शनि गृह की जानकारी, उत्पत्ति, तथ्य | Saturn Planet Information in Hindi

Saturn Planet in Hindi/ शनि, सूर्य से छठां ग्रह है तथा बृहस्पति के बाद अकार में सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह हैं। औसत व्यास में पृथ्वी से नौ गुना बड़ा शनि एक गैस दानव है। जबकि इसका औसत घनत्व पृथ्वी का एक आठवां है, अपने बड़े आयतन के साथ यह पृथ्वी से 95 गुने से भी थोड़ा बड़ा है। इसका खगोलिय चिन्ह ħ है। यह आकाश में पीले तारे के समान दिखाई पड़ता है। इसके उपग्रहों की संख्या 30 है, जो सबसे अधिक है। शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाईटन है। यह आकार में बुध ग्रह के बराबर है।

Saturn Planet Profile in Hindi

Equatorial Diameter:120,536 km
Polar Diameter:108,728 km
Mass:5.68 × 10^26 kg (95 Earths)
Moons:62 (Titan, Enceladus, Iapetus & Rhea)
Rings:30+ (7 Groups)
Orbit Distance:1,426,666,422 km (9.54 AU)
Orbit Period:10,756 days (29.5 years)
Effective Temperature:-178 °C
First Record:8th century BC
Recorded By:Assyrians

शनि ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी – Saturn Planet Information in Hindi

हमारे सौर मंडल में पृथ्वी और मंगल के बाद शनि ही एक ऐसा ग्रह है, जिसको आसानी से पहचाना जा सकता है। शनि के छल्ले या रिंग इसके प्रमुख आकर्षक हैं जिसके द्वारा यह तुरंत पहचान में आ जाता है। अगर क्रम के आधार पर देखे तो शनि सौर मंडल का छठा ग्रह है एवं आकार में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। वही खुली आँखों से दिखने वाले ग्रहों में शनि सबसे दूर स्थित ग्रह है। आकाश में यह पीले तारे के समान दिखाई देता है। इसका गुरुत्व पानी से भी कम है। इसका नाम एक रोमन देवता के नाम पर रखा गया था। सप्ताह का छठा दिन भी शनि के कारण ही शनिवार या Saturday कहलाता है।

शनि का आंतरिक ढांचा संभवतया, लोहा, निकल और चट्टानों (सिलिकॉन और ऑक्सीजन यौगिक) के एक कोर से बना है, जो धातु हाइड्रोजन की एक मोटी परत से घिरा है, तरल हाइड्रोजन और तरल हीलियम की एक मध्यवर्ती परत तथा एक बाह्य गैसीय परत है। ग्रह अपने ऊपरी वायुमंडल के अमोनिया क्रिस्टल के कारण एक हल्का पीला रंग दर्शाता है। माना गया है धातु हाइड्रोजन परत के भीतर की विद्युतीय धारा, शनि के ग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र को उभार देती है, जो पृथ्वी की तुलना में कमजोर है और बृहस्पति की एक-बीसवीं शक्ति के करीब है।

बाह्य वायुमंडल आम तौर पर नीरस और स्पष्टता में कमी है, हालांकि दिर्घायु आकृतियां दिखाई दे सकती है। शनि पर हवा की गति, 1800 किमी/घंटा (1100 मील) तक पहुंच सकती है, जो बृहस्पति पर की तुलना में तेज, पर उतनी तेज नहीं जितनी वह नेप्च्यून पर है।

शनि की एक विशिष्ट वलय प्रणाली है जो नौ सतत मुख्य छल्लों और तीन असतत चाप से मिलकर बनी हैं, ज्यादातर चट्टानी मलबे व धूल की छोटी राशि के साथ बर्फ के कणों की बनी हुई है। बासठ चन्द्रमा ग्रह की परिक्रमा करते है; तिरेपन आधिकारिक तौर पर नामित हैं। इनमें छल्लों के भीतर के सैकड़ों ” छोटे चंद्रमा” शामिल नहीं है। टाइटन, शनि का सबसे बड़ा और सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा है। यह बुध ग्रह से बड़ा है और एक बड़े वायुमंडल को संजोकर रखने वाला सौरमंडल का एकमात्र चंद्रमा है। इसके आलावा शनि ग्रह के लगभग 82 उपग्रह है। अर्थात चंद्रमा की तरह उसके 82 चंद्रमा है। साथ ही फोबे, यूरोपा आदि उपग्रह है। फोबो विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।

शनि गैस का बहुत बड़ा गोला है जिसमे हाइड्रोजन एवं हीलियम गैस की मात्रा प्रमुख है। इसका कोर भाग गर्म लोहे और पथरीले चीजों से बना हुआ है जिसमे अमोनिया, मीथेन, गैस के मिश्रित बर्फ आदि ठोस रूप में पाए जाते हैं। शनि अपने छल्लों के कारण सौरमंडल का सबसे निराला और सुन्दर ग्रह कहलाता है। उसका उतना ही निराला एक उपग्रह है टाइटन, जिसे सारे सौरमंडल में पृथ्वी से सबसे अधिक मिलती-जुलती सतह वाला आकाशीय पिंड बताया जा रहा हैं।

शनि का व्यास पृथ्वी के व्यास से 9 गुना ज्यादा है जबकि घनत्व 8 गुना कम है। 120.536 किलोमीटर का इसका भूमध्य रेखीय व्यास है। अपनी धुरी पर घूमने में यह ग्रह 10 घंटे 34 मिनट लगाता है। कहते हैं कि शनि में लगभग 763 धरतियां समा सकती हैं। इसका एक वर्ष धरती के 29.45 साल बराबर का होता है। इसका भार पृथ्वी के मुकाबले 95 गुना ज्यादा है। शनि धरातल का तापमान 240 फेरनहाइट है या 139 डीग्री सेल्सीयस है।

Saturn History in Hindi

शनि ग्रह की खोज प्राचीन काल में ही कई सभ्यताओं द्वारा कर ली गई थी। प्राचीन काल में शनि गृह को रोमन में देवता के नाम पर जाना जाता था, इसी से नामकरण भी हुआ था। आधुनिक युग में शनि ग्रह को telescope के माध्यम से पहली बार देखने का श्रेय गैलीलियो गैलीली को जाता है जिन्होंने 1610 में इस ग्रह को अपनी बनाई telescope के माध्यम से देखा था। साल 1979 में पायनियर 11 शनि ग्रह तक पहुँचने वाला पहला ग्रह बना। यह शनि के सतह से लगभग 22000 किमी ऊपर से गुजरा एवं शनि के दो छल्लों की खोज की। बाद में वॉइज़र मिशन यहां से गुजरा जिसने इन छल्लों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसने कई महत्वपूर्ण जानकारियां भेजीं जिससे शनि के 9 चंद्रमाओं का पता चला।

शनि ग्रह पर हर साल एक टाइटैनिक या बहुत विशाल भूचाल आता है जो वायुमंडल एवं वहां के आकाशीय हवाओं में बाधा डालता है। साल 1876 से लेकर अबतक इस ग्रह के छह ऐसे भूचालों को रिकॉर्ड किया जा चुका है।

शनि देव – Shani Grah in Hindi

भारत में भी शनि गृह के कई मान्यताएं हैं। शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन हुआ था। सूर्य के अन्य पुत्रों की अपेक्षा शनि शुरू से ही विपरीत स्वभाव के थे। शनि जयंती 12 जून को मनाई जाती है। शनि भगवान सूर्य तथा छाया (संवर्णा) के पुत्र है। ये क्रूर ग्रह माने जाते हैं। इनकी दृष्टि में जो क्रूरता है, वह इनकी पत्नी के शाप के कारण है।


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