एडॉल्फ हिटलर का जीवन परिचय | Adolf Hitler Biography In Hindi

Adolf Hitler Biography & History in Hindi / आज की सदी मे जहा विश्व लोकतंत्र के स्तंभ को मजबूत बनाने के लिए तानाशाही व्यवस्था को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जा रहा है। वहीं एक दौर ऐसा भी था जब इन्हीं तानाशाहों ने पूरे विश्व को अपनी मुठ्ठी में कर रखा था। जब हम किसी व्यक्ति को तानाशाह के नाम से संबोधित करते हैं तो उसका सीधा संबंध एक ऐसे व्यक्ति के नाम के साथ जुड़ जाता है जो अपनी करिश्माई नेतृत्व की बदौलत न केवल विश्व को अपने इशारों पर नचाता रहा बल्कि अपने नीतियों की बदौलत खुद को वह सबसे ऊपर मानता था। यहां जिक्र हो रहा है पूर्व जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) का. जिसने पूरे विश्व को अपने मुट्ठी मे रखा था आए जानते है एडॉल्फ हिटलर का जीवन।

Adolf Hitler Biography in hindi

एडॉल्फ हिटलर का परिचय – Adolf Hitler Life History In Hindi 

पूरा नाम  एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler)
जन्म दिनांक  20 अप्रैल सन 1889
जन्म स्थान  ब्रौनौ ऍम इन्, ऑस्ट्रिया – हंगरी
मृत्यु तिथि   30 अप्रैल, 1945
मृत्यु स्थान   बर्लिन जर्मनी
पिता का नाम  एलोईस हिटलर
माता का नाम  क्लारा हिटलर
पत्नी  ईवा ब्राउन
प्रसिद्धि के कारण तानाशाह, द्वितीय विश्वयुद्ध के जन्मदाता
राष्ट्रीयता जर्मन
पार्टी नाजीदल

एडोल्फ हिटलर “राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी” (NSDAP) के नेता थे। इस पार्टी को प्राय: “नाजी पार्टी” के नाम से जाना जाता है। सन् 1933 से सन् 1945 तक वह जर्मनी का शासक रहे। हिटलर को द्वितीय विश्वयुद्ध के लिये सर्वाधिक जिम्मेदार माना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध तब हुआ, जब उनके आदेश पर नात्सी सेना ने पोलैंड पर आक्रमण किया। फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैंड को सुरक्षा देने का वादा किया था और वादे के अनुसार उन दोनो ने नाज़ी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।

शुरुवाती जीवन – Early Life of Adolf Hitler

बीसवीं सदी मे अपने कार्यो के वजह से सर्वाधिक चर्चित (संभवतः सर्वाधिक घृणित) व्यक्तियों में से एक नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 को ऑस्ट्रिया में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लिंज नामक स्थान पर हुई। पिता की मृत्यु के पश्चात् 17 वर्ष की अवस्था में वे वियना चले गए। कला विद्यालय में प्रविष्ट होने में असफल होकर वे पोस्टकार्डों पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह करने लगे। यही वह समय था जब हिटलर साम्यवादियों और यहूदियों से घृणा करने लगे।

एडोल्फ हिटलर की तानाशाही जीवन – Adolf Hitler Story

यह दौर विश्व युद्ध का दौर था जब हिटलर सभी काम को छोड़ कर सेना में भर्ती हो गए और फ्रांस के कई लड़ाइयों में उन्होंने भाग लिया। आपको बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध तब हुआ, जब उनके आदेश पर नात्सी सेना ने पोलैंड पर आक्रमण किया। फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैंड को सुरक्षा देने का वादा किया था और वादे के अनुसार उन दोनो ने नाज़ी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।

1918 के युध मे घायल होने के कारण अस्पताल मे रहे, जर्मनी के हार से उन्हे बहुत दुख हुवा और उन्होने 1918 में जर्मनी की पराजय के बाद 1919 में हिटलर ने सेना छोड़ दी व नेशनल सोशलिस्टिक आर्बिटर पार्टी (नाजी पार्टी) का गठन कर डाला। इसका उद्देश्य साम्यवादियों और यहूदियों से सब अधिकार छीनना था क्योंकि उनकी घोषित मान्यता थी कि साम्यवादियों व यहूदियों के कारण ही जर्मनी की हार हुई। जर्मनी की हार को लेकर हिटलर के अंदर जो नफरत की भावना थी, वो हज़ारों जर्मन वासियों की भावना से मेल खाती थी। यही वजह है कि नाजी पार्टी के सदस्यों में देशप्रेम कूट-कूटकर भरा था।

आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जब नाजी दल के नेता हिटलर ने अपने ओजस्वी भाषणों में उसे ठीक करने का आश्वासन दिया तो अनेक जर्मन इस दल के सदस्य हो गए। हिटलर ने भूमिसुधार करने, वर्साई संधि को समाप्त करने और एक विशाल जर्मन साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य जनता के सामने रखा जिससे जर्मन लोग सुख से रह सकें। इस प्रकार 1922 ई. में हिटलर एक प्रभावशाली व्यक्ति हो गया।

उन्होंने स्वास्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया जो कि हिन्दुओं का शुभ चिह्र है। समाचारपत्रों के द्वारा हिटलर ने अपने दल के सिद्धांतों का प्रचार जनता में किया। भूरे रंग की पोशाक पहने सैनिकों की टुकड़ी तैयार की गई. 1923 ई. में हिटलर ने जर्मन सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न किया लेकिन इसमे वह कामयाब नहीं हो पाए। 20 फरवरी, 1924 को हिटलर पर “राष्ट्रद्रोह” का मुकदमा चलाया गया और पांच साल के कैद की सजा सुनाई गई।

हिटलर को कुल 13 महीने तक कैद में रखा गया। यहीं जेल में हिटलर ने अपनी पुस्तक “मीन कैम्फ” (मेरा संघर्ष) लिखी। हिटलर ने अपनी यह आत्मकथा उन सोलह प्रदर्शनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि में समर्पित की है, जिन्होंने अपने देश की एकता के लिए संघर्ष करते हुए अपने ही देश के सैनिकों की गोलियों का सामना किया।

इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि आर्य जाति सभी जातियों से श्रेष्ठ है और जर्मन आर्य हैं इसलिए उन्हें विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। वह जर्मन नस्ल को दूसरी सभी नस्लों से बेहतर मानते थे। जेल से रिहा होने के कुछ ही समय बाद हिटलर ने पाया कि जर्मनी भी विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है। आंकड़ों की मानें तो 1930-32 में जर्मनी में बेरोजगारी बहुत बढ़ गई थी। हिटलर ने जनता के असंतोष का फायदा उठाकर पुनः व्यापक लोकप्रियता हासिल की. उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया।

1932 के चुनाव में हिटलर को राष्ट्रपति के चुनाव में सफलता नहीं मिली लेकिन 1933 में उन्हें जर्मनी का चांसलर बनने से कोई नही रोक सका। इसके बाद शुरू हुआ हिटलर का दमन चक्र. उन्होंने साम्यवादी पार्टी को अवैध घोषित कर दिया व यहूदियों के नरसंहार का सिलसिला शुरू कर दिया। नाज़ी दल के विरोधी व्यक्तियों को जेलखानों में डाल दिया गया। कार्यकारिणी और कानून बनाने की सारी शक्तियाँ हिटलर ने अपने हाथों में ले ली। तत्कालीन राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद हिटलर ने स्वयं को राष्ट्रपति तथा सर्वोच्च न्यायाधीश भी घोषित कर डाला।

सत्ता हासिल करने के बाद हिटलर ने राष्ट्र को जोड़ने के लिए भावी युद्ध को ध्यान में रखकर जर्मनी की सैन्य शक्ति बढ़ाना प्रारंभ कर दिया। उन्होंने सारी जर्मन जाति को सैनिक प्रशिक्षण देने का आदेश दिया। विशाल जर्मन साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य लेकर हिटलर ने तमाम तरह की संधियों की अहवेलना करके पड़ोसी देशों पर आक्रमण कर दिए। जिसके फलस्वरूप 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध भड़क उठा।

नाजी दल का आतंक जनजीवन के प्रत्येक क्षेत्र में छा गया। 1933 से 1938 तक लाखों यहूदियों की हत्या कर दी गई। 1933 में जर्मनी की सत्ता पर जब एडोल्फ हिटलर काबिज हुआ था तो उसने वहां एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की थी। उसके साम्राज्य में यहूदियों को सब-ह्यूमन करार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया।

यहूदियों के प्रति हिटलर की इस नफरत का नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया, यानी समूचे यहूदियों को जड़ से खत्म करने की सोची-समझी और योजनाबद्ध कोशिश। होलोकास्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे।

हिट्लर की मृत्यु – Adolf Hitler Death

हिटलर हमेशा मौत के डर के साये में रहता था। उस हर पल यह डर सताता था कि कहीं उसके खाने में उसे जहर ना दे दिया जाए। इसके कारण हिटलर ने फूड टेस्टरों को नियुक्त किया था। ये फूड टेस्टर अपनी मर्जी के बिना हिटलर का खाना चखने के लिये मजबूर थे और उन्हें अपने हर निवाले में मौत नजर आती थी। क्योंकि इंग्लैंड हिटलर को जहर देना चाहता था और हिटलर को अपने जासूसों से इस बात का पता चल गया था कि उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया जा सकता है।

शुरुआत में तो हिटलर को सफलता मिली लेकिन बाद में हिटलर के पांव उखड़ने लगे। अब तक जर्मनी की हार निश्चित हो गई थी। हिटलर भी अब हार महसूस करने लगा था। अंततः 29 अप्रैल 1945 को, एडॉल्फ हिटलर ने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन से शादी कर ली। दुश्मन के सैनिकों के हाथों में पड़ने के डर से हिटलर और ब्राउन 30 अप्रैल 1945 को, उनकी शादी के बाद आत्महत्या कर ली। उनके शरीर जला दिया गया।


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