता है।

बुध की सतह पर गढ्ढे काफ़ी गहरे है, कुछ सैकड़ो किमी लम्बे और तीन किमी तक गहरे है। ऐसा प्रतित होता है कि बुध की सतह लगभग 0.1% संकुचित हुयी है। बुध की सतह पर कैलोरीस घाटी है जो लगभग 1300 किमी व्यास की है। यह चन्द्रमा के मारीया घाटी के जैसी है। शायद यह भी किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के टकराने से बनी है। इन गड्डो के अलाबा बुध ग्रह में कुछ सपाट पठार भी है जो शायद भूतकाल के ज्वालामुखिय गतिविधीयो से बने है। मैरीनर से प्राप्त आंकड़े बताते है कि बुध पर कुछ ज्वालामुखिय गतिविधीयां है लेकिन इसे प्रमाणित करने कुछ और आंकड़े चाहिये। आश्चर्यजनक रूप से बुध के उत्तरी ध्रुवो के गड्डो में पानी की बर्फ़ के प्रमाण मीले है। बुध पर हल्का सा चुंबकिय क्षेत्र है जो पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र की क्षमता का 1% है। बुध का कोई भी ज्ञात चन्द्रमा नहीं है।

बुध को हमारे चन्द्र्मा का भाई कहा जा सकता है दोनो की सतह पर उलकापात से बने ढेर सारे गढ्ढे ( क्रेटर) है। लेकिन बुध का घनत्व चन्द्रमा के घनत्व से कहीं ज़्यादा है (5.43 ग्राम / घन सेमी और 3.34 ग्राम / घन सेमी)। बुध की सतह स्थायी है, उस पर परतो में कोई गतिविधी नहीं है। बुध का घनत्व 5.43 ग्राम / सेमी है और यह पृथ्वी के बाद सारे सौर मण्ड्ल में सबसे ज़्यादा घनत्व वाला पिंड है। पृथ्वी का घनत्व उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण ज़्यादा है अन्यथा बुध का घनत्व सबसे ज़्यादा होता, बुध का घनत्व उसके लोहे की कोर के कारण है। इससे ऐसा प्रतित होता है कि बुध का लौह केन्द्र पृथ्वी के लौह केन्द्र से बड़ा है, शायद बाकि सभी ग्रहो के के केन्द्र से भी ज़्यादा। बुध की सतह पर सीलीकेट की एक बारीक पपड़ी है। बुध के केन्द्र में 1800 किमी से 1900 किमी व्यास की एक लोहे की गुठली है। सीलीकेट की परत (पृथ्वी जैसे ही) 500 किमी से 600 किमी मोटी है। सतह की पपड़ी 100 से 300 किमी की है। शायद लोहे का केन्द्र का कुछ भाग पिघला हुआ है।

बुध की कक्षा काफ़ी ज़्यादा विकेन्द्रीत ( eccentric ) है, इसकी सूर्य से दूरी 46,000000 किमी ( perihelion ) से 70,000000 किमी ( aphelion ) तक ( कक्षा = 57,910,000 किमी ( 0.38 AU ) सूर्य से ) रहती है। जब बुध सूर्य के नजदिक होता है तब उसकी गति काफ़ी धिमी होती है। 19 वी शताब्दि में खगोलशास्त्रीयो ने बुध की कक्षा का सावधानी से निरिक्षण किया था लेकिन न्युटन के नियमो के आधार पर वे बुध की कक्षा को समझ नहीं पा रहे थे। बुध की कक्षा न्युटन के नियमो का पालन नहीं करती है। निरिक्षित कक्षा और गणना की गयी कक्षा में अंतर छोटा था लेकिन दशको तक परेशान करनेवाला था। पहले यह सोचा गया कि बुध की कक्षा के अंदर एक और ग्रह (वल्कन) हो सकता है जो बुध की कक्षा को प्रभवित कर रहा है। काफ़ी निरिक्षण के बाद भी ऐसा कोई ग्रह नहीं पाया गया। इस रहस्य का हल काफ़ी समय बाद आईन्स्टाईन के साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत ( General Theory of Relativity ) ने दिया। इस सिद्धांत से गणना करने पर आये आंकडे ,निरिक्षण से प्राप्त आंकडो से मेल खा रहे थे। बुध की कक्षा की सही गणना इस सिद्धांत के स्वीकरण की ओर पहला क़दम था।

यह ग्रह 48 किलोमीटर (29 मील) प्रति सेकंड की रफ्तार से यह 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा कर लेता है, जो सबसे कम समय है। इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 60 दिन लगते हैं। 1962 तक यही सोचा जाता था कि बुध का एक दिन और वर्ष एक बराबर होते है जिससे वह अपना एक ही पक्ष सूर्य की ओर रखता है। यह उसी तरह था जिस तरह चन्द्रमा का एक ही पक्ष पृथ्वी की ओर रहता है। लेकिन डाप्लर सिद्धाण्त ने इसे ग़लत साबीत कर दिया। अब यह माना जाता है कि बुध के दो वर्ष में तीन दिन होते हैं। अर्थात बुध सूर्य की दो परिक्रमा में अपनी स्व्यं की तीन परिक्रमा करता है। शुक्र की तरह बुध का घुर्णन धीमा है। बुध और मंडल में अकेला पिंड है जिसका कक्षा / घुर्णन का अनुपात 1.1 नहीं है। ( वैसे बहुत सारे पिंडो में ऐसा कोई अनुपात ही नहीं है।)

अभी तक दो अंतरिक्ष यान मैरीनर 10 तथा मैसेन्जर बुध ग्रह जा चूके है। मैरीनर – 10 सन् 1974 तथा 1975 के मध्य तीन बार इस ग्रह की यात्रा कर चूका है। बुध ग्रह की सतह के 45% का नक्शा बनाया जा चुका है। (सूर्य के काफ़ी समीप होने से हब्ब्ल दूरबीन उसके बाकी क्षेत्र का नक्शा नहीं बना सकती है।) मैसेन्जर यान 2004 में नासा द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। यह यान भविष्य में 2011 में बुध की परिक्रमा करेगा। इसके पहले जनवरी 2008 में इस यान ने मैरीनर 10 द्वारा न देखे गये क्षेत्र की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरे भेंजी थी।

बुध ग्रह का इतिहास – Mercury Planet History in Hindi

बुध ग्रह को अंग्रेजी में Mercury कहते हैं। यह एक रोमन देवता का नाम भी है।  इतिहासिक दृष्टि से देखे तो, आज से 5000 वर्ष पूर्व सुमात्रा के लोग इस ग्रह के बारे में जानते थे। 500 इसा पूर्व प्राचीन ग्रीस के खगोल विज्ञानियों ने भी इसके होने की पुष्टि की थी। इसका अंग्रजी नाम मर्क्युरी है जोकि रोमन देवता कर नाम के आधार पर रखा गया था। भारत में भी बुध ग्रह के कई धार्मिक मायने हैं। दूरबीन की मदद से बुध ग्रह को देखने वाले सबसे पहले व्यक्ति महान वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली थे।

बुध ग्रह से जुड़े रोचक तथ्य – Mercury Planet Facts in Hindi

  • बुध ग्रह को सूर्य के चारों ओर अपनी परिक्रमा पूरी करने में 88 दिन लग जाते हैं जोकि सभी ग्रहों को मिला कर सबसे जल्दी है। परिक्रमा करते वक्त इसकी स्पीड 180,000 किमी प्रति घंटा रहती है। इसका परिक्रमा पथ अंडाकार है और दीर्घ वृताकार है।
  • बुध ग्रह का कोई चंद्रमा (उपग्रह) नहीं है। इसका गुरुत्वाकर्षण बल भी बहुत कम है। मतलब पृथ्वी पर किसी व्यक्ति का वजन 100 किलोग्राम है तो बुध ग्रह पर उसका वजन 38 किलोग्राम हो जाएगा।
  • सूर्य के सबसे नजदीक होने के बाद भी बुध ग्रह सौरमंडल का दूसरा सबसे गर्म ग्रह है। पहले स्थान पर शुक्र ग्रह है जो सबसे अधिक गर्म है।
  • बुध ग्रह का पर्यावरण अस्थिर है। इसका कोई वायुमंडल नहीं है। वायुमंडल की कोई विशेष परत नहीं है। जो पदार्थ और परमाणु बुध ग्रह के नजदीक आते हैं वह गर्म होकर नष्ट हो जाते हैं।
  • इसके आलावा पृथ्वी के बाद बुध सबसे अधिक घनत्व वाला ग्रह है। पृथ्वी का घनत्व 5.43 gm/cm³ है, जबकि बुध का घनत्व 5.51gm/cm³ है।
  • पांच ग्रहों में बुध भी ऐसा ग्रह है जिसे हम नंगी आंखों से देख सकते हैं। बृहस्पति शुक्र शनि मंगल को भी हम नंगी आंखों से पृथ्वी की सतह पर खड़े हो कर देख सकते हैं।

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