सेल्यूलर जेल (काला पानी) इतिहास, जानकारी | Cellular Jail History in Hindi

Cellular Jail / सेल्यूलर जेल या काला पानी (Kala Pani) अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में स्थित एक कारागार है। इस जेल की अंदरूनी बनावट सेल (कोठरी) जैसी है, इसलिए इसे सेल्यूलर जेल कहा गया है। यह अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कैद रखने के लिए बनाई गई थी, जो कि मुख्य भारत भूमि से हजारों किलोमीटर दूर स्थित थी, व सागर से भी हजार किलोमीटर दुर्गम मार्ग पडता था। आज जेल के परिसर को राष्ट्रिय स्मारक की उपाधि दी गयी है।

सेल्यूलर जेल (काला पानी) इतिहास, जानकारी | Cellular Jail History in Hindi

सेल्यूलर जेल का इतिहास – Cellular Jail History in Hindi – Kalapani Jail Stories in Hindi

सेल्युलर जेल भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय है। भारत जब गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था, अंग्रेजी सरकार स्वतंत्रता सेनानियों पर कहर ढा रही थी। हजारों सेनानियों को फांसी दे दी गई, तोपों के मुंह पर बांधकर उन्हें उड़ा दिया गया। कई ऐसे भी थे जिन्हें तिल तिलकर मारा जाता था, इसके लिए अंग्रेजों के पास सेल्युलर जेल का अस्त्र था।

ब्रिटिश शासन द्वारा भारत के स्वतंत्रता सेनानियों पर होने वाले अत्याचारों की मूक गवाह इस जेल की नींव 1896 में रखी गई थी। जेल परिसर का निर्माण 1896 से 1906 के बीच किया गया था। हालाँकि 1857 में सेपॉय विद्रोह के बाद से ही अंडमान द्वीप का उपयोग ब्रिटिशो द्वारा कैदियों को कैद करने के लिए किया जाने लगा था।

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम ने अंग्रेजी सरकार को चौकन्ना कर दिया। व्यापार के बहाने भारत आये अंग्रेजो को भारतीय जनमानस द्वारा यह पहली कड़ी चुनौती थी, जिसमे समाज के लगभग सभी वर्ग शामिल थे।

एक तरफ लोगो को फांसी दी गयी, पेड़ो पर सामूहिक रूप से लटका कर मृत्यु दण्ड दिया गया व तोपों से बांधकर दागा गया, वही जिन लोगो से अंग्रेजी सरकार को ज्यादा खतरा महसूस हुआ, उन्हें ऐसी जगह भेजा गया जहाँ से जीवित वापस आने की बात तो दूर किसी अपने-पराये की खबर तक मिलने की कोई उम्मीद भी नही थी। अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ़र को अंग्रेजी सरकार ने रंगून भेज दिया, जबकि इसमें भाग लेने वाले अन्य क्रांतिकारियों को काले पानी की सजा बतौर अंडमान भेज दिया गया।

कालापानी (Kala Pani) में अधिकाश कैदी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इनमें प्रमुख रूप से डॉ. दीवन सिंह,मौलाना फजल-ए-हक खैराबादी, योगेंद्र शुक्ला, बटुकेश्वर दत्त, मौलाना अहमदउल्ला, मौवली अब्दुल रहीम सादिकपुरी, बाबूराव सावरकर, विनायक दामोदर सावरकर, भाई परमानंद, शदन चंद्र चटर्जी, सोहन सिंह, वमन राव जोशी, नंद गोपाल आदि थे।

इसमें देश के विभिन्न भागों से लाए स्वतंत्रता सेनानियों को नजरबंद रखा जाता था। उन्हें यहाँ कठोर दिल दहला देने वाली यातनाएँ दी जाती थीं, जिनमें चक्की पीसना, कोल्हू पर तेल पिराई करना, पत्थर तोड़ना, लकड़ी काटना, एक हफ्ते तक हथकड़ियां बांधे खड़े रहना, तन्हाई के दिन बिताना, चार दिन तक भूखा रखना, दस दिनों तक क्रासवार की स्थिति में रहना आदि यातनाएं शामिल थीं।

यहां कितने भारतीयों को फांसी की सजा दी गई और कितने मर गए इसका रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। लेकिन आज भी जीवित स्वतंत्रता सेनानियो के जेहन में कालापानी शब्द भयावह जगह के रूप में बसा है। यह शब्द भारत में सबसे बड़ी और बुरी सजा के लिए एक मुहावरा बना हुआ है।

भूख हड़ताल –

अंग्रेजों द्वारा अमानवीय अत्याचार करने के कारण 1930 में यहां कैदियों ने भूख हड़ताल कर दी थी, तब महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसमें हस्तक्षेप किया। 1937-38 में यहां से कैदियों को स्वदेश भेज दिया गया था।

जापान का कब्ज़ा –

जापानी शासकों ने अंडमान पर 1942 में कब्जा किया और अंग्रेजों को वहां से मार भगाया। उस समय अंग्रेज कैदियों को सेल्युलर जेल में बंद कर दिया गया था। उस दौरान नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भी वहां का दौरा किया था। 7 में से 2 शाखाओं को जापानियों ने नष्ट कर दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद 1945 में फिर अंग्रेजों ने यहां कब्जा जमाया।

सेल्यूलर जेल की बनावट – Cellular Jail Information in Hindi

सेल्‍यूलर जेल के अंदर 694 कोठरियाँ हैं। प्रत्येक कोठरी 15×8 फीट की थी, जिसमें तीन मीटर की ऊंचाई पर रोशनदान थे। एक कोठरी का कैदी दूसरी कोठरी के कैदी से कोई संपर्क नहीं रख सकता था। इसका मुख्य भवन लाल ईंटों से बना है। ये ईंटें बर्मा से यहां लाई गईं, जो आज म्यांमार के नाम से जाना जाता है। ऑक्टोपस की भांति सात शाखाओं में फैली इस विशाल कारागार के अब केवल तीन अंश बचे हैं। संरचना की दृष्टि से देखा जाए तो इस जेल के बीच में एक टावर बना है, जिससे सात भुजाएँ निकली हैं जो टावर से गलियारे के माध्यम से जुड़ी है। यहाँ से कैदियों पर सख्त निगरानी रखी जाती थी।

इस जेल की चाहरदीवारी इतनी छोटी थी कि इसे आसानी से कोई भी पार कर सकता है। लेकिन यह स्थान चारों ओर से गहरे समुद्री पानी से घिरा हुआ है, जहां से सैकड़ों किमी दूर पानी के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता है। यहां का अंग्रेज सुपरिंडेंट कैदियों से अक्सर कहता था कि जेल दीवार इरादतन छोटी बनाई गई है, लेकिन यहां ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां से आप जा सकें।

कारागार की दीवारों पर वीर शहीदों के नाम लिखे हैं। यहाँ एक संग्रहालय भी है जहां उन अस्त्रों को रखा गया है जिनसे स्वतंत्रता सेनानियों पर अत्याचार किए जाते थे।

आजादी के बाद काला पानी की स्थिति –

भारत को आजादी मिलने के बाद इसकी दो और शाखाओं को ध्वस्त कर दिया गया। शेष बची तीन शाखाएं और मुख्य टावर को 1969 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया। 1963 में यहां गोविन्द वल्लभ पंत अस्पताल खोला गया। वर्तमान में यह 500 बिस्तरों वाला अस्पताल है और 40 डॉक्टर यहां के निवासियों की सेवा कर रहे हैं।

काला पानी की सजा से क्यों कांपते थे कैदी? जानें.. (Kala Pani Jail in Hindi)

इस जेल को सेल्युलर इसलिए नाम दिया गया था, क्योंकि यहां एक कैदी से दूसरे से बिलकुल अलग रखा जाता था। जेल में हर कैदी के लिए एक अलग सेल होती थी। यहां का अकेलापन कैदी के लिए सबसे भयावह होता था।

सुदूर द्वीप होने की वजह से यह विद्रोहियों को सजा देने के लिए अनुकूल जगह समझी जाती थी। उन्हें सिर्फ समाज से अलग करने के लिए यहां नहीं लाया जाता था, बल्कि उनसे जेल का निर्माण, भवन निर्माण, बंदरगाह निर्माण आदि के काम में भी लगाया जाता था। यहां आने वाले कैदी ब्रिटिश शासकों के घरों का निर्माण भी करते थे।

जेल में बंद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को बेड़ियों से बांधा जाता था। कोल्हू से तेल पेरने का काम उनसे करवाया जाता था। हर कैदी को तीस पाउंड नारियल और सरसों को पेरना होता था। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता था तो उन्हें बुरी तरह से पीटा जाता था और बेडियों से जकड़ दिया जाता था।

काला पानी जेल में भारत से लेकर बर्मा तक के लोगों को कैद में रखा गया था। एक बार यहां 238 कैदियों ने भागने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। एक कैदी ने तो आत्महत्या कर ली और बाकी पकड़े गए। जेल अधीक्षक वाकर ने 87 लोगों को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था।


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1 COMMENT

  1. Friendship is like a thread of those kite who fly away but thread is always behind it . Jis tarah kite ke saath thread rahata usi tarah humare saath knowledge ka hona bahut hi jaruri hai isiliye jab bhi aap ka mann kuch padhne ka ho download krke padh lijiye or kuch new chije jankar khush ho jaiye or send karane vale ko thanks kah dijiye.

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