कमल मंदिर इतिहास और रोचक बातें | Lotus Temple History In Hindi

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Lotus Temple / कमल मंदिर भारत के नयी दिल्ली में स्थित एक मंदिर है जो की उन्नीसवीं सदी के ईरान में सन 1844 मे स्थापित एक नया धर्म, बहाई धर्म का हैं। यह अपने फुल जैसे आकार के लिये प्रसिद्ध है जिसे मॉडर्न भारत का 20वी शताब्दी का ताज महल भी कहा जाता है। ये एक ऐसा मंदिर हैं जिसमे किसी भी धर्म का व्यक्ति इस मंदिर पर जाके प्राथना कर सकता हैं।

कमल मंदिर इतिहास और रोचक बातें | Lotus Temple History In Hindiलोटस टैंपल को भारतीय उपमहाद्वीप में इसे मदर टेम्पल भी कहा जाता है और काफी समय में शहर का यह मुख्य आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है। कमल मंदिर ने बहुत से आर्किटेक्चरल अवार्ड अर्जित किये है और 125 से भी ज्यादा अखबारों में इसे प्रकाशित किया गया है और इस मंदिर पर बहुत सी पत्रिकाओ में लेख भी लिखे गये है। दिल्ली में स्थित यह बेहतरीन और सबसे शानदार इमारत है और इसे आइकोनिक प्रतीक भी कहा जाता है। इस मंदिर को अपने वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार द्वारा नवाजा जा चुका है।

लोटस टैंपल  का इतिहास और जानकारी – Lotus Temple History In Hindi

लोटस टैंपल यानी बहाई मंदिर 26 एकड़ में बना है, यह 1986 में बनकर तैयार हुआ, लोटस टैंपल भारत के राष्ट्रीय पुष्प कमल और भारतीय सौन्दर्य का न केवल प्रतीक है बल्कि सर्वधर्म की एकता और शान्ति का प्रतीक है। इसमें एक बड़ा शान्त और प्रार्थना स्थल है जिसमें सभी धर्मों के लोग अपने-अपने इष्टदेव या धर्म की प्रार्थना करते हैं यहाँ कोई भी मूर्ति या किसी भी प्रकार का धर्म नहीं है। अपने इसी ख़ास गुण के कारण यह दिल्ली और देश-विदेश में ताजमहल के बाद लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है।

यह मंदिर एशिया महाद्वीप में बना एकमात्र बहाई प्रार्थना केंद्र है। भारत के अलावा पनामा, कंपाला, इल्लिनॉइस, फ्रैंकफर्ट, सिडनी और वेस्ट समोआ में लोटस टैंपल के केंद्र हैं। लोटस टैंपल के सभी केंद्र बहाई आस्था के प्रतीक हैं और अपने अद्वितीय वास्तु शिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर को बनाने में कुल 10 मिलियन रु. की लागत आई थी। मंदिर का उद्घाटन 24 दिसंबर 1986 को हुआ लेकिन आम जनता के लिए यह मंदिर 1 जनवरी 1987 को खोला गया। लोटस टैंपल तालाब और बगीचों के बीच है और यह मंदिर ऐसा लगता है जैसे पानी में कमल तैर रहा हो। कमल भारत की सर्वधर्म समभाव की संस्कृति को दर्शाता है। मंदिर के प्रार्थना केंद्र में कोई मूर्ति नहीं है। लोटस टैंपल में किसी भी धर्म के अनुयायी आकर ध्यान लगा सकते हैं। मंदिर में एक सूचना केंद्र भी है।

मंदिर का स्थापत्य वास्तुकार फ़रीबर्ज़ सहबा ने तैयार किया है। इस मंदिर के निर्माण के बाद ऐसी जगह की जरूरत महसूस हुई, जहाँ पर सभी जिज्ञासुयों के प्रश्नों का सहजता से उत्तर दिया जा सके। तब सूचना केंद्र के गठन के बारे में निर्णय लिया गया। सूचना केंद्र के निर्माण में करीब पांच साल का समय लगा। इसको मार्च 2003 में जिज्ञासुओं के लिए खोला गया। सूचना केंद्र में मुख्य सभागार है, जिसमें करीब 400 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। इसके अतिरिक्त दो छोटे सभागार भी हैं, जिसमें करीब 70 सीटें है। सूचना केंद्र में लोगों को बहाई धर्म के बारे में जानकारी भी दी जाती है। इसके साथ ही आगंतुकों को लोटस टेंपल की जानकारी दी जाती है।

यह मंदिर ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांत को यथार्थ रूप देता हैं। इन सभी मंदिरों की सार्वलौकिक विलक्षणता है – इसके नौ द्वार और नौ कोने हैं। माना जाता है कि नौ सबसे बड़ा अंक है और यह विस्तार, एकता एवं अखंडता को दर्शाता है। उपासना मंदिर चारों ओर से नौ बड़े जलाशयों से घिरा है, जो न सिर्फ भवन की सुंदरता को बढ़ता है बल्कि मंदिर के प्रार्थनागार को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान करते है। बहाई उपासना मंदिर उन मंदिरों में से है जो गौरव शांति एवं उत्कृष्ट वातावरण को ज्योतिर्मय करता है। उपासना मंदिर मीडिया प्रचार प्रसार और श्रव्य माध्यमों में आगंतुकों को सूचनाएँ प्रदान करता है। सुबह और शाम की लालिमा में सफेद रंग की यह संगमरमरी इमारत अद्भुत लगती है। कमल की पंखुड़ियों की तरह खड़ी इमारत के चारों तरफ लगी दूब और हरियाली इसे इसे कोलाहल भरे इलाके में शांति और ताजगी देने वाला बनाती हैं।

मंदिर में पर्यटकों को आर्किषत करने के लिए विस्तृत घास के मैदान, सफेद विशाल भवन, ऊंचे गुंबद वाला प्रार्थनागार और प्रतिमाओं के बिना मंदिर से आकर्षित होकर हजारों लोग यहां मात्र दर्शक की भांति नहीं बल्कि प्रार्थना एवं ध्यान करने तथा निर्धारित समय पर होने वाली प्रार्थना सभा में भाग लेने भी आते हैं। यह विशेष प्रार्थना हर घंटे पर पांच मिनट के लिए आयोजित की जाती है। गर्मियों में सूचना केंद्र सुबह 9:30 बजे खुलता है, जो शाम को 6:30 पर बंद होता है। जबकि सर्दियों में इसका समय सुबह दस से पांच होता है। इतना ही नहीं लोग उपासना मंदिर के पुस्तकालय में बैठ कर धर्म की किताबें भी पढ़ते हैं और उनपर शोध भी करने आते हैं।

बहाई धर्म – Bahai Religion Information In Hindi

बहाई पंथ उन्नीसवीं सदी के ईरान में सन 1844 मे स्थापित एक नया धर्म है जो एकेश्वरवाद और विश्वभर के विभिन्न धर्मों और पंथों की एकमात्र आधारशिला पर ज़ोर देता है। इसकी स्थापना बहाउल्लाह ने की थी और इसके मतों के मुताबिक दुनिया के सभी मानव धर्मों का एक ही मूल है। इसके अनुसार कई लोगों ने ईश्वर का संदेश इंसानों तक पहुँचाने के लिए नए धर्मों का प्रतिपादन किया जो उस समय और परिवेश के लिए उपयुक्त था। इस धर्म के अनुयायी बहाउल्लाह को पूर्व के अवतारोंकृष्ण, ईसा मसीह, मुहम्मद, बुद्ध, जरथुस्त्र, मूसा आदि की वापसी मानते हैं। बहाउल्लाह को कल्कि अवतार के रूप में माना जाता है जो सम्पूर्ण विश्व को एक करने हेतु आएं है और जिनका उद्देश्य और सन्देश है ” समस्त पृथ्वी एक देश है और मानवजाति इसकी नागरिक”।

लोटस टेम्पल के बारे में कुछ रोचक बातें – Interesting Facts About Lotus Temple In Hindi

1). बहाई समुदाय द्वारा 1986 में निर्मित कमल के आकार का यह मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है जिसे मॉडर्न भारत का 20वी शताब्दी का ताज महल भी कहा जाता है।

2). आधे खुले कमल के फूल की तरह निर्मित यह मंदिर शांति और आध्यात्मिकता के लिए स्वर्ग है। चमकदार सफेद संगमरमर मंदिर कलात्मक प्राकृतिक दृश्य वाले लॉन, बगीचों, रास्तों और बालू द्वारा निर्मित खूबसूरत डिजाइन से घिरा हुआ है। इस मंदिर में सीढ़ियों और पुलों को मिलाकर नौ पुल हैं।

3). मंदिर में पूजा के लिए एक हॉल है जो कि बेसमेंट पर टिका हुआ है। इसके बगल में एक स्वागत केन्द्र, एक पुस्तकालय, और प्रशासनिक अनुभाग है। मंदिर की मुख्य विशेषता यहाँ हर घंटे होने वाला ऑडियो- विडियो शो है जो कि पर्यटकों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

4). इस कमल को बारिश और अनियमितता से बचाने के लिए कांच और स्टील से बनी छत से ढंका गया है। गिलास कवर के कारण मुख्य हॉल में प्राकृतिक प्रकाश आसानी से आता है।

5). कमल मंदिर को तक़रीबन 700 इंजिनियर, तकनीशियन, कामगार और कलाकारों ने मिलकर बनाया था।

6). इस मंदिर में एक समय में एक साथ 2400 लोग आ सकते है।

7). इस मंदिर को निर्माण में जिस मार्बल का उपयोग किया गया है उसे ग्रीस से मंगवाया गया था।

8). मंदिर में हर साल तक़रीबन 4 मिलियन से भी ज्यादा पर्यटक आते है और सरासर लगभग 10000 लोग रोज़ आते है। जो की ताजमहल के बाद दूसरे स्थान पर हैं।

9). बहाई धर्म के लोगो का इस मंदिर पर काफी भरोसा है, उनकी भगवान पर बहुत आस्था है। सभी धर्मो के लोगो का मंदिर में समान रूप से स्वागत किया जाता है, और मंदिर में लोग समान भाव से भगवान को याद करते है और प्रार्थना करते है। कोई भेदभाव नहीं हैं।

10). बहाई धर्म का मानना हैं की ईश्वर एक है और समय- समय पर मानवजाति को शिक्षित करने हेतु वह पृथ्वी पर अपने अवतारों को भेजते हैं।

11). मंदिर को कमल के अकार में बनाने का उद्देश्य हैं की कमल सभी धर्मो में पूजन्य और पवित्र माना जाता हैं।


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