नीमराना किला का इतिहास और जानकारी | Neemrana Fort Palace in Hindi

Neemrana Fort Alwar / नीमराना किला राजस्थान के अलवर में स्थित एक ऐतिहासिक किला हैं। यह करीब 555 साल पुराना हैं। इसे 1986 में हेरिटेज रिजॉर्ट के रूप में तब्दील कर दिया गया। पैलेस में बदले इस किले में कई रेस्त्रां बने हैं। 10 मंजिला इस विशाल किले को तीन एकड़ में अरावली पहाड़ी को काट कर बनाया गया है।

नीमराना किला का इतिहास और जानकारी | Neemrana Fort Palace in Hindi

नीमराना फोर्ट पैलेस की जानकारी – Neemrana Fort Rajsathan Information

नीमराना किला भारत उन प्राचीनतम किलो में शामिल हैं जिसे अब होटलो के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं। नीमराना एक ऐतिहासिक फोर्ट के साथ-साथ खूबसूरत फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। जिस कारण यहाँ पर्यटको का आवाजाही लगा रहता हैं।

इस किले पर बहुत पुराने समय में पृथ्वीराज चौहान के वंश के राजा महाराजा शासन करते थे। उन्होंने बहुत सालों तक इसी किले पर निवास किया था। नीमराना किला दिखने में काफी भव्य प्रतीत होता है। नीमराना किला जब बनवाया गया उस वक्त इसमें कुल 11 मंजिले बनवाई गयी थी।

इस 10 मंजिले महल पर कुल 50 कमरे रिसोर्ट में हैं। यह तीन एकड़ में अरावली पहाड़ी को काट कर बनाया गया है। यही कारण है कि इस महल में नीचे से ऊपर जाना किसी पहाड़ी पर चढ़ने का अहसास कराता है। नीमराना की भीतरी साज-सज्जा में काफी छाप अंग्रेजों के दौर की भी देखी जा सकती है।

इस किले का नाम नीमराना क्यों पड़ा – Neemrana Fort History in Hindi

ज्यादातर कमरों की अपनी बालकनी है जो आसपास की भव्यता का पूरा नजारा प्रदान करती है। एक समय में यह किला पूरी तरह से खंडहर बन चूका था लेकिन अब यह किला एक भव्य और सुन्दर महल का रूप ले चूका है। यह किला राजस्थान की पुराणी और नयी वास्तुशैली का मिश्रण है।

नीमराना किला काफी पुराना और प्रसिद्ध किला है। इस किले के नाम के पीछे एक रोचक कथा हैं। बहुत साल पहले इस जगह पर ‘निमोला में’ नाम का शासक हुआ करता था। उसकी इच्छा थी की इस किले को उसका नाम दिया जाए। इसीलिए उस इन्सान के नाम के ऊपर से ही इस किले को’ नीमराना किला’ नाम दिया गया।

पृथ्वीराज चौहान की 1192 में मुहम्मद गौरी के साथ जंग में मौत हो गई थी। इसके बाद चौहान वंश के राजा राजदेव ने नीमराना चुना लेकिन यहां का निर्माता निमोला बहादुर शासक था। चौहानों से जंग में हारने के बाद निमोला ने अनुरोध किया कि उस जगह को उसके नाम से रख दिया जाए, तभी से इसे नीमराना कहा जाने लगा।

इसे पृथ्वीराज चौहान के वंशजों ने अपनी राजधानी के रूप में चुना था। सन 1464 में निर्माण किये गए किले को पृथ्वीराज चौहान 3 के उत्तराधिकारी राजधानी के रूप में इस्तेमाल करते थे। लेकिन जब भारत में अंग्रेज का शासन था तो चौहान शासको की ताकत कम पड़ गयी थी लेकिन उन्होंने कभी भी अंग्रेजो के सामने हार नहीं मानी थी।

1947 में राजा राजिंदर सिंह ने नीमराना किले को छोड़ दिया और विजयबाग को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल करने का सोचा था। कहा जाता हैं राजा राजिंदर सिंह इस किले को बेचना चाहते थे। 1986 में इस किले दोबारा मरम्मत कराई गयी। सन 1991 में इस किले को आम लोगो को देखने के लिए खोला गया, लेकिन यहां सिर्फ 15 कमरों में लोगो को रहने के लिए इजाजत दी गयी।

इस किले को कई पुरूस्कार के लिए भी नामित किया जा चूका हैं। जिसमे ‘इन्ताच सत्ते’ और आगा खान पुरूस्कार शामिल हैं। 2008 तक यह किला एक महल का रूप ले चूका था और इसमें 72 कमरे भी बनवाये गए थे, कई सारे हैंगिंग गार्डन्स, रेस्टोरेंट और काफी बड़े बड़े तालाब भी इसमें बनवाये थे। एक समय में यह किला पूरी तरह से खंडहर बन चूका था लेकिन अब यह किला एक भव्य और सुन्दर महल का रूप ले चूका है।

किले की बनावट – Neemrana Kila Architecture 

ऊंची पहाड़ी पर स्थित नीमराना किला-हवेली के आस-पास सौंदर्य का आलीशान दृष्टिकोण इस स्थान को ओर भी आकर्षक बना देता है। दस मंजिलों पर कुल 50 कमरे इस रिसोर्ट में हैं। ऊँचे पहाड़ पर बने होने के कारण ज्यादातर कमरों की बालकनी से आसपास की भव्यता का पूरा आनंद उठा सकते है। यहां तक की इस किले के बाथरूम से भी आपको हरे-भरे नजारे देखने को आसानी से मिल जायेंगे।

इसे 1986 में हेरिटेज रिजॉर्ट के रूप में तब्दील कर दिया गया। यहां नजारा महल और दरबार महल में कॉन्फ्रेंस हाल है। पैलेस में बदले इस किले में कई रेस्त्रां बने हैं। इस पैलेस में ओपन स्विमिंग पूल भी बना है। नाश्ते के लिए राजमहल व हवामहल तो खाने के लिए आमखास, पांच महल, अमलतास, अरण्य महल, होली कुंड व महा बुर्ज बने हुए हैं। इस किले की बनावट ऐसी है कि हर कदम पर शाही ठाठ का अहसास होता है।

इस फोर्ट के निर्माण में मुगलकालीन और राजंपूताना वास्तुकला शैली का मिश्रण साफ़ दिखाई पड़ता है। इसके अलावा महेल की भीतरी साज-सज्जा में अंग्रेजों के दौर की छवि भी देखी जा सकती है। वर्तमान समय यह पैलेस एक प्रमुख विरासत स्थल बन चुका है और शादियों व सम्मेलनों के लिए एक उचित स्थान है।

इस किले की खास बात यह है कि, यहां पर बने हर कमरे को अलग-अलग नाम दिया गया है। अगर आप किले में राजसी ठाठ का आनंद लेना चाहते हैं, तो मामूली शुल्क देकर पर्यटक दो घंटे के लिए महल की भव्यता का लुत्फ उठा सकते हैं, लेकिन सिर्फ ये कमरें दिनभर के लिए उपयोग कर सकते हैं रात्रि के समय इन कमरों को किराये पर नहीं दिया जाता है।

नीमराना के अन्य पर्यटक स्थल – Neemrana Fort Palace Tourism 

देश के मशहूर टाइगर रि़जर्व में से एक सरिस्का टाइगर रिजर्व भी यही पर स्थित है। इसके आलावा – भरतपुर अभयारण्य, लास महल, सरिस्का टाइगर रिजर्व, केसरोली, सिलीसेढ़ झील, लेक पैलेस, सरिस्का बाघ अभयारण्य, कांकवाड़ी किला, नीलकंठ मंदिर, पांडुपोल, तिजारा के स्मारक, सिलीसेरह झील, जयसमंद झील, भानगढ़-अजबगढ़, तलवृक्ष के गरम झरने, राजगढ़, मछारी, विराटनगर, दीग, प्रसिद्ध संग्रहालय, बाबा केदारनाथ का आश्रम आदि देखने लायक दर्शनीय स्थल है।

नीमराना से कुछ ही दूरी पर अलवर जिले में ‘केसरोली’ नामक एक प्राचीन स्थल है। यह घूमने के लिए एक शानदार जगह है। इसके अलावा अगर आप बोटिंग के शौकीन हैं तो केसरोली से सिलीसेढ लेक भी जा सकते हैं, जो बोटिंग के लिए काफी लोकप्रिय है।

कैसे जाएँ – Neemrana Fort in Hindi

नीमराना म्यूजिक फाउंडेशन यहां हर वीकेंड पर कल्चरल इवेंट करवाती है। इसमें देश-विदेश के कई टूरिस्ट परफॉर्म करते हैं। यहां आप जिप लाइन टूर का लुत्फ़ उठा सकते हैं। नीमराना किले में रुकने वाले लोगों के लिए विंटेज कार राइड की फैसिलिटी भी मौजूद है। आप महज 1000 रूपए में इस राइड का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

सड़क मार्ग:- दिल्ली के किसी भी बस अड्डे अलवर के लिए सीधी बसें आती हैं। अगर आप स्वयं के वाहन से नीमराना जाना चाहते हैं तो 4-5 घंटे में आराम से पहुंचा जा सकता है। नीमराना का अपना कोई बस स्टैंड नहीं है, यहां से सबसे नजदीकी बस स्टॉप कोसली (हरियाणा) है, जोकि यहां से 51 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग:- नीमराना का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलवर है, जो लगभग 70 किमी. की दूरी पर स्थित है। आपको देश के सभी बड़े शहरों से यहां के लिए ट्रेन आसानी से मिल जाएंगी।

हवाई मार्ग:- यहाँ का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो करीब 108 किमी. की दूरी पर है। वहीं, जयपुर का संगनेर एयरपोर्ट 136 किमी दूर है। जहाँ से आप इंटरस्टेट बस सर्विस के माध्यम से आराम से अलवर तक पहुच सकते है।


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