खजुराहो मंदिर का इतिहास और रोचक तथ्य | Khajuraho Temple History in Hindi

Khajuraho in hindi / खजुराहो में चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए ख़ूबसूरत मंदिरो का समूह हैं। यहां बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर हैं। यहां की प्रतिमाऐं विभिन्न भागों में विभाजित की गई हैं। जिनमें प्रमुख प्रतिमा परिवार, देवता एवं देवी-देवता, अप्सरा, विविध प्रतिमाऐं, जिनमें मिथुन (सम्भोगरत) प्रतिमाऐं भी शामिल हैं तथा पशु व व्याल प्रतिमाऐं हैं, जिनका विकसित रूप कंदारिया महादेव मंदिर में देखा जा सकता है। यह भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त, छत्तरपुर ज़िले में स्थित एक छोटा-सा क़स्बा हैं। खजुराहो समूह भी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है।

खजुराहो मंदिर का इतिहास और रोचक तथ्य | Khajuraho Temple History In Hindi

खजुराहो मंदिर की जानकारी – Khajuraho Temple Information in Hindi

भारत में ताजमहल के बाद, सबसे ज़्यादा देखे और घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में अगर कोई दूसरा नाम आता है तो वह है, खजुराहो। खजुराहो, भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। खजुराहो को प्राचीन काल में खजूरपुरा और खजूर वाहिका के नाम से भी जाना जाता था। इस जगह को खजुराहो नाम पढ़ने का कारन है की यहाँ पहले बहुत से खजूर के पेड़ थे।

इस प्राचीन मंदिर की कलाकृतियों की अद्भुत शिल्पकारी और प्रभावशाली मूर्ति कला की भव्यता की वजह से इन्हें विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया है। इस शानदार खजुराहों के मंदिर के अंदर करीब 246 कलाकृतियां हैं जबकि 646 कलाकृतियां बाहर हैं, जिनमें ज्यादातर कलाकृतियां कामुकता को प्रदर्शित करती हैं। इसे हर रोज दुनियाभर से लाखो लोग दर्शन के लिए आते हैं।

खजुराहो मंदिर का इतिहास – Khajuraho Temple History in Hindi

चंदेल शासकों ने इन मंदिरों की तामीर सन 900 से 1130 ईसवी के बीच करवाई थी। इतिहास में इन मंदिरों का सबसे पहला जो उल्लेख मिलता है, वह अबू रिहान अल बरूनी (1022 ईसवी) तथा अरब मुसाफ़िर इब्न बतूता का है। दरअसल यह क्षेत्र प्राचीन काल में वत्स के नाम से, मध्य काल में जैजाक्भुक्ति नाम से तथा चौदहवीं सदी के बाद बुन्देलखन्ड के नाम से जाना गया।

खजुराहो के चन्देल वंश का उत्थान दसवीं सदी के शुरू से माना जाता है। इनकी राजधानी प्रासादों, तालाबों तथा मंदिरों से परिपूर्ण थी। स्थानीय धारणाऑं के अनुसार तक़रीबन एक हज़ार साल पहले यहां के दरियादिल व कला पारखी चंदेल राजाओं ने क़रीब 84 बेजोड़ व लाजवाब मंदिरों की तामीर करवाई थी, लेकिन उनमें से अभी तक सिर्फ़ 22 मंदिरों की ही खोज हो पाई है, यद्यपि दूसरे पुरावशेषों के प्रमाण प्राचीन टीलों तथा बिखरे वास्तुखंडों के रूप में आज भी खजुराहो तथा इसके आसपास देखे जा सकते हैं।

खजुराहो स्मारकों में बदलाव 13 वी शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के आक्रमण के बाद हुआ, सुल्तान कुतुब-उद-दिन ऐबक ने आक्रमण कर के चंदेला साम्राज्य को छीन लिया था। इसकी एक शताब्दी के बाद ही इब्न बतुत्ता, मोरक्कन यात्री तक़रीबन 1335 से 1342 ईसवी तक भारत रुका और उसने अपने लेखो में खजुराहो को “कजर्रा” कहते हुए जिक्र किया।

मध्य भारतीय क्षेत्र में खजुराहो मंदिर 13 से 18 वी शताब्दी के बिच मुस्लिम शासको के नियंत्रण में थे। इस काल में बहुत से मंदिरों का अपमान कर उन्हें नष्ट भी किया गया था। उदाहरण के लिये 1495 ईसवी में सिकंदर लोदी ने अपनी सैन्य शक्ति के बल पर खजुराहो मंदिरों का विनाश किया था। लेकिन बाद में हिन्दुओ और जैन धर्म के लोगो ने एकत्रित होकर खजुराहो मंदिर की सुरक्षा की। लेकिन जैसे-जैसे सदियाँ बदलती गयी वैसे-वैसे वनस्पति और जंगलो का भी विकास होता गया और और खजुराहो के मंदिर भी सुरक्षित हो गये।

1838 में एक ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन टी.एस. बर्ट को अपनी यात्रा के दौरान अपने कहारों से इसकी जानकारी मिली। उन्होंने जंगलों में लुप्त इन मन्दिरों की खोज की और उनका अलंकारिक विवरण बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी के समक्ष प्रस्तुत किया। 1843 से 1847 के बीच छतरपुर के स्थानीय महाराजा ने इन मन्दिरों की मरम्मत कराई। जनरल अलेक्ज़ेंडर कनिंघम ने इस स्थान की 1852 के बाद कई यात्राएँ कीं और इन मन्दिरों का व्यवस्थाबद्ध वर्णन अपनी ‘भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण’ की रिपोर्ट (आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया रिपोर्ट्स) में किया।

कुछ इतिहासकारों के मुताबिक खुजराहों के मंदिरों के समूह में पहले मंदिरों की संख्या 85 थी, जो कि पहले 30 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए थे, लेकिन अब इनमें से सिर्फ 30 मंदिर ही बचे हैं, जो कि 6 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए हैं। कुछ लोगों ने खुजराहो के मंदिरों के दीवारों में बनाईं गईं कामोत्तक मूर्तियों को गलत संकेत मानकर इसे नष्ट करने की कोशिश की थी। हालाँकि हिन्दू और जैन धर्म के लोगों ने मिलकर भारत के इस प्रसिद्ध मंदिरों की सुरक्षा को लेकर प्रयास किये। खजुराहों के स्मारक अब भारत के पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की देखभाल और निरीक्षण में हैं।

निर्माण के पीछे कहानी – Khajuraho Temple Story in Hindi

खजुराहो के मंदिरों के निर्माण के पीछे एक बेहद रोचक कथा है। कहा जाता है कि हेमवती एक ब्राह्मण पुजारी की बेटी थी। एक बार जब जंगल के तालाब में नहा रही थी, तो चंद्र देव यानी कि चंद्रमा उस पर मोहित हो गए और दोनों के एक बेटा हुआ। खजुराहो मन्दिर, मध्य प्रदेश हेमवती ने अपने बेटे का नाम चंद्रवर्मन रखा। इसी चंद्रवर्मन ने बाद में चंदेल वंश की स्थापना की। चंद्रवर्मन का लालन-पालन उसकी मां ने जंगल में किया था। राजा बनने के बाद उसने मां का सपना पूरा करने की ठानी। उसकी मां चाहती थी कि मनुष्य की तमाम मुद्राओं को पत्थर पर उकेरा जाए। इस तरह चंद्रवर्मन की मां हेमवती की इच्छा स्वरूप इन ख़ूबसूरत मंदिरों का निर्माण हुआ। खजुराहो के ये मंदिर पूरी दुनिया के लिए एक धरोहर हैं।

प्रसिद्द मंदिरे – Khajuraho Temples in Hindi

खजुराहो में जो मन्दिर बनवाए गए उनमें से तीस आज भी स्थित हैं। इन मंदिरों में आठ जैन मन्दिर हैं। जैन मन्दिरों की वास्तुकला अन्य मन्दिरों के शिल्प से मिलती-जुलती है। यह 62 फुट लम्बा और 31 फुट चौड़ा है। इसकी बाहरी भित्तियों पर तीन पंक्तियों में जैन मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं। इसकी अन्य विशेषता यह है कि इसके गर्भगृह के पीछे एक और छोटा मंदिर भी जुड़ा है। दूसरे अर्थों में यह कहा जा सकता है कि यह विकसित खजुराहो (चंदेल) शैली का एक मंदिर है जिसमें अद्भुत अलंकरण तथा प्रतिमाऑं की सौम्यता दृष्ट्व्य होती है। खजुराहो के दक्षिणी समूह के मंदिरों में आते हैं चतुर्भुज और दूल्हादेव मंदिर।

खजुराहो में विराजमान बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा के प्राप्त होने से यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म का भी प्रचलन था, भले ही वह सीमित पैमाने पर ही क्यों न रहा हो। कनिंघम के मत में गंठाई नामक मन्दिर बौद्ध धर्म से सम्बन्धित है, किन्तु यह तथ्य सत्य जान नहीं पड़ता।

खजुराहो के पश्चिमी समूह में लक्ष्मण, कंदारिया महादेव, मतंगेश्वर, विश्वनाथ, लक्ष्मी, जगदम्बी, चित्रगुप्त, पार्वती तथा गणेश मंदिर आते हैं। यहीं पर वराह व नन्दी के मंडप भी हैं।

मंदिर की बनावट और वास्तुकला – Design And Architecture Of The Khajuraho Temple

मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व में मुड़े हुए पत्थरों से निर्मित मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। भारत के अलावा दुनिया भर के आगन्तुक और पर्यटक प्रेम के इस अप्रतिम सौंदर्य के प्रतीक को देखने के लिए निरंतर आते रहते है। हिन्दू कला और संस्कृति को शिल्पियों ने इस शहर के पत्थरों पर मध्यकाल में उत्कीर्ण किया था। संभोग की विभिन्न कलाओं को इन मंदिरों में बेहद खूबसूरती के उभारा गया है।

सामान्य रूप से यहां के मंदिर बलुआ पत्थर से निर्मित किए गए हैं, लेकिन चौंसठ योगिनी, ब्रह्मा तथा ललगुआँ महादेव मंदिर ग्रेनाइट (कणाष्म) से निर्मित हैं। यहां मंदिर बिना किसी परकोटे के ऊंचे चबूतरे पर निर्मित किए गए हैं। इस सुंदर मंदिर की बाहरी दीवारों पर भी देवी-देवताओं, स्त्रियों और बहुत सारी अन्य पत्थर की नक्काशियाँ बनी हैं। इस मंदिर के प्रवेशद्वार सूर्यदेव की छोटी मूर्तियों से सजे हुए हैं। यहाँ आने वाले यात्री अकसर मंदिर की खूबसूरती देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

खजुराहो के मंदिर कला का एक अद्भुत नमूना हैं जिनमें करीब 10 प्रतिशत कामुक और संभोग की कृतियां दर्शाई गई हैं। इन मूर्तियों के माध्यम से तंत्र द्वारा सेक्स को अध्यात्म से जोड़ने का प्रयास किया गया है और कुछ हद तक वे इनमें सफल भी रहे हैं। खजुराहो की मूर्तियां इस बात का एक बेजोड़ प्रमाण हैं। खजुराहो की मूर्तियों की सबसे खास बात यह है कि नग्न संभोग की प्रतिमाएं होने के बावजूद इनमें कुछ ऐसा नहीं है जिसे देखकर किसी की आंखें झुक जाएं।

खजुराहो की मूर्तियों की सबसे अहम और महत्त्वपूर्ण ख़ूबी यह है कि इनमें गति है, देखते रहिए तो लगता है कि शायद चल रही है या बस हिलने ही वाली है, या फिर लगता है कि शायद अभी कुछ बोलेगी, मस्कुराएगी, शर्माएगी या रूठ जाएगी। और कमाल की बात तो यह है कि ये चेहरे के भाव और शरीर की भंगिमाऐं केवल स्त्री पुरुषों में ही नहीं बल्कि जानवरों में भी दिखाई देते हैं। कुल मिलाके कहा जाय तो हर मूर्ति में एक अजीब सी जुंबिश नज़र आती है।

हालांकि कुछ विद्वान इस बात की पैरवी कर चुके हैं कि खजुराहो की ये मूर्तियां अश्लीलता की हद पार कर रही हैं इसलिए इन्हें मिट्टी से पुतवा देना चाहिए। वहीं कुछ विद्वान ये भी कहते हैं कि खजुराहो के मंदिर जैसी प्रतिमाएं देशभर में होंगी तो बाकी किसी भी मंदिर की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि बाकी मंदिरों में न कोई वैज्ञानिकता है, न कोई अर्थ, जबकि खजुराहो के मंदिर जरूर अर्थपूर्ण हैं।

खजुराहो मंदिर के बारे में रोचक बातें – Interesting Facts About Khajuraho Temple in Hindi

1). खजुराहो का मंदिर समूह अपनी भव्‍य छतों (जगती) और कार्यात्‍मक रूप से प्रभावी योजनाओं के लिए भी उल्‍लेखनीय है। यहाँ की शिल्‍पकलाओं में धार्मिक छवियों के अलावा परिवार, पार्श्‍व, अवराणा देवता, दिकपाल और अप्‍सराएँ तथा सूर सुंदरियाँ भी हैं। यहाँ वेशभूषा और आभूषण भव्‍यता मनमोहक हैं।

2). खजुराहो मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। कभी यह स्थान खजूर के जंगल के लिए जाना जाता था। यही कारण है कि इसका नाम खजुराहो पड़। लेकिन खजुराहो आज खजूर के वन नहीं बल्कि कामुक मूर्तियों से सजी मंदिरों के लिए जाना जाता है।

3). खजुराहो मंदिर के अन्दर के कमरे एक दुसरे से जुड़े हुए है। कमरों में एक तरह से कलाकृति की गयी है की कमरों की खिडकियों से सूरज की रौशनी पुरे मंदिर में फैले। और लोग भी मंदिर को देखते ही आकर्षित होते है।

4). खजुराहो प्रसिद्ध पर्यटन और पुरातात्विक स्थल है। जिसमें हिन्दू व जैन मूर्तिकला से सुसज्जित 25 मन्दिर और तीन संग्रहालय हैं। 25 मन्दिरों में से 10 मंदिर विष्णु को समर्पित हैं, जिसमें उनका एक सशक्त मिश्रित स्वरूप वैकुण्ठ शामिल है। नौ मन्दिर शिव के, एक सूर्य देवता का, एक रहस्यमय योगिनियों (देवियों) का और पाँच मन्दिर दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के तीर्थकारों के हैं। खजुराहो के मन्दिर में तीन बड़े शिलालेख हैं, जो चन्देल नरेश गण्ड और यशोवर्मन के समय के हैं।

5). कुछ अन्य मंदिरों की तरह इस मंदिर की भी यह विशेशता है कि अगर कुछ दूर से आप इसे देखें तो आपको लगेगा कि आप सैंड स्टोन से बने मंदिर को नहीं बल्कि चंदन की लकड़ी पर तराशी गई कोई भव्य कृति देख रहे हैं। अब सवाल उठता है कि अगर यह मंदिर बलुआ पत्थर से बना है तो फिर मूर्तियों, दीवारों और स्तम्भों में इतनी चमक कैसे, दरअसल यह चमक आई है चमड़े से ज़बरदस्त घिसाई करने के कारण।

6). खजुराहो जैसी ऐतिहासिक जगह पर घूमने के बाद भी पर्यटकों के मन में इसके इतिहास से जुड़े कई सवाल अधूरे रह जाते हैं। पर्यटकों की तमाम शंकाओं के समाधान के लिए खजुराहो में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है। इस शो में चंदेल राजाओं के वैभवशाली इतिहास से लेकर इन अप्रतिम मंदिरों के निर्माण की कहानी बताई जाती है। वेस्टर्न ग्रुप के मंदिरों के पास ही बने एक कॉम्पलेक्स में 50 मिनट तक चलने वाले एक शो में सुपर स्टार अमिताभ बच्चन अपनी आवाज़ में दर्शकों को खजुराहो के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराते हैं। ये शो रोजाना शाम को हिन्दी और अंग्रेज़ी में चलाए जाते हैं।

खजुराहो में मंदिरों का समूह – Famous Temples in Khajuraho

पार्वती मंदिर –  इस मंदिर में देवी गंगा विराजमान हैं जो नदियों की देवी हैं। वे अपने वाहक मगरमच्छ पर खड़ी हुई हैं। यह मंदिर गौरी का प्रतिनिधित्व करता है जो देवी पार्वती का ही एक रूप है।

विश्वनाथ मंदिर – मध्यप्रदेश राज्य के छतरपुर के पास स्थित भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर खजुराहो की सबसे बेहतरीन मंदिर है। यह मंदिर पंचायतन शैली में बना हुआ है जिसका निर्माण काल 1002 -1003 ईसवी है।

नंदी मंदिर – यह प्रसिद्ध मंदिर शिव वाहक नंदी को समर्पित है, इसमें 12 स्तम्भ हैं। मूर्ती की लम्बाई 2.20 मीटर है। यह मंदिर विश्वनाथ मंदिर का सामना करते हुए स्थापित किया गया है।

सूर्य मंदिर – विशेष कलाकृति के लिए मशहूर इस प्रसिद्द खजुराहो के मंदिर के अंदर भगवान सूर्य को समर्पित चित्रगुप्त का मंदिर बना हुआ है। यहाँ भगवान सूर्य की सात फुट ऊँची मूर्ती है जो सात घोड़े वाले रथ को चलाती है।

लक्ष्मण मंदिर –  लक्ष्मण मंदिर काफी प्रसिद्ध है, यह रामचंद्र चतुर्भुज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें भगवान सूर्य की एक बेहद आर्कषक करीब 7 फीट ऊंची मूर्ती रखी गई है। यह मंदिर राजा यशोवर्मन के शासन काल में बना था।

देवी जगदम्बा मंदिर – यह मंदिर कंदरिया महादेव के उत्तर की तरफ है। इस मंदिर की वास्तुकला सराहनीय है। यह कुंडलीदार और बेहद जटिल रचना के आकार में बने हैं। यहाँ कामुक मूर्तियां बनी हुईं हैं।

कंदरिया महादेव मंदिर – खजुराहो के मंदिरों में सबसे विशाल कंदरिया महादेव मंदिर मूलतः शिव मंदिर है। मंदिर का निर्माणकाल 999 सन् ई. है। 31 मीटर ऊँचा यह मंदिर खजुराहो में सबसे बड़ा है। इस मंदिर में कामुकता को दर्शाती हुई लगभग 872 मूर्तियाँ हैं और प्रत्येक मूर्ती 1 मीटर की है। यह मंदिर बलुआ पत्थर से बना है तो फिर मूर्तियों, दीवारों और स्तम्भों में इतनी चमक कैसे, दरअसल यह चमक आई है चमड़े से ज़बरदस्त घिसाई करने के कारण।

पार्श्वनाथ मंदिर – खजुराहो में जितने भी प्राचीन जैन मंदिर हैं, उनमें से यह सबसे सुंदर, विशाल व भव्य है। यह अपने भू विन्यास में विशिष्ट है। मूलरूप से यह मंदिर प्रथम तीर्थंकर को समर्पित किया गया था।

वामन मन्दिर – यह मंदिर विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। इसके भू-विन्यास में सप्तरथ, गर्भगृह, अंतराल, महामंन्डप तथा मुखमंडप हैं। इसका गर्भगृह निरंधार है तथा चतुर्भुज वामन की प्रतिमा स्थापित की हुई है।

मतंगेश्वर मंदिर – राजा हर्षवर्मन द्वारा सन् 920 ईसवी में बनवाया गया यह मंदिर खजुराहो में चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए सभी मंदिरों में सबसे पुराना माना जाता है। यहाँ के सभी पुराने मंदिरों में यही एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहाँ अभी भी पूजा–अर्चना की जाती है।

खजुराहों के प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन के लिए कैसे पहुंचे – How To Reach Khajuraho Temple

भारत के मध्यप्रदेश स्थित खुजराहो अच्छी तरह सडको से जुड़ा हैं, आप आसानी से यहां पहुँच सकते हैं –

सड़क मार्ग – खजुराहो, महोबा से 54 किलोमीटर दक्षिण में, छतरपुर से 45 किलोमीटर पूर्व और सतना ज़िले से 105 किलोमीटर पश्‍चिम में स्‍थित है। खजुराहो सतना, हरपालपुर, झांसी और महोबा से बस सेवा द्वारा जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग – दिल्ली से खजुराहो माणिकपुर होते हुए उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति ट्रेन से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, दिल्ली-चेन्नई रेल मार्ग पर पड़ने वाले स्टेशनों महोबा (61 किमी), हरपालपुर (94 किमी) और झांसी (172 किमी) से भी ट्रेन बदलकर खजुराहो जाया जा सकता है।

हवाई मार्ग – खजुराहो के लिए दिल्ली, बनारस और आगरा से प्रतिदिन विमान–सेवा उपलब्ध रहती है।


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