यमुनोत्री मंदिर का इतिहास, जानकारी | Yamunotri Temple History in Hindi

Yamunotri Temple / यमुनोत्री मंदिर उत्तराखंड राज्य में स्थित भगवान यम और देवी यमुना को समर्पित है। यह मंदिर गढ़वाल हिमालय के पश्चिम में समुद्र तल से 3235 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह वह स्थान है, जहाँ से यमुना नदी निकली है। यहाँ पर प्रतिवर्ष गर्मियों में तीर्थ यात्री आते हैं। यमनोत्री धाम हिन्दुओ के चार धामों में से एक है। इस मंदिर को ‘माता यमुनोत्री का मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।

यमुनोत्री मंदिर की कहानी – Yamunotri Dham Story in Hindi

पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना नदी सूर्य की पुत्री हैं तथा मृत्यु के देवता यम, सूर्य के पुत्र हैं। एक कथा के अनुसार माता यमुना जब पृथ्वी पर आयी तो उसने अपने भाई को छाया के अभिशाप से मुक्त कराने के लिए घोर तपस्या की और उन्हें अभिशाप से मुक्त करा दिया। यमुना की तपस्या देख यम बहुत खुश हुए और वरदान दिया, इतना कहने पर यमुना देवी ने अपने भाई यम से वरदान में स्वव्छ नदी ताकि धरती पर किसी को पानी पिने में कोई परेशानी न हो और या पानी लोगो को लाभ पहुंचाए। ऐसा कहा गया है की जो यमुना नदी में स्नान करता है वो अकाल मृत्यु से बच जाता है और मोक्ष को प्राप्त होता है।

कहा जाता है कि जो लोग यमुना में स्नान करते हैं, उन्हें यम मृत्यु के समय पीड़ित नहीं करते हैं। यमुनोत्री के पास ही कुछ गर्म पानी के स्रोते (yamunotri kund) भी हैं। तीर्थ यात्री इन स्रोतों के पानी में अपना भोजन पका लेते हैं। यमुनाजी का मन्दिर यहाँ का प्रमुख आराधना मन्दिर है। यमुना नदी इस स्थान से सारे देश में बहती है व यह तीन बहनो का हिस्सा है जिसमे – गंगा, सरस्वती और यमुना आती है।

यमुनोत्री मंदिर का इतिहास, जानकारी | Yamunotri Temple History In Hindi

यमुना देवी का तीर्थस्थल, यमुना नदी के स्त्रोत पर स्थित है। यमुनोत्री का वास्तविक स्त्रोत जमी हुई बर्फ़ की एक झील और हिमनद (चंपासर ग्लेसियर) है जो समुद्र तल से 4421 मीटर की ऊँचाई पर कालिंद पर्वत पर स्थित है। एक और कथा के अनुसार, यह भी कहा जाता है कि इस स्थान पर “संत असित” का आश्रम था।

यमुनोत्री मंदिर का इतिहास – Yamunotri Temple History in Hindi

Yamunotri Mandir – यमुना देवी के मंदिर का निर्माण, टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह द्वारा किया गया था। वर्तमान मंदिर जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में बनवाया था। भूकम्प से एक बार इसका विध्वंस हो चुका है, जिसका पुर्ननिर्माण कराया गया। अत्यधिक संकरी-पतली युमना काजल हिम शीतल है। यमुना के इस जल की परिशुद्धता, निष्कलुशता एवं पवित्रता के कारण भक्तों के हृदय में यमुना के प्रति अपार श्रद्धा और भक्ति उमड पड़ती है।

पौराणिक आख्यान के अनुसार असित मुनि की पर्णकुटी इसी स्थान पर थी। यमुना देवी के मंदिर की चढ़ाई का मार्ग वास्तविक रूप में दुर्गम और रोमांचित करने वाला है। मार्ग पर अगल-बगल में स्थित गगनचुंबी, मनोहारी नंग-धडंग बर्फीली चोटियां तीर्थयात्रियों को सम्मोहित कर देती हैं। इस दुर्गम चढ़ाई के आस-पास घने जंगलो की हरियाली मन को मोहने से नहीं चूकती है। मंदिर प्रांगण में एक विशाल शिला स्तम्भ है जिसे दिव्यशिला के नाम से जाना जाता है। यमुनोत्री मंदिर परिशर 3235 मी. उँचाई पर स्थित है। यमुनोत्री मंदिर में भी मई से अक्टूबर तक श्रद्धालुओं का अपार समूह हरवक्त देखा जाता है। शीतकाल में यह स्थान पूर्णरूप से हिमाछादित रहता है।

यमुनोत्री मंदिर की जानकारी – Yamunotri Dham in hindi

कलिन्द पर्वत से बहुत ऊँचे से हिम पिघलकर यहाँ जल के रूप में गिरता है। इसी से यमुना का नाम कालिन्दी है। यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। पहला धाम यमुनोत्री से यमुना का उद्गम मात्र एक किमी की दूरी पर है। यहां बंदरपूंछ चोटी (6315 मी.) के पश्चिमी अंत में फैले यमुनोत्री ग्लेशियर को देखना अत्यंत रोमांचक है। यमुना पावन नदी का स्रोत कालिंदी पर्वत है। पानी के मुख्य स्रोतों में से एक सूर्यकुण्ड है जो गरम पानी का स्रोत है। चारों धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ की पूरी यात्रा करनी हो तो यमुनोत्री से प्रारंभ करते। इनमें से एक या दो स्थान ही जाना हो तो भी यात्रा ऋषिकेश से प्रारंभ होती है।

अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर मंदिर के कपाट खुलते हैं और दीपावली (अक्टूबर-नंवबर) के पर्व पर बंद हो जाते हैं। सूर्यकुंड अपने उच्चतम तापमान के लिए विख्यात है। भक्तगण देवी को प्रसाद के रूप में चढ़ाने के लिए कपडे की पोटली में चावल और आलू बांधकर इसी कुंड के गर्म जल में पकाते है। देवी को प्रसाद चढ़ाने के पश्चात इन्ही पकाये हुए चावलों को प्रसाद के रूप में भक्त जन अपने अपने घर ले जाते हैं। सूर्यकुंड के निकट ही एक शिला है जिसे दिव्य शिला कहते हैं। इस शिला को दिव्य ज्योति शिला भी कहते हैं। भक्तगण भगवती यमुना की पूजा करने से पहले इस शिला की पूजा करते हैं।

यमुनोत्री धाम कैसे जाएँ – How To Reach Yamunotri Dham in Hindi

हवाई मार्ग यमुनोत्री के सबसे नजदीक देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है जो यमुनोत्री से करीब 210 किलोमीटर दूर है। यहां सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून है जो करीब 175 किलोमीटर दूर है। यमुनोत्री जाने का सबसे अच्छा तरीका सड़क मार्ग हैं। यहां पहुंचने का सबसे अच्छा रास्ता बड़कोट और देहरादून से होकर निकलता है। इसके बाद धरासू से यमुनोत्री की तरफ बड़कोट फिर जानकी चट्टी तक बस द्वारा यात्रा होती है। जानकी चट्टी से 6 किलोमीटर पैदल चलकर यमुनोत्री पहुंचा जाता है।


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