वैज्ञानिक जेम्स क्लार्क मैक्सवेल | James Clerk Maxwell Biography In Hindi

James Clerk Maxwell / जेम्स क्लार्क मैक्सवेल स्कॉटलैण्ड (यूके) के एक विख्यात गणितज्ञ एवं भौतिक वैज्ञानिक थे। उन्होंने प्रकाश के विद्युत-चुंबकीय के सिद्धांत का नया रूप दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

जेम्स क्लार्क मैक्सवेल की जीवनी | James Clerk Maxwell Biography In Hindiवैज्ञानिक जेम्स क्लार्क मैक्सवेल की जीवनी – James Clerk Maxwell Biography In Hindi

बचपन से ही मैक्सवेल को प्रकृति से विशेष लगाव था। इन्हें झील, पहाड़ियां और झरनों को देखने का बहुत बड़ा शौक था। प्रकृति के रंग बिरंगे दृश्य को देख कर वे उनमे दुब जाते थे और उनके विषय में कुछ न कुछ सोचते रहते थे। निश्चय ही प्राकृति के इन रंग-बिरंगे दृश्यों ने उनकी प्रतिभा को विकसित करने में प्रमुख भूमिका निभाई। शायद यह प्रकृति का ही उपहार था कि आगे चलकर उन्होंने विविध रंगों को एक समीकरण में बांधने में सफलता प्राप्त की।

मैक्सवेल का जन्म एडिनर्बग (स्कॉटलैण्ड) में 13 नवम्बर सन् 1831 के हुआ था। इनके पिता गैलेनेयर एक धनि व्यक्ति थे। दुर्भाग्यवश जब इनकी उम्र केवल आठ वर्ष की ही थी तभी इनकी मां की मृत्यु हो गयी। मां का साया उठ जाने के बाद इनकी देख-रेख इनके पिता को ही करनी पड़ी। इन्होंने एडिनबर्ग विश्वविद्यालय तथा केंब्रिज में शिक्षा पाई। 18 वर्ष की अवस्था में ही इन्होंने गिडनबर्ग की रॉयल सोसायटी के समक्ष प्रत्यास्थता (elasticity) वाले ठोस पिंडों के संतुलन पर अपना निबंध प्रस्तुत किया था। इसी के आधार पर इन्होंने श्यानतावाले (viscous) द्रव पर स्पर्शरेखीय प्रतिबल (tangential stress) के प्रभाव से क्षण मात्र के लिये उत्पन्न होने वाले दुहरे अपवर्तन की खोज की। सन् 1859 में मैक्सवेल ने शनि के वलय के स्थायित्व पर एक गवेषणपूर्ण निबंध प्रस्तुत किया।

मैक्सवेल की सबसे महत्वपूर्ण खोज थी-  प्रकाश का विद्युत-चुम्बकीय सिद्धांत। इस सिद्धांत पर कार्य करने की प्रेरणा उन्हें माइकल फैराडे से मिली थी। माइकल फैराडे को स्वंय यह एहसास हो गया था कि प्रकाश एक विद्युत-चुंबकीय घटना है लेकिन वह इसका कोई गणितीय आधार प्रस्तुत न कर पाए। मैक्सवेल ने प्रकाश की विद्युत-चुंबकीय प्रवृत्ति को समझने के लिए अनेक प्रयोग किए और फिर इसे गणितीय रूप में प्रस्तुत किया। इस विषय से संबंधित उन्होंने अपने परिणाम ‘डायनामिक थ्योरी ऑफ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड’ के नाम से प्रकाशित किया। मैक्सवेल के विद्युत चुंबकीय तरंगे ईथर के लचीले माध्यम से संचालित होती थी। बाद में ईथर माध्यम की संकल्पना निराधार सिद्ध हो गई लेकिन इनका विधुत सिद्धांत आज भी हर कसौटी पर सत्य उतरता है।

गैस के गतिज सिद्धान्त (Kinetic Ttheory) पर महत्वपूर्ण शोधकार्य करके, गैस के अणुओं के वेग के विस्तरण के लिये इन्होंने सूत्र दिया, जो “मैक्सवेल के नियम” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने विद्युत चुंबकत्व के क्षेत्र में एकीकृत मॉडल दिया, जिसे भौतिकी में एक बड़ा योगदान माना जाता है। मैक्सवेल ने मैक्सवेल वितरण का विकास किया जिसे गैसों की गतिज उर्जा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है।

सन 1856 से 1860 तक वे ऐबर्डीनके मार्शल कालेज में प्राकृतिक दर्शन (Naturalphilosophy) के प्रोफेसर रहे। सन् सन 1860 से 68 तक मैक्सवेल लंदन के किंग कालेज में भौतिकी और खगोलमिति के प्रोफेसर रहे। 1868 ई० इन्होंने अवकाश ग्रहण किया, किंतु 1871 में आपको पुन: केंब्रिज में प्रायोगिक भौतिकी विभाग के अध्यक्ष का भार सौंपा गया। मैक्सवेल के निर्देशन में इन्हीं दिनों सुविख्यात कैंबेंडिश प्रयोगशाला की रूपपरेखा निर्धारित की गई।

मेक्सवेल के विश्व-प्रसिद्ध वैज्ञानिक तो थे ही साथ ही साथ वें तैरने, घुड़सवारी करने और जिम्नास्टिक में भी दक्ष थे। वह अच्छी कविताएं भी कर लेते थे। महान प्रतिभा वाला यह वैज्ञानिक विज्ञान की सेवा करते हुए 5 नवम्बर, 1879 को निधन हो गया।


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