फ़तेहगढ़ क़िला का इतिहास और जानकारी | Fatehgarh Fort

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Fatehgarh Fort in Hindi / फ़तेहगढ़ क़िला, मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। इस क़िले का निर्माण सन 1726 ई. में मोहम्मद ख़ान ने अपनी बेगम बीवी फ़तेह के नाम पर करवाया था। 

फ़तेहगढ़ क़िला का इतिहास और जानकारी | Fatehgarh Fort in Hindi

फ़तेहगढ़ क़िला की जानकारी – Fatehgarh Fort, Bhopal in Hindi 

फ़तेहगढ़ क़िले के मग़रबी बुर्ज पर एक मस्जिद हैं जिसे ढाई सीढ़ी मस्जिद के नाम से जाना जाता हैं। यह एशिया की सबसे छोटी मस्जिद के रूप में जानी जाती है और इसका नाम है ‘ढाई सीढ़ी की मस्जिद’। इसका नाम ‘ढाई सीढ़ी की मस्जिद’ क्यूँ पड़ा यह कहना बहुत मुश्किल है, क्योंकि ढाई सीढ़ी आज कहीं भी नज़र नहीं आती; लेकिन शायद जब यह बनी होगी, तब ढाई सीढ़ी जैसी कोई संरचना इससे अवश्य जुड़ी रही होगी। किले के द्वार में स्थित एक ऐतिहासिक तोप था जो करीब पांच सौ साल पुराना था, जो हाल ही में चोरी हो गया।

किले का इतिहास – Fatehgarh Fort History in Hindi

राजा भोज के शासनकाल के लगभग सात सौ साल बाद सत्रहवीं शताब्दी की शुरुआत में एक साहसी अफ़ग़ान भोपाल आया, जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद ख़ान। वह अफ़ग़ानिस्तान के तिरह के मीर अज़ीज़ का वंशज था और मूल रूप से मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की सेना में भर्ती होने की नीयत से आया था।

कुछ दिन उसने दिल्ली में औरंगज़ेब की सेना में काम भी किया, किन्तु वहाँ एक युवक की हत्या करने के बाद वह फ़रार हो गया। वह भागकर मालवा आया और उसने चन्देरी पर सैय्यद बंधुओं के आक्रमण में हिस्सा लिया। बाद में इस लड़ाके ने पैसे लेकर लोगों के लिए लड़ना शुरू कर दिया। इसी सिलसिले में दोस्त मोहम्मद को भोपाल की गोंड रानी द्वारा बुलवाया गया और रानी ने मदद की एवज़ में उसे बैरसिया परगने का मावज़ा गाँव दे दिया।

रानी की मृत्यु के बाद 1722 में दोस्त मोहम्मद ख़ान ने भोपाल पर कब्ज़ा कर लिया। उसने राजा भोज के टूटे हुए क़िले के पास भोपाल की चहारदीवारी बनवाई और इसमें सात दरवाज़े बनवाए, जो हफ्तों के दिनों के नाम से थे। सन 1726 में दोस्त मोहम्मद ख़ान ने अपनी बीवी फ़तेह के नाम पर ‘फ़तेहगढ़ का क़िला’ बनवाया।


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