शुक्र ग्रह की जानकारी, उत्पति, तथ्य | Venus Planet Information in Hindi

Venus Planet / शुक्र पृथ्वी का निकटतम ग्रह, सूर्य से दूसरा और सौरमण्डल का छठवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। शुक्र पर कोई चुंबकिय क्षेत्र नहीं है। इसका कोई उपग्रह (चंद्रमा) भी नहीं है। आकाश में शुक्र को नंगी आंखो से देखा जा सकता है। यह आकाश में सबसे चमकिला पिंड है। ग्रीक मिथको के अनुसार शुक्र ग्रह प्रेम और सुंदरता की देवी है। यह नाम शुक्र ग्रह के सभी ग्रहो में सबसे ज़्यादा चमकिले होने के कारण दिया गया है। (इसे यूनानी में Aphrodite तथा बेबीलोन निवासी में Ishtar कहते थे।) हिन्दू मिथको / पुराणों के अनुसार शुक्र असुरो के गुरु है।

शुक्र ग्रह की जानकारी, उत्पति, तथ्य | Venus Planet Information in HindiVenus Planet Profile

Diameter:12,104 km
Mass:4.87 x 10^24 kg (81.5% Earth)
Moons:None
Orbit Distance:108,209,475 km (0.73 AU)
Orbit Period:225 days
Surface Temperature:462 °C
First Record:17th century BC
Recorded By:Babylonian astronomers

 

शुक्र ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी – Venus Planet Information & History in Hindi

चूँकि शुक्र एक अवर ग्रह है इसलिए पृथ्वी से देखने पर यह कभी सूर्य से दूर नज़र नहीं आता है: इसका प्रसरकोण 47.8 डिग्री के अधिकतम तक पहुँचता है। शुक्र सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लिए ही अपनी अधिकतम चमक पर पहुँचता है। यहीं कारण है जिसके लिए यह प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा सुबह का तारा या शाम का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है।

शुक्र एक स्थलीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत है और समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण कभी कभी उसे पृथ्वी का “बहन ग्रह” कहा गया है। शुक्र आकार और दूरी दोनों मे पृथ्वी के निकटतम है। हालांकि अन्य मामलों में यह पृथ्वी से एकदम अलग नज़र आता है। शुक्र सल्फ्यूरिक एसिड युक्त अत्यधिक परावर्तक बादलों की एक अपारदर्शी परत से ढँका हुआ है। जिसने इसकी सतह को दृश्य प्रकाश में अंतरिक्ष से निहारने से बचा रखा है। इसका वायुमंडल चार स्थलीय ग्रहों मे सघनतम है और अधिकाँशतः कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना मे 92 गुना है। 735° K (462°C,863°F) के औसत सतही तापमान के साथ शुक्र सौर मंडल मे अब तक का सबसे तप्त ग्रह है। कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए यहाँ कोई कार्बन चक्र मौजूद नही है और ना ही ज़ीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन यहाँ नज़र आता है। शुक्र पर अतीत में महासागर हो सकते है लेकिन अनवरत ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण बढ़ते तापमान के साथ वह वाष्पीकृत होते गये होंगे। पानी की अधिकांश संभावना प्रकाश-वियोजित (Photodissociation) रही होने की, व, ग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र के अभाव की वजह से, मुक्त हाइड्रोजन सौर वायु द्वारा ग्रहों के बीच अंतरिक्ष में बहा दी गई है। शुक्र की भूमी बिखरे शिलाखंडों का एक सूखा मरुद्यान है और समय-समय पर ज्वालामुखीकरण द्वारा तरोताजा की हुई है।

शुक्र ग्रह को प्रागैतिहासिक काल से जाना जाता। यह आकाश में सूर्य और चन्द्रमा के बाद सबसे ज़्यादा चमकिला ग्रह / पिंड है। बुध के जैसे ही इसे भी दो नामो भोर का तारा ( यूनानी : Eosphorus ) और शाम का तारा / आकाशीय पिण्ड के ( यूनानी : Hesperus ) नाम से जाना जाता रहा है। ग्रीक खगोलशास्त्री जानते थे कि यह दोनो एक ही है। शुक्र भी एक आंतरिक ग्रह है, यह भी चन्द्रमा की तरह कलाये प्रदर्शित करता है। गैलेलीयो द्वारा शुक्र की कलाओं के निरिक्षण कोपरनिकस के सूर्यकेन्द्री सौरमंडल सिद्धांत के सत्यापन के लिये सबसे मज़बूत प्रमाण दिये थे।

यह सूर्य की परिक्रमा 224 दिन में करता है और सूर्य से इसका परिक्रमा पथ 108200000 किलोमीटर लम्बा ( कक्षा : 0.72 AU या 108,200,000 किमी ) है। शुक्र ग्रह व्यास 121036 किलोमीटर और द्रव्यमान 4.869e24 किग्रा है। इसकी कक्षा लगभग वृत्ताकार है। यह अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त ( Anticlockwise ) चक्रण करता है।

शुक्र का घुर्णन काफ़ी अजीब है क्योंकि यह काफ़ी धीमा है। वह एक घुर्णन करने में 243 पृथ्वी दिवस लगाता है मतलब कि शुक्र का एक दिन पृथ्वी के 243 दिनो के बराबर होता है। जो कि शुक्र के सुर्य की परिक्रमा में लगने वाले समय से भी थोडा ज़्यादा है। शुक्र पर एक शुक्र दिन शुक्र के एक वर्ष से बड़ा होता है। शुक्र की परिक्रमा और घुर्णन में इतने समकालिक है कि पृथ्वी से शुक्र का केवल एक ही हिस्सा दिखायी देता है।

शुक्र पर वायुदाब भी पृथ्वी के वायुमंडल दबाव से 90 गुना है। जोकि पृथ्वी पर सागरसतह से 1 किमी गहराई के तुल्य है। वायुमंडल में सर्वाधिक कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा पाई जाती है। शुक्र के यह कई किलोमिटर मोटे सल्फ्युरिक अम्ल के बादलो से घीरा हुआ है। यह बादल शुक्र ग्रह की सतह ढंक लेते है जिससे हम उसे देख नहीं पाते हैं। इस वातावरण से शुक्र पर ग्रीनहाउस प्रभाव पडता है जो कि तापमान को 400 सेल्सीयस से 740 सेल्सीयस तक बढा देता है। इस तापमान पर सीसा भी पिघल जाता है। शुक्र की सतह बुध की सतह से भी ज़्यादा गर्म है, जबकि शुक्र बुध की तुलना में सूर्य से दूगनी दूरी पर है। शुक्र के बादलो में उपरी सतह में लगभग 350 किमी प्रति घण्टा की गति से हवायें चलती है जबकि निचली सतह में ये कुछ ही किमी प्रति घण्टा की गति से चलती है। शुक्र पर किसी समय पानी उपस्थित था जो उबलकर अंतरिक्ष में चला गया। शुक्र अब काफ़ी सूखा ग्रह है। पृथ्वी यदि सूर्य से कुछ और नजदिक ( कुछ किमी ) होती तब पृथ्वी का भी यही हाल होता।

शुक्र की सतह से अधिकांश रोलिंग मैदानों हैं। वहां काफ़ी सारे समुद्र जैसे गहरे क्षेत्र है जैसे अटलांटा, गुयेनेवेरे, लावीनिया। कुछ उंचे पठारी क्षेत्र है जैसे ईश्तर पठार जो उत्तरी गोलार्ध में है और आस्ट्रेलीया के आकार का है; अफ्रोदीते पठार जो भूमध्यरेखा पर है और दक्षिण अमरीका के आकार का है। इश्तर पठार का क्षेत्र उंचा है, इसमे एक क्षेत्र लक्ष्मी प्लेनम है जो शुक्र के पर्वतो से घीरा है। इनमे से एक महाकाय पर्वत मैक्सवेल मान्टेस है।

मैग्लेन यान से प्राप्त आंकड़े बताते है कि शुक्र की सतह का अधिकतर भाग लावा प्रवाह से ढंका है। उस पर काफ़ी सारे मृत ज्वालामुखी है जैसे सीफ मान्स। हाल ही में प्राप्त आंकड़े बताते है कि शुक्र अभी भी ज्वालामुखी सक्रिय है लेकिन कुछ ही क्षेत्रो मे; अधिकतर भाग लाखो वर्षो से शांत है। शुक्र पर छोटे क्रेटर नहीं है। ऐसा प्रतित होता है कि उल्काये शुक्र के वातावरण में सतह से टकराने से पहले ही जल जाती है। शुक्र की सतह पर क्रेटर गुच्छो में है जो यह बताती है कि बड़ी उल्का सतह से टकराने से पहले छोटे टूकड़ो में बंट जाती है। शुक्र के प्राचीनतम क्षेत्र 8000 लाख वर्ष पूराने है। ज्वालामुखीयो ने शुक्र के पुराने बड़े क्रेटरो को भर दिया है। शुक्र का अंतरिक भाग पृथ्वी जैसा है, 3000 किमी त्रिज्या की लोहे का केन्द्र; उसके आसपास पत्थर की परत। ताजा आंकड़ो के अनुसार शुक्र की पपड़ी ज़्यादा मोटी और मज़बूत है। पृथ्वी के जैसे ही शुक्र पर सतह पर दबाव बनता है और भूकंप आते हैं।

शुक्र का व्यास (पृथ्वी के व्यास का 95 %), द्रव्यमान (पृथ्वी के द्रव्यमान का 80 %) एवं आकार पृथ्वी से थोड़ा ही छोटा है। दोनो ग्रहो में क्रेटर ( उल्कापार से बने विशाल गढ्ढे ) कम है। दोनो का घनत्व और रासायनिक संयोजन समान है। इन समानताओ से यह सोचा जाता था कि बादलो के निचे शुक्र ग्रह पृथ्वी के जैसे होगा और शायद वहां पर जिवन होगा। लेकिन बाद के निरिक्षणो से ज्ञात हुआ कि शुक्र पृथ्वी से काफ़ी अलग है और यहां जिवन की संभावना न्युनतम है।

ग्रीक मिथको के अनुसार शुक्र ग्रह प्रेम और सुंदरता की देवी है। यह नाम शुक्र ग्रह के सभी ग्रहो में सबसे ज़्यादा चमकिले होने के कारण दिया गया है। ( इसे यूनानी में Aphrodite तथा बेबीलोन निवासी में Ishtar कहते थे। ) हिन्दू मिथको / पुराणों के अनुसार शुक्र असुरो के गुरु है। इनके पिता का नाम कवि और इनकी पत्नी का नाम शतप्रभा है। दैत्य गुरु शुक्र दैत्यों की रक्षा करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। ये बृहस्पति की तरह ही शास्त्रों के ज्ञाता, तपस्वी और कवि हैं। इन्हें सुंदरता का प्रतीक माना गया है।

1962 में शुक्र ग्रह की यात्रा करने वाला पहला अंतरिक्ष यान मैरीनर 2 था। उसके बाद 20 से ज़्यादा शुक्र ग्रह की यात्रा पर जा चुके हैं; जिसमे पायोनियर, वीनस और सोवियत यान वेनेरा 7 है जो कि किसी दूसरे ग्रह पर उतरने वाला पहला यान था। 1966 में, सोवियत संघ का वेनेरा 3 अंतरिक्ष यान शुक्र पर जानेवाला सबसे पहला मानव निर्मित यान था।


और अधिक लेख –

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *