अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह इतिहास, जानकारी Andaman and Nicobar

Andaman and Nicobar Island in Hindi  / अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है। ये बंगाल की खाड़ी के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित है। अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह लगभग 572 छोटे बड़े द्वीपों से मिलकर बना है जिनमें से सिर्फ कुछ ही द्वीपों पर लोग रहते हैं। यहाँ की राजधानी पोर्ट ब्लेयर है। पुरातत्व प्रमाणों के आधार पर यह पता चला है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे पहली बस्ती पाषाण युग के मध्य थी। कहा जाता है कि अंडमानी लोग अंडमान द्वीप के सबसे पहले निवासी थे। सन् 1850 तक अंडमानी बिलकुल अलग थलग रहते थे। सन् 1850 के बाद ही वे लोग बाहरी दुनिया के संपर्क में आए। निकोबारी लोग निकोबार द्वीप के मूल निवासी थे। वो लोग निकोबार द्वीप समूह में शोंपेन के साथ रहते थे।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह इतिहास, जानकारी Andaman and Nicobarभारत का यह केन्द्र शासित प्रदेश हिंद महासागर में स्थित है और भौगोलिक दृष्टि से दक्षिण पूर्व एशिया का हिस्सा है। यह इंडोनेशिया के आचेह के उत्तर में 150 किमी पर स्थित है तथा अंडमान सागर इसे थाईलैंड और म्यांमार से अलग करता है। दो प्रमुख द्वीपसमूहों से मिलकर बने इस द्वीपसमूह को 10° उ अक्षांश पृथक करती है, जिसके उत्तर में अंडमान द्वीप समूह और दक्षिण में निकोबार द्वीप समूह स्थित हैं। इस द्वीपसमूह के पूर्व में अंडमान सागर और पश्चिम में बंगाल की खाड़ी स्थित है। 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या 380381 है। पूरे क्षेत्र का कुल भूमि क्षेत्र लगभग 6496 किमी² या 2508 वर्ग मील है। यहां का लिंग अनुपात 1000 पुरूषों के मुकाबले 878 महिलाओं का है।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का इतिहास – Andaman and Nicobar Island History in Hindi

अण्डमान शब्द मलय भाषा के शब्द हांदुमन से आया है जो हिन्दू देवता हनुमान के नाम का परिवर्तित रूप है। निकोबार शब्द भी इसी भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ होता है नग्न लोगों की भूमि। इस द्वीप समूह पर 17 वीं सदी में मराठों द्वारा अधिकार किया गया था। इसके बाद इस पर अंग्रेजों का शासन हो गया और बाद में दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान द्वारा इस पर अधिकार कर लिया गया।

18 वीं सदी में अंग्रेजों के भारत में आने के बाद वैश्विक परिदृश्य में उभरा है। लेकिन ब्रिटिश काल के दौरान यह ‘कालापानी’ को लेकर कुख्यात था, क्योंकि किसी भी आरोप के दोषी को ब्रिटिश सरकार यहां कैद रखती थी। अंग्रेजों ने इस खूबसूरत द्वीप को एक ‘दंड काॅलोनी’ में बदल दिया जहां आजीवन कैद काटने वालों को बंद रखा जाता था। कई सालों तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ‘दंड काॅलोनी’ के तौर पर जाना जाता रहा। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह परिदृश्य बड़े पैमाने पर बदला है। शुरुआत में इस द्वीप समूह पर जाना वर्जित था और प्रतिष्ठित लोग इस द्वीप पर जाना नापसंद करते थे। लेकिन आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत के पर्यटन का सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित स्थान है। यहां मौजूद कई आकर्षक स्थानों ने इस जगह के पर्यटन में बहुत बढ़ावा किया है।

कुछ समय के लिये यह द्वीप नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज के अधीन भी रहा था। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि देश में कहीं भी पहली बार पोर्ट ब्लेयर में ही तिरंगा फहराया गया था। यहां नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने 30 दिसम्बर 1943 को यूनियन जैक उतार कर तिरंगा झंडा फहराया था। इसलिय अंडमान निकोबार प्रशासन की तरफ से 30 दिसम्बर को हर साल एक भव्य कार्यक्रम मनाने की शुरूआत की गई है। जनरल लोकनाथन भी यहाँ के गवर्नर रहे थे। 1947 में ब्रिटिश सरकार से मुक्ति के बाद यह भारत का केन्द्र शासित प्रदेश बना।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह की जानकारी – Andaman and Nicobar Island Information in Hindi

हिन्द महासागर में बसा निर्मल और शांत अण्डमान पर्यटकों के मन को असीम आनंद की अनुभूति कराता भारत का एक लोकप्रिय द्वीप समूह है। अण्डमान अपने आंचल में मूंगा भित्ति, साफ-स्वच्छ सागर तट, पुरानी स्मृतियों से जुड़े खण्डहर और अनेक प्रकार की दुर्लभ वनस्पतियां संजोए है। सुन्दरता में एक से बढ़कर एक यहां कुल 572 द्वीप हैं अंडमान का लगभग 86 प्रतिशत क्षेत्रफल वनों से ढका हुआ है। समुद्री जीवन, इतिहास और जलकुत्रीओं में रूचि रखने वाले पर्यटकों को यह द्वीप बहुत अधिक आता है।

अंडमान और निकोबार द्वीप में कई आदिवासी जनजातियां हैं और यह बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल के तट से 1220 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और चैन्नई से 1190 किलोमीटर दूर स्थित है। अंडमान के मुख्य द्वीपों में लैंड फाॅल द्वीप, मिडिल अंडमान, दक्षिण अंडमान, पोर्ट ब्लेयर और लिटिल अंडमान हैं। निकोबार दक्षिण में स्थित है और इसमें कार निकोबार, ग्रेट निकोबार, छोवरा, टेरेसा, ननकोवायर, कच्छल और लिटिल निकोबार शामिल हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को लोकप्रिय तौर पर ‘एम्राल्ड आइल’ के तौर पर जाना जाता है। तत्कालीन ‘काला पानी’ या सेलुलर जेल अब एक संग्रहालय है और भारत का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

समुद्र के पास स्थित होने के कारण अंडमान और निकोबार में पूरा साल तापमान सामान्य ही रहता है। 80 प्रतिशत की नमी के साथ समुद्री हवा तापमान को 23 डिग्री सेल्सियस से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखती है। इस द्वीप में मानसून की बरसात साल भर में अलग अलग चरणों में होती है। शानदार वर्षा वन अंडमान को लकड़ी की ‘सोने की खान’ बनाता है। द्वीपों के पहाड़ी हिस्सों में ट्राॅपिकल फल बहुतायत में पाए जाते हैं। यहां मछली पालन की बहुत संभावनाएं हैं जिसमें औद्योगिक विकास के अच्छे अवसर हैं। अंडमान की मुख्य नगदी फसल धान है जबकि नारियल और सुपारी निकोबार की मुख्य नगदी फसलें हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सरकार और राजनीति भारत के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शासन से थोड़ी अलग है। इस द्वीप समूह की सरकार और राजनीति के बारे में पहली उल्लेखनीय बात यह है कि यहां एक विधायिका की कमी है। लेफ्टिनेंट गवर्नर स्वयं अंडमान और निकोबार की सरकार में कार्यकारी प्रमुख होता है। विभिन्न विभागों के प्रमुखों द्वारा प्रत्यक्ष निगरानी के तहत कार्यकारी शाखा उनकी देखरेख में चलती है। राज्य की न्यायपालिका कोलकाता हाईकोर्ट के अंतर्गत आती है। लेफ्टिनेंट गवर्नर का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सरकार और राजनीति में बहुत महत्व है।

अंडमान और निकोबार के 572 द्वीपों का समूह अपने स्वच्छ पर्यावरण और पानी की साफ धाराओं के चलते किसी भी प्रकृतिवादी के लिए स्वर्ग से कम नहीं है। सैलानियों के लिए इस जगह के कुछ खास आकर्षणों में हरे भरे जंगलों से पटे अलग अलग पहाड़ी इलाके और समुद्री तट हैं। जौली बॉय द्वीप, अंड़मान का प्रमुख पर्यटक स्थल है। जौली बॉय द्वीप के संग हैवलॉक और सिंक द्वीप मिलकर महात्मा गाँधी मैरीन नेशनल पार्क का हिस्सा बनते हैं, जिसे वन्डोर मैरीन नेशनल पार्क भी कहा जाता है। यह स्थान ईकोजों होने के साथ साथ प्रदुषण रहित जगह भी है जिसके कारण इसका ट्रौपिकल वातावरण सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ के समुन्द्र का साफ़ पानी, इसमें बस्ती मरीन लाइफ और यहाँ पाए जाते कई प्रकार के पेड़ पौधे इसकि खूबसूरती में चार चार लगाते हैं।

सेलुलर जेल –

अंग्रेजी सरकार द्वारा भारत के स्वतंत्रता सैनानियों पर किए गए अत्याचारों की मूक गवाह इस जेल की नींव 1897 में रखी गई थी। इस जेल के अंदर 694 कोठरियां हैं। इन कोठरियों को बनाने का उद्देश्य बंदियों के आपसी मेल जोल को रोकना था। आक्टोपस की तरह सात शाखाओं में फैली इस विशाल कारागार के अब केवल तीन अंश बचे हैं। कारागार की दीवारों पर वीर शहीदों के नाम लिखे हैं। यहां एक संग्रहालय भी है जहां उन अस्त्रों को देखा जा सकता है जिनसे स्वतंत्रता सैनानियों पर अत्याचार किए जाते थे।

कैसे जाये –

अंड़मान-निकोबार जाने के लिए कई सुविधाएँ उपलब्ध है। भारत से पोर्ट ब्लेयर के वीर सावरकर हवाई अड्डे के लिए कोलकाता, भुवनेश्वर और चेन्नई जैसे शहरों से कई उड़ाने उपलब्ध है। शिप्पिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया ने निकोबार के पोर्ट ब्लेयर के लिए, चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए महीने में दो बार और विजाग से पोर्ट ब्लेयर तीन महीने में एक बार एम्.वी.नेनकोय नमक समुंद्री जहाज की सेवा उपलब्ध कराई है।


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