बिस्तर में पेशाब करने के घरेलु उपचार Bistar Par Peshab ka Ilaj in Hindi

Bedwetting Treatment in Ayurveda in Hindi – बच्चे अक्सर बिस्तर में पेशाब कर देते, इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे ठन्डे पदार्थ का सेवन करना, ज्यादा गरिष्ठ (भारी) खाना, या पेट में कीड़े होने पर भी पेशाब करते हैं। कुछ बच्चे दिन में ज्यादा समय खेलते-कूदते रहते हैं जिसकी वजह से बच्चे बुरी तरह से थक जाते हैं। ऐसे बच्चों को ज्यादा भूख लगती है और वह खाते ही सो जाते हैं। थकावट की वजह से बच्चे रात को सोते हुए बार-बार पेशाब करते हैं। कुछ मां-बाप काम की वजह से बच्चों को खाना देर से खिलाते हैं और फिर बच्चे खाना खाते ही बिस्तर पर चले जाते हैं और सो जाते हैं। इसलिए वह बच्चे रात को बिस्तर पर पेशाब जरूर करते है। कई अनुभवियों के अनुसार स्नायु विकृति के कारण बच्चे रात को सोते हुये बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं।

छोटे बच्चों का कहीं भी पेशाब कर देना आम बात होती है, खास करके रात में सोते समय नींद में पेशाब करना। यदि 3-4 वर्ष की आयु होने पर भी बच्चा बिस्तर पर पेशाब करे तो यह एक बीमारी मानी जायेगी। बच्चे को इस बीमारी से बचाने के लिए शैशवकाल से ही कुछ सावधानियां रखना जरूरी होता है। निचे कुछ घरेलु उपचार बताएं जा रहे हैं जिसके मदद से आप बच्चो को बिस्तर में पेशाब करना छुड़ा सकते हैं

बिस्तर में पेशाब करने के घरेलु उपचार Bistar Par Peshab ka Ilaj in Hindi

बिस्तर गीला करने के प्रकार – Types of Bedwetting in Hindi

बिस्तर में पेशाब करने के मुख्य रूप से दो प्रकार हैं –

  • पहला बेड वेटिंग का अर्थ है कि बचपन से ही बच्चा हमेशा बिस्तर गीला करता है।
  • दूसरी प्रकार के बेड वेटिंग में बच्चा रात में 6 महीना होने के बाद करता हो।

बिस्तर गीला करने के लक्षण – Bedwetting Symptoms in Hindi

ज्यादातर बच्चे जिन्हे बिस्तर गीला करने की बीमारी होती है, वे ऐसा सिर्फ रात में करते हैं। रात में बिस्तर को गीला करने के अलावा उनमें अन्य कोई लक्षण नहीं होते हैं। अगर वो दिन में भी बिस्तर गिला कर रहा हो और पेशाब का बार-बार अत्यधिक मात्रा में आ रहा हो तो, अन्य लक्षण मनोवैज्ञानिक कारणों या तंत्रिका तंत्र या गुर्दे से संबंधित समस्याओं की और संकेत कर सकते हैं।

बिस्तर गीला करने के कारण – Bedwetting Causes in Hindi

बच्‍चे सोते समय बिस्‍तर में कई कारणों से पेशाब कर देते हैं, जैसे कि –

  • हो सकता है कि आपके बच्चे का मूत्राशय इतना विकसित नहीं हुआ हो, जिसमें रात्रि के दौरान उत्पादित मूत्र समा सके।
  • अगर मूत्राशय को कंट्रोल करने वाली नसें धीरे मैच्‍योर हो रही हैं तो पेशाब आने पर बच्‍चे की नींद नहीं खुलती है। ऐसा खासतौर पर गहरी नींद में होता है।
  • बचपन में कुछ बच्चे रात के समय मूत्र उत्पादन की प्रक्रिया को धीमा करने वाले एंटी- ड्यूरेटिक हार्मोन (एडीएच) का पर्याप्त उत्पादन नहीं करते हैं।
  • मूत्रमार्ग में संक्रमण के कारण पेशाब रोकने में बच्‍चे को दिक्‍कत आ सकती है।
  • स्‍लीप एप्निया में नींद के दौरान सांस लेने में दिक्‍कत होती है जिसमें कभी-कभी सोते समय पेशाब निकल सकता है।
  • ऐसा दुर्लभ मामलों में ही देखा जाता है कि बिस्तर गीला करना बच्चे की न्यूरोलॉजिकल प्रणाली या मूत्र प्रणाली के दोष से संबंधित होता है।
  • इसके अलावा डायबिटीज, लंबे समय से कब्‍ज, मूत्र मार्ग या तंत्रिका तंत्र की संरचना में दिककत की वजह से बच्‍चा रात में बिस्‍तर गीला कर सकता है।

बिस्तर पर पेशाब करने के घरेलु उपचार – Bedwetting Treatment in Hindi

बिस्तर में पेशाब करने वाले बच्चों को प्रतिदिन दो मुनक्का (बीज निकालकर) और एक छुहारा रात को सोने से पहले खिलाएं। बालक बिस्तर में पेशाब नहीं करेगा। दही लस्सी एक चावल का परहेज जरूरी है।

कुछ बच्चे रात में सोते समय बिस्तर में ही पेशाब कर देते हैं। यह एक बीमारी होती है। सोते समय शहद का सेवन करते रहने से बच्चों का निद्रावस्था में पेशाब निकल जाने का रोग दूर हो जाता है।

आंवले का गूदा और काले जीरा का संभाग शहद के साथ लेने पर सोते समय पेशाब निकलना बंद हो जाता है। इसे सोने से पहले लेना चाहिए।

बबूल की कच्ची फलियों को छाया में सुखाकर, घी में भूनकर उसमें मिश्री मिलाकर 4-4 ग्राम सुबह और शाम गर्म दूध के साथ पीने से बिस्तर पर पेशाब करने का रोग ठीक हो जाता है।

बच्चों को अखरोट खिलाने से बच्चों की रात को सोते समय बिस्तर पर पेशाब करने की आदत खत्म हो जाती है।

बिश्तर में पेशाब करने वाले बच्चों को एक कप ठंडे-फीके दूध में एक चम्मच शहद घोलकर सुबह शाम 40 दिन तक पिलाना चाहिए। साथ ही तिल का एक लड्डू गुड में बनाकर रोज सुबह खिलाएं। शाम के समय गर्म तथा शीतल पाय पीने को नहीं दे।

अश्वगंधा और जटामांसी को बराबर मात्रा में लेकर पानी में डालकर काफी देर उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को छानकर बच्चे को 3 से 4 दिनों तक पिलाने से बिस्तर में पेशाब करने का रोग समाप्त हो जाता है।

जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस 2-2 ग्राम चूर्ण को दिन में 2 बार पानी के साथ खाने से बच्चे बिस्तर पर पेशाब करना बंद कर देते हैं।

बिस्तर पर पेशाब या बार-बार पेशाब आने पर दो छुहारे दिन में दो बार और सोते समय दो छुहारे दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

तिल और गुड़ को एक साथ मिलाकर बच्चे को खिलाने से बच्चे का बिस्तर पर पेशाब करने का रोग समाप्त हो जाता है। तिल और गुड़ के साथ अजवायन का चूर्ण मिलाकर खिलाने से भी लाभ होता है।

बिस्तर गीला करने की बच्चे की इस आदत को छुड़वाने के लिए उसे रात को सोने से पहले एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच पिसी अजवाइन घोलकर पिलाएं। इससे समस्या जल्द ही दूर हो जाएगी।

दालचीनी इम्‍यूनिटी बढ़ाती है और सर्दी-जुकाम से राहत दिलाती है। इतना ही नहीं दालचीनी बिस्‍तर गीला करने की समस्‍या को कंट्रोल करने में भी बहुत लाभकारी है। दिन में एक बार बच्‍चे को दालचीनी की छाल चबाने को दें। अगर बच्‍चा इसे खाने से मना करता है तो उसे दालचीनी की छाल को पीसकर पाउडर के रूप में दें।

इन बातों का ख्याल रखे – Prevention of Bedwetting in Hindi

रात को सोते समय बच्चे का बिस्तर में पेशाब करने का रोग समाप्त करने के लिये कोई भी औषधि देने से पहले माता-पिता को बच्चे के भोजन की कुछ आदते सुधारनी जरूरी हैं। बच्चे को सोने से 1 घंटा पहले भोजन करा देना चाहिए। बच्चे को सोने के बाद उसे जगाकर कुछ भी खाने और पीने को नहीं देना चाहिए। बच्चे को बिस्तर पर जाने से पहले एक बार पेशाब जरूर करा देना चाहिए। और पढ़ें : http://mirchifacts.com/gharelu-ilaj/168.html

⇒ बच्चे को सोने से पहले शू-शू कि आवाज करते हुए पेशाब करा देनी चाहिए। शाम को 8 बजे के बाद ज्यादा पानी नही पिलाना चाहिए। रात 1-2 बजे के लगभग उसे धीरे से जगाइए और शौचालय में ले जाइए, जहाँ उसे पेशाब करने के लिए फुसलाइए या प्रेरित कीजिए। यदि बच्चा नहीं जागता है, तो उसे धीरे से उठाकर शौचालय में ले जाइए और पेशाब कराइए। जिस कमरे में बच्चा सोता है, उस कमरे में रात्रि में मंद लाइट जलाकर रखें, जिससे बच्चा रात्रि में खुद अकेले जाकर बाथरूम में मूत्र का त्याग कर सकें । अगली सुबह जब बच्चा उठे और बिस्तर सूखा मिले तो बिस्तर गीला नहीं करने के लिए उसकी तारीफ करें।

बिस्तर गीला करने वाले बच्चो को क्या खिलाना चाहिए? – What to eat during Bedwetting in Hindi?

बेड वेटिंग आहार का महत्वपूर्ण स्थान है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि कुछ खाद्य पदार्थ हैं, जो मूत्राशय को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। सही खान-पान से इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।

  • बच्चे को फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन कराएं। जैसे – ताज़े फल, सब्जियां, साबुत अनाज, अनाज। इसके अलावा बच्चे के आहार में उच्च मात्रा में दूध, तिल, केले और बादाम शामिल करें, क्योंकि ये बिस्तर गीला करने से रोकने में मदद करते हैं।
  • नींद में पेशाब करने की आदत छुड़वाने के लिए बच्चे को दिन में दो से तीन केले खिलाएं। इससे समस्या दूर होगी।
  • बच्चे को रोजाना सोने से पहले तीन से चार अखरोट खिलाने से भी रात में सोते समय बिस्तर पर पेशाब करने की आदत से छुटकारा मिलेगा।
  • आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार बच्चे को रोजाना सुबह खाली पेट भीगी हुई किश्मिश खिलाने से भी फायदा होता है। इससे बच्चे को रात में पेशाब कम लगेगी।

बिस्तर गीला करने में परहेज़ – What to avoid during Bedwetting in Hindi?

बिस्तर पर पेशाब करने वाले बच्चो कुछ चीजों में परहेज भी करना जरुरी हैं। जैसे –

मांस, मिठाई, कृत्रिम योजक युक्त खाद्य पदार्थ, संसाधित भोजन, जंक फूड, सोया और अंडे से बचे। कोला, सोडा और फलों के रस से बचें, क्योंकि ये समस्या को और गंभीर कर सकते हैं। साथ ही बिस्तर पर जाने से पहले बच्चे को पानी पीने से रोकें। अगर बच्‍चे को रात में उठकर पेशाब करने जाने से डर लगता है तो उसे बोलें कि वो आपको अपने साथ लेकर जाए।


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