इलाहाबाद क़िला का इतिहास, जानकारी | Allahabad Fort History in Hindi

Allahabad Fort / इलाहाबाद क़िला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में स्थित है। अपने विशिष्ट बनावट, निर्माण और शिल्पकारिता के लिए जाना जाने वाला यह किला गंगा और युमाना के संगम पर स्थित है। इस क़िले का निर्माण 1583 ई. में किया गया था। यह मुग़ल बादशाह अकबर के द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा क़िला है। इस क़िले का इस्तेमाल अब भारतीय सेना द्वारा किया जाता है। आम नागरिकों के लिए कुछ हिस्सों को छोड़कर बाकी हिस्सों में प्रवेश वजिर्त है। सैलानियों को अशोक स्तंभ, सरस्वती कूप और जोधाबाई महल देखने की इजाजत है। ऐसा कहा जाता है कि क़िले में अक्षय वट यानी अमर वृक्ष है। हालांकि यह वृक्ष क़िले के प्रतिबंधित क्षेत्र में है, जहाँ पहुंचने के लिए अधिकारियों से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।

इलाहाबाद क़िला का इतिहास, जानकारी | Allahabad Fort History in Hindi

इलाहाबाद किले की जानकारी –  Allahabad Fort Information in Hindi

पार्क में बलुआ पत्थर से बना 10.6 मीटर का विशाल अशोक स्तंभ भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण 232 ईसा पूर्व किया गया था। पुरातत्त्वविद् और इतिहासकारों के लिए इस स्तंभ का विशेष महत्व है।

इस क़िले को चार भागों में बांटा गया है। पहला भाग ख़ूबसूरत आवास है जो फैले हुए उद्यानों के मध्य में है। यह भाग बादशाह का आवासीय हिस्सा माना जाता है। दूसरे और तीसरे भाग में अकबर का शाही हरम था और नौकर-चाकर वहीं रहते थे। चौथे भाग में सैनिकों के लिए आवास बनाए गए थे।

क़िले में एक ‘जनाना महल’ है, जिसे ‘जहांगीर महल’ भी कहते हैं। मुग़ल शासकों ने क़िले में बड़े फेरबदल कराये और फिर अंग्रेज़ों ने भी इसे अपने माकूल बनाने के लिए काफ़ी तोड़-फोड़ की। इससे क़िले को काफ़ी क्षति पहुंची।

कई शासकों और अंग्रेज़ों को सुरक्षित रखने तथा आज भी देश की सेना को शरण देने वाले इस क़िले की अवस्था अब जर्जर हो गई है। इसकी दीवारों पर बरगद, नीम, पीपल आदि ने जड़ें जमा ली हैं। घास-फूंस और झाड़ियां भी फैल गई हैं। दीवारों पर निकले पेड़ पौराणिक अक्षय वट की जड़ों की उपज हैं। इनमें कुछ पेड़ ऐसे भी हैं, जो पक्षियों के कारण दरारों में जम गए हैं। जल्द इन पेड़ों को नहीं काटा गया तो ये क़िले की दीवारों के लिए खतरा बन जाएंगे। चूंकि क़िला इस समय भारतीय सेना के कब्जे में है, इसलिए उसकी इजाजत के बगैर पुरातत्त्व विभाग सौंदर्यीकरण या मरम्मत भी नहीं करा सकता है।

इलाहाबाद क़िला का इतिहास – Allahabad Fort History in Hindi

इलाहाबाद क़िले की स्थापना मुग़ल बादशाह अकबर ने की थी। हालांकि इस पर इतिहासकारों में मतभेद हैं। समकालीन लेखक अब्दुल कादिर बदायूंनी ने ‘मुंतखवुल-तवारीख’ में लिखा है कि- “क़िले की नींव सन 1583 में डाली गई थी। नदी की कटान से यहां की भौगोलिक स्थिति स्थिर न होने से इसका नक्शा अनियमित ढंग से तैयार किया गया था।” वे लिखते हैं कि अनियमित नक्शे पर क़िले का निर्माण कराना ही इसकी विशेषता है। क़िले का कुल क्षेत्रफल तीस हज़ार वर्ग फुट है। इसके निर्माण में कुल लागत छह करोड़, 17 लाख, 20 हज़ार 214 रुपये आयी थी।

अकबर ने इस किले का निर्माण मुग़ल काल में पूर्वी भारत (वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार) से अफ़ग़ान विद्रोह को खत्म करने के लिए किया था। सन 1773 में अंग्रेज़ इस किले में आए और सन 1765 में बंगाल के नवाब शुजाउद्दौला के हाथ 50 लाख रुपये में बेच दिया। सन 1798 में नवाब शुजात अली और अंग्रेज़ों में एक संधि के बाद क़िला फिर अंग्रेज़ों के कब्जे में आ गया। आज़ादी के बाद भारत सरकार का क़िले पर अधिकार हुआ। क़िले में पारसी भाषा में एक शिलालेख भी है, जिसमें क़िले की नींव पड़ने का वर्ष 1583 ई. दिया है।

इतिहासकार मिस्टर हमिल्टन ने वर्ष 1815 में लिखा था कि इलाहाबाद स्थित अकबर के क़िले के बराबर वैभवपूर्ण भवन यूरोप में भी कम ही देखने को मिलते हैं। फ़र्गुसन के अनुसार इसकी नक्काशी और चित्रकारी इतनी दर्शनीय है कि इसकी तुलना पूरे भारत के किसी भी भवन से नहीं की जा सकती। इसी क़िले के भीतर एक टकसाल भी था जिसमें चांदी और तांबे के सिक्के ढाले जाते थे। अकबर के इस क़िले में उस समय पानी के जहाज और नावें बनाई जाती थीं जो यमुना नदी से समन्दर तक ले जाई जाती थीं। अकबर द्वारा हिन्दुस्तान में निर्मित सभी क़िलों में यह सबसे विशाल और उत्कृष्ट माना जाता है।

इस क़िले पर मुग़लों के बाद जब अंग्रेजों ने कब्ज़ा कर लिया तो इसे अपनी सैनिक छावनी बना दिया । इस क़िले के चारों तरफ़ विश्व के सबसे बड़े धार्मिक कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। इस अति संवेदनशील क़िले के आसपास करोड़ों लोग प्रतिवर्ष इकट्ठा होते हैं।

क़िले में एक सरस्वती कूप है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहीं से सरस्वती नदी जाकर गंगा-यमुना में मिलती थी। सरस्वती कूप में ही अक्षयवट नामक वृक्ष है जिसके बारे में कहा जाता है कि मुग़लों ने इसे जला दिया था क्योंकि पहले स्थानीय लोग इसकी पूजा करने के लिए क़िले में आते थे। यह भी किंवदन्ती है कि इस वृक्ष के नीचे जो भी इच्छा व्यक्त की जाती थी वह पूरी होती थी। आजकल पर्यटकों को जिस अक्षयवट के दर्शन कराए जाते हैं वह असली नहीं। असली अक्षयवट के दर्शन सेना की अनुमति लेने के बाद ही हो पाते हैं।


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2 thoughts on “इलाहाबाद क़िला का इतिहास, जानकारी | Allahabad Fort History in Hindi”

  1. Allahabad fort ki neev smarts Ashok ne rakhi thi ganga ke kinare vishalkay davik magarmach nivas karate the jab samrat apni yatra ke samay sangam sthal par vishram
    kiya to yah sthan unhe ati sukhad laga jiske bad kile ki neev rakhi magar ganga ke tej bahav aur magarmach ki yatna ke karan sangam par kila ka nirman asmbhav tha lekin isme samrat ke man samman ki baat thi to eska upay janne ki koshis ki.sathal par anivas karte rishiyo se Samprak kiyaa to rishi ne bataya ki iska karan magarmach hi jo Davik hi jo bali echa lekar tat par aaya hi fir rishi ne apni Bali di jiske baad nirman karya aarambh hula.

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