क्रिकेटर शिखर धवन की जीवनी | Shikhar Dhawan Biography in Hindi

Shikhar Dhawan / शिखर धवन एक भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी है। सलामी बल्लेबाज शिखर धवन एक बाएं हाथ के बल्लेबाज और कभी-कभी दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज हैं। गब्बर के नाम से प्रसिद्ध शिखर धवन तेज बल्लेबाजी और बड़े शॉटस के लिए जाना जाता है।

क्रिकेटर शिखर धवन की जीवनी | Shikhar Dhawan Biography in Hindi

शिखर धवन का संक्षिप्त परिचय – Shikhar Dhawan Biography in Hindi

नामशिखर धवन (Shikhar Dhawan)
जन्म दिनांक5 दिसंबर, 1985
जन्म स्थानदिल्ली
पिता का नाममहेंद्रपाल धवन
माता का नामसुनैना धवन
राष्ट्रीयताभारतीय
पत्नीआयेशा मुख़र्जी
संतानजोरावर
भूमिकासलामी बल्लेबाज

अपनी रौबदार मूंछों और धाकड़ बल्लेबाजी के कारण शिखर धवन को उनके साथी और प्रशंसक गब्बर के नाम से भी बुलाते हैं। शिखर धवन विशाखापत्तनम में अक्टूबर 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय कैरियर की शुरुआत की। उन्होंने (85 गेंदों पर 100 रन. 174 गेंदों पर 187 रन से अपनी पारी को समाप्त) मोहाली में मार्च 2013 में एक ही विपक्ष के खिलाफ अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत की और टेस्ट कैरियर की शुरुआत पर किसी भी बल्लेबाज द्वारा सबसे तेज शतक बनाया। शिखर धवन घरेलू क्रिकेट में दिल्ली और आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हैं। नवंबर 2004 में दिल्ली के लिए अपनी पहली श्रेणी की शुरुआत करने से पहले वह अंडर -17 और अंडर -19 टीमों के लिए खेले।

प्रारंभिक जीवन – Early Life of Shikhar Dhawan 

शिखर धवन का जन्म 5 दिसंबर 1985 को दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुवा था। उनके पिता का नाम महेंद्रपाल धवन और माता का नाम सुनैना हैं। शिखर की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित सेंट मार्कस सीनियर सेकंडरी पब्लिक स्कूल में हुई। 2012 में शिखर धवन ने मेलबोर्न की बॉक्सर आयेशा मुख़र्जी से शादी कर ली जो पहले से शादीशुदा थी और दो बेटियों की माँ हैं। उन दोनों की फेसबुक के जरिये मुलाकात हुई थी। 2014 उन्हें एक लड़का भी हुआ जिसका नाम जोरावर है।

क्रिकेट करियर की शुरुवात – Cricket Career of Shikhar Dhawan

12 साल की उम्र से उन्होंने सोनेट क्लब में तारक सिन्हा के मार्गदर्शन में क्रिकेट का अभ्यास शुरू कर दिया था। शुरुआत में शिखर अपने क्लब के लिए विकेट कीपर की भूमिका में होते थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपना बल्लबाजी कौशल निखारना शुरू किया और आगे चलकर वे स्थापित बल्लेबाज के रूप में सामने आए।

शिखर धवन क्रिकेट के खेल में आने के पीछे के कारण को बताते हुए एक जगह इंटरव्यू में जि​क्र किया था की – मेरे एक चचेरे भाई दिल्ली के सोनेट क्लब की ओर से क्रिकेट खेला करते थे। उन्हीं को देखकर मेरे भी मन में इस खेल की ओर रुझान बढ़ा और धीरे-धीरे ये मेरी जिन्दगी का महत्वपूर्ण हिस्स बन गया। और बच्चों की तरह मैं भी शुरू-शुरू में अपनी कॉलोनी के बच्चों के साथ खेला करता था। मेरी परफार्मेंस थोड़ी अच्छी रहती थी। बाद में मैने और घरवालों ने इसे प्रोफेशनली अपनाने का फैसला ले​ लिया।

शिखर धवन को 1999-2000 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। पहले सत्र में शिखर का प्रदर्शन सामान्य रहा। अगले सत्र में 2001-02 की विजय मर्चेंट ट्रॉफी में शिखर के बल्ले का जलवा देखने को मिला। पूरे टूर्नामेंट में शिखर ने 9 मैच खेले और 83.88 के बढ़िया औसत के सथ कुल 755 रन बनाए। शिखर पूरे टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे और उनकी टीम दिल्ली इस टूर्नामेंट में दूसरे स्थान पर रही।

अच्छा प्रदर्शन को देखते हुवे शिखर धवन को अंडर-17 एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। 2004 में शिखर धवन अंडर 19 विश्व कप में खेल चुके है। उस विश्व कप में उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाए। उन्होंने 7 पारियों में 505 रन बनाए थे और वो एक अंडर 19 विश्व कप का रिकॉर्ड है।

2004-05 में उन्होंने दिल्ली की तरफ़ से रणजी ट्राफी में पहला मैच खेला। उस ट्राफी में वो उनकी टीम से सबसे ज्यादा रन बनानेवाले बल्लेबाज थे। अच्छा प्रदर्शन के करना वे चर्चा में आये। आईपीएल के पहले सीजन में शिखर को दिल्ली की टीम ने खरीदा था। अगले सीज़न में वह मुंबई के लिए खेले क्योंकि दिल्ली ने उनकी जगह आशिष नेहरा को ले लिया था। जब नीलामी का अगला सेट हुआ, तो हैदराबाद ने उन्हें 300,000 डॉलर में खरीदा।

शिखर धवन को अक्टूबर 2010 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापत्तनम में पहला वनडे खेलने का मौका मिला। पहला मैच शिखर के लिए अत्यंत निराशाजनक रहा। आस्ट्रेलिया की ओर से 3 विकेट पर 289 रन का पीछा कर रही भारतीय टीम की ओपनिंग शिखर धवन ने की। शिखर इस मैच में सिर्फ 2 गेंद खेलकर 0 रन पर आउट हो गए। हालांकि कप्तान विराट कोहली के शतक (118) और युवराज सिंह (58) और सुरेश रैना (71) के अर्द्द्धशतकों की बदौलत टीम इंडिया जीतने में कामयाब रही।

एक शानदार 2011 आईपीएल सीजन के बाद, उन्हें वेस्ट इंडीज की ओडीआई श्रृंखला के लिए सलामी बल्लेबाज के रूप में चुना गया और फिर से निराश हुए, तीन मैचों में उन्होंने सिर्फ 58 रन बनाये। उन्होंने भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन 2012 में अपने घरेलू सत्र में तीन शतक लगाए, जिसने उन्हें टीम का अगला सलामी बल्लेबाज बना दिया।

धवन ने वनडे में अपना शानदार फॉर्म जारी रखा और जून 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिला। उन्होंने पांच मैचों में 363 रन बनाए, जिनमें दो शतक और एक अर्धशतक शामिल है।

शिखर धवन 2015 के विश्व कप में अपना फॉर्म वापस लाने के लिए समय के खिलाफ दौड़ में थे। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की गति और उछाल ने धवन को पीछे छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने भारत के लिए सही समय पर अच्छा प्रदर्शन किया, उन्होंने दो शतक और एक अर्धशतक की मदद से 412 रन बनाये, मेलबर्न में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 137 रन बनाये।

जून 2011 में उन्होंने टी20 का पहला मैच वेस्ट इंडीज के खिलाफ क्वीन्स पार्क ओवल में खेला था। जिसमें वे ओपनिंग करते हुए 11 गेंदों पर मात्र 5 रन बनाकर आउट हो गए। वनडे सीरीज के पहले मैच में जरूर शिखर धवन ने 76 गेंदों पर 51 रन बनाकर अपने टैलेंट का नमूना दिखाया लेकिन अगले मैचों में फिर वे क्रमश 3, 4 और 11 रन ही बना सके।

14 मार्च 2013 को उन्होंने पहला टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। टेस्ट के तीसरे ही दिन उन्होंने सबसे तेज शतक पूरा किया और भारत के पूर्व खिलाड़ी गुंडप्पा विश्वनाथ का रिकॉर्ड तोड़ दिया जिन्होंने पहले ही मैच में सबसे तेज शतक बनाया था। शिखर धवन ने उस टेस्ट मैच में केवल 168 गेंदों में नाबाद 185 रन बनाए थे।

धवन भारत के ऐसे तीसरे सलामी बल्लेबाज है जिन्होंने लगातार दो शतक लगाये है। इससे पहले ऐसा रिकॉर्ड सुनील गावस्कर और राहुल द्रविड़ ने बनाया था। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने क्रिस गेल, हर्शल गिब्स और सौरव गांगुली के सबसे ज्यादा शतकों की बराबरी की। उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी में 500 रन बनाने वाले सबसे तेज़ बल्लेबाज बनने का कीर्तिमान भी बनाया, जिसमें उन्होंने केवल 7 मैच खेले।

शिखर धवन का दूसरा नाम गब्बर है। उन्हें गब्बर नाम इसलिए दिया गया क्यु की जब वो स्लिप में फील्डिंग करते थे तो टीम का उत्साह बढ़ाने ने के लिए अक्सर अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र की मशहूर “शोले” फ़िल्म का मशहूर खलनायक अमजद खान के डायलॉग बोला करते थे। इसीलिए उन्हें सब अभी गब्बर नाम से ही पुकारते है।

सम्मान और पुरूस्कार – Shikhar Dhawan Awards 

  • आईसीसी विश्व एकदिवसीय एकादश: 2013.
  • सीईएटी वर्ष का अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी: 2013-14.
  • 174 गेंदों पर 187 के द्वारा पदार्पण में सबसे तेज़ टेस्ट शतक.
  • आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में लगातार दो गोल्डन बैट पाने वाले एकमात्र खिलाड़ी.

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