अरुणाचल प्रदेश दर्शनीय व पर्यटन स्थल | Arunachal Pradesh Tourism in Hindi

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Arunachal Pradesh Tourism / अरुणाचल प्रदेश भारत का एक उत्तर पूर्वी राज्य है। ‘अरुणाचल’ का अर्थ हिन्दी में शाब्दिक अर्थ है ‘उगते सूर्य की भूमि’ (अरुण+अचल)। भूटान, चीन और म्यांमार की सीमा से सटे और हिमालय की गोद में बसे अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। यह जगह पर्यटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अरुणाचल प्रदेश को भारत का आर्किड स्वर्ग भी कहते हैं। बर्फ से ढंकी पहाड़ों की चमचमाती चोटी, खूबसूरत वादियां, जंगल के पत्तों की सरगोशियां, तंग जगहों से पानी का घुमावदार बहाव, बौद्ध साधुओं के भजन न सिर्फ अरुणाचल प्रदेश को खूबसूरत बनाती हैं बल्कि पर्यटक को भी अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

अरुणाचल प्रदेश पर्यटन की जानकारी | Arunachal Pradesh Tourism in Hindi

अरुणाचल प्रदेश पर्यटन – Arunachal Pradesh Tourism in Hindi 

विविध प्रकार की वनस्पति और जीव-जंतु अरुणाचल प्रदेश की मुख्य विशेषता है। अरुणाचल की बहुरंगी संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है। अरुणाचल में एक तरफ तो विभिन्न जनजातीय समूहों के उत्सव, उनके लोक संगीत की जीवंत परंपरा है तो दूसरी तरफ हरे-भरे ऊँचे-ऊँचे पहाड़, घने जंगल और उसके बीच से गुजरने वाली बलखाती सड़कें हैं जो लोगों को बरबस मुग्ध कर देती हैं। पूरे भारत में त्वांग में सबसे पहले सूरज निकलता है और इसे निहारने के लिए पर्यटक भी खूब आते हैं।

अरुणाचल प्रदेश की भौगोलिक बनावट का भी पर्यटन में अहम योगदान है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के हर पहलू से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है। यहां के ज्यादातर भाग पर हिमालय पर्वत श्रृंखला के पहाड़ देखे जा सकते हैं। साथ ही ये प्रदेश पांच नदी घाटी में बंटा हुआ है। ये नदी घाटियां हैं- सियांग, सुबनसिरी, कमेंग, तिरप और लोहित। ये सभी खूबसूरत घाटियां हरे-भरे घने जंगलों से घिरी हुई है। यहां 500 से ज्यादा प्रजाति के आर्किड पाए जाते हैं, जो कि पूरे भारत में पाए जाने वाली आर्किड प्रजाति का आधा है। इनमें से कुछ दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजाति के आर्किड भी हैं।

वन्य जीवों और कीटों की सैकड़ों लुप्त होती प्रजातियों का दीदार अरुणाचल में सहज संभव है। यहाँ पाए जाने वाले विभिन्न तरह के पेड़-पौधे शोधकर्ताओं के लिए खास हैं तो पहाड़ों से उतरती नदियाँ जल क्रीड़ा का साहसिक अवसर प्रदान करती हैं। राफ्टिंग के लिए इससे बेहतर जगह और कोई नहीं है। चीन की सीमा पर बर्फबारी का आनंद है तो वर्षा वन शोधार्थियों के लिए वरदान है।

अगर आपको एडवेंचर पसंद है तो फिर अरुणाचल प्रदेश में आपके लिए काफी अवसर हैं। अरुणाचल प्रदेश के लोग काफी साधारण और मेहमान नवाज होते हैं। राज्य भर में 26 से भी ज्यादा जनजाति निवास करते हैं और वे अपनी कला एंव संस्कृति से आज भी जुड़े हुए हैं। अन्य पर्यटन स्थलों की तरह यहाँ के स्थानीय लोग पर्यटकों को ठगते नहीं बल्कि उल्टे ठगे जाते हैं। साथ ही यहां कई जनजातिय त्योहार नृत्य और संगीत के साथ पूरे साल मनाया जाता है।

अरुणाचल प्रदेश पर्यटन स्थल – Arunachal Pradesh Tourist Place in Hindi 

1). ईटानगर

भारत के अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर बहुत ही ख़ूबसूरत है। ईटानगर समुद्रतल से 350 मी. ऊंचाई पर है। ईटानगर हिमालय की तराई में बसा हुआ है। मायापुर के साथ ईटानगर की खोज हुई थी। मायापुर 11वीं शताब्दी में जित्रि वंश की राजधानी थी। ईटा क़िला के नाम पर ही इसका नाम ईटानगर रखा गया है। ईटानगर में लकड़ियों से बनी ख़ूबसूरत वस्तुएँ, वाद्ययंत्र, शानदार कपड़े, हस्तनिर्मित वस्तुएँ और केन की बनी सुन्दर कलाकृतियों को देख सकते हैं।

2). पौराणिक गंगा झील

पौराणिक गंगा झील ईटानगर से 6 किलोमीटर की दूरी पर है। झील के पास सुन्दर प्राकृतिक जंगल है। सैलानी यहाँ सुन्दर पेड़-पौधे, वन्य जीव और फूलों के बगीचे भी देख सकते हैं।

3). ईटा क़िला

इस क़िले का निर्माण 14 -15वीं शताब्दी में कराया गया था। इसके नाम पर ही इस जगह का नाम ईटानगर है। इस क़िले से बहुत ही सुन्दर दृश्य दिखायी देते हैं। क़िले को देखने के बाद सैलानी पौराणिक गंगा झील भी देख सकते हैं।

4). तवांग

तवांग अरुणाचल प्रदेश की उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। तवांग की उत्तर-पूर्व दिशा में तिब्बत, दक्षिण-पश्चिम में भूटान और दक्षिण-पूर्व में पश्चिम कमेंग स्थित है। तवांग हिमालय की तराई में समुद्र तल से 3500 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। छुपे हुए स्वर्ग के नाम से यह पर्यटकों में काफ़ी लोकप्रिय है। पर्यटक यहाँ पर ख़ूबसूरत चोटियाँ, छोटे-छोटे गाँव, शानदार गोनपा, शांत झील और इसके अलावा बहुत कुछ देख सकते हैं। इन सबके अलावा यहाँ पर इतिहास, धर्म और पौराणिक कथाओं का सम्मिश्रण भी देखा जा सकता है। प्राकृतिक ख़ूबसूरती के अलावा पर्यटक यहाँ पर अनेक बौद्ध मठ भी देख सकते हैं। यहाँ पर एशिया का सबसे बडा मठ तवांग मठ भी है। अपने बौद्ध मठों के लिए यह पूरे विश्व में पहचाना जाता है।

5). पापुम पेर

अरुणाचल प्रदेश का पापुम पेर बहुत ही सुन्दर स्थान है। इसका मुख्यालय यूपिया में स्थित है। यह ईटानगर से 20 किलोमीटर दूर है। पापुम पेर हिमालय की तराई में बसा हुआ है। यहाँ से हिमालय की अनेक चोटियाँ दिखायी देती हैं। इनके अतिरिक्त यहाँ जंगलों, नदियों की प्राकृतिक छटा को भी देख सकते हैं।

6). दिरांग घाटी

दिरांग घाटी अरुणाचल प्रदेश राज्य में बोमडिला और तवांग के बीच में स्थित एक पहाड़ी पर्यटन स्थल है। यह घाटी समुद्री स्‍तर से 4910 फुट की ऊँचाई पर है। दिरांग घाटी की ऊँची चोटियाँ पर चढ़ना पर्वतारोहियों और यात्रियों के लिए अनूठा अनुभव होता है। दिरांग घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा सेब के बगीचों के लिए भी प्रसिद्ध है।

8). मालिनीथान

मालिनीथान अरुणाचल प्रदेश राज्य के पश्चिमी सियांग ज़िले में ज़मीन से 60 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यहाँ का सबसे ख़ूबसूरत और पवित्र पर्यटन स्थल है। इस पूरी पहाड़ी पर पत्थर की प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं। इन प्रतिमाओं की खोज 1968-1971 ई. की शृंखलाबद्ध खुदाई के दौरान हुई थी। खुदाई में प्रतिमाओं के साथ ख़ूबसूरत स्तंभ और अनेक कलाकृतियाँ भी मिली हैं। इन ख़ूबसूरत स्तंभ और कलाकृतियों को देखने के लिए पर्यटक यहाँ बड़ी संख्या में आते है। पर्यटकों के अलावा तीर्थयात्रियों में भी मालिनीथान बहुत लोकप्रिय है। यहाँ पूजा करने के लिए देश-विदेश से हजारों तीर्थयात्री भी आते हैं।

9). पासीघाट

पासीघाट अरुणाचल प्रदेश राज्य के पूर्वी सियांग ज़िले में 1911 के दौरान स्‍थापित किया गया एक नगर है। पासीघाट को आम तौर पर अरुणाचल प्रदेश राज्‍य का पर्यटन द्वार कहा जाता है। पासीघाट की मनोरम पहाडियाँ और हरी भरी न‍दी घाटियाँ अनेक जनजातियों का आश्रय हैं और यहाँ पर्यटकों तथा फोटोग्राफरों के लिए अद्भुत दृश्‍य उपलब्‍ध हैं।

10). अलोंग

अलोंग अरुणाचल प्रदेश राज्य के पूर्वी सियांग ज़िले में समुद्री स्‍तर से 300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक नगर है। अलोंग सुंदर गाँवों वाला प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित अरुणाचल प्रदेश का एक छोटा नगर है। गर्मी के मौसम के लिए अलोंग अरुणाचल प्रदेश का सबसे अधिक पर्यटकों वाला स्‍थान है। सुंदर पेड़-पौधों से भरा यह स्‍थान अरुणाचल प्रदेश के सर्वाधिक उपयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक स्‍थानों में से एक है। अलोंग जाने के लिए मीठुन और जर्सी क्रॉस ब्रीडिंग फार्म से गुजरना होता है जो अलोंग से 25 किमी की दूरी पर कामाकी में स्थित है।

11). नामदफा अभयारण्य

नामदफा अभयारण्य में वास्‍तविक जंगल और हरियाली भरी वनस्‍पति की सुंदरता को देखा जा सकता है। नामदफा अभयारण्य को 1972 में राष्‍ट्रीय उद्यान के रूप में स्‍थापित किया गया और 1983 में इसे टाईगर रिजर्व घोषित कर दिया गया। नामदफा अभयारण्य 200 मीटर से लेकर 4500 मीटर तक फैला हुआ है। नामदफा अभयारण्य में 90 प्रकार के स्‍तनपायी पाये जाते हैं। इनमें हाथी, चीता, तेंदुआ, जंगली भैंसा आदि शामिल हैं। स्‍तनपायी जंतुओं के अलावा नामदफा में पक्षियों की भी लगभग 400 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। इनमें किंगफिशर, बत्तख, बाबलर आदि शामिल है।

12). नूरानंग झरना

नूरानंग झरना अरुणाचल प्रदेश राज्य के तवांग शहर से 35 किमी की दूरी पर स्थित है। इसे जुंग झरने के नाम से भी जाना जाता है। नूरानंग झरने का सफ़ेद ठंडा पानी 100 मीटर से भी अधिक ऊँचाई से मूसलधार बारिश के रूप में गिरता है। घने हरे रंग का प्रतिवेश नूरानंग झरने की सुंदरता को बढ़ाता है। हरियाली और हिमालय के पर्वत नूरानंग झरने को एक ख़ूबसूरत पर्यटन स्थल बनाते है। 1997 में बनी शाहरुख़ ख़ान और माधुरी दीक्षित की फ़िल्म ‘कोयला’ की शूटिंग यहाँ हुई है।

कैसे पहुंचे –

अरुणाचल जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी इनरलाइन परमिट लेना होता है। अपना परिचय देने पर अरुणाचल हाउस से यह सहज ही मिल जाता है। पर्यटक इसे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में भी प्राप्त कर सकते हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या देखकर अरुणाचल सरकार ने जगह-जगह पर टूरिस्ट लॉज बनवाए हैं। वहाँ ठहरने और खाने का बेहतर इंतजाम है हालांकि अरुणाचल में अच्छे होटलों की कमी है पर त्वांग में कुछ अच्छे होटल जरूर मिल जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत के अन्य राज्य से बस, ट्रैन, हवाई लाइन जुडी हुई हैं। इसलिए यहां जाने में कोई परेशानी नहीं हैं।


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