बारिश ‘वर्षा’ के बारे में रोचक बातें | Facts About Rain in Hindi

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Rainy Season / वर्षा ऋतु (बारिश) ऐसी ऋतु है जो लगभग सभी लोगों की पसंदीदा होती है क्योंकि झुलसा देने वाली गर्मी के बाद ये राहत का एहसास लेकर आती है। वर्षा हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन वर्षा से जुड़े कई ऐसे बातें हैं जो आपको जरूर जानना चाहिए…

बारिश (वर्षा) के बारे में रोचक बातें | Facts About Rain in Hindiबारिश (वर्षा) के बारे में रोचक तथ्य – Interesting & Amazing Facts About Rain in Hindi

1). वर्षा (Rainfall) एक प्रकार का संघनन है। पृथ्वी के सतह से पानी वाष्पित होकर ऊपर उठता है और ठण्डा होकर पानी की बूंदों के रूप में पुनः धरती पर गिरता है। इसे वर्षा कहते हैं।

2). जल की सूक्ष्म बूंदे एक-दूसरे से टकराकर आकार में बढ़ती जाती हैं। जब जल की ये बूंदे इतनी भारी हो जाती हैं कि हवा में स्थिर न हो सकें तब यह धरती पर पानी या हिम के रूप में बरसती हैं।

3). हम जानते हैं कि जब आर्द्र हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है तब जलवाष्प संघनित होकर जल की सूक्ष्म बूंदें बनाती है। कभी-कभी अनुकूल परिस्थितियों में हवा के बिना ऊपर उठे ही जलवाष्प जल की नन्हीं बूंदों में बदल जाती है तब हम इसे कोहरा कहते हैं।

4). रंगीन बारिश (Colorful rain) एक प्रकार की बारिश है जिसमें पर्याप्त धूल होती है। केरल के कोट्टयम क्षेत्र में, दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में लाल वर्षा सबसे अधिक होती है।

5). अगर रेगिस्तान में बारिश होती है, तो संभावना है कि आप गीली नहीं हो सकते। इस बारिश को फंटम बारिश कहा जाता है क्योंकि यह जानना मुश्किल है कि क्या बारिश हुई है या नहीं, क्योंकि बूंदों को गर्म हवा के प्रभाव के कारण मिट जाता है।

6). हममें से अधिकांश को लगता है कि बारिश की बूंदें आंसू की बूंदों की तरह दिखती हैं; लेकिन वे वास्तव में चॉकलेट चिप की तरह होते हैं। बारिश की बूंदें के आकार 0.1 से 9 मिमी व्यास के बिच रहते हैं। सबसे कम बारिश के बादलों को बादल की बूंदें कहा जाता है, और उनकी आकृति गोल होती है। बड़े वर्षा बुँदे को पैराशूट की तरह आकार दिया जाता है पृथ्वी पर सबसे बड़ी वर्षा बून्द ब्राजील और मार्शल आइलैंड्स में 2004 में दर्ज किए गए – उनमें से कुछ 10 मिमी के बराबर थे।

7). पृथ्वी के कुछ हिस्सों में ऐसी मान्यता हैं की आकाश से बारिश के साथ मछलियॉँ और सांप भी जमीन में आते हैं। कई जगह में इसके लिए मछली उत्सव भी बनाया जाता हैं।

8). गिरने वाली बारिश का अधिकतम गति 18 से 22 मील प्रति घंटे होता है। यह गति वायुमंडलीय घर्षण के वजह से कम हो जाती हैं। यदि इस वायुमंडलीय घर्षण में बारिश के गति को कम नहीं करता है, तो प्रत्येक बूंद बहुत ज्यादा गति से नीचे आ जाएगी और बहुत नुकसान हो सकता है।

9). एक निश्चित अवधि के दौरान एक विशेष क्षेत्र में वर्षा के माप को मापने के लिए वर्षा गेज का उपयोग किया जाता है। वे मूल या जटिल हो सकते हैं, वे जमते हुए वर्षा की गणना नहीं करते हैं। अधिकांश बारिश गेज लीटर प्रति वर्ग मीटर के अनुपात में मिलीमीटर में वर्षा का आकलन करते हैं। वर्षा का स्तर कभी-कभी इंच या सेंटीमीटर के रूप में दर्ज किया जाता है।

10). वर्षा गेज एक खोखला बेलन होता है जिसके अंदर एक बोतल रखी रहती है और उसके ऊपर एक कीप लगा रहता है। वर्षा का पानी कीप द्वारा बोतल में भर जाता है तथा बाद में पानी को मापक द्वारा माप लिया जाता है। इस यंत्र को खुले स्थान में रखते हैं, ताकि वर्षा के पानी के कीप में गिरने में किसी प्रकार की रुकावट न हो।

11). वर्षा गेज प्रमुख प्राचीन मौसम उपकरण है। ऐसा माना जाता है कि भारत में इसका उपयोग 2000 साल पहले से किया जा रहा है। कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र में लिखा है कि वर्षामापी का उपयोग अनाज उत्पादन के मानक सार-लेखन को निर्धारित करने में किया जाता था। प्रत्येक राज्य के भंडार गृहों में मानक वर्षामापी होते थे जिनका उपयोग कर उगाही के उद्देश्य के लिए भूमि को वर्गीकृत करना होता था।

12). धरती की सतह पर जो बारिश के समय टिप-टिप की आवाज आती हैं, वे ढंकते हुए पानी के बुलबुले द्वारा निर्मित होती है।

13). सौर मंडल के अन्य ग्रहों पर भी वर्षा होती है; हालांकि, यह धरती पर होने वाले बारिश से अलग है। वहां यह मिथेन, नीयन और सल्फ्यूरिक संक्षारक या पानी के बजाय काफी लौह से बना हो सकता है। शुक्र पर होने वाला वर्षा सल्फ्यूरिक एसिड से बना होता है, और शनि के चंद्रमा टाइटन पर, पानी की बजाय मीथेन वर्षा होती है।

14). बारिश के वास्तविक गैर-अलंकारिक वजन बहुत बड़ा है; एक एकड़ जमीन पर वर्षा का एक इंच, मोटे तौर पर 226,000 पाउंड होता है, और हर मिनट में पृथ्वी पर 1 अरब टन बारिश होती है।

15). वर्षा की बूंदों में हवा से आने वाले भंग नाइट्रोजन (dissolved nitrogen) होते हैं। यह फ्री और प्राकृतिक उर्वरक (natural fertilizer) हैं जो वर्षा के बाद घास को हरियाली बनाने में मदद करता है।

16). एक बार अमेरिका में एक रेडिओ स्टेशन के मालिक को गिरफतार किया गया था। क्यूंकि उसने भाविष्यवाणी की थी की आज दिन में कई बार बारिश होंगे, जोकि गलत साबित हुई थी।

17). दुनिया में कई ऐसे जगहे हैं जहा पर सालो भर बारिश होती हैं, जैसे कऊऐ देश में 350 दिन बारिश होती हैं।

18). जैसा कि अब दुनिया 21 वीं सदी में जी रही है, ऐसे में जब हर चीज कृत्रिम तरीके से बनाया जा रहा हैं तो बारिश कैसे पीछे रहेगी। अब कृत्रिम बारिश करना संभव है। सूखा बर्फ का कण विमान से विशेष रूप से क्यूम्यलस बादल पर फेंक दिया जाता हैं। एक बादल में, कार्बन डाइऑक्साइड पानी से लिपटा जाता है और बर्फ के टुकड़े के रूप में गिराया जाता है, ऐसा करने से बादल में छुपे पानी के कण बिखरकर बारिश के रूप में जमीन पर गिरने लगते हैं।

19). भारत के कुछ राज्य अपने स्तर पर पिछले 35 वर्षो से प्रोजेक्ट के रूप में कृत्रिम बारिश का प्रयोग कर रहे हैं। तमिलनाडु सरकार ने 1983 में सूखाग्रस्त इलाकों में पहली बार इसका प्रयोग किया था। हालाँकि कृत्रिम बारिश करना ज्यादा खर्चा भरा नहीं रहता हैं।

20). हम ‘200 मिमी. वर्षा’ जैसे शब्द से परिचित हैं; लेकिन क्या हम इसका मतलब जानते हैं? वास्तव में यह पूर्ण समतल सतह पर गिरने वाली वर्षा के जल को संचित मात्रा की ऊंचाई है और अप्रत्यक्ष रूप से यह वर्षा के द्वारा बरसने वाले पानी की माप है। इस प्रकार यदि 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 200 मिमी. वर्षा होती है तब उस क्षेत्र में बरसे कुल जल का आयतन करीब [(10×1000×100×10)2×200] घन मिमी. होगा। किसी क्षेत्र विशेष में बरसने वाली वर्षा की मात्रा को मापने के लिए वर्षामापी नामक युक्ति का उपयोग किया जाता है। जिसमें एक मापक बेलनाकार पात्र में एकत्र हुए वर्षा जल का आयतन मिमी. में मापा जाता है।

21). भारतीय उपमहाद्वीप में वार्षिक वर्षा की 90 प्रतिशत मात्रा ग्रीष्म मानसून के दौरान चार महीनों की अवधि में बरसती है। मानसून शब्द अरबी भाषा के ‘मुसिन’ शब्द से लिया गया है। जिसका अर्थ ‘हवाओं का मौसम’ है। मानसून मौसमी हवाओं के हिंद महासागर और उसके आसपास के क्षेत्रों के साथ अरब महासागर की ओर विस्थापन से संबंधित होता है। ये पवनें आधे साल दक्षिण पश्चिम से तथा आधे साल उत्तर पूर्व से बहती हैं।


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