काला जादू क्या हैं, कैसे होता हैं, कैसे बचे उपाय | Black Magic in Hindi

0

माना जाता है कि काला जादू (Black Magic) उसे कहते हैं जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वार्थ को साधने का प्रयास करता है या किसी को नुकसान पहुंचाना के काम करता है। बंगाल और असम को काला जादू का गढ़ माना जाता रहा है। काले जादू के माध्यम से किसी को बकरी बनाकर कैद कर लिया जाता है या फिर किसी को वश में कर उससे मनचाहा कार्य कराया जा सकता है। काले जादू के माध्यम से किसी को किसी भी प्रकार के भ्रम में डाला जा सकता है और किसी को मारा भी जा सकता है। आइए जानते हैं क्या होता है काला जादू (Kala Jadoo) व इससे जुड़े रहस्य और इसके बचाव..

काला जादू क्या हैं, कैसे होता हैं, कैसे बचे उपाय | Black Magic in Hindiकाला जादू क्या हैं –

काला जादू पारम्परिक रूप से पराप्राकृतिक शक्तियों अथवा दुष्ट शक्तियों की सहायता से अपने स्वार्थी उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए किया जाने वाला एक जादू है। काला जादू एक ऐसी बुरी शक्ति या बुरी ऊर्जा जो किसी पर बुरा प्रभाव डालती है यह एक प्रकार नकारात्मक दृष्टि है। नकारात्मक तंत्र-मंत्र को वो लोग अपनाते हैं जोकि दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करते हैं। इस तरह के व्यक्तियों के अंदर नकारात्मकता, ईर्ष्या, लालच, निराशा, कुंठा इस तरह से घर कर जाती है कि वे दूसरों की सफलता, उन्नति, समृद्धि को स्वीकार नहीं कर पाते हैं तथा वे उस व्यक्ति से प्रतिशोध लेने के लिए काले जादू के द्वारा उसके लिए परेशानियां पैदा कर आनंद का अनुभव करते हैं। काले जादू का प्रयोग दूसरे व्यक्ति को हानि पहुंचाने या चोट पहुंचाने के लिए कुछ विशेष तरह की क्रियाओं के द्वारा सम्पन्न किया जाता है। इस प्रथा का प्रभाव हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति पर भी देखा जा सकता है।

धर्म शास्त्रों में काले जादू को अभिचार के नाम से भी जाना जाता है अर्थात ऐसा तंत्र-मंत्र जिससे नकारात्मक शक्तियों को जागृत किया जाता है। काले जादू अर्थात नकारात्मक तंत्र-मंत्र का मुख्य उद्देश किसी व्यक्ति को उस स्थान से भगाना, उसे परेशान करना या उसे अपने वश में करके उसका इस्तेमाल करना या उसे बर्बाद करना होता है। हालांकि इनकी सचाई के बारे में कोई नहीं जानता। कुछ लोग मानते हैं कि काला जादू होता है और कुछ लोग इसे वहम मानते हैं। अब यह तो शोध का विषय हो सकता है।

जानकारों का मानना है ये जादू और कुछ नहीं बस एक बंच ऑफ एनर्जी है। जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या कहें एक इंसान के द्वारा दूसरे इंसान पर भेजा जाता है। इसे Law of Conservation of Energy से समझा जा सकता है। जिसके अनुसार‘’Energy may be transformed from one form to another, but it can not be created or destroyed’’. हिंदी में कहा जाए तो ऊर्जा को न ही पैदा किया जा सकता है और न ही इसे खत्म किया जा सकता है। सिर्फ इसके स्वरूप को दूसरे स्वरूप मे बदला जा सकता है। यदि ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल है, तो नकारात्मक इस्तेमाल भी है। सनातन धर्म का अथर्ववेद सिर्फ सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के लिए ऊर्जाओं के इस्तेमाल को ही समर्पित है। आपको यह समझना होगा कि ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न तो दैवीय होती है, न शैतानी। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं – देवता या शैतान। यह बिजली की तरह होती है। क्या बिजली दैवीय या शैतानी, अच्छी या बुरी होती है? जब वह आपके घर को रोशन करती है, तो वह दिव्य होती है।

गीता में कहा गया है –

अर्जुन ने भी कृष्ण से यही सवाल पूछा था कि आपका यह कहना है कि हर चीज एक ही ऊर्जा से बनी है और हर एक चीज दैवीय है, अगर वही देवत्व दुर्योधन में भी है, तो वह ऐसे काम क्यों कर रहा है? कृष्ण ने जवाब दिया, ‘ईश्वर निर्गुण है, दिव्यता निर्गुण है। उसका अपना कोई गुण नहीं है।’ इसका अर्थ है कि वह बस विशुद्ध ऊर्जा है। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं। जो बाघ आपको खाने आता है, उसमें भी वही ऊर्जा है और कोई देवता, जो आकर आपको बचा सकता है, उसमें भी वही ऊर्जा है। बस वे अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं।

कैसे होता है काला जादू –

तंत्र विज्ञान के अनुसार, यह एक बहुत ही दुर्लभ प्रक्रिया है जिसे बहुत ही विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया जाता है। इसे करने के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता की जरूरत होती है और कुछ ही लोग इसे करने में सक्षम होते हैं। इस प्रक्रिया में एक मूर्ति जो गुड़िया जैसी दिखती है, का उपयोग होता है। जिसे कई तरह की खाने की चीजों जैसे बेसन, उड़द के आटे आदि से बनाया जाता है। इसमें विशेष मंत्रों से जान डाली जाती है। उसके बाद जिस व्यक्ति पर जादू करना होता है उसका नाम लेकर पुतले को जागृत किया जाता है।

पुराने समय में इस तरह का पुतला बनाकर उस पर प्रयोग सिर्फ कहीं दूर बैठे रोगी के उपचार व परेशानियां दूर करने के लिए किया जाता था। उस पुतले पर रोगी का बाल बांधकर विशेष मंत्रों से उसके नाम के साथ जागृत किया जाता था। उसके बाद रोगी के जिस भी अंग में समस्या होती थी। पुतले के उसी अंग पर सुई को गड़ाकर विशेषज्ञ अपनी सकारात्मक ऊर्जा को वहां तक पहुंचाता था। कुछ समय तक ऐसा करने पर तकलीफ खत्म हो जाती थी। यही कारण है कि इसे रेकी और एक्यूप्रेशर का मिश्रण भी कहा जा सकता है। जिसमें अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा की सहायता से किसी को जीवन दिया जा सकता है।

कुछ स्वार्थी लोगों ने इस प्राचीन विधा को समाज के सामने गलत रूप में स्थापित किया। तभी से इसे काला जादू नाम दिया जाने लगा। दरअसल, उन्होंने अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए किया। गौरतलब है जिस तरह काले जादू की सहायता से सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर किसी के रोग व परेशानी को दूर किया जा सकता है। ठीक उसी तरह सुई के माध्यम से किसी तक अपनी नकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर। उसे तकलीफ भी दी जा सकती है।

काले जादू से ग्रसित व्यक्ति के लक्षण : –

काले जादू, टोने टोटके या तंत्र-मंत्र से ग्रसित व्यक्ति के लक्षण इस प्रकार होते हैं जैसे मानसिक अवरोध, श्वासों में भारीपन या तेज चलना, गले में खिंचाव, बिना किसी चोट के जांघ पर नीले रंग के निशान आना, हृदय में भारीपन महसूस होना, पर्याप्त नींद न आना, किसी की मौजूदगी का भ्रम होना आदि।

इसके अलावा घर में बिना किसी विशेष कारण के कलह या लड़ाई-झगड़ा, निराशा, कुंठा, बैचेनी, अशांति तथा उत्साह की कमी भी इसी का परिणाम है। ऐसे माहौल में घर के किसी सदस्य की अप्राकृतिक मृत्यु, व्यवसाय में अचानक हानि का होना इसके पुख्ता लक्षण माने गए हैं। कहते हैं कि यदि काले जादू का समय रहते उपाय न किया जाए तो यह अत्यंत विनाशकारी, भयानक तथा घातक हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप जातक की जिंदगी तबाह तथा बर्बाद हो सकती है।

काला जादू से बचाव और निवारण – Black Magic Remedies in Hindi

  • हर रोज़ हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहियें और हो सके तो हर मंगलवार को मंदिर में भी जाना चाहिए। आपने ऐसा सुना भी होगा की हनुमान से भूत प्रेत सब दूर भागते है। ऐसा करने से आप बुरी नज़रो से बच सकते है।
  • काले जादू से बचने के लिए आपको अपने घर में गोमूत्र का छिड़काव करना होगा अगर शास्त्रो में देखा जाये तो उसमे भी गोमूत्र को पवित्र माना जाता है। गोमूत्र में पर्यावरण को सुध करने की शक्ति होती है। ऐसा भी माना जाता है। की गाये में सभी देवी देवताओ का वास होता है। इससे पर्याप्त होने वाली हर चीज़ बहुत ही पवित्र होती है अगर हो सके तो थोड़ा थोड़ा गोमूत्र पिने से भी लाभ पर्याप्त होता है।
  • प्रतिदिन सुबह और शाम को कर्पूर जलाना चाहिए। इसके अलावा कभी कभी गुढ़ घी मिलाकर उसके कंडे पर धूप देना चाहिए।
  • गणेश भगवान को एक पूरी सुपारी रोज चढ़ाएं और एक कटोरी चावल दान लेकर किसी भिखारी को दान दे इससे भी आपकी भूत बाधा या आपके ऊपर काले जादू का असर खत्म हो जायेगा।
  • सामान्यतः बुरी नजरों से बचाव करने वाला काजल कालू जादू से भी बाचाव करता है। इसके लिए दीपावली की रात को विशेष तौर पर बनाया गया काजल महत्वपूर्ण होता है।  सरसो या शुद्ध घी का दीपक जालाएं और उससे तैयार होने वाले काजल को लगाने से भूत-प्रेत का भय सदा के लिए मन से निकल जाता है।
Note :- कृपया ध्यान रहे इस लेख को हम सिर्फ एक जानकारी के तौर पर प्रकाशित कर रहे हैं न कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए।

और अधिक लेख –

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here