गैलीलियो गैलिली की जीवनी और इतिहास | Galileo Galilei Biography in Hindi

महान खगोलविद, गणितज्ञ और विचारक गैलीलियो गैलिली / Galileo Galilei ने अपने समय में अनेक भ्रांतियों को तोड़ते हुए एक साहसपूर्ण घोषणा की थी कि पृथ्वी नहीं सूर्य ब्रह्मांड का केंद्र है अन्य ग्रहों की तरह पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करती है। इस समय कोई यह अद्भुत तर्क मानने के लिए तैयार नहीं था। इसके लिए गैलीलियो को अदालत में सज़ा भी मिली और उन्हे जेल मे डाल दिया गया।

गैलीलियो गैलिली की जीवनी | Galileo Galilei Biography in Hindiगैलीलियो गैलिली की जीवनी – Galileo Galilei Biography in Hindi

गैलिलियो का जन्म 15 फ़रवरी, 1564 को इटली के प्रसिद्ध नगर पीसा (अब फ्रांस) में हुआ था। इनके पिता एक विचारक थे तथा सामाजिक तौर पर उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। बचपन में गैलिलियो का झुकाव चिकित्सा शास्त्र की ओर था, लेकिन कालांतर में उनकी रुचि भौतिक विज्ञान की ओर बढ़ गई।

जब वह लगभग 17 वर्ष के थे और विज्ञान अध्ययन कर रहे थे तो एक शाम वे अपने शहर पीसा के गिरजाघर में प्रार्थना करने गए। तभी गिरजाघर में एक दरबार ने जंजीर से लटके एक लैंप को जलाया। जैसे ही उसने अपना हाथ हटाया वैसे ही लैंप जंजीर के साथ दाएँ-बाएँ झूलने लगा। लैंप को झूलते देख गेलेलियो ने यह महसूस किया कि लैंप के इधर-उधर डोलने (दोलन) का समय समान ही रहता है चाहे वह डोलने की दूरी बड़ी हो या छोटी। इसी तथ्य के आधार पर उनके दिमाग में एक यंत्र बनाने का विचार पैदा हुआ जिसे आज सरल दोलन (सिंपल पेंडुलम) कहते हैं।

इसी तथ्य के आधार पर उन्होंने एक यंत्र का आविष्कार किया जिसे ‘नारी स्पंदन माफी’ (पल्स मीटर) कहते हैं। कई वर्षों बाद जब गैलिलियो वृद्ध और अंधे हो चले थे, उनके पुत्र विंसेज़ी ने इसी आधार पर दीवार घड़ियों के मॉडल बनाए। आज भी इसी अविष्कार का आधार दीवार की पेंडूलम घड़ियां बनाई जाती है।

गेलिलियो गैलिली के बारे में बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि खगोल विज्ञानी होने के अलावा वो एक कुशल गणितज्ञ, भौतिकविद और दार्शनिक थे जिसने यूरोप की वैज्ञानिक क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसलिए गेलिलियो गैलिली को“ आधुनिक खगोल विज्ञानं का जनक” और “आधुनिक भौतिकी का पिता” के रूप में भी सम्बोधित किया जाता है।

गेलिलियो गैलिली ने आज से बहुत पहले गणित, सैधांतिक भौतिकी और प्रायोगिक भौतिकी में परस्पर संबध को समझ लिया था। परावलय या पैराबोला का अध्ययन करते हुए वो इस निष्कर्ष पर पहुचे थे कि एक समान त्वरण की अवस्था में पृथ्वी पर फेंका कोई पिंड एक परवलयाकार मार्ग में चलकर वापस पृथ्वी पर गिरेगा, बशर्ते हवा में घर्षण का बल अपेक्ष्नीय हो।

सन 1608-9 में गेलिलियो गैलिली को दूरबीन के बारे में पता चला जिसका हॉलैंड में अविष्कार हो चुका था। केवल उसका विवरण सुनकर उन्होंने उससे भी कही अधिक परिष्कृत और शक्तिशाली दूरबीन स्वयं बना ली। जिसका सार्वजनिक प्रदर्शन उन्होने 25 अगस्त 1609 को किया था। फिर शुरू हुआ खगोलीय खोजो का एक अदभुद अध्याय। गेलिलियो ने अपनी एक पुस्तक में लिखा जब इस दूरदर्शी (टेलिस्कोप) के निर्माण की खबर वेनिस पहुंची तो मुझे राजा सिग्नोरिया ने बुलावा भेजा, मैंने यह यंत्र दिखाकर सारे राज दरबार को चकित कर दिया। बहुत से कुलीन व्यक्ति इस यंत्र को लेकर वेनिस के गिरजाघर की सबसे ऊंची मीनार पर चढ़ गए और उन्होंने बालदार जहाजों को देखा। इस यंत्र के कारण जहाज वास्तविक दूरी से 10 गुनी समीप दिखते थे। उन्होंने बृहस्पति के उपग्रहों का पता लगाया और सिद्ध किया कि आकाशगंगा बहुत से तारों से मिलकर बनी है।

गेलिलियो ने कोपरनिकस के विचारों की पुष्टि की। कोपरनिकस का कहना था कि सूर्य ब्रह्मांड का केंद्र है, न कि पृथ्वी। गेलिलियो ने इस सिद्धांत को प्रतिस्थापित करते हुए कहा कि पृथ्वी इस ब्रह्मांड का केंद्र नहीं, बल्कि पृथ्वी और दूसरे सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। सन 1616 में जब गेलिलियो ने सूर्य की स्थिरता का और पृथ्वी के घूमने का सिद्धांत घोषित किया तो इसके दो दिन बाद उन्हें चर्च के अधिकारियों के सामने प्रस्तुत होना पड़ा। यह बात तत्कालीन वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओ के विरूद्ध जाती थी गेलिलियो के जीवनकाल में इसे उनकी भूल ही समझा गया। उन्हें सरकारी तौर पर चेतावनी दी गई कि वे इस विचार का प्रचार बंद करें। कहा जाता है कट्टर कैथोलिक होने के कारण गेलिलियो ने सन 1630 तक इस सिद्धांत के बारे में कोई सार्वजनिक नहीं दिया। इसके पश्चात उनहोने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक (Dialogues concerning the two principal system of the world) धार्मिक न्यायालय में कि। इस पुस्तक में उन्होंने अपने विचारों को खुलकर प्रतिपादन किया था। इसके आधार पर उन पर अभियोग लगाया गया और 70 वर्ष के इस बूढ़े वैज्ञानिक को न्यायालय में उपस्थित होना पड़ा। गेलिलियो पर यह दबाव डाला गया कि यदि वह अपने कथनों को झूठा मान ले तो उन्हें माफ किया जा सकता है।

लेकिन गेलिलियो ने इसे इनकारा कर दिया और अपने बता पर अटल रहे। इसके लिए उस बूढ़े वैज्ञानिक को जेल की सज़ा काटनी पड़ी। सन 1637 में गैलेलियो अंधे हो गए और 8 जनवरी, 1642 में जेल में ही उनका देहांत हो गया। उनकी मुर्त्यु के कुछ महीनों बाद ही न्यूटन का जन्म हुआ था। इस तरह हम कह सकते है कि उस समय एक युग का अंत और दुसरे नये क्रांतिकारी युग का आरम्भ हुआ था।

हमेशा से पोप की निगरानी में रहने वाली वेटिकन सिटी स्थित इसाई धर्म की सर्वाेच्च संस्था ने 1992 में यह स्वीकार किया किया कि गैलीलियो के मामले में निर्णय लेने में उनसे गलती हुयी थी। इस प्रकार एक महान खगोल विज्ञानी, गणितज्ञ, भौतिकविद एवं दार्शनिक गैलीलियो के संबंध में 1633 में जारी आदेश कर अपनी ऐतिहासिक भूल स्वीकार करने में चर्च को साढे तीन सौ सालों से भी अधिक का समय लगा।


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