माचू पिच्चू का रहस्मय इतिहास और जानकारी | Machu Picchu History in Hindi

Machu Picchu / माचू पिच्चू 2007 में घोषित विश्व के नए सात अजूबो में से एक है। यह दक्षिण अमेरिका के पेरू में एंडीज पर्वतों के बीच बसा है। यह कोलम्बस पूर्व युग इंका की सभ्यता के खँडहर है। यह खँडहर ही ऐतिहासिक स्थल है जो माचू पिच्चू कहलाते है। माचू पिच्चू का मलतब होता है पुरानी चोटी, जिसका संबंध इंका सभ्यता से है।

माचू पिच्चू का रहस्मय इतिहास और जानकारी | Machu Picchu History In Hindi

माचू पिच्चू की जानकारी – Machu Picchu Information in Hindi

माचू पिच्चू पेरू के उरुबाम्बा नामक घाटी पर स्थित है। उरुबाम्बा घाटी से उरुबाम्बा नदी बहती है। घाटीनुमा यह पहाड़ बहुत ऊंचाई पर स्थित है। समुद्र तल से यह घाटी 2430 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह घाटी अमेरिका के कुज्को से 80 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित है। माचू पिच्चू को इन्काओ का खोया शहर (Lost City) भी कहा जाता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि माचू पिच्चू को 1983 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल की सूचि में भी शामिल किया गया है। दुनिया के इस अजूबे की खोज अमेरिकी इतिहासकार श्रेय हीरम बिंघम ने 1911 में की थी, जिसके बाद से आज तक यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण बना हुआ है।

माचू पिच्चू एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल होने के साथ ही एक पवित्र स्थान भी है। पर्यटको के लिये इस जगह की बहोत सी इमारतों की मरम्मत भी की गयी है इस तरह से बनाया गया है की वे असल में एतिहासिक दिख सके। 1976 से 30% माचू पिक्चु को पुनर्निर्मित किया गया था, आज भी इसकी मरम्मत का काम शुरू है।

माचू पिच्चू का इतिहास – Machu Picchu History In Hindi

इन्काओ ने सन 1430 ईस्वी के आसपास इसका निर्माण शुरू किया था। इसे राजाओ के अधिकारिक स्थल के रूप में बनाया गया था। 1530 ईस्वी के आस पास इंकाओं पर स्पेनिओ ने आक्रमण कर विजय प्राप्त कर ली। तब इंका सभ्यता के लोग यह जगह छोड़ कर चले गए। लेकिन स्पेनी इस जगह पर नहीं आये। न ही स्पेनिओ ने इसे लूटा। वहा के निवासी ऐसे शुरू से जानते थे। लेकिन इतिहासकार हीरम बिंघम ने माचू पिच्चू का दुनिया से परिचय करवाया।

हीरम बिंघम यहाँ पहली बार 1911 में आये थे। तब से माचू पिच्चू एक खास पर्यटक स्थल बन गया है। 1981 से माचू पिच्चू पेरू शहर का ऐतिहासिक देवालय है। यह 1983 से यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल किया गया है। क्योकि स्पेनी इसे इंकाओं पर विजय के बाद भी नहीं लूट सके थे इसलिए इस स्थल का एक सांस्कृतिक स्थल के रूप में विशेष महत्व है और इसे एक पवित्र स्थान भी माना जाता है।

इसे इंकाओं की पुरानी शैली में बनाया गया है। इसके निर्माण में पोलिश किये गए पत्थर प्रयोग किये गए है। माचू पिच्चू में एक सूर्य मंदिर जिसे इतिहुआताना कहते है प्रमुख है। यहाँ एक तीन खिड़कियों वाला कमरा है जिसे भी खास माना जाता है। यहाँ की खास कलाकृतिया हीरम बिंघम अपने साथ ले गये थे। जो अब येल विश्वविद्यालय के पास है।

1430 ईस्वी में राजा व उनका स्टाफ घोड़ो का प्रयोग करता था। अतः उनके लिए इस घाटी पर आना कोई मुश्किल कार्य नहीं था। घोड़ो के लिए घास फूस घाटी पर थी। यहाँ पानी के लिए उरुबाम्बा नदी बहती है। यह जगह इतनी उचाई पर होने के बाद भी यहाँ निर्माण के लिए पर्याप्त सपाट जगह उपलब्ध थी। अतः इस अनुकूल परिस्थितियों में यहाँ के राजाओ का आधिकारिक स्थल किसी जन्नत से कम नहीं रहा होगा। इतनी ऊंचाई पर हरे भरे पहाड़ो व बादलो का जो दृश्य बनता है। वह अवश्य ही मन मोह लेता है। इसके बाद यहाँ की ताजा हवा किसी को भी यहाँ खीच लेती है। बहुत ही रमणीक जगह है यह माचू पिच्चू।

माचू पिच्चू का इतिहास बहुत रहस्मय हैं। एक कहानी के अनुसार माचू पिच्चू का इस्तेमाल इंसानों की बलि देने के लिए किया जाता है और उनके कंकालों को सही तरह से दफनाया नहीं गया है। आपको बता दें कि इस जगह पर कई कंकाल बिना दफ्न हुए मिले थे।

आज तक किसी ने पूरे भरोसे के साथ जवाब नहीं दे पाया कि माचू पिच्चू का निर्माण क्यों और किसके द्वारा करवाया गया था। इस जगह को जितनी जल्दी बनाया गया था उससे भी जल्दी इसको खाली कर दिया गया था। यहाँ आने वाले पर्यटक माचू पिच्चू की कहानी और रहस्य के बारे में जानने में काफी उत्सुक रहते  हैं।

हालाँकि माचू पिच्चू के इतिहास को लेकर जानकारों में कई मतभेद हैं। इंका सभ्यता की हकीकत आज तक कोई नहीं समझ पाया।

लॉस्ट सिटी (Lost City in Hindi)

माचू पिच्चू की खोज करने वाले हीरम बिंघम का कहना था कि यह स्थान इंका सभ्यता से जुड़ा आखिरी स्थान है और साथ ही ‘विल्काबंबा ला विईजा’ का गुम हो चुका शहर यानि की ‘लॉस्ट सिटी’ है. लेकिन हीरम की इस खोज को अन्य पुरातत्व वैज्ञानिकों ने अपने-अपने तर्क और खोज से नकार दिया।

वर्जिन ऑफ द सन

इंका सभ्यता के देव भगवान सूर्य को वर्जिन महिलाओं की बलि दी जाती थी। यह स्थान उन अविवाहित औरतों के लिए था जो अपने प्राण भगवान सूर्य को समर्पित कर देती थीं। उनके शवों को यहीं दफना दिया जाता था। इस स्थान पर मिले कंकालों में लगभग सभी कंकाल महिलाओं के थे जिसे आधार बनाकर माचू पिच्चू को वर्जिन ऑफ द सन का नाम दिया गया। परंतु बाद में कुछ कंकाल पुरुषों के भी पाए गए जिसके बाद इस थ्योरी को भी नकारा गया।

राजकर्मचारियों की कब्र

पंद्रहवीं शताब्दी में इंका सम्राट पचाकुटी की सेवा में जितने भी कर्मचारी लगे थे उन्हें माचू पिच्चू में ही दफनाया गया था। इस थ्योरी के अनुसार माचू पिच्चू में शाही मेहमानों के मनोरंजन का पूरा इंतजाम किया जाता था और इस स्थान को सम्राट शाही कोर्ट के तौर पर प्रयोग करता था।

इंसानी बलि का स्थान

माचू पिच्चू को इंसानी बलि के लिए प्रयोग किया जाता था और बहुत हद तक संभव है कि शवों को सही तरीके से दफनाया भी नहीं जाता था। खोजकर्ताओं को यहां कई कंकाल ऐसे भी मिले हैं जिन्हें दफनाया नहीं गया था।

एलियन द्वारा निर्मित स्थान

सभी अवधारणाओं को नकारते हुए मॉडर्न वैज्ञानिकों का यह कहना है कि माचू पिच्चू का निर्माण दूसरे ग्रह से आए प्राणियों ने किया है। माचू पिच्चू के ग्रांड आर्किटेक्चर का निर्माण एलियन्स ने अपने अनुसार किया है। पेरू वासियों ने इस थ्योरी को भी नकार दिया है क्योंकि उनका कहना है कि उनके पूर्वज इससे भी बेहतरीन आर्किटेक्चर की कला जानते थे।

माचू पिच्चू पर्यटक स्थल – Machu Picchu Tourism in Hindi

इस स्थान की सबसे पॉपुलर जगह इन्का ट्रेल ट्रैक है। तीन दीनो का यह रास्ता श्वास-फूलने जैसी 4214 मीटर की ऊँचाई पर ले जाता है और इस रास्ते में बहोत से प्राचीन इन्का पत्थर भी दिखाई देते है। भू-क्षरण के डर से सरकार ने रास्ते की चढ़ाई करने वाले लोगो की संख्या सिमित कर दी है, अब इस रास्ते पर एक समय में केवल 500 लोग ही चढ़ाई कर सकते है, जिनमे स्थानिक कुली भी शामिल है।

यहां काम करने वाले कुली चमकीली धातुओ के साथ सोते है। उनका ऐसा मानना है की चमकीली धातु धरती से आने वाली भावनाओ को हटाते है। आप भले ही किसी भी कुली से पूछ लो वे आपको ये जरूर बतायेंगे की कभी-कभी उन्हें टेंट से बाहर की और खीचने का अनुभव भी हुआ है। माचू पिच्चू दुनिया की सबसे आकर्षक जगहों में एक हैं। यह दक्षिण अमेरिका का एक मशहूर खंडहर है जो हर साल लाखों करोड़ों लोगों को पर्यटन के लिए स्वागत करता है। अगर आपन इतिहासिक चीजे देखने के उत्सुक हैं तो यहां एक बार जरूर जाएँ।


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