पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की जीवनी | Chandra Shekhar Singh Biography In Hindi

Chandra Shekhar / चन्द्रशेखर सिंह भारत के नौवें प्रधानमन्त्री (Prime Minister) थे। जिनका कार्यालय 10 नवंबर, 1990 से 21 जून, 1991 तक रहा था।

पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की जीवनी | Chandra Shekhar Singh Biography In Hindi

चंद्रशेखर सिंह की जीवनी – Chandra Shekhar Singh Biography In Hindi

श्री चंद्रशेखर जनाधार की राजनीति करने वाले महाधुरंधर नेता रहे हैं। उन्होंने 1950-60 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान आंदोलन में अपना पूरा सहयोग और समर्थन दिया। 1967-71 के दौरान वे युवा तुर्क के रूप में उभरे और 1985 में उन्होंने ‘भारत यात्री’ के तौर पर जनता में नवीन आशाओं का संचार किया। 1988-89 में भी श्री चंद्रशेखर ने जनाअधिकार आंदोलन का नेतृत्व किया। एक-एक पायदान की छलांग लगाते हुए श्री चंद्रशेखर ने अंतत: राजनीति के चरमोत्कर्ष प्राप्त किया। उन्होंने राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए 10 नवंबर, 1990 को भारत के प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण किया।

राजनीति के कर्मठ नेता श्री चंद्रशेखर का जन्म 1 जुलाई, 1927 को उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के इब्राहिम पट्टी नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता ठाकुर सदानंद सिंह एक मध्यवर्गीय और सम्मानित कृषक परिवार से संबंधित थे। उनके पास लगभग 12 एकड़ कृषि योग्य जमीन थी। इसी जमीन के उपज से उनके परिवार का भरण-पोषण होता था।

श्री चंद्रशेखर के तीन भाई और बहने थी। अपने भाइयों और बहनों के स्नेह की शीतल छाया में वह पल बढ़कर बड़े हुए। बाल्यकाल से ही उनकी कुशाग्र वृद्धि का लोहा मानने लगे थे। वह अपने गांव के ऐसे पहले छात्र थे जिन्होंने सबसे पहले मेट्रिक की परीक्षा पास की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा D.A.V हाईस्कूल और जीवनराम हाई स्कूल में हुई।

मात्र 14 वर्ष की अल्पआयु में श्री चंद्रशेखर का विवाह कर दिया गया था। उनके पिता चाहते थे कि उनका पुत्र पढ़ाई पूरी करके शीघ्र ही कहीं नौकरी कर ले और अपनी गृहस्थी संभाले, किंतु उनका भविष्य तो उनके राजनीतिक के अखाड़े में अपनी ओर आकर्षित कर रहा था, फिर भला वे नौकरी को क्यों वरीयता देते।

श्री चंद्रशेखर ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और उन्होंने सतीशचंद्र डिग्री कॉलेज से बी.ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद 1951 में उन्होंने राजनीतिक विज्ञान से M.A. की डिग्री प्राप्त की। उन्हें विद्यार्थी राजनीति में एक “फायरब्रान्ड” के नाम से जाना जाता था।

अपने छात्र जीवन में ही श्री चंद्रशेखर राजनीति के मैदान में कूद पड़े। 1947 में वे जिला छात्र कांग्रेस के अध्यक्ष बने। शीघ्र ही उनका कांग्रेस में मोहभंग हो गया। 1951 में उन्होंने पार्टी से त्याग पत्र दे दिया और सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। श्री चंद्रशेखर की कुशलता कार्यक्षमता और कर्मठता को देखते हुए आचार्य नरेंद्रदेव ने उन्हें कुछ समय के बाद स्टेट प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का सेक्रेटरी बना दिया। 1957 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा, किंतु बहुत कम अंतर वे यह चुनाव हार गए। उसके बाद में 1962 में राज्यसभा के सदस्य बने।

धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक में गहरी पैठ बनती चली गई। वास्तव में श्री चंद्रशेखर राजनीतिक में अपना भविष्य बनाने नहीं बल्कि देश और समाज का भविष्य बनाने के लिए आए थे। यही उनका सपना था और यही उनके विचार थे। उनका विचार था कि भारत की 70% जनता गांव में निवास करती है। यदि गांवों का विकास हो जाए तो भारत का अपने आप ही विकास हो जाएगा। विकास क्रम में सबसे पहले वे बाल शिक्षा पर विशेष जोर देते थे। उनका मानना था कि आज का बालक कल का नेता और देश का भविष्य है। अतः बच्चों के साथ मानवीयता का, सहानुभूति का व्यवहार करना चाहिए, निर्दयता का नहीं।

श्री वि.पि सिंह की सरकार गिर जाने के बाद श्री चंद्रशेखर ने कांग्रेस के समर्थन से केंद्र में अपनी सरकार बनाई। 10 नवंबर, 1990 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

चंद्रशेखर जी का प्रधानमंत्री कार्यालय 224 दिन का रहा। जब अवसर देखकर कांग्रेस ने समर्थन वापस लिया तो श्री चंद्रशेखर ने अपने पद से इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव की घोषणा कर दी।

श्री चंद्रशेखर ने भले ही अल्प समय के लिए प्रधानमंत्री पद संभाला हो, किंतु उन्होंने राजनीतिक में शुचिता, स्वच्छता और कर्मठता पर अधिक ध्यान दिया। देश और समाज की सेवा करते हुए राजनीति के इस कर्मठ नेता का 8 जुलाई, 2007 को देवासना हो गया। उन्हे मल्टिपल मायलोमा, एक प्रकार का प्लाज्मा कोष कैंसर हुआ था।


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