योगमाया मंदिर का रोचक इतिहास, जानकारी | Yogmaya Temple History in Hindi

Yogmaya Temple / योगमाया मंदिर या जोगमाया मंदिर एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है जो देवी योगमाया को समर्पित है। योगमाया श्री कृष्ण जी की बहन थी। ये मंदिर नई दिल्ली की महरौली में क़ुतुब परिसर के निकट स्थित है। यह मंदिर महाभारत के समय से है। योगमाया देवी भ्रम निर्माण करने वाली देवी है।

योगमाया मंदिर का रोचक इतिहास Yogmaya Temple History In Hindiयोगमाया मंदिर का इतिहास – Yogmaya Temple History in Hindi

दुनिया में देवी योगमाया के अनेक मंदिर हैं, लेकिन हस्तिनापुर और महाभारत के इतिहास से जुड़े होने के कारण इस देवी मंदिर का महत्त्व बढ़ जाता है। देवी योगमाया के बारे में कहा जाता है कि वे भगवान श्रीकृष्ण की बहन थी, जो उनसे बड़ी थीं।

पुराणों अनुसार, देवी देवकी के सातवें गर्भ को योगमाया ने ही संकर्षण कर रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया था, जिससे श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी का जन्म हुआ था। मान्यता है कि योगमाया ने ही श्रीकृष्ण के प्राणों की रक्षा थी।

बारवी शताब्दी के जैन ग्रंथो में इस मंदिर के निर्माण के पश्चात् महरौली को योगोनीपुरा के नाम से वर्णित किया गया हैं। माना जाता हैं की इस मंदिर का निर्माण पांडवो द्वारा महाभारत युद्ध के समाप्ति के पश्चात् कराया गया था। इस मंदिर को सर्वप्रथम सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान लाल सेठमल द्वारा कराया गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 19वी शताब्दी में हुआ हैं।

योगमाया मंदिर की वास्तुकला – Yogmaya Temple Architecture in Hindi

मंदिर की रचना नागर शैली में हुई है। इसके प्रवेशद्वार के ऊपर एक नाग की आकृति उकेरी हुई है, जो चिंतामाया का एक प्रतीकात्मक रूप मानी गयी है। संपूर्ण मंदिर सुन्दर भित्ति चित्रों से सजा है। मंदिर की दीवारों पर श्रीविष्णु, देवी दुर्गा, लक्ष्मी, यक्ष, गन्धर्व आदि की आकृतियां पत्थरों को काट-काट कर उकेरी गयी हैं।

योगमाया मंदिर 1827 में निर्मित एक संरचना है जो एक प्रवेश द्वार और एक गर्भगृह के साथ एक सरल लेकिन समकालीन संरचना है। इससे आगे मुख्य गर्भगृह है जिसमे देवी योगमाया की मूर्ति स्थापित की गयी है। यह मूर्ति काले पत्थर से बानी हैं। देवी की मूर्ति को आभूषण और सुन्दर वस्त्रो से सजाया गया है। देवी की मूर्ति के ठीक ऊपर दो पंखे लगाये गए है। मंदिर में एक सुन्दर गुबंद भी देखने को मिलता है।

इस मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर योगमाया का मंत्र लिखा हुआ दीखता है। श्रद्धालु इसे पढ़ और जप कर ही आगे बढ़ते हैं। गर्भगृह में देवी योगमाया का विग्रह काफी भव्य और मनमोहक है। यह जमीन पर एक कुण्ड में विराजित है। इस कुण्ड के गोलाकार घेरे में भगवती योगमाया का सिर प्रतिष्ठित है। माया को अशरीरी माना गया है, शायद इसलिए यहां प्रतीकात्मक रूप से केवल सिर की पूजा होती है।

योगमाया मंदिर भारत की वास्तुकला, संस्कृति और आध्यामिकता का प्रतीक है जो भक्तों और पर्यटकों को अपनी तरफ बेहद आकर्षित करता है। योगमाया मंदिर दिल्ली में कुतुबमीनार के एक दम नजदीक स्थित है।

योगमाया मंदिर की पौराणिक कथा – Yogmaya Temple Story in Hindi

पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में जब भगवान् कृष्ण का जन्म हुआ तब उसे पहले माता दुर्गा ने योगमाया के रूप लिया था। देवी दुर्गा ने यह अवतार कुछ समय के लिए ही लिया था। गर्गपुराण के अनुसार भगवान कृष्ण की मां देवकी के सातवें गर्भ को बदलकर योगमाया ने रोहिणी के गर्भ में पहुँचाया है जिससे बलराम जन्मे थे। इसके बाद यशोदा की गर्भ से योगमाया का जन्म हुआ।

जिस समय योगमाया का जन्म हुआ तो यशोदा गहरी नींद में थी जिस कारण अपनी पुत्री को देख नहीं पाई थी। देवकी के आठवे पुत्र का जन्म होने के बाद वासुदेव ने उसे यशोदा के सामने लिटा दिया, जिसकी वजह से नींद खुलने के बाद यशोदा ने बालिका के स्थान पर पुत्र को पाया। वसुदेव जन्मी बालिका को मथुरा लेकर आ गये लेकिन जब कंस ने उस बालिका को मारने की कोशिश की तो वो कंस के हाथ से छुट कर चली गई और जाते हुए आकाशवाणी करती गई।

एक और पौराणिक कथा के अनुसार जब अभिमन्यु को जयद्रथ ने मार डाला था तो उसकी मृत्यु के बाद भगवान कृष्ण और अर्जुन इस मंदिर में देवी के दर्शन करने के लिए आये थे। अर्जुन ने इसी मंदिर में कसम खायी थी की दुसरे दिन के शाम तक वो जयद्रथ को मार डालेगा। देवी के चमत्कारिक शक्ती के कारण ही युद्धभूमि में भ्रम पैदा करनेवाला सूर्य ग्रहण हुआ था और इस सूर्य ग्रहण के कारण ही अर्जुन को जयद्रथ को मारने में मदद मिली थी।

योगमाया मंदिर के त्यौहार – Yogmaya Mandir Festival in Hindi

इस मंदिर में फूलवालों की सैर का वार्षिक उत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं। इसकी शुरुआत सूफी संत कुतुबुद्दीन भक्तियार खाकी द्वारा 1812 में किया गया था। इसे साल के अक्टूबर-नवंबर महीना में मनाया जाता हैं जिसमे फूलो से पंखो को देवी योगमाया के मंदिर में अर्पित किया जाता हैं।

इस मंदिर में महाशिवरात्रि का त्यौहार फरवरी या फिर मार्च के महीने में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इसके आलावा नवरात्री का उत्सव साल में दो बार मनाया जाता है। इस त्यौहार को पहले गर्मी के शुरुवाती दिनों में मनाया जाता है और बाद में फिर ठंडी के शुरुवात में मनाया जाता है।

कैसे पहुंचे – How To Reach Yogmaya Temple in Hindi

दिल्ली भारत की राजधानी हैं और यह मंदिर दिल्ली रेलवे स्टेशन से केवल 10 किमी की दुरी पर है। इस कारण यह सभी मार्गो से अच्छी तरह जुड़ा हैं। आप रेल, वाहन या हवाई जहाज से अच्छी तरह जा सकते हैं। यहां आने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है।


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