आगरा किले का इतिहास और सच | Agra Fort History In Hindi

Agra Red Fort Agra / Agra Qila – आगरा किला ताजमहल के बाद आगरा का दूसरा विश्व धरोहर स्थल है। जो की ताज महल से केवल 2.5 किलोमीटर की दुरी पर ही स्थित है। इसका निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने 1565 में करवाया था। रोचक बात यह कि किले के प्रवेश द्वार पर एक तख्ती है, जिसपर लिखा है कि इस किले का निर्माण मूल रूप से 1000 इस्वी से भी पहले किया गया था और अकबर ने सिर्फ इसका नवीनीकरण करवाया था। इस किले को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में भी शामिल किया गया है।

About Agra Fort History & Story In Hindi,

History Of Agra Fort In Hindi :-

आगरा किला (Agra Fort) भारत का सबसे महत्वपूर्ण किला है। भारत के मुगल सम्राट बाबर, हुमायुं, अकबर, जहांगीर, शाहजहांऔरंगज़ेब यहां रहा करते थे, व यहीं से पूरे भारत पर शासन किया करते थे। यहां राज्य का सर्वाधिक खजाना, सम्पत्ति व टकसाल थी। यहां विदेशी राजदूत, यात्री व उच्च पदस्थ लोगों का आना जाना लगा रहता था, जिन्होंने भारत के इतिहास को रचा।

किले का आकार अर्ध-चंद्राकर है, जो यमुना नदी समानन्तर और दूसरे तरफ से कुछ वृत्ताकार या त्रिभुजाकार है। किले की तीनो तरफ सड़क बनी हुई है, जो सभी तरफ से आपस में जुड़ी हुई है। यमुना के तरफ वाले सड़क मार्ग को यमुना किनारा मार्ग कहते है, जो ताजमहल के पश्चिमी दरवाजे तक जाता है। एक मार्ग आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन होता हुआ बिजलीघर चौराहे फिर उससे आगे लाल किले के मुख्य प्रवेश दरवाजा जो रामलीला मैदान के सामने तक जाता है, उससे आगे जाकर यही रास्ता यमुना किनारे वाले मार्ग पर जाकर मिल जाता हैं। किला चारों तरफ की दीवारे करीब सत्तर फिट ऊँची और कही-कही कई मीटर चौड़ी है।

किले की दीवारे लाल रंग के बेहद मजबूत बलुआ पत्थर से बनी है और सुरक्षा द्रष्टि से किले के चारों तरफ कई मीटर और चौड़ी खाई निर्माण किया गया था। किले के चारों कोने पर चार द्वार हैं, जिनमे से मुख्य द्वार दिल्ली द्वार जो चारों में से भव्य है। इस द्वार के अंदर भी एक और द्वार है, जिसे हाथी पोल कहते हैं, जिसके दोनों तरफ दो वास्तवाकार पाषाण हाथी की मूर्तियां हैं। वर्तमान में यह द्वार शहर के व्यस्तम चौराहे बिजलीघर के पास के अम्बेडकर पार्क के पीछे बना हुआ है और यह प्रवेश हेतु बंद है। दूसरा अकबर दरवाजा है, जिसे अमरसिंह द्वार भी कहते है, जो स्थापत्य कला में दिल्ली दरवाजे जैसा ही है, जो किले की खाई के पार करने के बाद बना हुआ है। यह दरवाजा वर्तमान में रामलीला मैदान के पास बना हुआ है जहाँ से पर्यटको और आगुन्तको को किले में प्रवेश दिया जाता है।

शुरुआती समय मे यह मूलतः एक ईंटों का किला था, जो चौहान वंश के राजपूतों के पास था। इसका प्रथम विवरण 1080 ई. में आता है, जब महमूद गजनवी की सेना ने इस पर कब्ज़ा किया था। सिकंदर लोदी (1487-1517), दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था, जिसने आगरा की यात्रा की,तथा इसने इस किले की मरम्म्त 1504 ई० मे करवायी व इस किले में रहा था तथा इसे 1506 इश्वी मे राजधानी बनाया। उसने देश पर यहां से शासन किया। उसकी मृत्यु भी, इसी किले में 1517 में हुई थी, जिसके बाद, उसके पुत्र इब्राहिम लोदी ने गद्दी नौ वर्षों तक संभाली, तब तक, जब वो पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में निपट नही गया। उसने अपने काल में, यहां कई स्थान, मस्जिदें व कुएं बनवाये।

पानीपत के बाद, मुगलों ने इस किले पर भी कब्ज़ा कर लिया, साथ ही इसकी अगाध सम्पत्ति पर भी। इस सम्पत्ति में ही एक हीरा भी था, जो कि बाद में कोहिनूर हीरा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तब इस किले में इब्राहिम के स्थान पर बाबर आया। उसने यहां एक बावली बनवायी। सन 1530 में, यहीं हुमायुं का राजतिलक भी हुआ। हुमायुं इसी वर्ष बिलग्राम में शेरशाह सूरी से हार गया, व किले पर उसका कब्ज़ा हो गया। इस किले पर अफगानों का कब्ज़ा पांच वर्षों तक रहा, जिन्हें अन्ततः मुगलों ने 1556 में पानीपत का द्वितीय युद्ध में हरा दिया।

बाद में जब अकबर ने आगरा के महत्व को जाना तब उन्होंने आगरा को ही 1558 में अपने साम्राज्य की राजधानी घोषित किया था। कहा जाता है की तक़रीबन 4000 कामगारों ने रोज काम करके लगभग 8 साल में इस किले को बनाया था और इसका निर्माणकार्य 1573 में पूरा हुआ था। बाद में शाहजहां ने इसे और उन्नत बनाया। उन्होंने संगमरमर और खूबसूरत नक्काशी से इसे और भी दर्शनीय बना दिया।

अपने जीवन के अंतिम दिनों में, शाहजहां को उसके पुत्र औरंगज़ेब ने इस ही किले में बंदी बना दिया था, एक ऐसी सजा, जो कि किले के महलों की विलासिता को देखते हुए, उतनी कड़ी नहीं थी। यह भी कहा जाता है, कि शाहजहां की मृत्यु किले के मुसम्मन बुर्ज में, ताजमहल को देखेते हुए हुई थी। इस बुर्ज के संगमर्मर के झरोखों से ताजमहल का बहुत ही सुंदर दृश्य दिखता है।

बाद मे मराठा साम्राज्य ने इस किले को हासिल कर लिया था। बाद में लगातार कयी बार यह किले मराठाओ से लेकर उनके दुश्मनों के पास जाता गया। लेकिन 1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध में अहमद शाह अब्दाली ने मराठाओ को पराजित कर दिया था। इसके बाद तक़रीबन 1 दशक तक मराठा लोग इस क्षेत्र से बाहर ही थे। और अंततः 1857 में महादजी शिंदे ने किले को जीत लिया था।

यहां कई हिन्दू व इस्लामी स्थापत्यकला के मिश्रण देखने को मिलते हैं। बल्कि कई इस्लामी अलंकरणों में तो इस्लाम में हराम (वर्जित) नमूने भी मिलते हैं, जैसे—अज़दहे, हाथी व पक्षी, जहां आमतौर पर इस्लामी अलंकरणों में ज्यामितीय नमूने, लिखाइयां, आयतें आदि ही फलकों की सजावट में दिखाई देतीं हैं।

आगरा के किले (Agra Fort) को कभी-कभी लाल किला भी कहा जाता है। न सिर्फ लाल रंग, बल्कि दिल्ली स्थित लाल किले से इसकी वास्तुशिल्प शैली और डिजाइन भी काफी मिलती है। दोनों ही किले का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। यही कारण है कि जब पर्यटक आगरा के किले को देखते हैं, तो उन्हें दिल्ली का लाल किला याद आ जाता है।

Agra Fort Address: Agra Fort, Rakabganj, Agra, Uttar Pradesh 282003


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