मिस्र पिरामिडो का रोचक इतिहास, रहस्य Misr Pyramid History in Hindi

मिस्र या इजिप्ट (Egypt) के पिरामिड वहां के तत्कालीन फैरो (सम्राट) के लिए बनाए गए स्मारक स्थल हैं, जिनमें राजाओं के शवों को दफनाकर सुरक्षित रखा गया है। इन शवों को ममी कहा जाता है। उनके शवों के साथ खाद्यान, पेय पदार्थ, वस्त्र, गहनें, बर्तन, वाद्य यंत्र, हथियार, जानवर एवं कभी-कभी तो सेवक सेविकाओं को भी दफना दिया जाता था। प्राचीन मिस्रवासियों की धारणा थी कि उन का राजा किसी देवता का वंशज है, अत: वे उसी रूप में उसे पूजना चाहते थे। मृत्यु के बाद राजा दूसरी दुनिया में अन्य देवताओं से जा मिलता है, इस धारणा के चलते राजा का मकबरा बनाया जाता था और इन्हीं मकबरों का नाम पिरामिड (Pyramid) रखा गया था।

मिस्र के पिरामिडो का रोचक इतिहास, रहस्य Misr Pyramids History In Hindiमिस्र के पिरामिडो का इतिहास – Egyptian pyramids History In Hindi

दरअसल, प्राचीन मिस्र में राजा अपने जीवनकाल में ही एक विशाल एवं भव्य पिरामिड का निर्माण कराता था ताकि उसे मृत्यु के बाद उस में दफनाया जा सके। यह पिरामिड त्रिभुजाकार होता था। ये पिरामिड चट्टान काट कर बनाए जाते थे। इन पिरामिडों में केवल राजा ही नहीं बल्कि रानियों के शव भी दफनाए जाते थे। दफ़नाने से पहले उनके शव को एक लेप लगाकर संरक्षित कर दिया जाता था। यही नहीं, शव के साथ अनेक कीमती वस्तुएं भी दफन की जाती थीं। चोरलुटेरे इन कीमती वस्तुओं को चुरा कर न ले जा सकें, इसलिए पिरामिड की संरचना बड़ी जटिल रखी जाती थी। प्राय: शव को दफनाने का कक्ष पिरामिड के केंद्र में होता था।

भारत की तरह ही मिस्र की सभ्यता भी बहुत पुरानी है और प्राचीन सभ्यता के अवशेषों के उस गौरव गथा कहते हैं। योनि में मिस्र में 138 पिरामिड हैं और काहिरा के उपनगर गीज़ा में तीन लेकिन सामान्य विश्वास का विपरीत सिर्फ गिजा का ‘ग्रेट पिरामिड’ ही प्राचीन विश्व की सात अजूबों की सूची में है। दुनिया के सात प्राचीन आश्चर्यों में शेष यह एकमात्र ऐसा स्मारक है जो काल प्रवाह भी खत्म नहीं हो सकता है।

यह पिरामिड 450 फुट ऊंचे है। 4300 सालो तक यह दुनिया की सबसे ऊंची संरचना है। 19वीं सदी में ही उसकी ऊंचाई का कर्तमीन टूटा इसका आधार 13 एकड़ में फैला है जो लगभग 16 फुटबॉल मैदानों में है यह 25 लाख चूनापट्ठरों के खंडों से निर्मित है जिनमें से हर एक का वजन 2 से 30 टन के बीच है। ग्रेट पिरामिड इतने परिशुद्धता से बनाया गया है कि वर्तमान तकनीक जैसे कृति को दोहरा नहीं सकते हैं। प्रमाण बताता है कि उसके निर्माण करीब 2560 साल ईसा पूर्व मिस्र के शासक खुफु के चौथे वंश ने अपनी कब्र के रूप में किया था। इसे बनाने में लगभग 23 साल लग गए।

त्रिकोण आकार में बनाए गए पिरामिडों की संरचना का सबसे मुख्य हिस्सा उनका ऊपरी भाग होता है, जिसे सबसे अंत में बनाया जाता है। यह ऊपरी भाग जिसे कैपस्टोन या टॉप स्टोन कहा जाता है इतना आवश्यक या महत्वपूर्ण होता है कि इसे सोने या फिर बेशकीमती पत्थर से बनाया जाता है। लेकिन ग्रेट पिरामिड के ऊपर कैपस्टोन ही नहीं है। इसका राज अभी नहीं पता चल पाया की ऐसा क्यों हैं।

पिरामिड बनाना आसान नहीं था। मिस्रवासियों को इस कला में दक्ष होने में काफी समय लगा। विशाल योजना बना कर नील नदी को पार कर बड़ेबड़े पत्थर लाने पड़ते थे। पिरामिड बनाने में काफी मजदूरों की आवश्यकता होती थी। पत्थर काटने वाले कारीगर भी अपने फन में माहिर होते थे। ऐसी मान्यता है कि पिरामिड ईसापूर्व 2690 और 2560 शताब्दियों में बनाए गए। सब से पुराना पिरामिड सक्कारा में स्थित जोसीर का सीढ़ीदार पिरामिड है। इसे लगभग 2650 ईसापूर्व बनाया गया था।

Egypt Pyramid Mummy in Hindi

मिस्र में पुराने जमाने में शासको को फराओ के नाम से पुकारा जाता था। इनकी मौत होने पर, दफ़नाने से पहले उनके शव को एक लेप लगाकर संरक्षित कर दिया जाता था। लेप लगाने से पहले शरीर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को बाहर निकाल दिया जाता था, यहाँ तक की दिमाग को भी। हालाँकि दिल को नहीं निकाला जाता था। इससे इनकी लाश बहुत हद तक ठीक रहती थी। इसे मम्मी के नाम जाना जाता हैं। प्राचीन मिस्र और विश्व के कई अन्य देश के लोगों का पुनर्जन्म में विश्वास था और वो ये मानते थे की मृत व्यक्ति के शरीर को संभाल कर रखा जाना चाहिए ताकि अगले जन्म में वो उस शरीर को पा सके

मिस्र के पिरामिडो के बारे में रोचक बातें  – Pyramid ka Rahasya in Hindi

  • प्राचीन मिस्र में शाही घराने के लोगों और शासकों की मृत्यु के पश्चात उनके शव को एक लेप लगाकर संरक्षित कर दिया जाता था। वे मानते थे कि मौत के बाद भी जिन्दगी है इसलिए मृत्यु के बाद उनके शव के साथ जरूरत की सारी वस्तुएं और उनके रक्षकों को भी दफना दिया जाता था।
  • क्या आप जानते हैं इन पिरामिडो को बनाने की तकनीक का अब तक पता नहीं चल पाया हैं। वैज्ञानिको कई सालो से इस तकनीक को पता लगाने में लगे पर अबतक कोई सफलता हाथ नहीं लगा हैं।
  • मिस्र के पिरामिड अपने भीमकाय आकार, अनूठी संरचना और मजबूती के लिए तो जगत्‌ प्रसिद्ध हैं ही, लेकिन उससे भी कहीं अधिक प्रसिद्ध हैं अपने जादुई प्रभाव के लिए। वैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा यह प्रमाणित हो गया है कि पिरामिड के अंदर विलक्षण किस्म की ऊर्जा तरंगें लगातार काम करती रहती हैं, जो जड़ (निर्जीव) और चेतन (सजीव) दोनों ही प्रकार की वस्तुओं पर प्रभाव डालती हैं। वैज्ञानिकों ने पिरामिड के इस गुण को ‘पिरामिड पॉवर’ की संज्ञा दी है।
  • सिर दर्द एवं दाँत दर्द के रोगियों को पिरामिड के अंदर बैठने पर दर्द से छुटकारा मिल जाता है। ‘पिरामिड पॉवर’ के आधुनिक खोजकर्ता स्वयं बोबिस ने पिरामिड के आकार की टोपी बनाई और पहनकर आजमाया। बोबिस का कहना है कि इसको पहनने से सिर दर्द तो दूर हो ही जाता है, साथ ही कई प्रकार के मानसिक विकार भी दूर हो जाते हैं।
  • मिस्र के अन्य पिरामिडों के बीच एक ऐसा पिरामिड भी है जिसके अंदर बहुमूल्य खजाना है लेकिन कोई भी आम नागरिक या फिर विशेषज्ञ भी उस खजाने तक पहुंच नहीं पाया है। यहां तक कि अगर कोई उस खजाने को हाथ लगाने तक की गलती भी करता है तो भी उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
  • मिस्र के राजा का यह खजाना बहुत बड़ा है. कहते हैं इस खजाने में इतना धन है कि मिस्र के नागरिकों की आने वाली 5 पुश्तें तक इसे मनचाहे ढंग से उड़ाएं तो भी इस खजाने का कुछ भाग बच जाएगा। लेकिन इस खजाने तक जिसने भी पहुंचने की हिम्मत की वह बीमार पड़ गया और बेहद अप्रत्याशित तरीके से मौत के आगोश में समा जाता है।
  • मिस्र से जुड़ा ऐसा ही एक रहस्य है रानी नेफरतिती की ममी का जिसे पिछले कई वर्षों से इतिहासकार और पुरातत्वविद खोजने में लगे हैं। यह लापता ममी उस मिस्र की उस खूबसूरत रानी नेफरतिती की है जिसकी मूर्ति तो जर्मन पुरातत्विदों द्वारा 1912 में खोज ली गई थी लेकिन उसकी ममी आजतक किसी को नहीं मिल पाई।
  • मिस्र को पिरामिडों का देश कहा जाता है लेकिन जितनी जिज्ञासा और दिलचस्पी फराओ तूतनखामेन के मकबरे को देखी जा सकती है वह किसी और के लिए नहीं दिखती। जब फराओ के मकबरे को तलाश किया गया तो उसकी ममी के पास से सोने-चांदी और बहुमूल्य रत्नों से जड़े आभूषण पाए गए थे। रिसर्च में पता चला है कि तूतनखामेन मात्र 9 वर्ष की उम्र में सम्राट बना और 19 साल की उम्र में उसकी मृत्यु भी हो गई थी। ये उन चंद सम्राटो में एक था जिसे मिस्रवासी देवता मानते थे।
  • वैसे मिस्र में कई पिरामिड हैं, पर इन में से गीजा का ग्रेट पिरामिड दुनिया के सात अजूबो में शामिल हैं। बाकी 6 अजूबे काफी हद तक छतिग्रस्त हो गए हैं लेकिन ग्रेट पिरामिड का ऊपर का 10 मीटर ही गिरा हैं। इस पिरामिड के पास दो और पिरामिड हैं पर वो इससे छोटे हैं।
  • 1922 में तूतनखामन की ममी को खोजा गया था. ब्रिटिश पुरातत्त्ववेत्ता हौवर्ड कार्टर ने फराओ (राजा) की इस ममी को ढूंढ़ा था। ममी ने तावीज पहन रखा था और पूरा चेहरा सोने से बने मास्क से ढका हुआ था। कार्टर और उनकी टीम ने फराओ के चेहरे से मास्क भी उतारा था। कहा जाता है कि अब तक केवल 50 लोगों ने तूतनखामन के चेहरे को देखा है। इस ममी को एक ताबूत में रखा गया था और जब इस प्राचीन शासक के शरीर को इस से बाहर निकाला गया तो उस का चेहरा झुर्रीदार और काला था। हालांकि बाद में वापस मास्क लगा दिया गया था। उन की कब्र से सोने और हाथी दांत की बनी ढेरों कीमती चीजें मिली थीं।
  • त्रिकोण आकार में बनाए गए पिरामिडों की संरचना का सबसे मुख्य हिस्सा उनका ऊपरी भाग होता है, जिसे सबसे अंत में बनाया जाता है। यह ऊपरी भाग जिसे कैपस्टोन या टॉप स्टोन कहा जाता है इतना आवश्यक या महत्वपूर्ण होता है कि इसे सोने या फिर बेशकीमती पत्थर से बनाया जाता है। लेकिन ऐसा क्या हुआ जो मिस्र के ग्रेट पिरामिड के ऊपर कैपस्टोन ही नहीं है? क्या ग्रेट पिरामिड को हमेशा से ही बिना कैपस्टोन के रखा गया था या फिर बहूमूल्य पत्थर होने की वजह से उसे लूट लिया गया? इतिहासकार यह मानने से इनकार करते हैं कि ग्रेट पिरामिड के टॉप स्टोन को चुराया गया था। अगर ऐसा है तो फिर वाकई इतना महत्वपूर्ण पिरामिड होने के बावजूद इसे क्यों सोने या किसी अन्य बहुमूल्य पत्थर से नहीं ढककर रखा गया?
  • ग्रेट पिरामिड एक पाषाण-कंप्यूटर जैसा है। यदि इसके किनारों की लंबाई, ऊंचाई और कोणों को नापा जाय तो पृथ्वी से संबंधित भिन्न-भिन्न चीजों की सटीक गणना की जा सकती है।
  • ग्रेट पिरामिड में पत्थरों का प्रयोग इस प्रकार किया गया है कि इसके भीतर का तापमान हमेशा स्थिर और पृथ्वी के औसत तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के बराबर रहता है। यदि इसके पत्थरों को 30 सेंटीमीटर मोटे टुकड़ों मे काट दिया जाए तो इनसे फ्रांस के चारों आ॓र एक मीटर ऊंची दीवार बन सकती है।
  • पिरामिड में नींव के चारों कोने के पत्थरों में बॉल और सॉकेट बनाये गये हैं ताकि ऊष्मा से होने वाले प्रसार और भूंकप से सुरक्षित रहे।
  • मिस्रवासी पिरामिड का इस्तेमाल वेधशाला, कैलेंडर, सनडायल और सूर्य की परिक्रमा में पृथ्वी की गति तथा प्रकाश के वेग को जानने के लिए करते थे।
  • पिरामिड को गणित की जन्मकुंडली भी कहा जाता है जिससे भविष्य की गणना की जा सकती है।

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