मुंबा देवी मंदिर का इतिहास व जानकारी | Mumba Devi Temple History in Hindi

Mumba Devi Temple, Mumbai / मुंबा देवी मंदिर, महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित एक मुंबा माता का मंदिर हैं। पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक मुंबा देवी को लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है। मुंबई का नाम ही मराठी में मुंबा आई यानि मुंबा माता के नाम से निकला है। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है।

मुंबा देवी मंदिर का इतिहास व जानकारी | Mumba Devi Temple History in Hindi

मुंबा देवी मंदिर की जानकारी – Mumba Devi Temple Story in Hindi

मुंबा देवी को समर्पित मंदिर चौपाटी की रेतीले तटों के निकट बाबुलनाथ में स्थित है। मुंबा देवी मंदिर में दर्शन करने देश के कोने-कोने से लोग आते हैं। श्रद्धालुओं की ऐसी मान्यता है कि यहां पर श्रद्धाभाव से जो मन्नतें मांगी जाती है, वे अवश्य पूरी होती हैं।

मुंबा देवी मुंबई की ‘ग्रामदेवी’ है इसलिए मुंबई निवासी हर शुभ कार्य में सबसे पहले उन्हें ही याद करते हैं। यहां के मछुआरा समाज का मानना है कि समुद्र में आने वाली हर बाधा से वे ही उन्हें सुरक्षित रखती हैं।

मुंबई का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा है। इसका नाम हिन्दू देवी दुर्गा का रूप, जिनका नाम मुंबा देवी है के नाम से पड़ा है। ‘मुंबई’ नाम के पहले दो शब्द मुंबा या महा-अंबा देवी के नाम से रखा गया है। वहीं आखिरी शब्द आई, जिसे मराठी में ‘मां’ कहते हैं से पड़ा है,जिसे ऑफिशियली सन 1995 में पहली बार इसे ये नाम दिया गया।

माता का वाहन हर रोज बदला जाता है। सोमवार को नंदी, मंगलवार हाथी, बुधवार मुर्गा, गुरूवार गरुड़, शुक्रवार हंस, शनिवार हाथी, रविवार सिंह आदि वाहनों पर मुंबा देवी विराजमान होती है। सभी वाहन चांदी में बनाए गए हैं।

मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार पर गणेश की मूर्ति है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर पट खुलने से पहले देवी की शृंगार किया जाता है। देवी की मूर्ति पर मुकुट के अलावा नाक की लौंग और सोने का हार पहनाया गया है। मंदिर के बाई ओर जगदंबा और अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति स्थापित की गई है।

मान्यता के मुताबिक देवी लक्ष्मी, ‘समुद्र’ की बेटी है। यही वजह है कि समुद्र किनारे बसे शहरों में संपत्ति, धन, एेश्वर्य और संपदा हमेशा से बनी रही है। धन को ‘माया’ भी कहा गया है, यही वजह है कि मुंबई को ‘मायानगरी’ भी कहा जाता है। मुंबई भारत का सबसे रईस शहर है। यहां भारत के सबसे ज्यादा दौलतमंद लोग रहते हैं, जबकि यह दुनिया का सातवां ऐसा शहर है, जहां सबसे रईस लोग रहते हैं।

यह मंदिर अत्‍यंत आकर्षक है। इसमें स्‍थापित माता की मूर्ति भी काफी भव्‍य है। यहां मुंबा देवी की नारंगी चेहरे वाली रजत मुकुट से सुशोभित मूर्ति स्थापित है। न्यास ने यहां अन्नपूर्णा और माता जगदंबा की मूर्तियां भी मुंबा देवी की अगल-बगल स्थापित करवाई थीं।

मुंबा मंदिर का इतिहास – Mumba Devi Temple History in Hindi

मुंबई में शुरू में मछुआरों की बस्ती थी। इन्हें यहां कोली कहते हैं। मुंबादेवी इसी समाज की कुलदेवी हैं। अपने कुलदेवी के कृपा के चलते कोली समाज को समुद्र से कोई नुकसान नहीं हुआ। अतीत में जिस कुलदेवी की पूजा-अर्चना कोली समाज के लोग करते हैं। वहां पर आज सबसे अधिक उत्तर भारतीय समाज के लोग दूर-दूर से दर्शन करते हैं।

कोली समाज ने बोरीबंदर में मुंबादेवी की स्थापना की थी। वर्तमान में जहां सीएसटी स्टेशन (पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस) इमारत है, पहले ठीक उसी स्थान पर मुंबादेवी मंदिर था। लेकिन अंग्रेजों के शासनकाल में सन 1918 में मुंबादेवी को मरीन लाइंस के पास स्थित कालबादेवी के बीच बाजार में स्थानांतरित कर दिया। यहां पर पूरे विधि से मंदिर में मुंबादेवी की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। जब मंदिर यहां स्थानांतरित हुआ था, तब इसके तीन तरफ बड़े तालाब थे, जो अब नहीं है।

इस मंदिर की भूमि पांडु सेठ ने दान में दी थी, व मंदिर की देखरेख भी उन्हीं का परिवार करता था। बाद में मुंबई उच्च न्यायालय के आदेशा्नुसार मंदिर के न्यास की स्थापना की गई। अब भी वही मंदिर न्यास यहां की देखरेख करता है।


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