विन्सटन चर्चिल की जीवनी | Winston Churchill Biography in Hindi

Sir Winston Churchill / विन्सटन चर्चिल द्वितीय विश्वयुद्ध, 1940-1945 के समय इंगलैंड के प्रधानमंत्री थे। वे एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्हे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल के दम पे ब्रिटेन को द्वितीय विश्वयुद्ध में हार के मुंह से निकाल कर जीत का स्वाद चखाया। चर्चिल एक प्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता, साथ ही वह इतिहासकार, लेखक और कलाकार भी थे।

विन्सटन चर्चिल की जीवनी | Winston Churchill Biography in Hindi

विन्सटन चर्चिल की जीवनी – Winston Churchill Biography in Hindi

बीसवीं सदी ने दो विश्वयुद्धों की भयावह विभीषिकाओं को झेला है। इन दोनों ही युद्धों के दौरान संपूर्ण विश्व के सामने या तो राख के ढेर में तब्दील हो जाने या फिर तानाशाहों का साम्राज्य कायम हो जाने की क्रूर वास्तविकता बहुत करीब आकर खड़ी हो गई थी। खासतौर पर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब हिटलर और मुसोलिनी के तानाशाह इरादों की स्याह चादर दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेने का प्रयत्न कर रही थी, तब जिन राजनयिकों ने पूरी दृढ़ता के साथ इनका मुकाबला किया, सर विंस्टन चर्चिल उनमें से एक नाम है।

विन्सटन चर्चिल सेना में अधिकारी रहे थे। आर्मी कैरियर के दौरान चर्चिल भारत, सूडान और द्वितीय विश्वयुद्ध में अपना जौहर दिखाया था। उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में ख्याति पाई थी। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सेना में अहम जिम्मेदारी संभाली थी। राजनीतिज्ञ के रूप में उन्होंने कई पदों पर कार्य किया। विश्वयुद्ध से पहले वे गृहमंत्रालय में व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष रहे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे लॉर्ड ऑफ एडमिरिल्टी बने रहे। युद्ध के बाद उन्हें शस्त्र भंडार का मंत्री बनाया गया। 10 मई 1940 को उन्हें युनाइटेड किंगडम का प्रधानमंत्री बनाया गया और उन्होंने धूरी राष्ट्रों के खिलाफ लड़ाई जीती।

चर्चिल का जन्म 30 नवंबर 1874 को आक्सफोर्ड शायर के ब्लेनहिम पैलेस में हुआ था। इनके पिता लार्ड रेनडल्फ चर्चिल थे और माता का नाम जेनी था। इनकी शिक्षा हैरी और सैंहर्स्ट में हुई। मूलत: सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे विंस्टन ‍चर्चिल ने भी अपने करियर की शुरुआत एक सैनिक और युद्ध संवाददाता के रूप में की। संवाददाता इसलिए कि उन्हें शुरू से ही लिखने का बेहद शौक था। 1895 से 1898 तक क्यूबा, भारत और सूडान में ब्रिटेन की फौज में तैनाती के दौरान उन्होंने युद्ध रिपोर्टिंग की।

3 सितंबर, 1939 को ब्रिटेन ने जब युद्ध की घोषणा की तो चर्चिल को जलसेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया। मई, 1940 में नार्वे की हार ने ब्रिटिश जनता में प्रधानमंत्री चैंबरलेन के प्रति विश्वास को डिगा दिया। 10 मई को चैंबरलेन ने त्यगपत्र दे दिया और चर्चिल ने प्रधान मंत्री पद संभाला और एक सम्मिलित राष्ट्रीय सरकार का निर्माण किया। लोकसभा में तीन दिन बाद भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि ‘मैं रक्त, श्रम, आँसू और पसीने के अतिरिक्त और प्रदान नहीं कर सकता। उनका युद्ध विजय में अटूट विश्वास था, जो संकट के समय प्रेरणा देता रहा। ब्रिटिश साम्राज्य की संयुक्त शक्ति ही नहीं वरन् अमरीका और रूस की शक्तियों का जर्मनों के विरुद्ध सक्रिय रूप से प्रेरित किया। उनके अथक परिश्रम, विश्वास, दृढ़ता और लगन के कारण मित्र राष्ट्रों की विजय हुई।

विन्सटन चर्चिल 6 वी कक्षा फ़ैल थे। लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम करना कभी नहीं छोड़ा। वो प्रयत्न करते रहे और दुसरे विश्व युद्ध के दौरान यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बने। चर्चिल साधारणतः ब्रिटेन और दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नेता थे। BBC के 2002 के चुनाव में जिसमे 100 महानतम ब्रिटिश लोगो का चुनाव होना था उसमे सभी ने चर्चिल को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया गया।

हालांकि शुरुआती दौर में चर्चिल का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ावों भरा रहा है, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जिस कुशलता और दृढ़ता से उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में लोकतां‍त्रिक शक्तियों का नेतृत्व किया, उसने उन्हें कालजयी बना दिया।

15 जनवरी, 1965 को चर्चिल को एक गंभीर हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वे गंभीर रूप से बीमार हो गए। नौ दिन बाद, 24 जनवरी, 1965 को, अपने लन्दन के घर में उनकी मृत्यु हुई। उस समय पूरा ब्रिटेन एक हफ़्ते से ज्यादा शोक करता रहा।


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