मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन का इतिहास, जानकारी | Ujjain Temple Mangal Nath

Mangal Nath Temple in Hindi / मंगलनाथ मंदिर, मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है। उज्जैन को पुराणों में मंगल की जननी कहा जाता है। ऐसे व्यक्ति जिनकी कुंडली में मंगल भारी रहता है, वे अपने अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए मंगलनाथ मंदिर में पूजा-पाठ करवाने आते हैं। कर्क रेखा पर स्थित इस मंदिर को देश का नाभि स्थल माना जाता है।

मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन का इतिहास, जानकारी | Ujjain Temple Mangal Nath

मंगलनाथ मंदिर की जानकारी – Mangalnath Mandir Ujjain in Hindi

मंगल दोष एक ऐसी स्थिति है, जो जिस किसी जातक की कुंडली में बन जाये तो उसे बड़ी ही अजीबोगरीब परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति जिनकी कुंडली में मंगल भारी रहता है, वे अपने अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए ‘मंगलनाथ मंदिर’ में पूजा-पाठ करवाने आते हैं।

मान्यता है कि मंगल ग्रह की शांति के लिए दुनिया में ‘मंगलनाथ मंदिर’ से बढ़कर कोई स्थान नहीं है। कर्क रेखा पर स्थित इस मंदिर को देश का नाभि स्थल माना जाता है। मंगल को भगवान शिव और पृथ्वी का पुत्र कहा कहा गया है।। इस कारण इस मंदिर में मंगल की उपासना शिव रूप में भी की जाती है।

हर मंगलवार के दिन इस मंदिर में लोगों का ताँता लगा रहता है, लेकिन मार्च की अंगारक चतुर्थी के दिन का नजारा बेहद भव्य होता है। आप अपनी सुविधा अनुसार इस मंदिर में कभी भी आ सकते हैं। यहाँ हर मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलता रहता है।

मंदिर का इतिहास – Mangal Nath Temple History in Hindi

हालाँकि भारत में मंगल देवता के कई मंदिर हैं, लेकिन उज्जैन में इनका जन्म-स्थान होने के कारण यहाँ की पूजा को ख़ास महत्व दिया जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर सदियों पुराना है। सिंधिया राजघराने में इसका पुनर्निर्माण करवाया गया था। उज्जैन शहर को भगवान महाकाल की नगरी कहा जाता है, इसलिए यहाँ मंगलनाथ भगवान की शिव रूपी प्रतिमा का पूजन किया जाता है।

मंगल भगवान का स्थान नवग्रहों में आता है। यह ‘अंगारका’ और ‘खुज’ नाम से भी जाना जाता है। वैदिक पौराणिक कथाओं के अनुसार मंगल ग्रह शक्ति, वीरता और साहस के परिचायक है तथा धर्म के रक्षक माने जाते हैं। मंगल देव को चार हाथ वाले त्रिशूल और गदा धारण किए दर्शाया गया है। मंगल देवता की पूजा से मंगल ग्रह से शांति प्राप्त होती है तथा कर्ज से मुक्ति और धन लाभ प्राप्त होता है। मंगल के रत्न रूप में मूंगा धारण किया जाता है। मंगल दक्षिण दिशा के संरक्षक माने जाते हैं।

पौराणिक कथा – Mangal Nath Temple Story in Hindi

‘स्कन्दपुराण’ के ‘अंवतिकाखंड’ में इस मंदिर के जन्म से जुड़ी कथा है। कथा के अनुसार अंधाकासुर नामक दैत्य ने भगवान शिव से वरदाना पाया था कि उसके रक्त की बूँदों से नित नए दैत्य जन्म लेते रहेंगे। इन दैत्यों के अत्याचार से त्रस्त जनता ने शिव की अराधना की। तब शिव शंभु और दैत्य अंधाकासुर के बीच घनघोर युद्ध हुआ। ताकतवर दैत्य से लड़ते हुए शिवजी के पसीने की बूँदें धरती पर गिरीं, जिससे धरती दो भागों में फट गई और मंगल ग्रह की उत्पत्ति हुई।

शिवजी के वारों से घायल दैत्य का सारा लहू इस नए ग्रह में मिल गया, जिससे मंगल ग्रह की भूमि लाल रंग की हो गई। दैत्य का विनाश हुआ और शिव ने इस नए ग्रह को पृथ्वी से अलग कर ब्रह्मांड में फेंक दिया। इस दंतकथा के कारण जिन लोगों की पत्रिका में मंगल भारी होता है, वह उसे शांत करवाने के लिए इस मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। इस मंदिर में मंगल को शिव का ही स्वरूप दिया गया है।

मंगल दोषों का निवारण – Mangal Nath 

मंगल दोष पूरी तरह से ग्रहों की स्थति पर आधारित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यदि किसी जातक के जन्म चक्र के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें घर में मंगल हो तो ऐसी स्थिति में पैदा हुआ जातक मांगलिक कहा जाता है। यह स्थिति विवाह के लिए अत्यंत अशुभ मानी जाती है। संबंधो में तनाव व बिखराव, घर में कोई अनहोनी व अप्रिय घटना, कार्य में बेवजह बाधा और असुविधा तथा किसी भी प्रकार की क्षति और दंपत्ति की असामायिक मृत्यु का कारण मांगलिक दोष को माना जाता है।

ऐसे व्यक्ति जिनकी कुंडली में मंगल भारी रहता है, वे अपने अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए ‘मंगलनाथ मंदिर’ में पूजा-पाठ करवाने आते हैं। और अपनी समस्या का निवारण करवाते हैं।

कैसे जाएँ – Mangal Nath Temple Guide 

उज्जैन-आगरा-कोटा-जयपुर मार्ग, उज्जैन-बदनावर-रतलाम-चित्तौड़ मार्ग, उज्जैन-मक्सी-शाजापुर-ग्वालियर-दिल्ली मार्ग, उज्जैन-देवास-भोपाल मार्ग, उज्जैन-धुलिया-नासिक-मुंबई मार्ग। वही रेलवे के लिए उज्जैन से मक्सी-भोपाल मार्ग (दिल्ली-नागपुर लाइन), उज्जैन-नागदा-रतलाम मार्ग (मुंबई-दिल्ली लाइन), उज्जैन-इंदौर मार्ग (मीटरगेज से खंडवा लाइन), उज्जैन-मक्सी-ग्वालियर-दिल्ली मार्ग। वायुमार्ग- उज्जैन से इंदौर एअरपोर्ट लगभग 65 किलोमीटर दूर है।

उज्जैन में अच्छे होटलों से लेकर आम धर्मशाला तक सभी उपलब्ध हैं। इसके साथ-साथ महाकाल समिति की महाकाल और हरसिद्धि मंदिर के पास अच्छी धर्मशालाएँ हैं। इन धर्मशालाओं में एसी, नॉन एसी रूम और डारमेट्री उपलब्ध हैं। मंदिर प्रबंध समिति इनका अच्छा रखरखाव करती है।

मंदिर के प्रबंधन की व्यवस्था सरकार के अधीन है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पिछले एक दशक में उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध तथा मंदिर का विस्तार किया गया है। उज्जैन में 2016 में ‘उज्जयिनी कुंभ’, ‘सिंहस्थ पर्व’ का आयोजन होगा, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना के मद्देनजर मंगलनाथ सहित छह मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास कार्यों के लिए लगभग चार करोड़ रुपए की एक कार्य योजना तैयार की गई है।


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1 thought on “मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन का इतिहास, जानकारी | Ujjain Temple Mangal Nath”

  1. M ek strong manglik ladke se shadi krna chti hu…m manglik nhi hu…..kya yha upay krane k bd hum shadi kr skte h?

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