जसवंत थड़ा का इतिहास और जानकारी | Jaswant Thada History in Hindi

जसवंत थड़ा राजस्थान के जोधपुर में स्थित संगमरमर का बना एक सुंदर स्मारक है। यह राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। मेहरानगढ़ किला परिसर के बाईं ओर स्थित जसवंत थड़ा किले की तलहटी में एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है।

जसवंत थड़ा का इतिहास और जानकारी | Jaswant Thada History in Hindi

जसवंत थड़ा की पूरी जानकारी – Jaswant Thada Jodhpur Information in Hindi

जसवंत थड़ा जोधपुर राजपरिवार के सदस्यों के दाह संस्कार के लिये सुरक्षित है। इससे पहले राजपरिवार के सदस्यों का दाह संस्कार मंडोर में हुआ करता था। इस विशाल स्मारक में संगमरमर की कुछ ऐसी शिलाएँ भी दिवारों में लगी हैं, जिनमें सूर्य की किरणें आर-पार जाती हैं।

सन 1899 में जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय (1888-1895) की याद में उनके उत्तराधिकारी महाराजा सरदार सिंह ने इसे बनवाया था। लेकिन अब यहां पर्यटक खूब आते हैं। यह भवन लाल घोटू पत्थर के चबूतरे पर बनाया गया है। यहां बना बगीचा और फव्वारा बहुत ही मनोरम लगता है।

धपुर राजघराना सूर्यवंशी रहा है संगमरमर निर्मित जसवंत थड़े में कुछ ऐसी शिलाएँ भी दिवारों में लगी हैं, जिनमें सूर्य की किरणें आर-पार जाती हैं। इस स्मारक के लिये जोधपुर से 250 कि.मी. दूर मकराना से संगमरमर का पत्थर लाया गया था। इस स्मारक को उस समय बनाने में 2,84,678 रुपए का खर्च आया था।

महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय (1837-1895 ई.) की स्मृति में बने इस जसवन्त थड़े में महाराजा जसवन्तसिंह द्वितीय से लेकर महाराजा हनवंतसिंह तक की सफेद पत्थर से निर्मित छतरियां बनी हुई हैं। साथ ही महारानियों के स्मारक भी देखने लायक हैं। मोक्ष के धाम जसवंत थड़ा का आज भी पुराना वैभव उसी रूप में कायम है जिस कला रूप में यह बना था। इमारत के पास ही “तखतसिंहोत परिवार” के सदस्यों की छत्तरियां भी बनी हुई हैं।

स्मारक के पास ही एक छोटी-सी झील है, जो स्मारक के सौंदर्य को और बबढ़ा देती है। इस झील का निर्माण महाराजा अभय सिंह (1724-1749 ई.) ने करवाया था। यह अपनी संगमरमर की जटिल नक्काशियों के कारण ‘मारवाड़ के ताजमहल‘ के रूप में भी जाना जाता है। मुख्य स्मारक एक मंदिर के आकार में बनाया गया था।

जसवंत थड़ा के बुद्धमल और रहीमबख्श आर्किटेक्ट थे। इसके निर्माण में कलात्मकता का पूरा ध्यान रखा गया है। प्रो. जहूर खां मेहर, प्रमुख इतिहासकार। जसवत थड़ा के मुख्य अहाते में घुसने के लिए दो बार सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। इसका शिल्प राजस्थानी और मुगल कालीन स्थापत्य का मिश्रण है। सामने की ओर निकले बरामदे का स्थापत्य जहाँ मुगलों से प्रभावित है

जसवंत थड़ा से मेहरानगढ़ को आप अपनी संपूर्णता में देख सकते हैं । वहीं मेहरानगढ़ से पूरे जसवंत थड़ा के आहाते का रमणीक दृश्य दिखाई देता है। अलग अलग तलों पर बने बागों और छोटी सी एक झील से घिरा जसवंत थड़ा मुसाफ़िरों को अपनी संगमरमरी दूधिया चमक से सहज ही आकर्षित करता है।

यह इमारत चांदनी रात में बहुत खूबसूरत दिखाई पड़ती है। रात के 8 बजे तक ये खुला रहता है। यहां का टिकट भारतीयो के लिये 40 रूपये है। स्काउट गाइड, एनसीसी, एनएसएस, स्कूल कॉलेज के भ्रमण दल, देसी विदेशी सैलानी इसे देखने आते हैं। जोधपुर रिफ के आयोजन के दौरान विख्यात गायकों की आवाज में अलसभोर और संध्या आरती के समय कबीर वाणी माहौल में भक्ति रस घुलता है।


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