भारतीय मुद्रा ‘Money’ का इतिहास और रोचक तथ्य | About Indian Currency in Hindi

Indian Currency – अभी का दौर में पैसा इतना महत्वपूर्ण बन गया हैं, की बिना पैसो के जिंदगी जीना असंभव लगता हैं। लेकिन क्या आपको पैसो से जुडी सारी जानकारी मालूम हैं? अगर नहीं,,, तो चलिए आज मैं आपको भारतीय करंसी का इतिहास और इससे जुड़े मजेदार और रोचक बातें बताता हूँ।

भारतीय मुद्रा(Money) का इतिहास और रोचक तथ्य | About Indian Currency In Hindiभारतीय करंसी का इतिहास – History of indian currency in hindi

भारतीय रुपया भारत की राष्ट्रीय मुद्रा है। इसका बाज़ार नियामक और जारीकर्ता भारतीय रिज़र्व बैंक है। नये प्रतीक चिह्न के आने से पहले रूपये को हिन्दी में दर्शाने के लिए ‘रु’ और अंग्रेजी में Re. (1 रुपया), Rs. और Rp. का प्रयोग किया जाता था। “रुपया” शब्द का उद्गम संस्कृत के शब्द रुप् या रुप्याह् मे निहित है, जिसका अर्थ कच्ची चांदी होता है और रूप्यकम् का अर्थ चांदी का सिक्का है।

“रुपया” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम शेर शाह सूरी ने भारत मे अपने संक्षिप्त शासन (1540-1545) के दौरान किया था। शेर शाह सूरी ने अपने शासन काल मे जो रुपया चलाया वह एक चांदी का सिक्का था जिसका वजन 178 ग्रेन (11.534 ग्राम) के लगभग था। उसने ताँबे का सिक्का जिसे दाम तथा सोने का सिक्का जिसे मोहर कहा जाता था को भी चलाया। कालांतर मे मुग़ल शासन के दौरान पूरे उपमहाद्वीप मे मौद्रिक प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए तीनों धातुओं के सिक्कों का मानकीकरण किया गया। शेर शाह सूरी के शासनकाल के दौरान शुरू किया गया ‘रुपया’ आज तक प्रचलन मे है।

पहले रुपए (11.66 ग्राम) को 16 आने या 64 पैसे या 192 पाई में बांटा जाता था। रुपये का दशमलवीकरण 1957 में भारत मे हुआ। इस प्रकार अब एक भारतीय रुपया 100 पैसे में विभाजित हो गया। भारत में कभी कभी पैसे के लिए नया पैसा शब्द भी इस्तेमाल किया जाता था।

भारतीय करंसी से जुड़े रोचक तथ्य – Interesting facts about Indian currency in Hindi

(1) करंसी पर फोटो का इस्तेमाल  :- हर भारतीय नोट पर किसी न किसी चीज की फोटो छपी होती हैं जैसे इंसानों, जानवरों, प्रकृति से लेकर आजादी के आंदोल से जुड़ी तस्वीरें छपी होती है। 20 रुपए के नोट पर अंडमान आइलैंड की तस्वीर है। वहीं, 10 रुपए के नोट पर हाथी, गैंडा और शेर छपा हुआ है, जबकि 100 रुपए के नोट पर पहाड़ और बादल की तस्वीर है। इसके अलावा 500 रुपए के नोट पर आजादी के आंदोलन से जुड़ी 11 मूर्ति की तस्वीर छपी है।

(2) महात्मा गाँधी की फोटो :- 1996 से पहले भारतीय करंसी में महात्मा गाँधी की फोटो नहीं होती थी इसके जगह पर अशोक स्तंभ छापा जाता था। महात्मा गांधी की जो फोटो छपती हैं वह तब खीँची गई थी जब गांधीजी, तत्कालीन बर्मा और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात करने गए थे वही फोटो का इस्तेमाल होता हैं।

(3) फटा नोट नहीं होता बेकार :- अगर आपके पास 51 फीसदी से भी ज्यादा फटा नोट है, तो भी आपको चिंता करने की जरुरत नहीं हैं. आप उसको बैंक में जाकर बदल सकते है। आरबीआई की गाइडलाइन्स के अनुसार, किसी भी प्रकार का फटा, पुराना और गंदा नोट किसी भी बैंक की शाखा में जाकर बदला जा सकता है।

(4) कभी एक रुपए में मिलता था 13 डॉलर :- आजादी से पहले जब 1 रुपया 13$ डाॅलर के बराबर हुआ करता था। फिर 1947 में भारत आजाद हुआ, 1 = 1$ कर दिया गया। फिर धीरे-धीरे भारत पर कर्ज बढ़ने लगा तो इंदिरा गांधी ने कर्ज चुकाने के लिए रूपये की कीमत कम करने का फैसला लिया उसके बाद आज तक रूपये की कीमत घटती आ रही हैं। और आज का दौर में पूरा उल्टा 1$ = 70 + हो गया हैं।

(5) भारतीय नोट पर 17 भाषाओं में लिखी होती है :- हिंदी और अंग्रेजी के अलावा भारतीय नोट में 15 भाषाओं का इस्तेमाल होता है। कोई भी नोट जैसे 10, 20, 50 पर हिंदी और अंग्रेजी के साथ असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू में उसकी कीमत लिखी होती है। हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल नोट के अगले हिस्से में होता है। बाकी भाषाएं नोट के पिछले हिस्से पर लिखी होती हैं।

(6) रुपए के विभिन्न भाषाओ में नाम हैं :- भारत के अधिकांश भागों में रुपये को इन नामों से जाना जाता है: हिन्दी में रुपया, गुजराती में रुपियो, तेलुगू , तुलू भाषा और कन्नड़ में रूपाइ, तमिल में रुबाइ, मलयालम में रूपा, मराठी (रुपये) में रुपये या संस्कृत से निकले अन्य शब्द जैसे रूप्यकम्, रूप्यकं इत्यादि। हालांकि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिज़ोरम, उड़ीसा और असम में रुपये को आधिकारिक रूप से संस्कृत के तनक नाम से जाना जाता है। इसलिए रुपये को बंगाली में टका, असमिया में तोका और उड़िया में टन्का के नाम से जाना जाता है और रोमन अक्षर ‘T’ से भारतीय बैंकनोटों में दर्शाया जाता है।

(7) पेपर करंसी की शुरुआत  :- रिजर्व बैंक ने जनवरी 1938 में पहली पेपर करंसी छापी थी, जो 5 रुपए नोट की थी। इसी साल 10 रुपए, 100 रुपए, 1,000 रुपए और 10,000 रुपए के नोट भी छापे गए थे। हालांकि, 1946 में 1,000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए गए थे। लेकिन 1954 में एक बार फिर से 1,000 और 10,000 रुपए के नोट छापे गए। साथ ही 5,000 रुपए के नोट की भी छपाई की गई। लेकिन, 1978 में 10,000 और 5,000 के नोट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

(8) नेपाल में नहीं चलता 500 और 1000 रुपए का नोट :- भारत के 500 और 1,000 रूपये के नोट नेपाल में नही चलते। नकली नोटों के कारन ये नियम नेपाल में लागु हैं। जानकारी के लिए भारत नेपाल बॉर्डर पर भी नोटिस बोर्ड लगा है, और एक बड़ी बात,, अब तो 1000 के नॉट भारत में भी अवैध हैं।

(9) करेंसी छापने का अधिकार किसको हैं :- एक रुपए का नोट भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। बाकी सभी नोट जारी करने का अधिकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पास है। इस नोट पर आरबीआई गवर्नर की जगह फाइनेंस सेक्रेटरी का सिग्नेचर होता है।

(10) ब्लेड बनाने के लिए होती थी सिक्कों की तस्करी :- एक समय ऐसा था, 5 रूपए के सिक्को को बहुत जोरो पर तस्करी की जाती थी, क्योंकि 5 रूपए के एक सिक्के से 6 ब्लेड बनते थे. 1 ब्लेड की कीमत 2 रूपए होती थी तो ब्लेड बनाने वाले को अच्छा फायदा होता था. इसे देखते हुए भारत सरकार ने सिक्का बनाने वाला मेटल ही बदल दिया।

(11) अल्फाबेट के इन नम्बरो का इस्तेमाल करेंसी पर नहीं होता हैं :- सुरक्षा कारणों की वजह से करंसी नोटों पर 26 में से सिर्फ 20 अल्फाबेट ही इस्तेमाल होते हैं। दरअसल, भारतीय करंसी पर प्रीफिक्स में आई (I), जे (J),ओ (O), एक्स (X), वाई (Y) और जेड (Z) का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। चूंकि आई न्यूमेरिक एक के साथ, ओ, जीरो के साथ और जे आदि कन्फ्यूज करते हैं। इसलिए प्रीफिक्स में इन्हें शामिल नहीं किया जाता है।

(12) पुराने और फटे हुए नोटों का क्या किया जाता हैं :- जब कोई नोट पुराना हो जाता है या दुबारा चलन में आने के योग्य नहीं रहता है तो उसे व्यावसायिक बैंकों के जरिये जमा कर लिया जाता है और दुबारा बाजार में नहीं भेजा जाता है अब तक कि प्रथा यह थी। कि उन पुराने नोटों को जला दिया जाता था परन्तु अब RBI ने पर्यावरण की रक्षा के लिए जलाने  के स्थान पर 9 करोड़ रुपये की एक मशीन आयात की यह मशीन पुराने नोटों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है फिर इन टुकड़ों को गलाकर ईंट के आकर में बनाया जाता है ये ईंटें कई कामों में प्रयोग की जाती हैं।

(13) अब सवाल ये है कि कितना नोट छापा जाता हैं या कितने सिक्के ढ़ाले जाते हैं? जहां तक बात नोटों की है, 1 रुपये को छोड़ बाकी कीमत वाले नोटों के बारे में रिजर्व बैंक आर्थिक विकास दर, महंगाई दर और नोटों की बदलने की मांग जैसे तथ्यों के आधार पर अनुमान लगता है, फिर सरकार के साथ विचार-विमर्श कर तय होता है कि कितना नोट छपेगा. भले ही नोट छापने और सिक्का ढालने का फैसला सरकार और रिजर्व बैंक मिलकर करते हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि गरीबी दूर करने के लिए खूब सारे नोट छाप लिए जाएं. बाजार में अगर नोट औऱ सिक्के काफी ज्यादा हो जाएंगे, तो महंगाई आसमान छूने लगेगी. छपने वाले नोटों की मात्रा पूरी अर्थव्यवस्था में नोटों के परिचालन, गंदे नोटों और आरक्षित आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाती है।

(14) एक साल में कितने नॉट छपते हैं :- रिजर्व बैंक के अनुसार, भारत में हर साल 2,000 करोड़ करेंसी नोट छापा जाता है। इसकी 40 प्रतिशत लागत कागज और स्याही के आयात में जाती है। यह कागज जर्मनी, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों से आयात किया जाता है।

(15) एक नोट कितने रूपयें में छपता हैं :-  एक आरटीआई के अनुसार 5 रुपए का नोट छापने में 50 पैसा खर्च होता है, 10 रुपए के लिए 0.96 पैसे, 50 का नोट छापने में 1.81 रुपए और 100 का नोट छापने में 1.79  रुपए की लागत आती है। 500 और 2000 रुपए के नोट छापने में 3.09 और 3.54 रुपए का खर्च आता था। इसी तरह 10 के सिक्के की माइनिंग में 6.10 रुपए खर्च होते हैं।

(16) करेंसी पेपर :- भारतीय नोट काॅटन के बने होते हैं। ये इतने मजबूत होते हैं कि आप नए नोट के दोनो सिरों को पकड़कर उसे फाड़ नही सकते।

(17) भारत में नोट के पेपर छापने का कारखाना :- देश में नोट के पेपर छापने वाला एकमात्र कारखाना मध्यप्रदेश के होशांगाबाद में स्थित ‘सिक्योरिटी पेपर मिल’ है। गौरतलब है कि इसकी स्थापना 1968 में हुई थी और यह सिर्फ 2.8 मेट्रिक टन पेपर बना सकता है। बाकी के पेपर जर्मनी, जापान और ब्रिटेन से मंगवाए जाते रहे हैं।

(18) देश का पहली नोट छापने वाली फैक्ट्री नासिक में 1926 में स्थापित की गई थी और वह 1928 से नोट छाप रही है. इसके बाद 1975 में देवास, मध्य प्रदेश में दूसरी, 1999 में मैसूर में तीसरी और 2000 में सालबोनी, पश्चिम बंगाल में चौथी नोट छापने वाली प्रेस की स्थापना की गई।

(19) हर सिक्के पर सन् के नीचे एक खास निशान बना होता हैं आप उस निशान को देखकर पता लगा सकते हैं कि ये सिक्का कहाँ बना हैं। मुंबई – हीरा [◆], नोएडा – डाॅट [.], हैदराबाद – सितारा [★], कोलकाता – कोई निशान नहीं।

(20) आजादी के बाद पाकिस्तान ने तब तक भारतीय मुद्रा का प्रयोग किया जब तक उन्होनें काम चलाने लायक नोट न छाप लिए।

(21) रूपया भारत के अलावा इंडोनेशिया, मॉरीशस, नेपाल, पाकिस्तान, आइलैंड और श्रीलंका की भी करंसी हैं।

(22) रुपए के चिन्ह को 2010 में आइआइटी के प्रवक्ता उदय कुमार ने बनाया था। इसके लिए इनको 2.5 लाख रूपयें का इनाम भी मिला था।

(23) नोटो पर सीरियल नंबर इसलिए डाला जाता हैं ताकि आरबीआई (RBI) को पता चलता रहे कि इस समय मार्केट में कितनी करंसी हैं।

(24) भारत में 75, 100, 150 और 1,000 के भी सिक्के छप चुके हैं।


और अधिक लेख  – 

1 thought on “भारतीय मुद्रा ‘Money’ का इतिहास और रोचक तथ्य | About Indian Currency in Hindi”

  1. Kaffi aachi jaankari mile h kuch baate mujhe maalum v nhi thi aap isse tarha hum savi ko jaankari dete rahiye .thank u aachi gayan . com

Leave a Comment

Your email address will not be published.